Tag: Sethani Ghat

  • माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान

    माघ पूर्णिमा पर आस्था का सैलाब: कड़ाके की ठंड में नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर गूंजे 'नर्मदे हर' के जयकारे, हजारों श्रद्धालुओं ने किया स्नान


    नर्मदापुरम । मध्य प्रदेश की संस्कारधानी और मां नर्मदा के पावन तट नर्मदापुरम में आज माघ पूर्णिमा का अद्भुत आध्यात्मिक नजारा देखने को मिला। माघ मास के इस अंतिम और पवित्र दिन पर प्रसिद्ध सेठानी घाट श्रद्धा के सागर में डूबा नजर आया। कड़ाके की ठंड और सुबह की सर्द हवाओं की परवाह न करते हुए, हजारों की संख्या में श्रद्धालु सूर्योदय से पहले ही मां नर्मदा की शरण में पहुँच गए और आस्था की डुबकी लगाई।

    सर्द हवाओं पर भारी पड़ी शिव-भक्ति रविवार तड़के से ही सेठानी घाट और आसपास के अन्य घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लगने लगी थीं। जैसे ही भोर की पहली किरण ने नर्मदा के जल को छुआ, पूरा वातावरण ‘नर्मदे हर’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। ठिठुरन के बावजूद क्या बच्चे, क्या बूढ़ेहर कोई मां नर्मदा के शीतल जल में पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए लालायित दिखा। श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात सूर्य को अर्घ्य दिया और तट पर स्थित प्राचीन शिवलिंगों का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

    दान-पुण्य और मोक्ष की मान्यता शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। माताओं और बहनों ने घाट पर दीपदान किया और अन्न-वस्त्र का दान कर पुण्य लाभ कमाया। नर्मदापुरम की इस पावन धरा पर भक्तों का यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में आस्था के आगे मौसम की कठोरता भी गौण हो जाती है।

    प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। गोताखोरों की टीम और पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि उमड़ती भीड़ के बीच कोई अप्रिय घटना न हो। दान-पुण्य भजन-कीर्तन और जप-तप का यह सिलसिला देर शाम होने वाली महाआरती तक जारी रहने की उम्मीद है।

  • मकर संक्रांति पर नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी ठंड में ,हर हर नर्मदे,के जयकारे

    मकर संक्रांति पर नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी ठंड में ,हर हर नर्मदे,के जयकारे


    नर्मदापुरम । मकर संक्रांति का पर्व हर वर्ष सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है और इसी दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं। मकर संक्रांति का पर्व प्रकृति सूर्य उपासना और मानव जीवन के संतुलन का प्रतीक है। इस दिन से खरमास का अंत होता है और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस दिन को लेकर नर्मदापुरम बैतूल छिंदवाड़ा भोपाल जैसे बड़े शहरों से श्रद्धालु नर्मदा तट पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे।

    नर्मदापुरम के प्रसिद्ध सेठानी घाट पर सुबह 4:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था। कड़कड़ाती ठंड में भी श्रद्धालु “हर हर नर्मदे” के जयकारे लगाते हुए नर्मदा नदी में स्नान करने पहुंचे। मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से तिल और खिचड़ी का दान करना पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु यहां आकर सत्यनारायण भगवान की पूजा के बाद इन दानों को नर्मदा नदी में अर्पित कर रहे हैं। दरिद्र नारायण को कंबल और अन्य वस्तुएं भेंट करने की भी परंपरा है जिसे श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से निभा रहे हैं।

    मकर संक्रांति के पर्व पर नेमावर के पेढ़ी घाट सिद्धनाथ घाट और नागर घाट पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। यहां देवास हरदा और सीहोर जिले से बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। ठंड में भी श्रद्धालुओं ने नर्मदा नदी में आस्था की डुबकी लगाई और नर्मदे हर के उद्घोष के साथ सूर्योदय का स्वागत किया। मकर संक्रांति के दिन स्नान दान और सूर्य उपासना का विशेष धार्मिक महत्व है। यहां श्रद्धालुओं ने अनाज कपड़े तिल खिचड़ी और अन्य सामग्री का दान किया।

    सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और पुलिस ने घाटों पर पुख्ता इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। शास्त्रों में मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव को विशेष वस्तुएं अर्पित करने का विधान है जिनमें लाल वस्त्र गेहूं गुड़ मसूर दाल तांबा स्वर्ण सुपारी नारियल और दक्षिणा शामिल हैं। इन धार्मिक क्रियाओं के साथ श्रद्धालु अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति का यह पर्व नर्मदा तट पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम बनकर उभरा जहां लाखों श्रद्धालुओं ने एक साथ आकर इस पवित्र दिन का लाभ उठाया।