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  • Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा

    Nifty-Sensex के लिए आसान नहीं होगा 3 सितंबर का कारोबार! क्रूड ऑयल से लेकर विदेशी बाजारों तक कई संकेत देंगे दिशा


    नई दिल्ली। 3 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी माहौल चुनौतीपूर्ण रह सकता है। बुधवार 2 सितंबर को बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र दबाव देखने को मिला और निफ्टी 50 करीब 0.59 फीसदी गिरकर 23914.45 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.49 फीसदी टूटकर 76570.35 पर पहुंच गया। बाजार में कमजोरी के पीछे सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ऐसे में गुरुवार 3 सितंबर को निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार शुरुआती दबाव के बाद संभलता है या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।

    मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमत बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में से एक बन गई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत में तेज उछाल आया है। तेल महंगा होने से भारत जैसे बड़े आयातक देश पर आयात बिल बढ़ने का दबाव बन सकता है और इससे महंगाई को लेकर चिंता भी बढ़ सकती है। बुधवार को वैश्विक बाजारों में भी इसी वजह से जोखिम लेने की क्षमता कमजोर दिखाई दी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है।

    3 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम स्तरों पर भी रहेगी। बाजार में हालिया कमजोरी को देखते हुए 24000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि निफ्टी इस क्षेत्र के आसपास मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे कमजोरी बढ़ने पर बिकवाली का दबाव और तेज हो सकता है। बाजार में अभी स्पष्ट तेजी के बजाय उतार चढ़ाव और सीमित दायरे में कारोबार की संभावना बनी हुई है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। सितंबर की शुरुआत में वैश्विक जोखिम बढ़ने से विदेशी पूंजी के रुख पर नजर बनी हुई है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है। भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़े मजबूत आंकड़े भी निवेशकों के लिए सकारात्मक पहलू हैं। हाल में जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है जो बाजार की घरेलू बुनियाद को मजबूती देती है।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। कच्चे तेल की तेजी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच रुपये पर दबाव बना हुआ है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप से रुपये को कुछ सहारा मिल रहा है।

    कुल मिलाकर 3 सितंबर को बाजार में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए जल्दबाजी में ट्रेड लेने के बजाय बाजार की शुरुआती दिशा और ग्लोबल संकेतों पर नजर रखना अहम होगा। खासकर क्रूड ऑयल अमेरिकी बाजारों बॉन्ड यील्ड रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से बाजार को अगले संकेत मिल सकते हैं। मौजूदा परिस्थितियों में सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर माना जा सकता है। यह बाजार विश्लेषण है निवेश का व्यक्तिगत सुझाव नहीं।