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  • प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच

    प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद पर बाल यौन शोषण FIR, पुलिस ने शुरू की गहन जांच


    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ बाल यौन शोषण के गंभीर आरोपों पर FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने गहन जांच शुरू कर दी है। मामला POCSO कोर्ट के आदेश पर दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और पीड़ित शिष्यों ने अदालत में बच्चों के कथित शोषण के बयानों को दर्ज कराया था, जिनके आधार पर पुलिस ने देर रात FIR को औपचारिक रूप दिया।

    पुलिस की पांच सदस्यीय टीम, जिसका नेतृत्व डीसीपी मनीष कुमार शांडिल्य कर रहे हैं, ने घटना स्थल का नक्शा तैयार कर लिया है और पीड़ितों के मेडिकल परीक्षण के बाद साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। टीम ने माघ मेला शिविर और अन्य कथित घटनास्थलों का निरीक्षण भी किया है। पुलिस का मुख्य फोकस अब उन पीड़ितों और शिकायतकर्ता तक पहुंचकर कलम बंद बयान और सबूत दर्ज करना है, ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी सुनिश्चित हो सके।

    अविमुक्तेश्वरानंद ने FIR दर्ज होने के बाद कहा कि वे जांच से भागेंगे नहीं और उनके मठ के दरवाजे पुलिस के लिए हमेशा खुले हैं। उन्होंने बताया कि कई वकीलों ने उनका केस मुफ्त में लड़ने का प्रस्ताव दिया है और उनकी लीगल टीम अब अग्रिम कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है। वहीं, उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी के आपराधिक इतिहास पर सवाल उठाया और दावा किया कि वह कांधला थाना क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी रह चुका है।

    इस हाई‑प्रोफाइल मामले में पुलिस ने स्पेशल टीम बनाई है जिसमें एसीपी और इंस्पेक्टर झूंसी समेत पांच वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। टीम निष्पक्ष और तेज़ जांच सुनिश्चित कर रही है। POCSO Act के तहत यह मामला तीव्र और संवेदनशील माना जा रहा है, इसलिए पुलिस मेडिकल, फोरेंसिक और गवाह सबूत के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई तय करेगी।

    इस बीच समाज और धार्मिक जगत में भी इस मामले पर बहस जारी है। स्वामी ने आरोपों को झूठा और साजिशपूर्ण बताया है और कहा कि न्याय जल्द ही दोनों न्यायालयों में सही रूप से होगा। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव के बयानों का उन्होंने समर्थन करते हुए उन्हें जनता की आवाज बताया।

  • यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया

    यासीन मछली की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को आधार बनाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यासीन अहमद उर्फ मछली की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने यासीन के खिलाफ दर्ज आरोपों की गंभीरता और उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए यह फैसला लिया। यासीन मछली, जो एक पत्रकार के नाम पर जारी फर्जी विधानसभा पार्किंग पास का इस्तेमाल कर रहा था, को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने यासीन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे ठुकरा दिया, यह कहते हुए कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

    यह घटना भोपाल में उस समय सामने आई थी जब यासीन मछली विधानसभा पार्किंग में एक फर्जी पास लगाकर अपनी कार पार्क कर रहा था। यह पास एक पत्रकार के नाम पर जारी हुआ था, जिसे दिसंबर 2024 के विधानसभा सत्र के लिए जारी किया गया था। पत्रकार ने इस मामले की शिकायत भोपाल अरेरा हिल्स पुलिस से की थी, जिसके बाद यासीन को गिरफ्तार कर लिया गया था।

    यासीन मछली के खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने यासीन और उसके चाचा शाहवर को ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। इसके अलावा, आरोपी के मोबाइल से अश्लील वीडियो भी बरामद हुए थे, जो जांच में एक और बड़ा मामला सामने लाए। यासीन और उसके साथियों के खिलाफ एक और गंभीर आरोप यह है कि वह स्कूल और कॉलेज की लड़कियों को पार्टियों के बहाने ड्रग्स की लत लगवाते थे, फिर उनका यौन शोषण करते और उन्हें ब्लैकमेल कर वीडियो बनाते थे। इसके अलावा, धर्मांतरण का दबाव भी इन अपराधों से जुड़ा हुआ था, जो पुलिस की जांच में उभरकर आया है।

    इस मामले के बाद से यासीन मछली की आपराधिक गतिविधियों की गहराई से जांच की जा रही है, और पुलिस उसे सख्त सजा दिलाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर चुकी है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देता है, कि कोर्ट गंभीर अपराधों में लिप्त आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं देगी। इस फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया है कि अपराधी चाहे कितनी भी ताकतवर स्थिति में क्यों न हो, कानून के सामने सभी समान होते हैं।