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  • शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव कृपा से शांत होंगे शनि दोष, साढ़ेसाती-ढैय्या से राहत पाने के लिए करें ये उपाय

    शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव कृपा से शांत होंगे शनि दोष, साढ़ेसाती-ढैय्या से राहत पाने के लिए करें ये उपाय


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की आराधना करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के कष्टों में राहत मिलती है।

    शनि प्रदोष व्रत 2026 कब है?
    त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जून 2026, रात 10:22 बजे
    त्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 जून 2026, रात 12:43 बजे
    शनि प्रदोष व्रत: शनिवार, 27 जून 2026
    प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 4:49 बजे से रात 9:03 बजे तक
    प्रदोष काल में करें ये विशेष पूजा

    भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष काल में
    शिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें।
    बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और पुष्प चढ़ाएं।
    घी का दीपक और धूप जलाएं।
    “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
    शिव परिवार की पूजा करें।
    शनि दोष से राहत के लिए करें ये उपाय
    यदि कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है तो:

    पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    शनि देव को नीले या सफेद पुष्प अर्पित करें।
    “ॐ शं शनैश्चराय नमः” अथवा “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
    काला तिल, काला चना, काले वस्त्र या भोजन का दान करें।
    जरूरतमंदों की सहायता करें।

    इस दिन क्या न करें?
    मांसाहार और शराब का सेवन न करें।
    किसी का अपमान या अनादर न करें।
    झूठ, क्रोध और कटु वचन से बचें।
    पिता, गुरु और बड़े भाई का अनादर न करें।
    पीपल वृक्ष के आसपास गंदगी न फैलाएं।
    साढ़ेसाती और ढैय्या के लिए प्रभावी मंत्र

    ॐ शं शनैश्चराय नम
    मान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जाप शनि की प्रतिकूलता को कम करने में सहायक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यत
    शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना जाता है। इसलिए शनि प्रदोष व्रत पर शिव पूजा करने से शनि से जुड़े कष्टों में कमी आने और जीवन में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली पर निर्भर करते हैं, इसलिए विशेष उपायों के लिए किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित माना जाता है।

  • हनुमान अष्टमी 12 दिसंबर: बजरंगबली की पूजा से मिलता है ग्रहदोष और संकटों से छुटकारा

    हनुमान अष्टमी 12 दिसंबर: बजरंगबली की पूजा से मिलता है ग्रहदोष और संकटों से छुटकारा

    पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाने वाली हनुमान अष्टमी इस वर्ष 12 दिसंबर को देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। इस दिन हनुमान भक्त विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, आरती और भंडारे का आयोजन करते हैं। कई मंदिरों से चल समारोह भी निकाले जाते हैं।

    हनुमान अष्टमी से जुड़ी प्राचीन मान्यताएँ

    ज्योतिषाचार्य पं. हरिहर पंड्या बताते हैं कि हनुमान अष्टमी से अनेक पौराणिक कथाएँ जुड़ी हैं।
    सबसे प्रचलित कथा के अनुसार, त्रेतायुग में हनुमानजी ने पाताल लोक में अहिरावण का वध किया था और भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को बंदीगृह से मुक्त कराया था। इस विजयोत्सव के कारण ही इस दिन को अत्यंत शुभ माना जाता है।

    एक अन्य मान्यता के अनुसार, अहिरावण का वध करने के बाद हनुमानजी पृथ्वी के नाभि केंद्र उज्जैन लौटे और यहीं विश्राम किया। संयोग से वह दिन पौष कृष्ण अष्टमी का था। तभी से उज्जैन में हनुमान अष्टमी उत्साहपूर्वक मनाई जाती है।

    उज्जैन में विशेष उत्सव और दर्शन का महत्व

    उज्जैन के नानाखेड़ा स्थित चाणक्यपुरी के श्री परशुराम मंदिर में विराजित भजनानंद हनुमानजी के दर्शन का इस दिन विशेष महत्व माना गया है। हर वर्ष बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन, पूजा और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी मंदिर प्रांगण में विशेष अनुष्ठान, आरती और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

    हनुमान पूजा से मिलता है ग्रहों के विपरीत प्रभाव से समाधान

    ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों की जन्मपत्री में शनि, मंगल, राहु या अन्य ग्रह प्रतिकूल प्रभाव में हों, उनके लिए हनुमानजी की उपासना अत्यंत फलदायी मानी गई है।

    विशेष रूप से-

    शनि की साढ़ेसाती

    शनि की ढैय्या

    मंगल या राहु के दोष

    से प्रभावित जातकों को हनुमान अष्टमी पर हनुमानजी को तेल और सिंदूर चढ़ाना चाहिए। साथ ही हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक का पाठ करने से संकटों से मुक्ति मिलती है।

    इसके अतिरिक्त, प्रत्येक शनिवार और मंगलवार को हनुमान मंदिर में दीपक लगाने, प्रसाद चढ़ाने और दर्शन करने से भी जीवन के कष्ट दूर होने की मान्यता है।