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  • मुकेश अंबानी को बड़ा झटका…. पहली तिमाही में 22% गिरा रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा

    मुकेश अंबानी को बड़ा झटका…. पहली तिमाही में 22% गिरा रिलायंस इंडस्ट्रीज का मुनाफा


    मुम्बई।
    मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) (Reliance Industries Limited – RIL) ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी का मुनाफा (Profit) सालाना आधार पर 22 प्रतिशत घटकर 20,946 करोड़ रुपये रहा। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि पिछले साल की समान तिमाही में एशियन पेंट्स की हिस्सेदारी बेचने से उसे एकबारगी बड़ा लाभ हुआ था, जिससे उसका मुनाफा 26,994 करोड़ रुपये रहा था। इस वजह से इस बार लाभ में गिरावट दिख रही है। रिलायंस ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही में पिछले साल जैसा 8,924 करोड़ रुपये का असाधारण लाभ नहीं था। हालांकि, अगर इस एकबारगी लाभ को हटा दिए जाए, तो कंपनी का मुख्य कारोबार स्थिर बना रहा।


    रिलायंस रिटेल के कारोबार का हाल

    रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में उसका नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14.1 प्रतिशत घटकर 2,805 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशन्स से रिलायंस रिटेल की EBITDA 1.8 प्रतिशत घटकर 5,935 करोड़ रुपये रह गई। जून में खत्म हुई तिमाही के दौरान, कंपनी की फाइनेंस कॉस्ट सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 793 करोड़ रुपये हो गई।


    जियो प्लेटफॉर्म्स के मुनाफे में उछाल

    वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट प्रॉफिट 9.2 प्रतिशत बढ़कर 7,764 करोड़ रुपये रहा। जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (जेपीएल) ने वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में 7,110 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। कंपनी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में उसकी परिचालन आय 11.8 प्रतिशत बढ़कर 39,173 करोड़ रुपये हो गई, जो 2025-26 की समान तिमाही में 35,032 करोड़ रुपये थी। जियो ने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स का राजस्व सालाना आधार पर 12 प्रतिशत बढ़ा है।

    इसके पीछे ग्राहक बाजार हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि, उपयोगकर्ता औसत राजस्व (एआरपीयू) में बढ़ोतरी और डिजिटल सेवाओं के कारोबार में मजबूत वृद्धि प्रमुख कारण रहे। तिमाही में जियो प्लेटफॉर्म्स का एआरपीयू 3.3 प्रतिशत बढ़कर 215.6 रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में कंपनी का एआरपीयू 208.8 रुपये था। कंपनी का ग्राहक आधार सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत बढ़कर 53.3 करोड़ हो गया, जो 2025-26 की समान तिमाही में 49.8 करोड़ था।


    शेयर का हाल

    रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर की बात करें तो शुक्रवार को 1326.50 रुपये पर बंद हुआ। एक दिन पहले के मुकाबले शेयर 2.59% बढ़कर बंद हुआ। शेयर के 52 हफ्ते का हाई 1,611.20 रुपये है।

  • चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की जेल बरकरार रखी

    चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 3 महीने की जेल बरकरार रखी


    मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शुक्रवार को उनकी तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखते हुए उन्हें दोबारा जेल भेजने के निर्देश दिए। कोर्ट ने इस दौरान अभिनेता के आचरण को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि मामले में उनका व्यवहार “संदिग्ध” रहा है। साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया है।

    2010 में फिल्म निर्माण के लिए लिया था 5 करोड़ रुपये का कर्ज
    यह मामला वर्ष 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और तय समय पर कर्ज की अदायगी नहीं हो सकी। कंपनी को दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा।

    2018 में सुनाई गई थी सजा
    अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सजा सुनाई थी। वर्ष 2019 में सेशन कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद अभिनेता ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।

    मामले से जुड़े सात अलग-अलग प्रकरणों में वर्ष 2025 के अंत तक करीब 9 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई थी, जिसमें प्रत्येक मामले में लगभग 1.35 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना था।

    अदालत ने वादे पूरे नहीं करने पर जताई नाराजगी
    जून 2024 में हाईकोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक लगाते हुए राजपाल यादव को बकाया राशि चुकाने का अवसर दिया था। हालांकि अदालत के अनुसार अभिनेता बार-बार अपने आश्वासन पूरे करने में असफल रहे। इसी कारण 2 फरवरी को उन्हें आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया था और अब अदालत ने उनकी सजा को भी बरकरार रखा है।

    बयानों में विरोधाभास पर कोर्ट की टिप्पणी
    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि राजपाल यादव की ओर से दिए गए बयानों और पहले दिए गए आश्वासनों में विरोधाभास है। एक सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि उसके सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दिए जा रहे हैं और पहले दी गई अंडरटेकिंग से अलग बातें कही जा रही हैं।

    शिकायतकर्ता कंपनी का पक्ष
    शिकायतकर्ता कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता अवनीत सिंह सिक्का ने अदालत में कहा कि राजपाल यादव पहले ही अपनी सजा स्वीकार कर चुके हैं और अब वे अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते।

    समझौते की कोशिश भी नहीं हुई सफल
    मामले के समाधान के लिए हाईकोर्ट ने कई बार दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया। अदालत के सुझाव पर शिकायतकर्ता कंपनी 6 करोड़ रुपये लेकर अंतिम समझौते के लिए भी तैयार हो गई थी, लेकिन राजपाल यादव ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

    अभिनेता ने अदालत को बताया कि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, यहां तक कि संपत्ति भी बेचनी पड़ी और वे पहले ही काफी राशि चुका चुके हैं। अदालत ने 3 करोड़ रुपये के भुगतान का एक संभावित तरीका भी सुझाया, लेकिन यह स्पष्ट किया कि यह केवल न्यायिक सुझाव है, अंतिम समझौता नहीं। कई दौर की बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष सहमति तक नहीं पहुंच सके। इसके बाद हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    फरवरी 2026 में मिली थी अंतरिम जमानत
    चेक बाउंस मामले में आत्मसमर्पण के बाद राजपाल यादव 5 फरवरी 2026 को दिल्ली की तिहाड़ जेल भेजे गए थे। बाद में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने 1.5 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त पर उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद 17 फरवरी 2026 को उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था। अब अदालत ने उनकी तीन महीने की सजा को बरकरार रखते हुए दोबारा जेल भेजने का आदेश दिया है।

  • चुनावी भाषण मामले में अभिषेक बनर्जी को कोर्ट का निर्देश, 8 जुलाई को देना होगा वॉयस सैंपल

    चुनावी भाषण मामले में अभिषेक बनर्जी को कोर्ट का निर्देश, 8 जुलाई को देना होगा वॉयस सैंपल


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी को चुनावी भाषण से जुड़े मामले में अदालत से झटका लगा है। पश्चिम बंगाल की एक अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को वॉयस सैंपल देने का निर्देश दिया है। यह आदेश विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए कथित धमकी भरे भाषण की जांच के सिलसिले में जारी किया गया है।

    अप्रैल में दर्ज हुई थी FIR
    यह मामला अप्रैल में दिए गए कथित भाषण से जुड़ा है, जिसके बाद बिधाननगर नॉर्थ थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच कर रही पुलिस ने अदालत से अभिषेक बनर्जी का वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस पर उत्तर 24 परगना जिले की अदालत ने उन्हें 8 जुलाई को अदालत में उपस्थित होकर अपनी आवाज का नमूना देने का आदेश दिया।

    मजिस्ट्रेट के सामने लिया जाएगा वॉयस सैंपल
    सूत्रों के अनुसार, सरकारी वकील मोहम्मद सबीर अली ने बताया कि अदालत के निर्देश के मुताबिक अभिषेक बनर्जी बिधाननगर कोर्ट में मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना वॉयस सैंपल देंगे। इसके बाद पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी और वॉयस सैंपल का उपयोग साक्ष्यों के सत्यापन के लिए किया जाएगा।

    BNSS की धारा 349 के तहत पुलिस ने मांगी थी अनुमति
    पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 349 के तहत अदालत से वॉयस सैंपल लेने की अनुमति मांगी थी। इस प्रावधान के अनुसार, मजिस्ट्रेट किसी भी व्यक्ति को जांच या आपराधिक मामले की सुनवाई के लिए हस्ताक्षर, लिखावट या वॉयस सैंपल देने का निर्देश दे सकता है। इसी आधार पर अदालत ने यह आदेश पारित किया।

    हाईकोर्ट में दी थी चुनौती
    अभिषेक बनर्जी ने पुलिस के वॉयस सैंपल संबंधी नोटिस को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने एफआईआर रद्द करने की भी मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने नोटिस पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कोई अंतरिम राहत नहीं दी।

    जस्टिस तीर्थंकर घोष ने यह कहते हुए याचिका दूसरी पीठ को स्थानांतरित कर दी कि इसी प्रकार का मामला पहले से हाईकोर्ट की दूसरी बेंच के समक्ष लंबित है।

    31 जुलाई तक कठोर कार्रवाई से मिली है राहत
    मामले की सुनवाई फिलहाल जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की पीठ के समक्ष चल रही है। अदालत ने 21 मई को अभिषेक बनर्जी को इस एफआईआर के संबंध में 31 जुलाई तक किसी भी कठोर कार्रवाई से अंतरिम राहत प्रदान की थी। हालांकि, वॉयस सैंपल देने के ताजा निर्देश के बाद मामले की जांच अब अगले चरण में प्रवेश करेगी।

  • बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?

    बंगाल में झटके के बाद ममता बनर्जी की अगली रणनीति क्या?


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनावी झटके के बाद ममता बनर्जी अब अपनी सियासत को नए सिरे से साधने की तैयारी में दिख रही हैं। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने नतीजों के बाद दिए बयानों में साफ किया है कि वे पीछे हटने के बजाय आक्रामक रुख अपनाए रखेंगी और विपक्षी एकता पर जोर बढ़ाएंगी।

    विपक्षी एकता पर फोकस

    राजनीतिक संकेत बताते हैं कि ममता बनर्जी अब INDIA गठबंधन के साथ तालमेल मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती हैं। केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका बनाए रखने और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना उनकी प्राथमिकता हो सकती है।

    “फाइटर इमेज” बरकरार रखने की कोशिश

    चुनाव नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में ममता ने हार को सीधे स्वीकार करने से बचते हुए संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया। माना जा रहा है कि यह रुख पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने और यह जताने की कोशिश है कि राजनीतिक लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

    संसद में मजबूत उपस्थिति का सहारा

    तृणमूल कांग्रेस फिलहाल केंद्र में तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 29 सीटें जीती थीं, जो उसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली बनाती हैं। ऐसे में विपक्षी रणनीति में उसकी भूमिका अहम बनी रह सकती है।

    कैडर को संभालना बड़ी चुनौती

    चुनावी झटके के बाद पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत बनाए रखना भी बड़ी प्राथमिकता होगी। इसके लिए ममता बनर्जी राज्यभर का दौरा कर सकती हैं, ताकि कार्यकर्ताओं में एकजुटता बनी रहे और टूट-फूट को रोका जा सके।

    भाजपा की बढ़त रोकने की तैयारी

    बंगाल में भाजपा की मजबूती को देखते हुए आने वाले लोकसभा चुनावों के लिए अभी से रणनीति बनाना जरूरी हो गया है। विपक्षी खेमे की कोशिश होगी कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह भरोसा दिलाया जाए कि एकजुट होकर मुकाबला किया जा सकता है।

    बंगाल के नतीजों ने ममता बनर्जी के सामने नई चुनौतियां जरूर खड़ी की हैं, लेकिन उनके हालिया संकेत बताते हैं कि वे आक्रामक राजनीति, संगठन मजबूती और विपक्षी एकता—इन तीन मोर्चों पर एक साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं।

  • Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा

    Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu:) की सियासत में बड़ी हलचल मच गई है। भाजपा (BJP) के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई (Annamalai) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने पिता की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए तमिलनाडु के छह विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रभारी पद से इस्तीफा (Resignation Post Election In-charge) लिया। अन्नामलाई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस निर्णय की जानकारी तमिलनाडु भाजपा नेतृत्व को दे दी है और उनकी स्थिति को समझते हुए वह इस समय अपने पिता के पास रहना चाहते हैं।

    अन्नामलाई ने कहा, “मेरे पिता डायलिसिस पर हैं और उनके इलाज और देखभाल का जिम्मा लेना मेरी प्राथमिकता है। इस कारण से मैं फिलहाल यात्रा करने की स्थिति में नहीं हूं। मैंने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया है कि वे इन छह विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी किसी अन्य नेता को सौंप दें।”

    अन्नामलाई को जिन छह विधानसभा क्षेत्रों का चुनाव प्रभारी बनाया गया था, वे हैं – सिंगानल्लूर, विरुगमबाक्कम (चेन्नई), करैक्कुडी, श्रीवैकुंटम, मदुरै (दक्षिण), और पद्मनाभपुरम (कन्याकुमारी)। अन्नामलाई ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि पार्टी उनके स्थान पर किसी अन्य नेता को नियुक्त कर सकती है।

    अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद राजनीतिक सियासत भी तेज हो गई। किल्लियूर के कांग्रेस विधायक राजेश कुमार ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा, “उन्हें चुनावी बुखार चढ़ गया था, और इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। मुझे लगता है कि चुनावी हार के डर से ही उन्होंने यह कदम उठाया है।” उन्होंने कहा, “कन्याकुमारी में भाजपा का कमल नहीं खिलेगा, चाहे वे कोई भी कदम उठाएं।”