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  • भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा

    भारत के सर्विसेज सेक्टर की गतिविधियां सितंबर में तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा

    नई दिल्ली ।भारत के सर्विसेज सेक्टर में सितंबर के दौरान गतिविधियों में तेजी देखने को मिली और पीएमआई तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। सितंबर में सर्विसेज पीएमआई बढ़कर 55.2 रहा, जबकि अगस्त में यह 54.1 पर था। यह जून के बाद पीएमआई का सबसे ऊंचा स्तर है। आंकड़ों के मुताबिक, सेवा क्षेत्र में गतिविधियों को मजबूत घरेलू मांग और नए ऑर्डर्स में तेज बढ़ोतरी से समर्थन मिला।

    सितंबर में नए बिजनेस में पिछले तीन महीनों की तुलना में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। कंपनियों को डिजिटल समाधान, खाने-पीने की चीजों, इंश्योरेंस, लोन, सॉफ्टवेयर, ट्रांसपोर्टेशन और टूर-एंड-ट्रैवल जैसी सेवाओं के लिए ज्यादा मांग मिली। फाइनेंस, इंश्योरेंस और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में बिक्री में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे सेवा क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियों को सितंबर में बेहतर गति मिली।

    सितंबर के दौरान भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग में भी सुधार दर्ज किया गया। कंपनियों ने जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, यूके और अमेरिका से बेहतर कारोबार मिलने की जानकारी दी। हालांकि नए निर्यात बिजनेस में बढ़ोतरी की रफ्तार अगस्त की तुलना में धीमी रही। इसके बावजूद बेहतर ऑर्डर बुक और पाइपलाइन में मौजूद प्रोजेक्ट्स ने कंपनियों को कारोबार बढ़ाने और अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने के लिए प्रोत्साहित किया।

    रोजगार के मोर्चे पर भी सेवा क्षेत्र में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में नौकरियों में वृद्धि की रफ्तार ठीक-ठाक रही, हालांकि रोजगार पैदा होने की दर अगस्त के मुकाबले थोड़ी कम रही। कंपनियों के पास मौजूद ऑर्डर्स और आगे आने वाले प्रोजेक्ट्स के कारण कर्मचारियों की जरूरत बनी रही। इस तरह नए कारोबार में बढ़ोतरी के साथ रोजगार में भी वृद्धि का सिलसिला जारी रहा।

    इनपुट लागत के मोर्चे पर सेवा कंपनियों को कुछ राहत मिली। सितंबर में इनपुट कीमतों में महंगाई नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई। लागत दबाव कम होने से सर्विस प्रोवाइडर्स पर अपनी बिक्री कीमतें बढ़ाने की जरूरत भी कम हुई। घरेलू मांग में मजबूती के बीच लागत दबाव में कमी ने सेवा कंपनियों के लिए कारोबारी परिस्थितियों को कुछ बेहतर बनाया।

    भारत में सेवा क्षेत्र की मजबूती को लेकर अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा कि पीएमआई सर्वेक्षण से घरेलू मांग बढ़ने के कारण सर्विस सेक्टर में लगातार सुधार का संकेत मिलता है। उनके मुताबिक, निर्यात कारोबार में भी वृद्धि जारी रही, हालांकि उसकी रफ्तार धीमी हुई। उन्होंने यह भी कहा कि सितंबर में इनपुट लागत का दबाव कम रहने से सेवा प्रदाताओं को बिक्री कीमतों में बढ़ोतरी की जरूरत कम पड़ी।

    हालांकि मासिक स्तर पर सितंबर का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन जुलाई-सितंबर तिमाही में सर्विसेज पीएमआई का औसत पिछली तिमाही की तुलना में कम रहा। इस तिमाही ने मार्च 2022 को समाप्त हुई तिमाही के बाद से अपना सबसे कमजोर तिमाही प्रदर्शन दर्ज किया। दूसरी ओर, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों को शामिल करने वाला एचएसबीसी इंडिया कंपोजिट पीएमआई आउटपुट इंडेक्स अगस्त के 54.3 से बढ़कर सितंबर में 55.9 हो गया। इससे सितंबर में निजी क्षेत्र की कुल कारोबारी गतिविधियों में बढ़ोतरी का संकेत मिला।

  • बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    नई दिल्ली ।सरकारी बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार ने ग्राहकों को राहत देने के लिए 27 सितंबर 2026, रविवार को बैंक शाखाएं खुली रखने का फैसला किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लगातार छुट्टियों और हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करना है।

    सरकार के इस निर्णय के तहत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 27 सितंबर को सामान्य कार्यदिवस की तरह काम करेंगे। इससे उन ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने का अवसर मिलेगा, जिन्हें नकद लेनदेन, दस्तावेजी कामकाज या अन्य जरूरी शाखा संबंधी सेवाओं की आवश्यकता है।

    बैंक कर्मचारियों के संयुक्त संगठन ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। प्रस्तावित हड़ताल से ठीक पहले 26 सितंबर को शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में लगातार छुट्टियों के साथ हड़ताल होने पर बैंकिंग सेवाओं में कई दिनों तक व्यवधान की स्थिति बन सकती थी।

    इसी संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए रविवार को बैंक खोलने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की जरूरी बैंकिंग जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों और सेवाओं में निरंतरता बनी रहे, इसके लिए पहले से आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    27 सितंबर को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी कामकाज होगा। बैंक शाखाओं के अलावा संबंधित बैंकिंग ढांचे को भी सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। इसका मकसद ग्राहकों को जरूरी सेवाओं के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

    हड़ताल का मुख्य मुद्दा बैंकों में सप्ताह के दौरान पांच कार्यदिवस लागू करने की मांग है। बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय वेतन संशोधन समझौते के दौरान पांच कार्यदिवस की व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।

    बैंक कर्मचारी संगठन इसी मांग को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं। प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल भी इसी मुद्दे को लेकर बुलाई गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की गई है।

    बैंकिंग सेवाएं आम नागरिकों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लगातार छुट्टियों के बाद हड़ताल होने की स्थिति में शाखाओं पर काम का दबाव बढ़ सकता है। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    ग्राहकों के लिए 27 सितंबर का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि यह सामान्य रविवार होने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में बैंकिंग कार्य उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण शाखाओं के नियमित कामकाज पर असर पड़ सकता है।

    सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से सेवाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया है। वहीं कर्मचारी संगठन अपनी पांच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल के कार्यक्रम पर कायम हैं। ऐसे में सितंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं की स्थिति पर ग्राहकों और कारोबारियों की नजर रहेगी।

  • सितंबर में भारत की निजी अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंचा

    सितंबर में भारत की निजी अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन के चलते कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंच गया। अगस्त में यह आंकड़ा 54.3 था। सितंबर का स्तर जून के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सबसे तेज विस्तार को दर्शाता है।

    एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई में देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों को शामिल किया जाता है। सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों की कंपनियों ने कारोबार में विस्तार दर्ज किया। नए ऑर्डर और रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई, जबकि महंगाई का दबाव कम होने और कारोबारी भरोसे में सुधार के संकेत मिले।

    आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियां अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर पहुंच गईं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की मजबूती ने संयुक्त गतिविधियों की रफ्तार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान उत्पादन और घरेलू नए ऑर्डर में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

    सितंबर में कंपनियों के कुल नए कारोबार में भी मजबूत बढ़ोतरी हुई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ी, लेकिन सामान बनाने वाली कंपनियों में इसका असर ज्यादा स्पष्ट रहा। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बिक्री में वृद्धि सात महीनों के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई।

    सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने नए ऑर्डर हासिल करने में मार्केटिंग गतिविधियों को उपयोगी बताया। सर्वेक्षण के गुणात्मक हिस्से में प्रॉपर्टी सेवाओं, परिवहन सेवाओं और नई यात्रा बुकिंग से जुड़ी मांग में बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया।

    मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी कई उत्पादों की मांग बढ़ने की जानकारी सामने आई। कंपनियों ने एल्युमीनियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद्य एवं पेय पदार्थों और फार्मास्युटिकल उत्पादों के साथ नए मॉडलों की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की।

    सितंबर के दौरान रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक गतिविधि देखने को मिली। कंपनियों ने उत्पादन और नए ऑर्डर में लगातार वृद्धि के बीच अपनी स्टाफिंग क्षमता बढ़ाई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में नई नौकरियां पैदा हुईं। दोनों क्षेत्रों में रोजगार विस्तार की दर लगभग समान रही।

    आर्थिक गतिविधियों में तेजी के साथ कंपनियों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इनपुट खरीद भी बढ़ाई। तैयार माल के स्टॉक से जुड़े सूचकांक में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह सूचकांक करीब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

    हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए लागत से जुड़ा दबाव बढ़ने के संकेत भी मिले। इनपुट कीमतों में बढ़ोतरी के बीच कंपनियों ने अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए आउटपुट की कीमतों में भी वृद्धि की। इससे उत्पादों की कीमतों पर महंगाई का दबाव बढ़ने की स्थिति बनी।

    आर्थिक गतिविधियों के मजबूत रहने के बावजूद कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां बढ़ाईं। मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बीच कंपनियों ने संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए बफर तैयार करने पर ध्यान दिया।

    सितंबर के पीएमआई आंकड़ों से निजी क्षेत्र में उत्पादन, नए कारोबार और रोजगार के स्तर पर व्यापक सुधार के संकेत मिले हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों में विस्तार के चलते संयुक्त पीएमआई अगस्त के मुकाबले काफी ऊपर रहा और जून के बाद सबसे मजबूत स्तर दर्ज किया गया।

  • 'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश

    'कर वसूली ही नहीं, नागरिक सुविधा भी प्राथमिकता बने', आयकर विभाग को निर्मला सीतारमण का स्पष्ट संदेश


    नई दिल्ली ।
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसकी जिम्मेदारी केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को बिना अनावश्यक परेशानी के समय पर और प्रभावी सेवाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही महत्वपूर्ण दायित्व है। उन्होंने कहा कि सरकारी व्यवस्था का उद्देश्य लोगों के काम को आसान बनाना होना चाहिए, ताकि उन्हें अपने वैध अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

    मुंबई के नरीमन पॉइंट स्थित आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत ‘आयकर सिंधु’ के उद्घाटन के अवसर पर वित्त मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना चाहिए और ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें सेवाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हों। उनके अनुसार, प्रभावी प्रशासन वही है जो नियमों का पालन करते हुए लोगों की कठिनाइयों को कम करे।

    वित्त मंत्री ने सरकारी भूमि और संपत्तियों के संरक्षण के विषय पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जिस भूमि पर नई इमारत का निर्माण हुआ है, वह कई दशक पहले विभाग को आवंटित की गई थी, लेकिन लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण वहां अवैध कब्जे की स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और उनका समय पर उपयोग सुनिश्चित करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, ताकि राष्ट्रीय संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके।

    अपने संबोधन में उन्होंने भवन निर्माण से जुड़ी प्रशासनिक और मंजूरी संबंधी प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि एक बड़े सरकारी विभाग को विभिन्न अनुमतियां प्राप्त करने में लंबा समय और कई स्तरों की जटिलताओं का सामना करना पड़ता है, तो आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिए विभागों को प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में लगातार प्रयास करना चाहिए।

    सीतारमण ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य नियमों में ढील देने का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नियमों का पालन करते हुए भी लोगों के कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को अपने वैध अधिकार या सरकारी सेवा प्राप्त करने के लिए अत्यधिक प्रयास करने की स्थिति नहीं आनी चाहिए। प्रशासन की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए, जिसमें जवाबदेही और दक्षता दोनों दिखाई दें।

    उन्होंने आयकर विभाग के अधिकारियों के आवास से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। वित्त मंत्री ने कहा कि मुंबई और नवी मुंबई क्षेत्र में अनेक अधिकारियों को सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो पाता, जिसके कारण उन्हें लंबी दूरी तय करके कार्यालय पहुंचना पड़ता है। इससे उनके कार्य और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक सरकारी भूमि के हस्तांतरण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया।

    वित्त मंत्री ने कहा कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को गति देने के लिए केंद्र स्तर पर आवश्यक सहयोग दिया जाएगा। इसके बाद भवन निर्माण, स्वीकृतियां, निविदाएं और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को संबंधित विभागों द्वारा समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर बुनियादी ढांचे, पारदर्शी कार्यप्रणाली और नागरिक-केंद्रित सोच के साथ आयकर विभाग अधिक प्रभावी सेवाएं प्रदान कर सकेगा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास भी और मजबूत होगा।

  • ग्राहकों को झटके पर झटके दे रहे बैंक…. सेवाओं पर बढ़ेगा शुल्क….कई सुविधाएं होंगी बंद

    ग्राहकों को झटके पर झटके दे रहे बैंक…. सेवाओं पर बढ़ेगा शुल्क….कई सुविधाएं होंगी बंद


    नई दिल्ली।
    बैंक (Banks) से जुड़ी सेवाओं का शुल्क (Service fees) लगातार बढ़ाया जा रहा है या फिर नए सिरे से शुल्क लगाए जा रहा है। इस वर्ष बैंकों ने एटीएम (ATM) से निकासी, क्रेडिट कार्ड (Credit card), चेक बुक जारी कराने से लेकर अन्य सेवाओं पर अपने शुल्क में बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही, कई तरह के सेवाओं को बंद कर दिया है या फिर सीमित किया गया है। अब आने वाले साल में भी कई बैंक व वॉलेट ऐप अपनी सेवाओं को सीमित करने और शुल्क बढ़ाने जा रहे हैं।

    आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) आने वाले वर्ष में अपनी कई सेवाओं को महंगा करने जा रहा है। 15 जनवरी 2026 से क्रेडिट कार्ड के जरिए गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले ट्रांजैक्शन पर दो फीसदी शुल्क लगेगाा। इसी तरह से अमेजॉन, पेटीएम, मोबिक्विक जैसे थर्ड पार्टी वॉलेट ऐप में पांच हजार से अधिक की धनराशि भेजने पर एक प्रतिशत शुल्क देना होगा।

    अगर बैंक शाखा में जाकर कैश में क्रेडिट कार्ड का बिल जमा करते हैं तो 150 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जो अभी तक 100 रुपये था। बैंक द्वारा इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर बुकमाईशो के जरिए दिए जाने वाले फिल्म के मुफ्त लाभ एक फरवरी 2026 से बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही, अन्य श्रेणी के कार्ड पर फिल्म ऑफर का लाभ उठाने के लिए खर्च की शर्त निर्धारित की गई है। मुफ्त फिल्म का लाभ उठाने के लिए कम से कम 25 हजार रुपये पिछली तिमाही में खर्च करने होंगे।

    रूबिक्स और सैफिरो जैसे क्रेडिट कार्ड पर हर महीने 20 हजार रुपये खर्च करने पर ही रिवॉर्ड पांइंट्स मिलेंगे। जबकि प्लेटिनम और कोरल श्रेणी के कार्ड पर ट्रांसपोर्ट खर्च की सीमा 10 हजार रुपये प्रति महीने तय की गई है।


    एयरटेल वॉलेट पर लगाएगा वार्षिक शुल्क

    एयरटेल पेमेंट बैंक ने एक जनवरी से वॉलेट पर 75 रुपये प्रति वर्ष (जीएसटी को छोड़कर) का वार्षिक रखरखाव शुल्क (एएमसी) लगाने का फैसला लिया है। एयरटेल की तरफ से कहा गया है कि यदि शुल्क लगाते समय पर्याप्त शेष राशि उपलब्ध नहीं है, तो उपलब्ध शेष राशि डेबिट कर दी जाएगी। ऐसे में शेष राशि अगली बार धनराशि जमा होने पर स्वतः कट कर ली जाएगी।


    पहले मुफ्त सेवा, फिर लगाते गए शुल्क

    मोबाइल पर डिजिटल मोड में पैसे रखने के लिए भारत में सबसे पहले वर्ष 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट आया लेकिन वॉलेट के क्षेत्र में असली बदलाव वर्ष 2010 से शुरू हुआ जब पेटीएम की शुरुआत हुई। इसके बाद तमाम कंपनियां वॉलेट ऐप के जरिए डिजिटल लेनदेन की सुविधा प्रदान करने के लिए मैदान में आई। शुरुआत में अधिकांश कंपनियों ने अपनी सेवा का मुफ्त रखा, लेकिन अब फरवरी 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क लगाने की शुरुआत की। इसी तरह से अन्य वॉलेट कंपनियों ने केवीईसी के लिए 15 रुपये शुल्क साथ में जीएसटी लगाने का फैसला लिया।


    केवाईसी न कराने पर जुर्माना

    इसके साथ ही, केवाईसी न कराने वाले ग्राहकों पर पांच रुपये प्रति तिमाही का जुर्माना भी लगाना शुरू किया। इसी तरह से अब क्रेडिट व डेबिट कार्ड के जरिए वॉलेट में पैसा डाले पर 1.5 प्रतिशत सर्विस चार्ज लगाया जाता है। हालांकि कई वॉलेट ऐप ने अभी तक कई चार्ज नहीं लगाए हैं।


    सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का एक ही लोगो होगा

    राज्य स्तर पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के एकीकरण के बाद सरकार ने अब उनके लिए नया लोगो जारी किया गया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के साथ मिलकर जारी किया गया है। यह देश में काम कर रहे सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एकीकृत ब्रांड पहचान स्थापित करेगा। इस लोगो में एक लौ है जो तीन स्तरों से मिलकर बनी है।