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  • सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा

    सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा


    नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रधान पीठ ने नई दिल्ली में बुधवार को इंदौर, भोपाल और राजस्थान के शहरों में पेयजल में सीवेज की मिलावट से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया। NGT ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने इंदौर में गंदे पानी के कारण मौतों और भोपाल में पेयजल में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिलने के मामलों का हवाला दिया।
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में गंदे पानी के सेवन से मौतें हुई हैं, जबकि भोपाल के कुछ इलाकों में ट्यूबवेल से रिसाव के कारण पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। वहीं, राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर और अजमेर जैसे शहरों में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन प्रणाली के चलते सीवेज के पानी का पेयजल में मिलना जारी है। ग्रेटर नोएडा में भी सीवेज मिला पानी पीने से कई लोग बीमार पड़े, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
    एनजीटी ने इन घटनाओं को गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला माना। पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से स्पष्ट जवाब तलब किया है। कहा गया है कि यह मामला पर्यावरणीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, जिम्मेदारी तय करने और नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार की रक्षा के लिए विचाराधीन रहेगा।

    इसके अलावा, NGT ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामलों को भी संज्ञान में लिया। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और कोयला खदान परियोजनाओं के लिए 50 से 100 वर्ष पुराने लगभग 15 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं या काटे जाने का प्रस्ताव है। सिंगरौली, खंडवा, विदिशा, भोपाल और इंदौर में भारी संख्या में पेड़ों की कटाई से वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य वन विभागों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।

  • नर्मदा में सीवेज से पेयजल पर संकट: दिग्विजय सिंह की चेतावनी से मचा हड़कंपजबलपुर में जनता भयभीत

    नर्मदा में सीवेज से पेयजल पर संकट: दिग्विजय सिंह की चेतावनी से मचा हड़कंपजबलपुर में जनता भयभीत


    जबलपुर । जबलपुर में नर्मदा नदी में सीवेज मिलने और उससे जुड़े पेयजल संकट को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस गंभीर मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गएतो शहर एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवकेंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह से हस्तक्षेप की मांग की है।

    दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि ग्वारीघाट क्षेत्र में बने सीवेज टैंक से बिना पूरी तरह फिल्टर किया गया गंदा पानी सीधे नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। यही नर्मदा नदी लगभग 500 मीटर दूर स्थित ललपुर पेयजल सप्लाई प्लांट के माध्यम से जबलपुर शहर को पानी उपलब्ध कराती है। ऐसे में सीवेज मिश्रित पानी के जरिए हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इस पूरे तंत्र को लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत बताई।

    इस बीचगंदे पानी की सप्लाई का मामला न्यायिक दहलीज तक भी पहुंच चुका है। जबलपुर निवासी अधिवक्ता ओपी यादव ने इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कलेक्टरनगर निगम आयुक्तमहापौर और प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2019 से शहर के कई इलाकों में लगातार गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है। बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

    याचिका में हाईलेवल कमेटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जबलपुर की जनता को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

    यह मामला इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है क्योंकि हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 18 लोगों की मौत हो चुकी हैजबकि कई अन्य लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इस घटना के बाद प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता और प्रभावितों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। ऐसे में जबलपुर में भी इसी तरह की स्थिति बनने की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि नर्मदा जैसी पवित्र और जीवनदायिनी नदी में सीवेज मिलने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक शहर का मुद्दा नहींबल्कि पर्यावरणजल सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।