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  • शनि अमावस्या का विशेष आयोजन, नर्मदा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने की पूजा

    शनि अमावस्या का विशेष आयोजन, नर्मदा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने की पूजा


    नई दिल्ली। बड़वानी जिले में शनिवार को शनि अमावस्या और शनि जयंती के दुर्लभ संयोग पर धार्मिक आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्थित शनि मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। साईं शनेश्वर शनि मंदिर, सेंगाव बाईपास स्थित शनि मंदिर और अंजड़ के श्री नवग्रह शनि मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।

    पूरे दिन मंदिर परिसर “जय शनिदेव” के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजते रहे। भक्तों ने तेल, फूल, काली उड़द और प्रसाद अर्पित कर शनिदेव की विशेष पूजा की।

    51 किलो तेल से शनिदेव का अभिषेक, नवग्रह पूजन भी सम्पन्न
    साईं शनेश्वर शनि मंदिर समिति के अनुसार, सुबह से ही वैदिक विधि-विधान के साथ शनिदेव का 51 किलो तेल से अभिषेक किया गया। इसके बाद नवग्रह पूजन, हवन और विशेष आरती संपन्न हुई। अंजड़ स्थित श्री नवग्रह शनि मंदिर, जिसे जिले का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है, वहां भी सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। यहां नवग्रह देवताओं का विशेष पूजन कर हवन किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

    भंडारे और प्रसादी से भक्तों का स्वागत
    श्रद्धालुओं के लिए कई स्थानों पर भंडारे और प्रसादी का आयोजन किया गया। अंजड़ मंदिर में लगभग एक क्विंटल पूरी-चना प्रसाद वितरित किया गया, जबकि सेंगाव बाईपास मंदिर में छप्पन भोग के साथ प्रसादी बांटी गई। कुछ स्थानों पर साबूदाने की खिचड़ी भी श्रद्धालुओं को दी गई। मंदिरों में दिनभर भक्तों का आना-जाना जारी रहा और शाम तक माहौल पूरी तरह भक्ति में डूबा रहा।

    नर्मदा घाटों पर आस्था की डुबकी, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
    शनि अमावस्या के अवसर पर नर्मदा नदी के घाटों, विशेषकर राजघाट पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। लोगों ने पवित्र स्नान कर दान-पुण्य और पितरों के तर्पण की विधि पूरी की। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। प्रशासन द्वारा घाटों पर पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके और किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

    शाम को होगी महाआरती, दिनभर जारी रहा उत्सव
    शाम 7 बजे सभी प्रमुख शनि मंदिरों में संगीतमय महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। पूरे जिले में यह दिन पूरी तरह धार्मिक उल्लास और आस्था के रंग में रंगा रहा।

  • शनिवार व्रत के जरूरी नियम: शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही विधि

    शनिवार व्रत के जरूरी नियम: शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही विधि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय के देवता और कर्मफलदाता माना गया है। मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिवार के दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में चल रही बाधाएं कम होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। लेकिन यह व्रत तभी पूर्ण फल देता है जब इसके नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए।

    शनिवार व्रत के महत्वपूर्ण निय
    शनिवार व्रत रखने वाले साधक को कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। व्रत के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही किसी भी व्यक्ति का अपमान या बुरा बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि शनिदेव कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। व्रत के दिन अन्न का सेवन न करने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है। व्रत समाप्ति यानी पारण के समय खिचड़ी और काली उड़द दाल का सेवन शुभ माना गया है।

    दान और सेवा का विशेष महत्व
    शनिवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा अनुसार काले तिल, लोहे की वस्तुएं, कंबल, जूते-चप्पल और धन का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का एक श्रेष्ठ उपाय माना गया है।

    पूजा विधि और मंत्र जाप
    शनिवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। पूजा में शनि देव को काले तिल, फूल, धूप, दीप और सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान “ॐ शं शनैश्चराय नमः” और “शनि मंत्र” का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद शनि चालीसा और आरती करने से पूजा पूर्ण फल देती है।

    शनि दोष से मुक्ति के विशेष उपाय
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही हो तो शनिवार के दिन शनि कवच का पाठ करना लाभकारी माना गया है। इसके साथ ही लगातार आठ शनिवार तक सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित करने से शनि दोष के प्रभाव में कमी आने की मान्यता है।

    शनिवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि अनुशासन, संयम और कर्म सुधार का प्रतीक माना जाता है। यदि श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन किया जाए तो जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।

  • शनिवार की सुबह करें ये 3 काम, दूर होंगी परेशानियां और बढ़ेगी सफलता

    शनिवार की सुबह करें ये 3 काम, दूर होंगी परेशानियां और बढ़ेगी सफलता


    नई दिल्ली । शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन सुबह कुछ सरल उपाय करने से जीवन में चल रही रुकावटें कम होती हैं और रुके हुए कामों में गति आने लगती है।

     1. घर के मुख्य द्वार की साफ-सफाई करें
    वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है।
    अगर यह जगह साफ और व्यवस्थित रहती है तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

    क्या करें:
    सुबह उठकर दरवाजे की अच्छे से सफाई करें
    पानी छिड़ककर हल्के कपड़े से पोछा लगाएं
    चाहें तो हल्दी या कुमकुम से शुभ चिन्ह बनाएं

     2. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाए
    शनिवार को पीपल के पेड़ का विशेष महत्व माना जाता है।

    क्या करें:
    स्नान के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएं
    दीपक जलाते समय मन शांत रखें और अच्छी कामना करें
    यदि पेड़ न मिले तो घर के मंदिर में दीपक जला सकते हैं

     3. घर के कोनों से बेकार सामान हटाएं
    घर के कोनों में जमा कबाड़ और पुरानी चीजें नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती हैं।

    क्या करें:
    टूटे-फूटे सामान को हटा दें
    कोनों की अच्छे से सफाई करें
    घर को खुला और व्यवस्थित रखें
    इससे घर हल्का और सकारात्मक महसूस होता है।

    शनिवार की सुबह किए गए ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। साफ-सफाई, सकारात्मक सोच और श्रद्धा के साथ किए गए ये काम घर में शांति और स्थिरता लाने में मदद करते हैं।

  • कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव और छाया के संयोग से शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन उनकी पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।

    शुभ मुहूर्त
    द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होगी और 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 16 मई को ही शनि जयंती और शनि अमावस्या मनाना शुभ रहेगा।

    पूजा विधि
    शनि जयंती के दिन संध्या काल को पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

    – संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    – पश्चिम दिशा की ओर मुख करके शनिदेव का ध्यान करें।
    – शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का पाठ करें।
    – पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।

    क्या रखें ध्यान?
    इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं, जिसे अपनी आस्था के अनुसार रखा जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को कम करती है और शनिदेव की कृपा दिलाती है।

  • शनिवार विशेष: इन मंत्रों के जाप से पाएं शनि देव की कृपा, घर में आएंगी खुशियां और बरकत

    शनिवार विशेष: इन मंत्रों के जाप से पाएं शनि देव की कृपा, घर में आएंगी खुशियां और बरकत


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन शनि देव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। जिन लोगों की कुंडली में शनि दोष होता है, उनके लिए यह दिन और भी अधिक प्रभावशाली माना जाता है। सही तरीके से पूजा करने से न केवल बाधाएं दूर होती हैं, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और तरक्की के द्वार भी खुलते हैं।
    शनिवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद शनि मंदिर जाना शुभ माना जाता है। मंदिर में जाकर शनि देव के दर्शन करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान काले वस्त्र धारण करना विशेष लाभकारी होता है, क्योंकि काला रंग शनि देव को प्रिय है। पूजा में सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
    इस दिन मंत्र जाप का भी विशेष महत्व है। “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का नियमित जाप मानसिक शांति देता है और जीवन में स्थिरता लाता है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र “ॐ त्रयम्बकं यजामहे…” का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्वास्थ्य लाभ मिलता है। शनि महामंत्र “ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्…” का उच्चारण करने से शनि की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कठिनाइयों में राहत मिलती है।
    शनि गायत्री मंत्र “ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात्” का जाप करने से बुद्धि और निर्णय क्षमता में सुधार आता है। वहीं वैदिक मंत्र “ॐ शन्नो देवीरभिष्टय…” का जाप सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और वातावरण को शुद्ध बनाता है।
    यदि आप सच्चे मन से इन मंत्रों का जाप करते हैं और नियमपूर्वक पूजा करते हैं, तो शनि देव की कृपा से जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं। घर में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है। शनिवार का यह दिन आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक श्रेष्ठ अवसर हो सकता है।