Tag: Share Market News

  • शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री

    शेयर बाजार पर ग्लोबल तनाव का असर, इंफोसिस फिसला तो डॉ रेड्डीज के शेयरों में तेजी मूल सामग्री


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 26 अक्टूबर को कारोबार के दौरान काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत कमजोर संकेतों के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दबाव में नजर आए। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में कुछ खरीदारी लौटी और प्रमुख सूचकांकों ने शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पर रही। इसके अलावा मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी रही।

    दोपहर के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 73 हजार 179 अंक के आसपास पहुंच गया जबकि एनएसई निफ्टी 22 हजार 610 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे पहले बाजार खुलते ही सेंसेक्स में 500 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली थी। शुरुआती कमजोरी के बाद खरीदारी आने से निवेशकों को कुछ राहत मिली लेकिन बाजार में पूरी तरह मजबूती लौटने के संकेत नहीं मिले। कारोबार के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर शेयरों की चाल पर दिखाई दिया।

    बाजार की चिंता की एक बड़ी वजह कच्चे तेल की ऊंची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने ऊर्जा बाजार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। इसका असर कंपनियों की लागत और अर्थव्यवस्था की विकास गति पर भी पड़ सकता है।

    शेयरों की बात करें तो सोमवार को डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। कंपनी के तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहने के बाद शेयर में तेजी दर्ज की गई। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में भी बढ़त रही। इसके विपरीत इंफोसिस के शेयरों पर दबाव बना रहा। कंपनी की ओर से सालाना राजस्व वृद्धि के अनुमान में कटौती किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी। उत्तर अमेरिकी बाजार में कमजोरी भी कंपनी के लिए चुनौती बनी हुई है।

    श्रीराम फाइनेंस का शेयर भी निवेशकों के रडार पर रहा। कंपनी की ओर से कर्ज वृद्धि के अनुमान में कमी और संभावित क्रेडिट लागत को लेकर संकेत दिए जाने के बाद शेयर में गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि बाजार में केवल वैश्विक घटनाक्रम ही नहीं बल्कि कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और भविष्य के अनुमान भी निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। तिमाही नतीजों के इस दौर में अलग अलग कंपनियों के शेयरों में अलग रुख देखने को मिल सकता है।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर रहेगी। यदि अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं तो उभरते बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक तनाव और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर फैसला न लें और निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति तथा अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करें।

  • Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर

    Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर


    नई दिल्ली। 6 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए राहत की सांस ली। 5 अक्टूबर को सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72 382.47 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत चढ़कर 22 555.75 पर पहुंच गया। बाजार में इस सुधार को कई अहम संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इससे पहले भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ सप्ताह की गिरावट झेल चुका था। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ऊंची बॉन्ड यील्ड महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये जैसे कारणों ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया था। पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 3.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और यह लगातार आठवीं साप्ताहिक गिरावट थी। यह सिलसिला करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का दौर बताया गया है।

    5 अक्टूबर की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अलग अलग सेक्टर में खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। बाजार खुलते समय वैश्विक संकेतों का भी असर देखने को मिला। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 22 621.80 के स्तर तक पहुंचा लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण इसमें दबाव आया। इसके बावजूद दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार ने रिकवरी की और निफ्टी 22 500 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

    निवेशकों के लिए 6 अक्टूबर को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बाजार पिछले सत्र की तेजी को आगे बढ़ा पाता है या नहीं। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर के अंतिम कारोबारी दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 10 148.41 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11 271.73 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को लेकर सामने आए संकेत भी निवेशकों के लिए अहम हैं। 5 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद बाजार में उस समय दबाव बढ़ा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत के फिलहाल एक ठहराव पर पहुंचने की बात कही। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी शुरुआती बढ़त का एक हिस्सा गंवा दिया था।

    5 अक्टूबर के कारोबार में Tata Motors Passenger Vehicles ITC Bajaj Finance Shriram Finance और NTPC जैसे शेयर निफ्टी के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। वहीं HCL Technologies Max Healthcare HDFC Bank Asian Paints और Apollo Hospitals जैसे शेयरों में दबाव देखा गया। व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त रही।

    ऐसे माहौल में 6 अक्टूबर को निवेशकों के लिए बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के नतीजे कारोबार की स्थिति वैश्विक संकेत और शेयर की वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी होगा। बाजार में उतार चढ़ाव अभी बना हुआ है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।

  • गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    नई दिल्ली। 2 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार में नियमित कारोबार नहीं होगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर इस दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। ऐसे में शेयर खरीदने और बेचने वाले निवेशकों को शुक्रवार के बाजार अवकाश को ध्यान में रखकर अपनी ट्रेडिंग योजना बनानी होगी। बाजार में अगला सामान्य कारोबारी सत्र छुट्टी के बाद खुलेगा।
    शेयर बाजार में छुट्टियां पहले से तय कैलेंडर के अनुसार होती हैं। राष्ट्रीय अवकाश और अन्य निर्धारित छुट्टियों के दौरान इक्विटी मार्केट में कारोबार बंद रहता है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण भी बाजार बंद रहेगा। इसका मतलब यह है कि निवेशक इस दिन सामान्य इक्विटी कारोबार के जरिए शेयरों की खरीद या बिक्री नहीं कर सकेंगे। बाजार बंद रहने के कारण दिनभर सेंसेक्स और निफ्टी में नियमित उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा।

    निवेशकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि शेयर बाजार बंद होने का अर्थ सभी वित्तीय सेवाओं का पूरी तरह बंद होना नहीं है। अलग अलग बैंकिंग और निवेश प्लेटफॉर्म की सेवाओं के कामकाज का समय और उपलब्धता अलग हो सकती है। इसके अलावा बाजार से जुड़े कुछ सेटलमेंट और अन्य कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए किसी लेनदेन की योजना बनाने से पहले अपने ब्रोकर या संबंधित वित्तीय संस्थान की सूचना देखना उपयोगी रहेगा।

    2 अक्टूबर की छुट्टी के कारण निवेशकों के लिए पिछले कारोबारी सत्र के प्रदर्शन का विश्लेषण करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार बंद रहने के दौरान वैश्विक बाजारों से आने वाले संकेतों और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर रखी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार के अगले कारोबारी सत्र पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कंपनियों से जुड़ी खबरें और आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल होते हैं।

    छुट्टी के दिन कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने के लिए समय निकालते हैं। ऐसे में अलग अलग कंपनियों के प्रदर्शन और अपनी निवेश रणनीति पर विचार किया जा सकता है। हालांकि केवल एक दिन के बाजार उतार चढ़ाव को देखकर जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। शेयर बाजार में जोखिम बना रहता है और किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत कई अलग अलग परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है।

    नए निवेशकों के लिए बाजार की छुट्टियों की जानकारी रखना खास तौर पर जरूरी है। इससे ऑर्डर प्लेस करने और ट्रेडिंग की योजना बनाते समय भ्रम की स्थिति नहीं रहती। यदि किसी निवेशक ने छुट्टी से पहले कोई ऑर्डर लगाया है तो उसके निष्पादन की स्थिति बाजार के नियमों और ऑर्डर के प्रकार पर निर्भर करेगी। इसलिए अपने ट्रेडिंग अकाउंट में ऑर्डर की स्थिति जांचना बेहतर रहेगा।

    कुल मिलाकर 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के कारण NSE और BSE पर नियमित शेयर बाजार कारोबार नहीं होगा। निवेशकों को इस दिन बाजार खुलने की उम्मीद में ट्रेडिंग करने के बजाय अगले कारोबारी सत्र की तैयारी करनी चाहिए। बाजार की छुट्टी को पोर्टफोलियो की समीक्षा और आने वाले कारोबारी सत्र के लिए रणनीति बनाने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। निवेश संबंधी कोई भी फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर लेना बेहतर रहेगा।

  • Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

    Share Market Today: नए कारोबारी सप्ताह में बाजार की चाल पर रहेंगी इन बड़े संकेतों की नजर, निवेशकों के लिए जानना जरूरी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को करेगा। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा। शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी 50 करीब 75.80 अंक की बढ़त के साथ 23346.40 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 74294.96 के स्तर पर रहा। पूरे सप्ताह की बात करें तो निफ्टी में करीब 0.22 प्रतिशत और सेंसेक्स में करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। यह लगातार छठा सप्ताह रहा जब निफ्टी साप्ताहिक आधार पर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    अब 21 सितंबर से शुरू होने वाले कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहेगी। सबसे अहम फैक्टर कच्चे तेल की कीमतें मानी जा रही हैं। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम और तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। ऊंची क्रूड कीमतें महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा सकती हैं जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की गतिविधि भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। सितंबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया है। ऐसे में 21 सितंबर के कारोबार में निवेशक विदेशी और घरेलू निवेश के आंकड़ों पर नजर रख सकते हैं। सितंबर में अब तक FII की बिकवाली और DII की खरीदारी के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।

    निफ्टी के तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विश्लेषणों में 23000 से 23100 के आसपास के क्षेत्र को महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना गया है। वहीं 23600 से 23700 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध क्षेत्र के तौर पर देखा जा रहा है। इन स्तरों के आसपास बाजार की चाल में बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि ये तकनीकी स्तर बाजार की दिशा की गारंटी नहीं देते और वास्तविक कारोबार वैश्विक तथा घरेलू घटनाक्रम के आधार पर बदल सकता है।

    इस सप्ताह NSE का IPO भी बाजार की चर्चा में रहेगा। NSE का IPO 17 सितंबर को खुला था और 21 सितंबर को इसका सब्सक्रिप्शन समाप्त होना है। इसके बाद 24 सितंबर को लिस्टिंग प्रस्तावित है। इस बड़े IPO से जुड़े आंकड़ों और निवेशकों की प्रतिक्रिया पर भी बाजार की नजर रहेगी।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड वैश्विक ब्याज दरों की स्थिति रुपये की चाल और पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरें भी भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे माहौल में 21 सितंबर को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और अपने जोखिम को समझें। बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय उपलब्ध जानकारी के आधार पर निवेश संबंधी निर्णय लेना अधिक उचित माना जाता है।

  • रविवार को नहीं होगी शेयर बाजार में खरीद बिक्री जानिए NSE BSE बंद रहने की वजह और अगले सत्र की तैयारी

    रविवार को नहीं होगी शेयर बाजार में खरीद बिक्री जानिए NSE BSE बंद रहने की वजह और अगले सत्र की तैयारी


    नई दिल्ली। रविवार का दिन शेयर बाजार के निवेशकों के लिए सामान्य कारोबारी दिनों से अलग होता है। भारत में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर रविवार को नियमित इक्विटी ट्रेडिंग नहीं होती है। ऐसे में शेयर खरीदने और बेचने की योजना बना रहे निवेशकों को बाजार के अगले कारोबारी सत्र का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि रविवार को बाजार की छुट्टी होने के बावजूद निवेशकों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसी दौरान वे पिछले सप्ताह के कारोबार की समीक्षा करते हैं और आने वाले सप्ताह की रणनीति पर नजर डालते हैं।

    शेयर बाजार में सोमवार से शुक्रवार तक सामान्य कारोबारी गतिविधियां होती हैं जबकि शनिवार और रविवार को नियमित कारोबार बंद रहता है। इसका मतलब यह है कि रविवार को सामान्य तरीके से शेयरों की खरीद बिक्री नहीं की जा सकती। निवेशक अपने ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर तैयार कर सकते हैं लेकिन उसकी वास्तविक प्रक्रिया बाजार खुलने के बाद ही संबंधित नियमों के अनुसार आगे बढ़ती है। इसलिए किसी भी ऑर्डर को लगाने से पहले उसके प्रकार और निष्पादन की स्थिति को समझना जरूरी है।

    रविवार को बाजार बंद रहने के दौरान निवेशकों के पास अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का अच्छा समय होता है। इस दौरान यह देखा जा सकता है कि सप्ताह के दौरान किन शेयरों में तेजी या गिरावट रही और उसके पीछे कौन से कारोबारी या आर्थिक कारण रहे। कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रबंधन से जुड़ी घोषणाएं सेक्टर से संबंधित खबरें और वैश्विक बाजारों के संकेत भी अगले कारोबारी सत्र के लिए बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    वैश्विक बाजारों पर नजर रखना भी सप्ताहांत में उपयोगी हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंकों के फैसले कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और भू राजनीतिक घटनाक्रम भारतीय बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि किसी एक खबर के आधार पर अगले कारोबारी सत्र में बाजार किस दिशा में जाएगा इसका निश्चित अनुमान लगाना उचित नहीं है। बाजार में अचानक उतार चढ़ाव हो सकता है और अलग अलग शेयरों पर उसका असर भी अलग हो सकता है।

    रविवार को निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति पर भी विचार करना चाहिए। केवल बाजार में तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार उसकी वित्तीय स्थिति और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर नए निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती और जोखिम निवेश के प्रकार तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।

    सप्ताहांत में निवेशक अपनी वॉचलिस्ट भी तैयार कर सकते हैं। जिन कंपनियों पर लंबे समय से नजर है उनके प्रदर्शन की तुलना की जा सकती है। साथ ही यह भी देखा जा सकता है कि किसी शेयर की कीमत में बदलाव कंपनी के मूल कारोबार में आए बदलाव से जुड़ा है या केवल बाजार की सामान्य हलचल का हिस्सा है। इस तरह की तैयारी अगले कारोबारी सत्र में भावनाओं के बजाय जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।

    शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए रविवार भले ही ट्रेडिंग का दिन नहीं है लेकिन यह तैयारी और समीक्षा का दिन जरूर हो सकता है। बाजार बंद होने के दौरान सही जानकारी जुटाना अपने जोखिम को समझना और निवेश के उद्देश्य को स्पष्ट रखना लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अगले कारोबारी दिन बाजार खुलने पर निवेशकों को अपने फैसले लेते समय ताजा बाजार संकेतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देना चाहिए।

  • शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

    शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

    18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

    रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

    कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

    सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

    18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल

    शेयर बाजार पर दोहरा संकट: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, सेंसेक्स-निफ्टी में भारी गिरावट के बाद 10 सितंबर को भी बढ़ सकती है हलचल


    नई दिल्ली । 10 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की नजर एक बार फिर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और सेंसेक्स तथा निफ्टी लगातार तीसरे सत्र में गिरावट के साथ तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए। 9 सितंबर को सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74764.23 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 23431.50 पर आ गया।

    बाजार में इस समय सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से बन रहा है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में तेजी का असर महंगाई से लेकर कंपनियों की लागत और रुपये की मजबूती तक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं।

    9 सितंबर के कारोबार में आईटी शेयरों पर खास दबाव देखने को मिला। टेक्नोलॉजी इंडेक्स में करीब 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर कमजोर रहे। टीसीएस में भी गिरावट दर्ज की गई जबकि एचसीएल टेक और अन्य प्रमुख आईटी शेयरों में बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया। दूसरी तरफ मेटल और कुछ ऊर्जा शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इससे साफ है कि बाजार में इस समय एकतरफा तेजी के बजाय सेक्टर के हिसाब से अलग अलग रुझान दिखाई दे रहे हैं।

    10 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर रुपये की चाल पर भी रहेगी। 9 सितंबर को भारतीय मुद्रा डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर के पार चली गई थी। रुपये में कमजोरी और महंगे कच्चे तेल का दबाव बाजार के लिए दोहरी चुनौती बन सकता है। अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और रुपये पर दबाव जारी रहता है तो विदेशी निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की है। 9 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 123 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग 1350 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक बाजार में कमजोरी को कुछ अवसर के रूप में देख रहे हैं लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के कारण सतर्कता अभी भी जरूरी है।

    निवेशकों के लिए 10 सितंबर का कारोबारी सत्र इसलिए भी अहम रहेगा क्योंकि निफ्टी तीन महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच चुका है। ऐसे माहौल में बाजार में अचानक तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कारोबारियों की नजर निफ्टी के 23400 के आसपास के स्तर पर रहेगी और इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर और दबाव बन सकता है। वहीं अगर बाजार इस स्तर से संभलता है तो निचले स्तरों पर खरीदारी लौटने की उम्मीद बन सकती है।

    फिलहाल बाजार की दिशा किसी एक घरेलू खबर से ज्यादा वैश्विक घटनाक्रम तय कर सकता है। कच्चे तेल की कीमत पश्चिम एशिया का तनाव अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर संकेत रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां 10 सितंबर के कारोबार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे। ऐसे समय में छोटे निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेडिंग करने के बजाय अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी होगा। शेयर बाजार में तेजी या गिरावट का अनुमान हमेशा निश्चित नहीं होता इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनी के फंडामेंटल और अपनी जोखिम क्षमता को देखना महत्वपूर्ण है।

  • Stock Market Today: 25 अगस्त को बाजार में दिख सकती है हलचल, निवेशकों की नजर इन बड़े ट्रिगर्स पर

    Stock Market Today: 25 अगस्त को बाजार में दिख सकती है हलचल, निवेशकों की नजर इन बड़े ट्रिगर्स पर


    नई दिल्ली। 25 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रहने वाली है। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है और ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए हर छोटी बड़ी खबर महत्वपूर्ण हो जाती है। सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय करने में ग्लोबल मार्केट का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें रुपये की चाल और कंपनियों से जुड़ी खबरें अहम भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे में मंगलवार के कारोबार में भी बाजार में तेजी और दबाव दोनों देखने को मिल सकते हैं।

    बाजार की शुरुआत पर सबसे पहले वैश्विक संकेतों का असर दिखाई दे सकता है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों की चाल से भारतीय निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित होता है। अगर विदेशी बाजारों में मजबूती बनी रहती है तो घरेलू बाजार को भी शुरुआती सपोर्ट मिल सकता है। वहीं किसी बड़े ग्लोबल इवेंट या आर्थिक संकेत के कारण विदेशी बाजारों में कमजोरी आती है तो भारतीय बाजार पर भी दबाव बन सकता है।

    निवेशकों की नजर विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII की गतिविधियों पर भी रहेगी। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार में सकारात्मक माहौल बनाने में मदद कर सकती है जबकि लगातार बिकवाली से बाजार में दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को गिरावट के दौरान सहारा दे सकती है। इसलिए मंगलवार को बाजार की दिशा समझने के लिए इन आंकड़ों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के प्रदर्शन पर भी बाजार की चाल काफी हद तक निर्भर रह सकती है। इसके अलावा आईटी ऑटो फार्मा मेटल और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में होने वाली खरीदारी या बिकवाली से प्रमुख सूचकांकों पर असर पड़ सकता है। किसी बड़ी कंपनी से जुड़ी खबर या कारोबारी अपडेट आने पर उसके शेयर में तेज हलचल देखने को मिल सकती है और इसका प्रभाव संबंधित सेक्टर के दूसरे शेयरों पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। दूसरी ओर तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था और कुछ कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है। रुपये की डॉलर के मुकाबले चाल भी बाजार के लिए अहम रहेगी।

    तकनीकी स्तर पर निवेशक निफ्टी और सेंसेक्स में महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रख सकते हैं। अगर खरीदारी का दबाव मजबूत रहता है तो बाजार ऊपरी स्तरों की ओर बढ़ सकता है जबकि मुनाफावसूली बढ़ने पर प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे समय में बिना पूरी जानकारी के तेजी से किसी शेयर में निवेश करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है।

    कुल मिलाकर 25 अगस्त का कारोबारी सत्र घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच उतार चढ़ाव वाला रह सकता है। निवेशकों को बाजार में अचानक आने वाली तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। खासकर शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए जोखिम प्रबंधन और स्टॉप लॉस का ध्यान रखना जरूरी है। शेयर बाजार में रिटर्न की संभावना के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है इसलिए निवेश का फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखकर करना बेहतर है।

  • निवेशकों के लिए अहम दिन 20 अगस्त को बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी के लिए इन स्तरों पर रहेगी नजर

    निवेशकों के लिए अहम दिन 20 अगस्त को बाजार में दिख सकता है बड़ा उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी के लिए इन स्तरों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल काफी अहम रहने वाला है। लगातार सात कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सेंसेक्स और निफ्टी में अब रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है। 19 अगस्त को सेंसेक्स 326 अंक गिरकर 76909.68 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 77 अंक फिसलकर 24078.30 पर पहुंच गया। निफ्टी लगातार सातवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ और इस दौरान इसमें करीब 2.1 प्रतिशत की कमजोरी आई।

    बाजार में मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बचते दिखाई दे रहे हैं।

    इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी भू राजनीतिक तनाव भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। अगर इस मोर्चे पर तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर तनाव कम होने की कोई सकारात्मक खबर आती है तो बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है।

    अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। ऊंची यील्ड की स्थिति में विदेशी निवेशकों के लिए विकसित बाजारों में पैसा लगाना अधिक आकर्षक हो सकता है। ऐसे माहौल में उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकलने का दबाव बढ़ सकता है। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले सत्रों में बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली हैं।

    19 अगस्त को बाजार में अधिकांश प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे। हालांकि आईटी और फार्मा जैसे कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत मजबूती दिखाई दी। ऐसे में 20 अगस्त को निवेशकों की नजर सेक्टर आधारित प्रदर्शन पर भी रहेगी। मजबूत नतीजों और बेहतर कारोबारी संभावनाओं वाले शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर वैश्विक संकेतों वाले क्षेत्रों में दबाव कायम रह सकता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा दौर में निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बड़े दांव लगाने के बजाय जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए। लगातार गिरावट के बाद कुछ शेयर आकर्षक स्तर पर नजर आ सकते हैं लेकिन बाजार की दिशा पूरी तरह बदल गई है ऐसा मान लेना जल्दबाजी होगी। निफ्टी के 24000 के आसपास के स्तर पर निवेशकों की खास नजर रह सकती है। इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बाजार में और दबाव बन सकता है जबकि मजबूती की स्थिति में रिकवरी की कोशिश दिखाई दे सकती है।

    कुल मिलाकर 20 अगस्त का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतें वैश्विक बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और पश्चिम एशिया से आने वाली खबरें बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की तेजी या गिरावट देखकर घबराहट में फैसला न लें और किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपनी जोखिम क्षमता तथा वित्तीय सलाह को ध्यान में रखें

  • शेयर बाजार आज: 8 जून को उतार-चढ़ाव के बीच रह सकती है बाजार की चाल, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर

    शेयर बाजार आज: 8 जून को उतार-चढ़ाव के बीच रह सकती है बाजार की चाल, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 8 जून 2026 का कारोबारी दिन उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है। घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों से मिल रहे संकेत निवेशकों को सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में बंद हुए थे, जबकि बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रह सकती है। GIFT Nifty में गिरावट के संकेत मिले हैं, जिससे शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की सतर्कता भी घरेलू बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है।

    पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के बाद बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, लेकिन महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर दिए गए संकेतों ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर किया। इसके चलते कई सेक्टरों में मुनाफावसूली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए।

    तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है, जबकि 23,700 से 23,900 के बीच मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र देखा जा रहा है। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो रिकवरी की संभावना बन सकती है, जबकि नीचे फिसलने पर दबाव और बढ़ सकता है।

    सेक्टरवार नजर डालें तो बैंकिंग शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिल सकती है। RBI के फैसले के बाद बैंकिंग सेक्टर को समर्थन मिला है। वहीं आईटी शेयरों पर वैश्विक संकेतों का असर बना रह सकता है। निवेशकों की नजर वित्तीय, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर अधिक रहने की संभावना है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने गिरावट को सीमित रखने में मदद की है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में फिलहाल चुनिंदा शेयरों और सेक्टरों में अवसर मौजूद हैं, लेकिन अस्थिरता के दौर में जोखिम प्रबंधन और संतुलित निवेश रणनीति अपनाना अधिक महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, विदेशी निवेश प्रवाह और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर 8 जून का कारोबारी दिन सावधानी और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। निवेशकों को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझानों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।