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  • शरद पवार की शिंदे के केबिन में मौजूदगी से तेज हुई सियासी चर्चाएं, दोनों पक्षों ने बताया महज शिष्टाचार और सुविधाजनक मुलाकात

    शरद पवार की शिंदे के केबिन में मौजूदगी से तेज हुई सियासी चर्चाएं, दोनों पक्षों ने बताया महज शिष्टाचार और सुविधाजनक मुलाकात

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के बीच वरिष्ठ नेता शरद पवार की उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कार्यालय में मौजूदगी ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। विधानसभा परिसर में हुई इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित नए समीकरणों को लेकर अटकलें तेज हो गईं। हालांकि कुछ ही समय बाद दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक बदलाव का संकेत नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप हुई एक सामान्य और शिष्टाचार आधारित बैठक थी।

    जानकारी के अनुसार शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद से संबंधित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में भाग लेने के लिए विधानसभा पहुंचे थे। समिति की बैठक समाप्त होने के बाद उन्होंने अपनी पार्टी एनसीपी (एसपी) के विधायकों से मुलाकात की। यह बैठक उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के केबिन में आयोजित हुई, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया। बाद में एकनाथ शिंदे भी वहां पहुंचे और उन्होंने शरद पवार का स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त बातचीत भी हुई, लेकिन उसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।

    एनसीपी (एसपी) के नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि बैठक के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। पार्टी नेताओं के अनुसार शरद पवार को लंबी दूरी तक पैदल चलने में असुविधा होती है। इसी कारण निकास द्वार के निकट स्थित उपमुख्यमंत्री के कार्यालय को बैठक के लिए उपयुक्त स्थान के रूप में चुना गया। उनका कहना है कि जब शरद पवार वहां पहुंचे, उस समय एकनाथ शिंदे अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे और बाद में उन्हें जानकारी मिलने पर उन्होंने शिष्टाचारवश मुलाकात की।

    उधर, एकनाथ शिंदे खेमे ने भी इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार का हिस्सा बताया। सरकार की ओर से कहा गया कि महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा में वरिष्ठ नेताओं का सम्मान किया जाता है और इसी भावना के तहत उनका स्वागत किया गया। इस मुलाकात का किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन, दल परिवर्तन या नए समीकरण से कोई संबंध नहीं है।

    मुलाकात के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या राज्य की राजनीति में कोई नया मोड़ आने वाला है। हालांकि एनसीपी (एसपी) ने इन सभी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। पार्टी नेतृत्व ने कहा कि उनका महा विकास अघाड़ी के प्रति रुख पहले जैसा ही है और किसी अन्य राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने या किसी प्रकार के विलय की चर्चाओं में कोई तथ्य नहीं है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में वरिष्ठ नेताओं की हर मुलाकात स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाती है। विशेष रूप से विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच होने वाली मुलाकातों को अक्सर राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जाता है। हालांकि कई बार ऐसी मुलाकातें केवल प्रशासनिक, औपचारिक या व्यक्तिगत शिष्टाचार तक ही सीमित होती हैं।

    फिलहाल दोनों पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद यह स्पष्ट किया गया है कि इस मुलाकात को किसी नए राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बावजूद राज्य की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • PMC चुनाव में सियासी सरगर्मी,अजित पवार से नहीं बनी बात, शरद पवार गुट फिर MVA में वापसी के लिए तैयार

    PMC चुनाव में सियासी सरगर्मी,अजित पवार से नहीं बनी बात, शरद पवार गुट फिर MVA में वापसी के लिए तैयार


    नई दिल्ली। पुणे महानगरपालिका (PMC) चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शरद पवार गुट की एनसीपी (NCP-SP) ने अजित पवार गुट के साथ गठबंधन की बातचीत टूटने के बाद फिर से महाविकास आघाड़ी (MVA) के साथ वार्ता शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार ने शरद पवार गुट की प्रमुख मांगों को ठुकरा दिया और 68 सीटों का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया।

    पिछले सात दिनों से दोनों एनसीपी गुटों के बीच संभावित गठबंधन पर चर्चा चल रही थी, लेकिन बातचीत अंततः असफल रही।

    अजित पवार ने जोर देकर कहा कि शरद पवार गुट के समर्थित उम्मीदवार केवल ‘घड़ी’ चुनाव चिह्न पर ही चुनाव लड़ें। शरद पवार गुट का कहना है कि यदि यह शर्त मान ली जाती तो पुणे शहर में उनका अस्तित्व खतरे में पड़ जाता।

    अजित पवार ने 68 सीटों का प्रस्ताव ठुकराया
    अजित पवार ने तर्क दिया कि 2017 के PMC चुनाव में एनसीपी एकजुट थी, तब केवल 43 सीटें जीती थीं। इसलिए 68 सीटों की मांग अव्यवहारिक है।

    शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता ने कहा, अजित पवार की शर्तों को मान लेना हमारे लिए अस्वीकार्य था, क्योंकि इससे पुणे में हमारे उम्मीदवारों का अस्तित्व ही खत्म हो जाता।

    इस इनकार के बाद सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल सहित NCP-SP के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि PMC चुनाव एमवीए के साथ मिलकर लड़ा जाएगा।

    नतीजतन, पुणे में तीनों पारंपरिक एमवीए सहयोगी दलकांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी-एसपीके बीच नई वार्ता शुरू हो गई है। हालांकि पिंपरी-चिंचवड़ में दोनों एनसीपी गुटों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की संभावना बनी हुई है।

    शरद पवार गुट की MVA में वापसी
    पहले शरद पवार गुट और अजित पवार के गठबंधन की संभावना ने एमवीए में दरार पैदा कर दी थी जिसके चलते कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) अलग होकर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे थे। लेकिन अब एनसीपी-एसपी के एमवीए में लौटने से तीनों दलों के बीच समन्वय बैठकें फिर शुरू हो गई हैं।

    अजित पवार ने इस बीच शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और पुणे में उनके नेतृत्व वाली शिवसेना नेताओं से संपर्क साधा। सूत्रों के मुताबिक एनसीपी की शिवसेना नेता उदय सामंत के साथ भी बातचीत चल रही है और अजित पवार समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।