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  • Nifty vs Sensex: आखिर निवेशकों के लिए कौन सा इंडेक्स है ज्यादा बेहतर, 50 शेयरों वाला निफ्टी या 30 कंपनियों वाला सेंसेक्स

    Nifty vs Sensex: आखिर निवेशकों के लिए कौन सा इंडेक्स है ज्यादा बेहतर, 50 शेयरों वाला निफ्टी या 30 कंपनियों वाला सेंसेक्स


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि निफ्टी बेहतर है या सेंसेक्स। रोजाना बाजार की खबरों में इन दोनों इंडेक्स के चढ़ने और गिरने की चर्चा होती है लेकिन कई निवेशक इनके बीच का वास्तविक अंतर नहीं समझ पाते। पहली बात यह जानना जरूरी है कि निफ्टी और सेंसेक्स दोनों भारत के प्रमुख शेयर बाजार इंडेक्स हैं और दोनों का उद्देश्य देश की बड़ी कंपनियों तथा बाजार की दिशा का संकेत देना है। हालांकि दोनों की संरचना और कवरेज में अंतर है। निफ्टी 50 नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई की 50 प्रमुख कंपनियों को दर्शाता है जबकि सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई की 30 बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन को दिखाता है। दोनों इंडेक्स फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन के आधार पर तैयार किए जाते हैं और इनमें शामिल बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन इंडेक्स की दिशा पर असर डालता है।

    अगर केवल कंपनियों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो निफ्टी का दायरा सेंसेक्स से बड़ा है। निफ्टी में 50 कंपनियां शामिल होने के कारण इसमें सेक्टरों की भागीदारी अपेक्षाकृत व्यापक मानी जाती है। सेंसेक्स में केवल 30 कंपनियां हैं लेकिन इनमें भी भारत की कई बड़ी और प्रभावशाली कंपनियां शामिल रहती हैं। यही कारण है कि दोनों इंडेक्स अक्सर एक जैसी दिशा में चलते दिखाई देते हैं। जब देश के बड़े बैंक आईटी कंपनियां ऊर्जा क्षेत्र या दूसरे प्रमुख सेक्टरों के शेयरों में तेजी या गिरावट आती है तो उसका असर निफ्टी और सेंसेक्स दोनों पर पड़ सकता है।

    निवेशकों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि किसी इंडेक्स का अंक अधिक होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह दूसरे इंडेक्स से बेहतर है। कई नए निवेशक सेंसेक्स के बड़े अंक को देखकर इसे निफ्टी से अधिक मजबूत या महंगा मान लेते हैं लेकिन यह सही तरीका नहीं है। दो इंडेक्स की तुलना हमेशा प्रतिशत के आधार पर की जानी चाहिए। सेंसेक्स में 500 अंकों की गिरावट और निफ्टी में 200 अंकों की गिरावट को सीधे तुलना नहीं किया जा सकता क्योंकि दोनों का स्तर अलग है। इसलिए बाजार की वास्तविक चाल समझने के लिए प्रतिशत बदलाव अधिक महत्वपूर्ण होता है।

    अगर कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए इंडेक्स फंड या ईटीएफ के जरिए निवेश करने पर विचार कर रहा है तो निफ्टी 50 को अक्सर व्यापक कवरेज के कारण देखा जाता है। निफ्टी 50 भारत की 50 प्रमुख कंपनियों और कई महत्वपूर्ण सेक्टरों को कवर करता है तथा यह फंड पोर्टफोलियो की तुलना और इंडेक्स आधारित निवेश के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। वहीं सेंसेक्स उन निवेशकों के लिए भी उपयोगी बेंचमार्क है जो भारत की चुनिंदा 30 बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन के आधार पर बाजार की दिशा समझना चाहते हैं।

    हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि हर निवेशक के लिए केवल निफ्टी ही बेहतर है या सेंसेक्स ही सबसे अच्छा विकल्प है। दोनों प्रमुख बाजार इंडेक्स हैं और लंबी अवधि में इनके प्रदर्शन की दिशा अक्सर काफी हद तक मिलती जुलती रही है। सही विकल्प निवेशक के लक्ष्य जोखिम लेने की क्षमता निवेश अवधि और चुने गए निवेश उत्पाद के खर्च जैसे कारकों पर निर्भर करता है। इंडेक्स फंड या ईटीएफ चुनते समय केवल निफ्टी या सेंसेक्स का नाम देखने के बजाय एक्सपेंस रेशियो ट्रैकिंग एरर और निवेश की अवधि पर भी ध्यान देना चाहिए।

    कुल मिलाकर बाजार को व्यापक रूप से समझने और 50 बड़ी कंपनियों की भागीदारी देखने के लिए निफ्टी 50 को अधिक विस्तृत प्रतिनिधित्व वाला इंडेक्स माना जा सकता है जबकि सेंसेक्स 30 प्रमुख कंपनियों के जरिए बाजार की एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है। दोनों में से कौन बेहतर है इसका जवाब हर निवेशक के लिए अलग हो सकता है। निवेश का फैसला केवल इंडेक्स के पिछले प्रदर्शन के आधार पर नहीं बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है इसलिए बिना समझे केवल तेजी के दौर को देखकर निवेश करने के बजाय पूरी जानकारी और जरूरत पड़ने पर योग्य वित्तीय सलाहकार की सलाह के साथ कदम उठाना बेहतर है।

    निफ्टी 50 में 50 कंपनियां और सेंसेक्स में 30 कंपनियां शामिल हैं तथा दोनों फ्री फ्लोट मार्केट कैपिटलाइजेशन पद्धति का उपयोग करते हैं। निफ्टी का कवरेज अपेक्षाकृत व्यापक है लेकिन दोनों प्रमुख इंडेक्स भारत की बड़ी कंपनियों और बाजार की दिशा को दर्शाते हैं।

  • नई दिल्ली में शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आए..

    नई दिल्ली में शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आए..


    नई दिल्ली । में भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में आ गए। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में कमजोरी देखने को मिली और दिन बढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती गई। सेंसेक्स में लगभग 600 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। इस अचानक आई बिकवाली ने निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बना दिया।

    बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार पर सीधा असर डाला। एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी बाजारों में गिरावट ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिससे घरेलू बाजार में भी दबाव बढ़ गया। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को जोखिम कम करने की ओर प्रेरित किया।

    भारतीय बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा असर आईटी सेक्टर पर देखने को मिला, जहां भारी बिकवाली दर्ज की गई। आईटी सूचकांक में तेज गिरावट ने पूरे सेक्टर को नीचे खींच लिया। कुछ बड़ी कंपनियों के कमजोर प्रदर्शन और भविष्य को लेकर सतर्क रुख अपनाने से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ, जिससे इस क्षेत्र में बिकवाली और तेज हो गई।

    इसके अलावा हाल के दिनों में बाजार में आई तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। लगातार बढ़त के बाद ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए शेयरों की बिक्री शुरू की, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। यह मुनाफावसूली गिरावट का एक अहम कारण बनकर उभरी और बाजार की दिशा को प्रभावित किया।

    हालांकि बाजार में पूरी तरह नकारात्मक माहौल नहीं रहा और कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी देखने को मिली। उपभोक्ता आधारित कंपनियों और कुछ चुनिंदा शेयरों में मजबूती दर्ज की गई, जिससे बाजार को आंशिक सहारा मिला। इसके बावजूद समग्र रूप से बाजार में अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल बना रहा।

    कच्चे तेल की कीमतों ने भी बाजार की चिंता बढ़ाए रखी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंचे दाम और आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण तेल की कीमतें दबाव में बनी हुई हैं। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है और बाजार में अस्थिरता बढ़ती है।

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार बाजार में कुछ महत्वपूर्ण समर्थन और प्रतिरोध स्तर बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार इन स्तरों से नीचे जाता है तो गिरावट और बढ़ सकती है, जबकि स्थिरता आने पर सुधार की संभावना भी बनी रह सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर आगामी कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले

    वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार तेजी दिखाई। कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex और Nifty 50 दोनों करीब 1.6% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखा।

    दिनभर ऐसा रहा बाजार का हाल
    30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,263.67 अंक (1.63%) चढ़कर 78,111.24 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 388.65 अंक (1.63%) की तेजी के साथ 24,231.30 के स्तर पर पहुंच गया।
    दिन के दौरान सेंसेक्स 77,981.10 पर खुला और 78,270.42 का हाई छुआ, जबकि निफ्टी ने 24,163.80 से शुरुआत कर 24,280.90 का इंट्रा-डे उच्च स्तर हासिल किया। यह पूरे सत्र में मजबूत खरीदारी का संकेत देता है।

    मिडकैप-स्मॉलकैप में और ज्यादा तेजी
    मुख्य इंडेक्स के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.20% और स्मॉलकैप 100 में 2.35% की बढ़त दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि निवेशक बड़े शेयरों के साथ-साथ मिड और स्मॉल कंपनियों में भी भरोसा जता रहे हैं।

     हर सेक्टर में खरीदारी, आईटी-रियल्टी में जोरदार उछाल
    बुधवार को लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में रहे। आईटी, मेटल, पीएसयू बैंक, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं ऑटो, एफएमसीजी, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी 1% से अधिक की बढ़त देखने को मिली।

     किन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी
    निफ्टी 50 के ज्यादातर शेयरों में खरीदारी रही। खासतौर पर Wipro, Tata Consultancy Services, Tech Mahindra, Larsen & Toubro और Hindalco Industries जैसे दिग्गज शेयरों में 3% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई।
    हालांकि Bharti Airtel, ICICI Bank, Axis Bank और ONGC जैसे कुछ शेयरों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली।

    क्यों आई बाजार में तेजी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, United States और Iran के बीच तनाव कम होने और शांति वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीदों ने बाजार का मूड पॉजिटिव किया। Donald Trump के बयान ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी तेज हुई।

    कच्चे तेल में नरमी, रुपये को मिला सहारा
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (94-95 डॉलर के आसपास) से भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ है। इससे रुपये को मजबूती मिली और यह करीब 93.50 के स्तर तक पहुंच गया। यह भी बाजार की तेजी का एक बड़ा कारण रहा।