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  • निलंबन और इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा सड़क सुरक्षा अभियान, पूर्व ट्रैफिक कर्मी के वायरल वीडियो ने यातायात व्यवस्था पर उठाए सवाल

    निलंबन और इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा सड़क सुरक्षा अभियान, पूर्व ट्रैफिक कर्मी के वायरल वीडियो ने यातायात व्यवस्था पर उठाए सवाल

    मध्य प्रदेश: के शहडोल में पूर्व ट्रैफिक हेड कांस्टेबल विवेकानंद तिवारी एक बार फिर चर्चा में हैं। पुलिस विभाग से निलंबन और बाद में स्वैच्छिक इस्तीफा देने के बावजूद उन्होंने सड़क सुरक्षा को लेकर अपना अभियान जारी रखा है। सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स रखने वाले विवेकानंद तिवारी का नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने यातायात नियमों के उल्लंघन की कई घटनाओं को कैमरे में रिकॉर्ड कर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया है।

    हाल ही में साझा किए गए वीडियो में उन्होंने शहर के एक प्रमुख चौराहे पर यातायात व्यवस्था का वास्तविक दृश्य दिखाया। वीडियो में मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, बिना हेलमेट दोपहिया चलाना, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, एक बाइक पर तीन लोगों का सफर करना और नाबालिग के वाहन चलाने जैसी कई लापरवाहियां दिखाई गई हैं। उनका कहना है कि ऐसी छोटी दिखने वाली गलतियां ही अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती हैं।

    वीडियो के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी समान जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि यातायात नियमों का पालन करके अनेक दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है। इसी उद्देश्य से वह लगातार लोगों को जागरूक करने वाले वीडियो तैयार कर रहे हैं।

    विवेकानंद तिवारी पहले ट्रैफिक पुलिस में कार्यरत थे और ड्यूटी के दौरान भी सड़क सुरक्षा से जुड़े उनके वीडियो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हुए थे। उनके जागरूकता अभियान को व्यापक समर्थन मिला और बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें डिजिटल माध्यमों पर फॉलो करना शुरू किया। समय के साथ उनके वीडियो सड़क सुरक्षा से जुड़े जनजागरूकता अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए।

    हालांकि कुछ समय पहले विभाग ने उन्हें लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और सेवा नियमों के उल्लंघन के आरोप में निलंबित कर दिया था। विभागीय जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि अनुपस्थिति के दौरान वह सोशल मीडिया पर सक्रिय थे। इसके बाद उन्होंने अपनी ओर से स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत किए और बताया कि उन्होंने अपनी बीमारी की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई थी।

    बाद में उन्होंने स्वेच्छा से पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया। उनका कहना था कि निलंबन की कार्रवाई से उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित हुई है, इसलिए उन्होंने सेवा छोड़ने का निर्णय लिया। विभाग से अलग होने के बाद भी उन्होंने सड़क सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी और स्वतंत्र रूप से जागरूकता अभियान चलाना जारी रखा।

    वर्तमान में वह हेलमेट उपयोग, सुरक्षित वाहन संचालन और यातायात नियमों के पालन को लेकर लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से वह सड़क पर दिखाई देने वाली लापरवाहियों को सामने लाते हैं और लोगों से जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील करते हैं। उनके हालिया वीडियो को भी बड़ी संख्या में लोग देख रहे हैं और इस पर सड़क सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कानून के साथ-साथ जनजागरूकता भी उतनी ही आवश्यक है। ऐसे अभियानों से लोगों में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। शहडोल से सामने आया यह मामला भी इस बात की ओर संकेत करता है कि सड़क सुरक्षा का संदेश किसी पद या वर्दी का मोहताज नहीं होता, बल्कि सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत पहल के माध्यम से भी प्रभावी बदलाव लाया जा सकता है।

  • लोकायुक्त FIR के साए में मिली नई जिम्मेदारी, करोड़ों की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पूर्व प्रभारी DEO की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल

    लोकायुक्त FIR के साए में मिली नई जिम्मेदारी, करोड़ों की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पूर्व प्रभारी DEO की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल

    मध्य प्रदेश: के सिंगरौली जिले से जुड़े बहुचर्चित शिक्षा विभाग वित्तीय अनियमितता प्रकरण ने एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के चलते जांच के दायरे में आए पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी एस.बी. सिंह को शहडोल संभाग में सहायक संचालक का प्रभार सौंपे जाने के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय सामने आया है जब संबंधित मामले में लोकायुक्त स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है और जांच की प्रक्रिया अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

    सिंगरौली का यह मामला पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा विभाग से जुड़े सबसे चर्चित प्रकरणों में शामिल रहा है। आरोपों के अनुसार विभागीय योजनाओं के संचालन, सामग्री खरीदी, प्रशासनिक स्वीकृतियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े विभिन्न मामलों में बड़े स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों के आधार पर प्रारंभिक जांच शुरू हुई और बाद में मामला इतना गंभीर माना गया कि लोकायुक्त संगठन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की कार्रवाई भी हुई। उस समय यह मामला प्रदेशभर में चर्चा का केंद्र बना था और प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कई प्रश्न उठाए गए थे। इसी वजह से माना जा रहा था कि जांच पूरी होने तक इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों की भूमिका सीमित रखी जा सकती है, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े।

    हालांकि हालिया प्रशासनिक आदेश ने इस धारणा को चुनौती दी है। पूर्व प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी को शहडोल संभाग में सहायक संचालक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर और बाहर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आलोचकों का मानना है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से घिरे अधिकारी को महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करना शासन की सख्ती को लेकर मिश्रित संदेश दे सकता है। वहीं कुछ प्रशासनिक जानकार इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहे हैं।

    इस नियुक्ति के बाद सबसे अधिक चर्चा पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को लेकर हो रही है। कई लोगों का तर्क है कि जब किसी मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हों और आरोपों की गंभीरता व्यापक हो, तब ऐसे अधिकारियों की नई पदस्थापना पर अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे जनता के बीच प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्षता को लेकर सवाल पैदा हो सकते हैं।

    दूसरी ओर कानूनी दृष्टिकोण अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। भारतीय न्याय व्यवस्था का मूल सिद्धांत है कि किसी भी व्यक्ति को तब तक दोषी नहीं माना जा सकता जब तक आरोप न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध न हो जाएं। केवल FIR दर्ज होना किसी अधिकारी या व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता। ऐसे में संबंधित अधिकारी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

    फिर भी यह तथ्य महत्वपूर्ण बना हुआ है कि सिंगरौली का शिक्षा विभाग प्रकरण लंबे समय तक सार्वजनिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र रहा है। लोकायुक्त कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश की चर्चित जांचों में शामिल हो गया था। अब उसी प्रकरण से जुड़े अधिकारी को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद एक बार फिर इस पूरे मामले पर ध्यान केंद्रित हो गया है।

    वर्तमान परिस्थितियों में सभी की नजर जांच से जुड़े आगामी घटनाक्रमों पर टिकी हुई है। आने वाले समय में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन और शासन के संभावित निर्णय इस मामले की दिशा तय करेंगे। फिलहाल यह नियुक्ति प्रशासनिक जवाबदेही, पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता को लेकर नई बहस को जन्म देती नजर आ रही है।

  • मध्यप्रदेश में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: E-5 हाथी को मिला सहारा, तनाव में था हिंसक व्यवहार

    मध्यप्रदेश में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: E-5 हाथी को मिला सहारा, तनाव में था हिंसक व्यवहार


    शहडोल । मध्यप्रदेश के शहडोल और अनूपपुर वन क्षेत्र में पिछले कई दिनों से दहशत का कारण बना जंगली हाथी E-5 आखिरकार वन विभाग की टीम द्वारा सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। इस हाथी पर तीन ग्रामीणों की मौत और कई मवेशियों व घरों को नुकसान पहुंचाने के आरोप थे, जिसके चलते इसे अत्यंत खतरनाक माना जा रहा था।

    लेकिन इस पूरे ऑपरेशन में जो बात सामने आई, उसने विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, E-5 वास्तव में स्वभाव से हिंसक नहीं था, बल्कि अपने झुंड से अलग हो जाने के कारण लंबे समय से अकेलेपन और तनाव में था। माना जा रहा है कि इसी मानसिक स्थिति ने उसके व्यवहार को आक्रामक बना दिया था।

    रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्रशिक्षित पालतू हाथी रामा को मैदान में उतारा गया। आमतौर पर जंगली हाथी अन्य हाथियों या इंसानों के संपर्क में आने पर आक्रामक हो जाते हैं, लेकिन E-5 ने रामा को देखते ही अलग व्यवहार दिखाया। वह शांत हुआ और धीरे-धीरे उसके करीब आने लगा। विशेषज्ञों ने इसे सामाजिक जुड़ाव की तलाश के रूप में देखा।

    वन विभाग की टीम ने इससे पहले 22 मई को हाथी को काबू में करने की कोशिश की थी, लेकिन वह प्रयास असफल रहा था। उस दौरान E-5 ने पिंजरा और GPS कॉलर तक तोड़ दिया था। इसके बाद रणनीति बदली गई और रातों-रात एक नया प्लान तैयार किया गया।

    मुख्य वन्यजीव वार्डन डॉ. समिता राजौरा के नेतृत्व में अगले चरण में पालतू हाथियों और माहूतों की मदद से उसे सफलतापूर्वक रेडियो कॉलर पहनाया गया। इसके बाद उसे सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ रेंज में शिफ्ट किया गया।

    अब E-5 को अन्य हाथियों के झुंड के करीब रखा गया है, ताकि वह दोबारा सामाजिक वातावरण में लौट सके और सामान्य जीवन जी सके। यह पूरा मामला वन्यजीव व्यवहार और उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक नई समझ भी सामने लाता है।

  • शहडोल में सनसनी: तेंदूपत्ता गिनती से लौट रहे किसान की जंगल मार्ग में हत्या, बाइक पर मिला शव

    शहडोल में सनसनी: तेंदूपत्ता गिनती से लौट रहे किसान की जंगल मार्ग में हत्या, बाइक पर मिला शव


    शहडोल, मध्यप्रदेश: शहडोल जिले के ब्यौहारी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक किसान की बेरहमी से हत्या कर दी गई। देवराव गांव निवासी तुलसी दास कुशवाहा का शव सोमवार सुबह गांव के पास जंगल मार्ग में उनकी बाइक पर खून से लथपथ हालत में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए।

    मृतक रविवार शाम तेंदूपत्ता की गिनती के लिए घर से निकला था। बताया जा रहा है कि वह गांव में चल रहे तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य में शामिल होने गया था। परिजनों के अनुसार, तुलसी दास देर रात तक घर नहीं लौटे, जिसके बाद परिवार में चिंता बढ़ गई। सुबह जब उनकी कोई जानकारी नहीं मिली तो तलाश शुरू की गई।

    इसी दौरान गांव के कुछ लोग जंगल मार्ग से गुजर रहे थे, जहां उन्होंने सड़क किनारे खड़ी बाइक पर एक व्यक्ति का शव पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर वह तुलसी दास कुशवाहा निकले। शव के आसपास बड़ी मात्रा में खून फैला हुआ था, जिससे स्पष्ट हो रहा था कि हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई है।

    सूचना मिलते ही ब्यौहारी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि मृतक पर किसी धारदार हथियार से कई बार हमला किया गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना को लेकर परिजनों ने पुरानी रंजिश की आशंका जताई है। उनका कहना है कि किसी विवाद के चलते तुलसी दास की हत्या की गई हो सकती है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से इनकार किया है और सभी संभावित एंगल से जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस टीम आसपास के ग्रामीणों से पूछताछ कर रही है और घटनास्थल के आसपास से सबूत जुटाए जा रहे हैं। अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी तलाश तेज कर दी गई है।

    अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हत्या के तरीके और कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और ग्रामीणों में आक्रोश भी देखा जा रहा है।

  • हाईटेक सिस्टम फेल? शहडोल में खुलेआम बिजली चोरी, ईमानदार उपभोक्ता परेशान..

    हाईटेक सिस्टम फेल? शहडोल में खुलेआम बिजली चोरी, ईमानदार उपभोक्ता परेशान..


    मध्य प्रदेश /शहडोल जिले में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया को एक बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई दे रही है। हाईटेक सिस्टम की मौजूदगी के बावजूद ग्रामीण इलाकों में बिजली चोरी का पुराना तरीका ‘कटिया कनेक्शन’ आज भी खुलेआम जारी है, जिससे बिजली विभाग की चुनौती और भी बढ़ गई है।

    जिले के कई ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग मीटर बायपास कर सीधे लाइन से बिजली का उपयोग कर रहे हैं। यह अवैध तरीका अब आम होता जा रहा है, जहां घरेलू उपयोग से लेकर भारी उपकरणों तक को बिना किसी रोक-टोक के चलाया जा रहा है। इस स्थिति ने न केवल बिजली आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव भी डाल दिया है।

    बिजली चोरी का सबसे बड़ा असर ट्रांसफार्मरों और सप्लाई सिस्टम पर देखने को मिल रहा है। ओवरलोडिंग के कारण बार-बार बिजली गुल होना, लो वोल्टेज और तकनीकी खराबी जैसी समस्याएं अब सामान्य हो चुकी हैं। इसका सीधा असर उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जो नियमित रूप से बिल का भुगतान कर रहे हैं और नियमों का पालन कर रहे हैं। छोटे व्यापारी और आम परिवार इस असंतुलित व्यवस्था से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा का विषय है कि इस तरह की गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई अपेक्षाकृत कम दिखाई देती है। कई जगहों पर खुलेआम तारों में हुक लगाकर बिजली लेने की घटनाएं देखी जा सकती हैं, जिससे विभागीय निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    दूसरी ओर बिजली विभाग का कहना है कि समय-समय पर जांच अभियान चलाए जाते हैं और अवैध कनेक्शन हटाने की कार्रवाई भी की जाती है। साथ ही स्मार्ट मीटर को इस समस्या के समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में बिजली चोरी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

    हालांकि जमीनी स्थिति और दावों के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आता है। आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के बावजूद बिजली चोरी की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या तकनीक अकेले इस समस्या को हल कर सकती है या इसके लिए सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक जागरूकता भी जरूरी है।

  • MP: शहडोल के ब्यौहारी रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में लगी भीषण आग… बड़ा हादसा टला

    MP: शहडोल के ब्यौहारी रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में लगी भीषण आग… बड़ा हादसा टला


    शहडोल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शहडोल (Shahdol) में ब्यौहारी रेलवे स्टेशन (Byawari Railway Station) पर खड़ी ट्रेन में अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। ये आग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास साइडिंग में खड़ी ट्रैक मशीन की बोगी में लगी। देखते ही देखते स्टेशन पर हड़कंप मच गया। आग की खबर मिलते ही डायल 112 और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने फुर्ती दिखाते हुए आग को बुझाया और उसे दूसरी बोगियों तक फैलने से रोक लिया। अगर थोड़ी भी देर होती, तो बड़ा नुकसान हो सकता था।

    प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, समय रहते आग को बुझा लिया गया जिससे बड़ा हादसा टल गया और किसी प्रकार की जान का नुकसान नहीं हुआ है। घटना रविवार दोपहर 3 बजे के करीब की बताई जा रही है। रेलवे के बड़े अधिकारियों को इस घटना की जानकारी दे दी गई है। फिलहाल स्टेशन पर स्थिति पूरी तरह सामान्य है, लेकिन सावधानी के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

    राहत टीमों ने डेढ़ घंटे बाद करीब साढ़े 4 बजे आग पर काबू पा लिया। मिली जानकारी के अनुसार बोगी रेलवे स्टेशन के साइडिंग ट्रैक पर चार कोच वाली एक ट्रैक मशीन खड़ी थी। दोपहर के वक्त इसके एक कोच नंबर ईसीओ 994129 में अचानक आग लग गई। गनीमत यह रही कि जिस वक्त आग लगी, बोगी के अंदर कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।

    थाना प्रभारी जिया उल हक और आरपीएफ चौकी प्रभारी गिरीश कुमार मिश्रा ने घटना का जायजा लिया। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी होगी। उस वक्त ट्रैक स्टाफ काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था। पुलिस और रेलवे की टीम अब आग लगने की असली वजह पता लगाने में जुटी है।

  • शहडोल के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं, दो नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल

    शहडोल के स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नहीं, दो नर्सों के भरोसे चल रहा अस्पताल


    शहडोल । शहडोल के ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निपनिया की स्थिति गंभीर है। चमचमाती नई बिल्डिंग होने के बावजूद यहाँ एक भी डॉक्टर पदस्थ नहीं है। अस्पताल पूरी तरह से दो नर्सों के भरोसे चल रहा है जबकि नियमों के अनुसार कम से कम पांच डॉक्टर होने चाहिए।

    गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए दूर दराज के अस्पतालों में रेफर करना पड़ रहा है। इससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी ग्रामीणों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है।

    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े बड़े दावे करती है लेकिन निपनिया अस्पताल की वास्तविक स्थिति इन दावों की पोल खोल रही है। अस्पताल के कर्मचारी भी इस अव्यवस्था से परेशान हैं और डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है।

    डॉ राजेश मिश्रा ने बताया कि डॉक्टरों का बॉन्ड पीरियड खत्म होने के कारण अस्पताल में खालीपन है। इसके अलावा जिले में पीजी के लिए लगभग 10 डॉक्टर अन्य कार्यों में गए हुए हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए शासन से मांग की गई है और जल्द ही स्थिति सुधारी जाएगी।
    यह मामला शहडोल जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाता है और दिखाता है कि चमचमाती बिल्डिंगों के बावजूद स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी अव्यवस्थित रह सकती है।

  • शहडोल में नशे पर बड़ा प्रहार: लेडी ड्रग पेडलर शबनम बी गिरफ्तार, 730 ऑनरेक्स सिरप जब्त

    शहडोल में नशे पर बड़ा प्रहार: लेडी ड्रग पेडलर शबनम बी गिरफ्तार, 730 ऑनरेक्स सिरप जब्त


    शहडोल । शहडोल जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अब तक की बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कोतवाली थाना पुलिस ने दुर्गा कॉलोनी स्थित टेक्निकल ग्राउंड के पास रहने वाली कथित लेडी ड्रग पेडलर शबनम बी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 730 नग ऑनरेक्स कफ सिरप जब्त किया है। जब्त सिरप की अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये बताई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार आरोपी शबनम बी पहले भी नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त पाई जा चुकी है। लगातार मिल रही सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने सुनियोजित रणनीति बनाकर दबिश दी और उसे रंगे हाथों गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि आरोपी बाहरी राज्यों से नशीली सामग्री मंगाकर जिले में युवाओं के बीच सप्लाई कर रही थी जिससे युवा वर्ग तेजी से नशे की चपेट में आ रहा था।

    कार्रवाई के दौरान एक संगठित गिरोह का खुलासा भी हुआ है। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में बंटी उसका बेटा और दामाद के अलावा अंतरराज्यीय तस्कर रमेश जायसवाल सहित अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई है। पांच अन्य संदिग्धों की पहचान भी कर ली गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह से जुड़े सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।

    कोतवाली थाना प्रभारी राघवेंद्र तिवारी ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नशे के खिलाफ यह विशेष अभियान चलाया गया। 730 ऑनरेक्स सिरप के साथ एक महिला आरोपी को गिरफ्तार किया गया है जबकि पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

    इस सख्त कार्रवाई के बाद जिले में नशा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं आमजन ने पुलिस की इस पहल की सराहना की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

  • शहडोल में कोल माफिया का दुस्साहस: रेंजर से मारपीट, वर्दी फाड़ने तक की वारदात, FIR में देरी का आरोप

    शहडोल में कोल माफिया का दुस्साहस: रेंजर से मारपीट, वर्दी फाड़ने तक की वारदात, FIR में देरी का आरोप


    शहडोल । मध्यप्रदेश शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र के खितौली बीट में कोल माफिया और अवैध कोयला खनन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर माफियाओं ने जमकर हमला किया। अवैध उत्खनन रोकने गए वन रेंजर रामनरेश विश्वकर्मा से मारपीट की गई और उनकी वर्दी भी फाड़ दी गई, जिससे विभाग व स्थानीय लोग सकते में हैं। स्थानीय वन अधिकारियों और डीएफओ ने इस घटना को खतरनाक कृत्य बताया है और साथ ही पुलिस पर एफआईआर दर्ज कराने में देरी का गंभीर आरोप लगाया है।

    घटना 11 फरवरी की रात खेतावली गांव के ऊपर टोला में हुई, जब वन विभाग को सूचना मिली कि कुछ ग्रामीणों ने अवैध कोयला लेकर जा रहे ट्रैक्टर को रोक रखा है। ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग दोनों को सूचना दी थी, लेकिन वन विभाग की टीम पहले मौके पर पहुंची जबकि पुलिस देर से आई। यहीं अवसर पाकर कोल माफिया ने वन टीम पर झपट्टा मारा, रेंजर की गाड़ी रोकी, उन्हें बाहर खींचा और मारपीट की। रेंजर, जैसे-तैसे वहां से भागकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचे।

    डीएफओ श्रद्धा पंद्रे ने आरोप लगाया कि पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही। रेंजर घटनास्थल के बाद सोहागपुर थाना पहुंचे और रात लगभग 11 बजे एफआईआर दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने 24 घंटे से अधिक तक कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने तीन बार रेंजर के आवेदन को बदलने को कहा और एफआईआर दर्ज करने में अनावश्यक विलंब किया। इसके अलावा अधिकारियों ने फोन कॉल तक नहीं उठाए, जिससे वन विभाग में नाराजगी और बढ़ गई।

    पुलिस ने अंततः गुरुवार देर रात रेंजर रामनरेश की शिकायत के आधार पर बिट्टन सिंह, चिंटू सिंह, राजू सिंह समेत अन्य के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, झगड़ा, तोड़फोड़ और गाली-गलौज के आरोप में केस दर्ज किया है।

    ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या नई नहीं है। खितौली इलाके में घोड़सा नाला के पास अवैध कोयले का खनन लंबे समय से चल रहा है। हर दिन दर्जनों ट्रैक्टर अवैध कोयला लेकर गुजरते हैं और ग्रामीणों ने कई बार पुलिस और प्रशासन से शिकायत की, लेकिन पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के बावजूद कोयले भरे ट्रैक्टर तेज रफ्तार में चलते हैं, जिससे दुर्घटना का जोखिम बना रहता है।

    घटना के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने कहा कि जब ग्रामीणों ने अवैध कोयला ले जा रहे ट्रैक्टर को रोक लिया, तो ट्रैक्टर चालक ने फोन पर सूचना दी और कुछ ही देर में 15-20 लोग हथियारों से लैस वहां पहुंच गए। वे ग्रामीणों को धमकी भी दे रहे थे। इस बीच वन विभाग की टीम पहुंचते ही स्थिति और गंभीर हो गई।

    यह मामला केवल एक व्यक्तिपरक संघर्ष से आगे बढ़कर खनन माफिया के हौसले, अवैध उत्खनन की त्वरित बढ़त और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच सहयोग की कमी को उजागर करता है। स्थानीय लोग और वन विभाग दोनों ही जल्द प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि वन संपदा तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

  • संपत्ति और मुआवजा विवाद पर शहडोल के परिवार में सड़क से थाने तक हाथापाई और गाली-गलौज

    संपत्ति और मुआवजा विवाद पर शहडोल के परिवार में सड़क से थाने तक हाथापाई और गाली-गलौज

    शहडोल / मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में पारिवारिक संपत्ति विवाद अचानक हाईवोल्टेज ड्रामा में बदल गया। बुढ़ार और धनपुरी थाना क्षेत्र के माली मोहल्ला निवासी परिवार के सदस्य सड़क पर आमने-सामने आ गए और थाने तक अपना विवाद लेकर पहुंचे। हाथापाई, झूमा-झपटी और गाली-गलौज के इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    मामले की शुरुआत बुढ़ार थाना क्षेत्र के जैन झरोखा के सामने सड़क पर हुई। माली मोहल्ला के अजय माली की कुछ साल पहले करंट लगने से मौत हो गई थी। उनकी पत्नी सोनम बाद में पुणे चली गई थी। अब सोनम के धनपुरी लौटने पर पति की मृत्यु के बाद मिली मुआवजा राशि और संपत्ति को लेकर देवर विजय और देवरानी के बीच विवाद शुरू हुआ।

    विवाद सड़क तक सीमित नहीं रहा और दोनों पक्ष थाने में पहुंचे। वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी संघर्षरत पक्षों को शांत करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन हालात काबू में करना उनके लिए आसान नहीं रहा। पुलिस दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने में जुटी हुई है।

    यह विवाद और उसका वायरल वीडियो जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। परिवारिक संपत्ति और मुआवजा को लेकर शुरू हुआ मामूली झगड़ा हिंसक रूप लेने के बाद थाने तक पहुंच गया।