Tag: Shani Jayanti 2026

  • राजगढ़ के प्राचीन शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शनि जयंती पर विशेष पूजा

    राजगढ़ के प्राचीन शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शनि जयंती पर विशेष पूजा

    राजगढ़। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर नाहरदा क्षेत्र में स्थित प्राचीन शनि मंदिर में शनिवार को आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। 105 साल पुराने इस मंदिर में शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या का दुर्लभ संयोग बनने के कारण सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह 11 बजे के बाद मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तों से भर गया और दूर-दराज के गांवों के साथ-साथ राजस्थान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे।

    जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर, चढ़ाया गया तेल और काली उड़द
    पूरे मंदिर परिसर में “जय शनिदेव” के जयकारों और घंटियों की गूंज से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु अपने हाथों में सरसों का तेल, काली उड़द, नारियल, दीपक और फूल लेकर कतारों में खड़े होकर दर्शन कर रहे हैं। मंदिर समिति द्वारा इस विशेष अवसर पर शनिदेव का चांदी के आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया गया, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

    श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई विशेष पूजा-अर्चना
    इस दुर्लभ संयोग का लाभ लेने के लिए श्रद्धालु अपने परिवार सहित मंदिर पहुंचे और शनिदेव की विशेष पूजा-अर्चना की। भक्तों ने सुख-शांति, व्यापार में उन्नति और शनि दोष से मुक्ति की कामना की। मंदिर में दर्शनार्थियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं भी सुचारू की गईं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    राजगढ़ का यह शनि मंदिर एक बार फिर आस्था और विश्वास का केंद्र बन गया है, जहां दुर्लभ खगोलीय और धार्मिक संयोग ने भक्तों की भारी भीड़ आकर्षित की है।

  • शनि जयंती के शुभ संयोग से खुलेंगे भाग्य के द्वार, इन 5 राशि वालों को मिलेगा अपार धन-लाभ

    शनि जयंती के शुभ संयोग से खुलेंगे भाग्य के द्वार, इन 5 राशि वालों को मिलेगा अपार धन-लाभ


    नई दिल्ली  साल 2026 की शनि जयंती कई मायनों में बेहद खास रहने वाली है। 16 मई को पड़ने वाली इस शनि जयंती पर ग्रहों की ऐसी दुर्लभ स्थिति बन रही है, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है। खास बात यह है कि इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन ही आ रही है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दौरान बुधादित्य राजयोग और केदार योग का निर्माण हो रहा है, जिसका असर कई राशियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई देगा। इनमें खास तौर पर 5 राशियों के लोगों की किस्मत अचानक चमक सकती है।
    दरअसल, 15 मई 2026 को सूर्य और बुध का वृषभ राशि में गोचर होगा। इन दोनों ग्रहों की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा, जो बुद्धि, करियर, सम्मान और धन लाभ का कारक माना जाता है। वहीं 7 घरों में ग्रहों की उपस्थिति से बनने वाला केदार योग आर्थिक मजबूती और सुख-समृद्धि का संकेत देता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इन शुभ योगों का सबसे ज्यादा फायदा वृषभ, सिंह, तुला, वृश्चिक और कुंभ राशि के लोगों को मिल सकता है।
    वृषभ राशि वालों को मिलेगा करियर में बड़ा उछाल
    वृषभ राशि में ही बुधादित्य योग बन रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को सबसे ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी और पदोन्नति मिल सकती है। कारोबारियों को पुराने क्लाइंट्स से बड़ा फायदा होने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में भी राहत मिल सकती है।
    सिंह राशि वालों की बढ़ेगी प्रतिष्ठा
    सिंह राशि के लोगों के लिए यह समय सामाजिक सम्मान और प्रोफेशनल सफलता लेकर आ सकता है। ऑफिस में आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। नए बिजनेस अवसर मिल सकते हैं और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा।
    तुला राशि वालों को होगा धन लाभ
    तुला राशि के लोगों के लिए केदार योग बेहद शुभ माना जा रहा है। संपत्ति खरीदने के योग बन सकते हैं। निवेश से लाभ होगा और लंबे समय से रुके काम पूरे हो सकते हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और मानसिक तनाव कम होगा।
    वृश्चिक राशि वालों को मिल सकती है नई नौकरी
    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शनि जयंती नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है। नौकरी बदलने का अवसर मिल सकता है। विदेश यात्रा या पढ़ाई के योग भी बन रहे हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर में नई दिशा मिल सकती है।
    कुंभ राशि वालों के लिए खुलेगा सफलता का रास्ता
    कुंभ राशि के स्वामी स्वयं शनि देव हैं, इसलिए शनि जयंती का प्रभाव इस राशि पर विशेष रूप से देखने को मिलेगा। भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। करियर में उम्मीद से बड़ी सफलता मिल सकती है। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और सेहत में भी सुधार आने के संकेत हैं।
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती के दिन शनिदेव की पूजा, दान और संयमित जीवनशैली अपनाने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। हालांकि किसी भी भविष्यवाणी को पूरी तरह निश्चित मानने के बजाय इसे आस्था और विश्वास के रूप में देखना चाहिए।
  • शनि जयंती 2026: 16 मई को बनेगा दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि, महत्व और शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय

    शनि जयंती 2026: 16 मई को बनेगा दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि, महत्व और शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार शनिदेव की जयंती हर साल ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है, जिसे शनि जयंती या शनि अमावस्या कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन न्याय और कर्म के देवता शनिदेव का प्राकट्य हुआ था। वर्ष 2026 में यह पर्व 16 मई (शनिवार) को मनाया जाएगा, और यह संयोग इसलिए खास है क्योंकि शनिवार स्वयं शनिदेव को समर्पित दिन होता है।

    शनि जयंती 2026 की सही तिथि
    पंचांग के अनुसार
    अमावस्या प्रारंभ: 16 मई 2026, सुबह 4:12 बजे
    अमावस्या समाप्त: 17 मई 2026, रात 1:31 बजे
    उदया तिथि के अनुसार शनि जयंती 16 मई 2026 (शनिवार) को ही मनाई जाएगी।

    शनि जयंती का धार्मिक महत्व
    शनि जयंती को अत्यंत शक्तिशाली दिन माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की गई पूजा सेशनि दोष का प्रभाव कम होता हैजीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैंकर्मों के अनुसार फल देने वाले शनि देव प्रसन्न होते हैं

    शनि जयंती पूजा विधि
    1. सुबह की शुरुआत
    सुबह जल्दी उठकर स्नान करें
    काले या गहरे रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनें

    2. पूजा स्थापना
    पूजा स्थान पर काले कपड़े का आसन बिछाएं
    शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें

    3. अभिषेक और पूजन
    पंचामृत या गंगाजल से स्नान कराएं
    कुमकुम, काजल और फूल अर्पित करें
    सरसों के तेल का दीपक जलाएं

    4. भोग और मंत्र जाप
    तेल से बने मीठे व्यंजन या काले तिल का भोग लगाएं
    ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें
    शनि चालीसा का पाठ करें

    ‍ 5. आरती और क्षमा प्रार्थना
    विधिवत आरती करें
    पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें

    शनिदेव को प्रसन्न करने के सरल उपाय
    1. काले चने का दान
    काले चने का प्रसाद बनाकर बंदरों को खिलाना बेहद शुभ माना जाता है।

    2. पीपल पूजा
    पीपल के वृक्ष पर जल और काले तिल अर्पित करें तथा नीचे सरसों तेल का दीपक जलाएं।

    3. मंत्र जाप
    ॐ शं शनैश्चराय नमः
    ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः
    इन मंत्रों का 108 बार जाप करें।

    4. दान-पुण्य
    गरीबों को काले जूते, काला छाता, काले तिल और भोजन दान करें।

    ज्योतिषीय मान्यता
    ज्योतिष के अनुसार शनि ग्रह व्यक्ति के कर्मों का फल देने वाला ग्रह है। इसलिए इस दिन किए गए अच्छे कर्मों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। साथ ही यह दिन धैर्य, अनुशासन और कर्म सुधार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।शनि जयंती केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि आत्म-सुधार और कर्म सुधार का अवसर माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आने की मान्यता है।

  • कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    कब है शनि जयंती ? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य देव और छाया के संयोग से शनिदेव का जन्म हुआ था। इसलिए यह दिन उनकी पूजा-अर्चना और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष महत्व रखता है। साल 2026 में शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी। इस दिन विधि-विधान से पूजा और उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।

    शुभ मुहूर्त
    द्रिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होगी और 17 मई को रात 1:30 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 16 मई को ही शनि जयंती और शनि अमावस्या मनाना शुभ रहेगा।

    पूजा विधि
    शनि जयंती के दिन संध्या काल को पूजा के लिए सबसे उत्तम समय माना गया है। इस दौरान श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

    – संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
    – पश्चिम दिशा की ओर मुख करके शनिदेव का ध्यान करें।
    – शनि मंत्र या शनि स्तोत्र का पाठ करें।
    – पूजा के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।

    क्या रखें ध्यान?
    इस दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं, जिसे अपनी आस्था के अनुसार रखा जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को कम करती है और शनिदेव की कृपा दिलाती है।