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  • मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    मॉनसून सत्र में शाह पर संजय राउत का हमला, बोले बयान से मत भागिए, भविष्य में इस्तीफा देना होगा

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के दौरान संसद में छात्रों के प्रदर्शन पर हुई कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने और स्पष्ट बयान देने की मांग कर रहा है। इसी बीच शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने शाह पर तीखा हमला बोला है।

    संजय राउत ने कहा कि विपक्ष पिछले कई दिनों से दो प्रमुख मुद्दों को लेकर सदन में चर्चा की मांग कर रहा है। उनके अनुसार पहला मामला राम मंदिर के चंदे से जुड़ा है, जबकि दूसरा छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन और हिंसा के इस्तेमाल के निर्देश से संबंधित है। राउत का कहना है कि इन दोनों विषयों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए।

    राउत ने गृह मंत्री अमित शाह के संभावित बयान को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बयान से बचने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और सवालों का सामना सदन में किया जाना चाहिए। उन्होंने भविष्य को लेकर दावा करते हुए कहा कि आने वाले समय में शाह को इस्तीफा देना होगा। हालांकि, यह राउत का राजनीतिक बयान है और इस पर सरकार या गृह मंत्री की ओर से संबंधित प्रतिक्रिया का उल्लेख सामने नहीं आया है।

    विपक्षी दलों का कहना है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही उनकी मांग स्पष्ट रही है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि विपक्ष केवल एक स्पष्ट बयान चाहता है। उनका सवाल है कि छात्रों के खिलाफ पैलेट गोली और हिंसा का निर्देश किस स्तर से दिया गया था। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि गृह मंत्री ने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया था, तो फिर उनके मंत्रालय में यह आदेश किसने दिया।

    महुआ मोइत्रा ने राम मंदिर के चंदे से जुड़े मामले को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा नहीं कर रही है। उनका तर्क था कि विपक्ष गृह मंत्री को सदन में आने से नहीं रोक रहा, बल्कि वह खुद सदन में आकर जवाब देने की मांग कर रहा है।

    कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी गृह मंत्री के सदन में आने की मांग की। उन्होंने कहा कि छात्रों पर हुई कार्रवाई और राम मंदिर के चंदे से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। विपक्ष का कहना है कि इन मुद्दों पर चर्चा और स्पष्टीकरण संसद के भीतर होना जरूरी है।

    मॉनसून सत्र में इन मुद्दों को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। विपक्ष जहां गृह मंत्री के जवाब को लेकर दबाव बना रहा है, वहीं इन मांगों के कारण सदन की कार्यवाही भी राजनीतिक तनाव के बीच आगे बढ़ रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों और विपक्ष की मांगों पर सदन में किस तरह प्रतिक्रिया देती है।

  • अखिलेश यादव ने अमित शाह के संसद में जवाब देने के बयान पर साधा निशाना, कहा देश भाषण सुनने के मूड में नहीं

    अखिलेश यादव ने अमित शाह के संसद में जवाब देने के बयान पर साधा निशाना, कहा देश भाषण सुनने के मूड में नहीं


    नई दिल्ली ।
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बुधवार को सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की ओर से जवाब देने के लिए समय सीमा तय करना अपने आप में अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक जवाब देने के बजाय सत्र समाप्त करने की जल्दबाजी में है।

    अमित शाह ने कहा था कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह संसद में उठाए जाने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और चर्चा के दौरान स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि संसद में जवाब देने के लिए सरकार द्वारा समय-सीमा तय करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार जवाब केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उसमें सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।

    अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सरकार जिस समय सीमा में जवाब देने की बात कर रही है, वह वास्तविक उत्तर देने के बजाय एक बयान तक सीमित रह सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती कि विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब दिया जाए और वह संसद के मौजूदा सत्र को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    समाजवादी पार्टी प्रमुख ने अपने बयान में जिम्मेदारी और जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी सरकार की जवाबदेही समय की शर्त से नहीं, बल्कि उसके उत्तरदायित्व और तर्क से तय होती है। उन्होंने छात्र आंदोलन से जुड़े पूरे मामले को गंभीर बताते हुए विस्तृत जवाब की मांग दोहराई।

    दरअसल, 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर चुके हैं।

    विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा जा रहा है। इसी बीच सरकार की ओर से संसद में चर्चा और जवाब देने की बात कही गई है। अमित शाह ने संकेत दिया है कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

    संसद के मौजूदा मानसून सत्र की निर्धारित अवधि 13 अगस्त तक है। ऐसे में विपक्ष के सवालों और सरकार के जवाब को लेकर समय को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, सदन की कार्यवाही की आवश्यकता होने पर समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना की भी चर्चा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच अखिलेश यादव का बयान विपक्ष की ओर से सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं और अमित शाह विपक्ष के आरोपों पर किस तरह जवाब देते हैं।

  • महिला क्रिकेट के सबसे बड़े महाकुंभ का बिगुल बजा: इंग्लैंड और वेल्स में 12 जून से शुरू होगा महिला टी20 विश्व कप, आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने टीमों को दीं शुभकामनाएं

    महिला क्रिकेट के सबसे बड़े महाकुंभ का बिगुल बजा: इंग्लैंड और वेल्स में 12 जून से शुरू होगा महिला टी20 विश्व कप, आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने टीमों को दीं शुभकामनाएं

    नई दिल्ली । महिला क्रिकेट के इतिहास में एक नया मील का पत्थर स्थापित करने के उद्देश्य से आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का बिगुल बज चुका है। इंग्लैंड और वेल्स के ऐतिहासिक मैदानों पर आयोजित होने जा रहे क्रिकेट के इस सबसे बड़े महाकुंभ की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। रविवार को टूर्नामेंट के आधिकारिक उद्घाटन के सिलसिले में एक भव्य ‘कैप्टंस मीट’ का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के चेयरमैन जय शाह ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर सभी 12 प्रतिभागी देशों के कप्तानों का हौसला बढ़ाया और उन्हें खेल भावना के साथ ऐतिहासिक प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।

    आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक संदेश के माध्यम से इस आगामी संस्करण को महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे भव्य और क्रांतिकारी टूर्नामेंट करार दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इंग्लैंड और वेल्स के प्रतिष्ठित क्रिकेट स्टेडियमों में इस बार रिकॉर्ड संख्या में दर्शक मैच देखने पहुंचेंगे, जिससे महिला क्रिकेट की लोकप्रियता को एक नया आयाम मिलेगा। शाह ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक प्रसारण नेटवर्क के व्यापक विस्तार के कारण दुनिया भर के करोड़ों क्रिकेट प्रेमी इस बार अपनी पसंदीदा महिला क्रिकेट टीमों और खिलाड़ियों को लाइव एक्शन में देख सकेंगे।

    प्रशासनिक और तकनीकी दृष्टिकोण से इस बार का टूर्नामेंट कई मायनों में अनूठा होने जा रहा है क्योंकि महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में पहली बार 12 टीमें खिताब की दौड़ में शामिल हो रही हैं। टूर्नामेंट का आधिकारिक आगाज 12 जून को पहले ग्रुप मुकाबले के साथ होगा। यह इस प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिता का 10वां संस्करण है और साल 2009 में आयोजित हुए उद्घाटन सत्र के बाद यह पहला मौका है जब इंग्लैंड इसकी पूर्ण रूप से मेजबानी कर रहा है। पूरे टूर्नामेंट के दौरान कुल 33 मुकाबले खेले जाएंगे, जिनका आयोजन इंग्लैंड और वेल्स के सात सबसे प्रमुख क्रिकेट मैदानों पर किया जाएगा।

    टूर्नामेंट के समीकरणों पर नजर डालें तो सभी 12 टीमों को दो अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया है। ग्रुप-A में छह बार की सर्वाधिक सफल चैंपियन टीम ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश और पहली बार इस वैश्विक मंच पर पदार्पण कर रही नीदरलैंड्स की टीम को जगह मिली है। वहीं दूसरी ओर ग्रुप-B में मेजबान इंग्लैंड के साथ गत विजेता न्यूजीलैंड, वेस्टइंडीज, श्रीलंका, आयरलैंड और स्कॉटलैंड की टीमें शामिल हैं। लीग चरण के दौरान प्रत्येक टीम कुल पांच-पांच मुकाबले खेलेगी और दोनों समूहों की शीर्ष दो टीमें नॉकआउट चरण अर्थात सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी।

    क्रिकेट समीक्षकों के अनुसार, जहां न्यूजीलैंड की टीम अपने मौजूदा चैंपियन के खिताब की रक्षा करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, वहीं छह बार की विश्व विजेता ऑस्ट्रेलियाई टीम का दबदबा बरकरार रखने की चुनौती होगी। मेजबान इंग्लैंड भी अपनी पूर्व कप्तान और वर्तमान मुख्य कोच शार्लोट एडवर्ड्स के मार्गदर्शन में साल 2009 की खिताबी सफलता को अपनी घरेलू धरती पर दोहराना चाहेगी। टूर्नामेंट के वार्म-अप मैचों की प्रक्रिया छह जून से डर्बी, लॉफबोरो और कार्डिफ में पहले ही शुरू हो चुकी है। मुख्य चरण के बाद दोनों महत्वपूर्ण सेमीफाइनल मुकाबले क्रमशः 30 जून और 2 जुलाई को लंदन के द ओवल मैदान पर खेले जाएंगे, जबकि विश्व विजेता का फैसला करने वाला ऐतिहासिक फाइनल महामुकाबला 5 जुलाई को मक्का ऑफ क्रिकेट कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान पर खेला जाएगा।