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  • शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार

    शेयर मार्केट निवेश के नाम पर 9.91 लाख की ठगी मंदसौर से दो आरोपी गिरफ्तार


    भोपाल /राजधानी भोपाल से साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है जहां शेयर मार्केट में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देकर एक व्यक्ति से 9 लाख 91 हजार 900 रुपये की ठगी की गई। इस मामले में भोपाल क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदसौर जिले से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

    पुलिस के अनुसार ठगी की यह वारदात M Stock नामक ऐप के माध्यम से की गई। आरोपियों ने फर्जी लिंक और एप्लिकेशन के जरिए पीड़ित को शेयर मार्केट में निवेश कर कम समय में अधिक रिटर्न मिलने का झांसा दिया। आरोपियों की बातों में आकर मिसरोद क्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता ने अलग अलग किस्तों में कुल 9 लाख 91 हजार 900 रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

    जब लंबे समय तक न तो कोई मुनाफा मिला और न ही रकम वापस हुई तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 4 अगस्त 2024 को भोपाल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

    तकनीकी विश्लेषण के बाद पुलिस को आरोपियों की लोकेशन मंदसौर जिले में मिली। इसके बाद साइबर सेल की टीम ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड जब्त किए गए हैं जिनका उपयोग ठगी की वारदात में किया जा रहा था। पुलिस इन मोबाइल और सिम कार्ड के जरिए अन्य पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और निवेश ऐप के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के माध्यम से निवेश के ऑफर भेजे जाते थे और भरोसा जीतने के बाद बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली जाती थी।

    भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक एप या निवेश स्कीम पर भरोसा न करें। शेयर मार्केट में निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की पूरी जांच करें। पुलिस का कहना है कि इस तरह की साइबर ठगी के मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।

  • शेयर में निवेश का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार साइबर अपराधियों को खाते बेचने का भी था काम

    शेयर में निवेश का झांसा देकर लाखों की ठगी करने वाला गिरोह गिरफ्तार साइबर अपराधियों को खाते बेचने का भी था काम


    नई दिल्ली। क्राइम ब्रांच ने शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर लोगों को ठगने वाले अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों का कारोबार मंदसौर जिले के भावगढ़ से संचालित होता था। ये लोग अपने नाम से बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचते थे, जिनके जरिए देशभर में ठगी के पैसों का लेन-देन किया जाता था।

    क्या था मामला?
    मिसरौद निवासी सुनील वर्मा (परिवर्तित नाम) ने 4 अगस्त 2024 को साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई।

    उन्होंने बताया कि एक फर्जी ‘स्टॉक एप्लीकेशन’ के माध्यम से उन्हें शेयर मार्केट में निवेश करने और कई गुना लाभ दिलाने का झांसा दिया गया।
    इस जाल में फंसकर उन्होंने 9,91,900 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगी का अहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस को सूचना दी।
    कैसे पकड़े आरोपी?
    साइबर क्राइम टीम ने तकनीकी जांच, बैंक खातों के विवरण और मोबाइल नंबरों की जांच की। जांच की कड़ियाँ मंदसौर जिले तक पहुंचीं। पुलिस टीम ने ग्राम भावगढ़ में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
    उनकी पहचान गुलशेर खान और रजनीश बारेठ के रूप में हुई।

    पुलिस ने इनके पास से 2 मोबाइल फोन और 2 सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। जांच में पता चला है कि इनके द्वारा बेचे गए बैंक खातों का उपयोग देश के अन्य राज्यों में भी धोखाधड़ी के लिए किया गया था। पुलिस फिलहाल इनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।

    ऐसे बचें ठगी का शिकार होने से (महत्वपूर्ण सुझाव)
    टास्क/लाइक-रेटिंग के नाम पर पैसे देने से बचें:
    यूट्यूब सब्सक्राइब, इंस्टा पेज लाइक करने या रेटिंग देने के बदले पैसे मांगने वाली योजनाएं 100% धोखाधड़ी होती हैं। शुरुआत में 50-100 रुपए भेजाकर भरोसा जीतते हैं, फिर बड़े निवेश के नाम पर लाखों ठग लेते हैं।

    फर्जी प्रॉफिट से सावधान रहें:
    ऐप या वेबसाइट पर दिखाया गया ‘प्रॉफिट’ केवल डिजिटल भ्रम है। निकालने के लिए ‘टैक्स’ या ‘प्रोसेसिंग फीस’ के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं।

    गोपनीय जानकारी साझा न करें:
    बैंक या KYC के नाम पर आने वाले कॉल पर OTP, CVV, पासवर्ड या PIN कभी न बताएं। बैंक कभी फोन पर ऐसी जानकारी नहीं मांगता।

    रिमोट एक्सेस ऐप्स से दूरी बनाए रखें:
    AnyDesk या TeamViewer जैसे ऐप्स बिना जरूरत न रखें। इनके जरिए ठग आपके फोन का पूरा कंट्रोल ले लेते हैं।
    अनजान नंबर से वीडियो कॉल रिसीव न करें:
    इससे ‘सेक्स्टॉर्शन’ और ब्लैकमेलिंग का खतरा बढ़ जाता है।