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  • शनि देव की नजर में अच्छे कर्मों का होता है सबसे बड़ा महत्व, ऐसे करें पूजा और पाएं शुभ आशीर्वाद

    शनि देव की नजर में अच्छे कर्मों का होता है सबसे बड़ा महत्व, ऐसे करें पूजा और पाएं शुभ आशीर्वाद

    नई दिल्ली । धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। मान्यता है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही शुभ और अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। यही वजह है कि शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा और उन्हें प्रसन्न करने के उपायों के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में ऐसा माना जाता है कि अगर व्यक्ति ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करे जरूरतमंदों की मदद करे और गलत कार्यों से दूर रहे तो शनिदेव की कृपा प्राप्त हो सकती है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए केवल पूजा पाठ ही नहीं बल्कि अच्छे आचरण और सेवा भाव को भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की साफ सफाई करके शनिदेव का ध्यान किया जा सकता है। भक्त शनिदेव के मंदिर जाकर उनकी पूजा भी करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिदेव को सरसों का तेल काले तिल और काला वस्त्र अर्पित किया जाता है। कुछ लोग दीपक में सरसों का तेल डालकर शनिदेव के समक्ष दीप प्रज्वलित करते हैं। पूजा के दौरान शनिदेव के मंत्रों का जाप करने और मन को शांत रखने की परंपरा भी है।

    शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा को भी विशेष माना जाता है। मान्यता है कि शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से भक्त को मानसिक मजबूती और सकारात्मकता मिलती है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को काली उड़द काले तिल कंबल कपड़े या भोजन का दान करने की परंपरा भी है। दान करते समय दिखावे से बचना और अपनी क्षमता के अनुसार सहायता करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी गरीब बुजुर्ग असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना भी शनिदेव की उपासना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    शनिवार के दिन व्रत रखने की भी परंपरा है। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार या सात्विक भोजन करके व्रत का पालन करते हैं। हालांकि हर व्यक्ति के लिए उपवास जरूरी नहीं है। जिन लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है या जिन्हें नियमित दवा और भोजन की आवश्यकता होती है उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के कठोर उपवास नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता में पूजा के साथ व्यक्ति का व्यवहार भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिवार के दिन झूठ बोलने क्रोध करने किसी का अपमान करने छल कपट करने और गलत कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि शनिदेव कर्मों का फल देने वाले देवता हैं इसलिए उनके प्रति सच्ची श्रद्धा का सबसे बड़ा आधार अच्छे कर्म माने जाते हैं। माता पिता बुजुर्गों और जरूरतमंदों का सम्मान करना पशु पक्षियों के प्रति दया रखना और अपने काम के प्रति ईमानदार रहना भी शुभ माना जाता है। इसलिए शनिदेव की कृपा पाने के लिए केवल एक दिन की पूजा के बजाय पूरे जीवन में अच्छे कर्म और संयम अपनाना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • शनि देव को प्रसन्न करने का आसान उपाय: शनिवार का व्रत और पूजा विधि पूरी जानकारी

    शनि देव को प्रसन्न करने का आसान उपाय: शनिवार का व्रत और पूजा विधि पूरी जानकारी


    नई दिल्ली।क्या आप भी शनिवार का व्रत रखने का सोच रहे हैं? तो जानिए कब और कैसे शुरू करें
    शनि देव को प्रसन्न करने के लिए रखना चाहिए शनिवार का व्रत, जानिए कब रखना चाहिए ये व्रत और कैसे करें शुरू इससे जुड़ी सारी जानकारी।

    शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन लोग उनकी पूजा अर्चन करते है। कई लोग आज के दिन व्रत भी रखते हैं ताकि उनकी कृपा पा सकें। अगर आप भी शनिवार का व्रत रखना चाहते हैं और ये समस्या आ रही हैं कि, इसकी शुरूआत कैसे करें। तो चलिए इस व्रत से जुड़ी सारी जानकारी आपको बताते हैं।

    कब से शुरू करें व्रत
    शनिवार का व्रत किसी भी शनिवार से शुरू किया जा सकता है, लेकिन शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से आरंभ करना अधिक शुभ माना जाता है। व्रत शुरू करने से पहले मन में संकल्प लेना चाहिए कि आप कितने शनिवार तक व्रत रखेंगे आमतौर पर 11, 21 या 51 शनिवार का व्रत रखा जाता है।

    व्रत के दिन की पूजा विधि
    व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे काले या नीले रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनि देव की पूजा करें। पूजा के दौरान शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों का तेल चढ़ाएं, काले तिल अर्पित करें और दीपक जलाएं। इसके साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना बेहद फलदायी माना जाता है।शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।

    व्रत का महत्त्व
    शनिवार का व्रत नियमित रूप से करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और मानसिक शांति मिलती है। शनि देव की कृपा से व्यक्ति को न्याय, सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है। इसलिए श्रद्धा और नियम से यह व्रत करने से अच्छे फल मिलते हैं।

    शनि देव की आरती
    जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
    सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
    नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है ललाट।
    मुक्तन की माला गले शोभित बलिहाट॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
    लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥

    देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
    विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

    जय जय श्री शनिदेव…॥