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  • मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी

    मैनपुरी में बड़ा राजनीतिक-सांस्कृतिक दृश्य: डिंपल यादव ने शंकराचार्य के सामने टेका माथा, मांगी माफी


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही हलकों में चर्चा तेज कर दी। बद्रीनाथ स्थित ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी गौ रक्षा यात्रा के तहत जिले में पहुंचे थे। इसी दौरान समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव उनसे मिलने पहुंचीं और उनके चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    कार्यक्रम के दौरान डिंपल यादव ने शंकराचार्य को शॉल भेंट की और जमीन पर बैठकर उनसे बातचीत की। इस मुलाकात में उन्होंने सबसे पहले कन्नौज की उस घटना का जिक्र किया, जिसमें शंकराचार्य को कथित तौर पर रात सड़क पर गुजारनी पड़ी थी। डिंपल यादव ने इस घटना को लेकर खेद जताते हुए माफी भी मांगी और कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा।

    डिंपल यादव ने शंकराचार्य के गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने के अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मुद्दे पर उनके साथ हैं और आगे भी सहयोग करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य का अपमान हुआ है, वह पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। अपने बयान में डिंपल यादव ने कहा कि “प्रकृति ऐसे अपमान का जवाब जरूर देती है।”

    मुलाकात के दौरान शंकराचार्य ने भी अपनी यात्रा और गौ रक्षा आंदोलन की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने का है और जब तक इसे संवैधानिक मान्यता नहीं मिलती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान कई स्थानों पर प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका अभियान नहीं रुकेगा।

    करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद शंकराचार्य किशनी के लिए रवाना हो गए। इससे पहले वे सपा नेता और पूर्व विधायक राजकुमार यादव के मैरिज हॉल में ठहरे हुए थे। बातचीत के दौरान डिंपल यादव ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव को इस पूरे घटनाक्रम का दुख है और यदि उन्हें जानकारी होती तो बेहतर व्यवस्थाएं की जातीं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर इसे धार्मिक संत के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक संदेश के तौर पर भी समझा जा रहा है।

    कुछ महीने पहले ही लखनऊ में अखिलेश यादव ने भी शंकराचार्य से मुलाकात की थी, जहां वह उनके सामने जमीन पर बैठे नजर आए थे। उसी मुलाकात के बाद से दोनों के बीच संवाद और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा लगातार सुर्खियों में बनी हुई है।

    मैनपुरी की यह मुलाकात अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के रूप में भी देखी जा रही है, जिस पर आगे भी चर्चाएं तेज रहने की संभावना है।

  • शंकराचार्य ने किया ‘Go-LX’ का ऐलान, OLX की तर्ज पर अब ऑनलाइन खरीदी-बिक्री होंगी गायें

    शंकराचार्य ने किया ‘Go-LX’ का ऐलान, OLX की तर्ज पर अब ऑनलाइन खरीदी-बिक्री होंगी गायें



    नई दिल्ली। गोहत्या के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन चला रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अब एक नई डिजिटल पहल की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि “Go-LX” नाम की एक वेबसाइट तैयार की जा रही है, जो OLX की तर्ज पर काम करेगी, लेकिन इसका उद्देश्य गायों की खरीद और संरक्षण होगा।शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने ‘Go-LX’ नाम से एक वेबसाइट लॉन्च करने का ऐलान किया है, जहां गायों की ऑनलाइन खरीद-बिक्री की जा सकेगी।
    इस पहल का उद्देश्य गायों को कटने से बचाना और गो-संरक्षण को बढ़ावा देना बताया गया है।

    शंकराचार्य के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर पशुपालक या व्यापारी अपनी गायों को बेचने के लिए विज्ञापन दे सकेंगे। वहीं गो-भक्त और गो-सेवक उन गायों को खरीदकर उनकी देखभाल करेंगे, खासकर उन गायों को जो दूध देना बंद कर चुकी हैं या जिन्हें कसाई को बेचा जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि कोई भी सच्चा हिंदू अपनी गाय को कटने के लिए नहीं बेच सकता और यह मंच गायों को कत्लखाने जाने से रोकने में मदद करेगा।

    शंकराचार्य ने यह भी दावा किया कि इस मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों, यहां तक कि मुस्लिम समाज के कुछ लोग भी गोहत्या बंदी के समर्थन में हैं। उनके अनुसार, यदि देश में गोहत्या और गोमांस सेवन पर रोक लगती है, तो सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास बढ़ेगा।

  • ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व का भव्य शुभारंभ मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक विरासत पर सीएम का संदेश

    ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व का भव्य शुभारंभ मध्यप्रदेश की आध्यात्मिक विरासत पर सीएम का संदेश


    खंडवा। ओंकारेश्वर में जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के प्रकटोत्सव पर आयोजित भव्य एकात्म पर्व का शुभारंभ आज वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच किया गया। खंडवा जिले के पवित्र ओंकारेश्वर स्थित एकात्म धाम में पांच दिवसीय इस आयोजन का उद्घाटन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के सान्निध्य में दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया और संतों तथा विद्वानों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश एक अद्भुत धरती है जहां हर युग में दिव्य सानिध्य की अनुभूति होती रही है। उन्होंने कहा कि वनवास काल में भगवान श्रीराम के आगमन से लेकर श्रीकृष्ण के शिक्षा ग्रहण तक इस भूमि का इतिहास दिव्यता से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ओंकारेश्वर का एकात्म धाम जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की महान परंपरा का जीवंत प्रतीक है और यह स्थान अद्वैत वेदांत की शाश्वत शिक्षाओं को विश्व पटल पर स्थापित करने की क्षमता रखता है।

    कार्यक्रम के दौरान अद्वैत लोक और अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण भी किया गया। मुख्यमंत्री ने यज्ञ में आहुतियां देकर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। यह आयोजन आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा वैशाख शुक्ल पंचमी के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े सहित कई संत और विद्वान उपस्थित रहे जिन्होंने अद्वैत दर्शन और आधुनिक युवा पीढ़ी के संबंधों पर विचार साझा किए।

    आयोजन के अंतर्गत द्वैत लोक संग्रहालय के निर्माण की भी योजना है जो दूसरे चरण में विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने बड़ी राशि की स्वीकृति प्रदान की है। इस मंच पर अद्वैत वेदांत की प्रासंगिकता पर विशेष विमर्श भी शुरू हुआ जिसमें संतों ने आत्मा ब्रह्म और भगवान की एकता पर प्रकाश डाला। शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि यह तीनों तत्व वास्तव में एक ही सत्य के विभिन्न रूप हैं और इन्हीं के समागम से भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना का विस्तार होता है।

    पांच दिवसीय एकात्म पर्व के दौरान ओंकारेश्वर में विभिन्न धार्मिक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं और आगंतुकों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रहा है बल्कि यह अद्वैत दर्शन को आधुनिक समाज से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी माना जा रहा है। यहां आने वाले लोग भारतीय संस्कृति की गहराई और उसकी एकात्म दृष्टि का अनुभव कर रहे हैं।

    इस आयोजन के माध्यम से सरकार और संत परंपरा मिलकर भारतीय दर्शन की गहराई को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। ओंकारेश्वर में बढ़ती श्रद्धालुओं की उपस्थिति से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है और पर्यटन को नई पहचान मिल रही है। यहां आने वाले युवा और विद्यार्थी अद्वैत वेदांत के मूल सिद्धांतों को समझकर जीवन में संतुलन और सकारात्मकता की प्रेरणा ले रहे हैं। यह आयोजन आने वाले समय में मध्यप्रदेश को आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद मामले में सियासत तेज, अखिलेश यादव ने दिया खुला समर्थन


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ झूंसी थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इस घटनाक्रम के बाद मामला धार्मिक दायरे से निकलकर सियासी अखाड़े में पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

    अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला

    समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सच्चे संतों का अपमान कर भाजपा ने अपनी कार्यशैली उजागर कर दी है। उनके मुताबिक जो भी व्यक्ति या संत सरकार के खिलाफ आवाज उठाता है उसे झूठे आरोपों में फंसाने की कोशिश की जाती है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा का मकसद सत्ता के जरिए धन अर्जित करना है और इसके लिए वह किसी भी स्तर तक जा सकती है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के भीतर भी आपसी मतभेद हैं जिनकी आहट समय-समय पर सुनाई देती रहती है।

    कार्रवाई उन पर होनी चाहिए थी जिन्होंने रोका
    अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि जिस धार्मिक आयोजन में अविमुक्तेश्वरानंद शामिल होना चाहते थे उस दौरान प्रशासन को उनके तय मार्ग पर आपत्ति थी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी ने उन्हें स्नान से रोका तो कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए थी न कि संत पर।उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक भगवाधारी संत के साथ ऐसा व्यवहार तब हो रहा है जब राज्य में खुद भगवाधारी मुख्यमंत्री सत्ता में हैं।

    भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार

    फिलहाल इस मामले में भाजपा की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है। धार्मिक आस्था कानून और राजनीति के बीच खिंची इस रेखा ने उत्तर प्रदेश की सियासत को नया मोड़ दे दिया है। अब नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है। वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने का प्रयास बता रहा है तो सत्ता पक्ष कानून की प्रक्रिया का हवाला दे रहा है।