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  • Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर

    Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 22 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। सोमवार को बाजार ने लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद राहत की सांस ली और सेंसेक्स तथा निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। सोमवार को सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23414.30 पर पहुंचा। बाजार में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेश से मिले सहारे के बीच देखने को मिली।

    अब 22 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सोमवार की तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार फिर से दबाव में आता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23200 से 23150 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 23500 के स्तर के आसपास बाजार को तत्काल प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि निफ्टी 23500 से ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में आगे की दिशा को लेकर नजर 23600 के आसपास के स्तर पर जा सकती है।

    सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की भी भूमिका रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 101.5 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी हालिया बिकवाली के बाद खरीदारी की तरफ रुख किया। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 599 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

    हालांकि बाजार के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। हाल के सप्ताहों में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण रही हैं। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेत भी उभरते बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वैश्विक मौद्रिक नीति में सख्ती की आशंका और भू राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    22 सितंबर को सेक्टर आधारित गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। सोमवार को फार्मा और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में मजबूती देखने को मिली जबकि आईटी मेटल और पीएसयू बैंकिंग जैसे कुछ हिस्सों में दबाव रहा। बाजार में स्टॉक विशेष गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं इसलिए केवल इंडेक्स की चाल के बजाय अलग अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत होकर 95.8150 पर बंद हुआ। हालांकि आयातकों की डॉलर मांग और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियां रुपये पर असर डाल सकती हैं। विदेशी निवेश का प्रवाह भी मुद्रा और शेयर बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    कुल मिलाकर 22 सितंबर के कारोबार में निफ्टी के 23200 से 23150 के सपोर्ट क्षेत्र और 23500 से 23600 के प्रतिरोध क्षेत्र पर बाजार की नजर रह सकती है। यह स्तर बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी आकलन पर आधारित हैं और वास्तविक कारोबार में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है। निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी निवेश या ट्रेडिंग फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनी के बुनियादी आंकड़ों पर विचार करना चाहिए।

  • Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा

    Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा


    नई दिल्ली। 3 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल चुनौतीपूर्ण रह सकता है। बुधवार 2 सितंबर को बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र दबाव देखने को मिला और निफ्टी 50 करीब 0.59 फीसदी गिरकर 23914.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.49 फीसदी टूटकर 76570.35 पर पहुंच गया। बाजार में कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ऐसे में गुरुवार 3 सितंबर को निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार शुरुआती दबाव के बाद संभलता है या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

    मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमत बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक बन गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश पर आयात बिल बढ़ने का दबाव बन सकता है और इससे महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ सकती है। बुधवार को वैश्विक बाजारों में भी इसी वजह से जोखिम लेने की क्षमता कमजोर दिखाई दी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।

    3 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम स्तरों पर भी रहेगी। बाजार में हालिया कमजोरी को देखते हुए 24000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस क्षेत्र के आसपास मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है। बाजार में अभी स्पष्ट तेजी के बजाय उतार चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार की संभावना बनी हुई है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। सितंबर की शुरुआत में वैश्विक जोखिम बढ़ने से विदेशी पूंजी के रुख पर नजर बनी हुई है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़े भी निवेशकों के लिए सकारात्मक पहलू हैं। हाल में जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है जो बाजार की घरेलू बुनियाद को मजबूती देती है।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। कच्चे तेल की तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से रुपये को कुछ सहारा मिल रहा है।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर को बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय बाजार की शुरुआती दिशा और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना अहम होगा। खासकर क्रूड ऑयल अमेरिकी बाजारों बॉन्ड यील्ड रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से बाजार को अगले संकेत मिल सकते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर माना जा सकता है। यह बाजार विश्लेषण है निवेश का व्यक्तिगत सुझाव नहीं।