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  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    नई दिल्ली। 2 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार में नियमित कारोबार नहीं होगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर इस दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। ऐसे में शेयर खरीदने और बेचने वाले निवेशकों को शुक्रवार के बाजार अवकाश को ध्यान में रखकर अपनी ट्रेडिंग योजना बनानी होगी। बाजार में अगला सामान्य कारोबारी सत्र छुट्टी के बाद खुलेगा।
    शेयर बाजार में छुट्टियां पहले से तय कैलेंडर के अनुसार होती हैं। राष्ट्रीय अवकाश और अन्य निर्धारित छुट्टियों के दौरान इक्विटी मार्केट में कारोबार बंद रहता है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण भी बाजार बंद रहेगा। इसका मतलब यह है कि निवेशक इस दिन सामान्य इक्विटी कारोबार के जरिए शेयरों की खरीद या बिक्री नहीं कर सकेंगे। बाजार बंद रहने के कारण दिनभर सेंसेक्स और निफ्टी में नियमित उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा।

    निवेशकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि शेयर बाजार बंद होने का अर्थ सभी वित्तीय सेवाओं का पूरी तरह बंद होना नहीं है। अलग अलग बैंकिंग और निवेश प्लेटफॉर्म की सेवाओं के कामकाज का समय और उपलब्धता अलग हो सकती है। इसके अलावा बाजार से जुड़े कुछ सेटलमेंट और अन्य कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए किसी लेनदेन की योजना बनाने से पहले अपने ब्रोकर या संबंधित वित्तीय संस्थान की सूचना देखना उपयोगी रहेगा।

    2 अक्टूबर की छुट्टी के कारण निवेशकों के लिए पिछले कारोबारी सत्र के प्रदर्शन का विश्लेषण करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार बंद रहने के दौरान वैश्विक बाजारों से आने वाले संकेतों और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर रखी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार के अगले कारोबारी सत्र पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कंपनियों से जुड़ी खबरें और आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल होते हैं।

    छुट्टी के दिन कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने के लिए समय निकालते हैं। ऐसे में अलग अलग कंपनियों के प्रदर्शन और अपनी निवेश रणनीति पर विचार किया जा सकता है। हालांकि केवल एक दिन के बाजार उतार चढ़ाव को देखकर जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। शेयर बाजार में जोखिम बना रहता है और किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत कई अलग अलग परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है।

    नए निवेशकों के लिए बाजार की छुट्टियों की जानकारी रखना खास तौर पर जरूरी है। इससे ऑर्डर प्लेस करने और ट्रेडिंग की योजना बनाते समय भ्रम की स्थिति नहीं रहती। यदि किसी निवेशक ने छुट्टी से पहले कोई ऑर्डर लगाया है तो उसके निष्पादन की स्थिति बाजार के नियमों और ऑर्डर के प्रकार पर निर्भर करेगी। इसलिए अपने ट्रेडिंग अकाउंट में ऑर्डर की स्थिति जांचना बेहतर रहेगा।

    कुल मिलाकर 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के कारण NSE और BSE पर नियमित शेयर बाजार कारोबार नहीं होगा। निवेशकों को इस दिन बाजार खुलने की उम्मीद में ट्रेडिंग करने के बजाय अगले कारोबारी सत्र की तैयारी करनी चाहिए। बाजार की छुट्टी को पोर्टफोलियो की समीक्षा और आने वाले कारोबारी सत्र के लिए रणनीति बनाने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। निवेश संबंधी कोई भी फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर लेना बेहतर रहेगा।

  • 24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर

    24 सितंबर को शेयर बाजार में बड़ा हलचल वाला दिन NSE की लिस्टिंग पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । 24 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार के लिए कारोबारी लिहाज से महत्वपूर्ण दिन रहने वाला है। इस दिन बाजार में सामान्य कारोबार के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के शेयरों की लिस्टिंग भी होने जा रही है। NSE का आईपीओ निवेशकों के बीच काफी चर्चा में रहा और अब इसकी लिस्टिंग पर बाजार की नजर बनी हुई है। आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था जबकि योग्य संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 12.68 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

    NSE के शेयर 24 सितंबर को BSE पर कारोबार के लिए उपलब्ध होंगे। इसके अलावा NSE के शेयर Metropolitan Stock Exchange of India पर भी कारोबार के लिए उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। NSE की लिस्टिंग ऐसे समय हो रही है जब भारतीय शेयर बाजार हाल के सत्रों में उतार चढ़ाव के दौर से गुजर रहा है।

    बुधवार 23 सितंबर के कारोबार के दौरान भी बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर रही। इससे एक दिन पहले 22 सितंबर को Sensex करीब 0.44 प्रतिशत गिरकर 74529.08 के स्तर पर बंद हुआ था। इस दौरान Reliance Industries समेत कुछ बड़े शेयरों में कमजोरी देखने को मिली।

    वहीं 21 सितंबर को भारतीय बाजार में हाल की लगातार गिरावट के बाद खरीदारी देखने को मिली थी। उस दिन Nifty 50 करीब 0.29 प्रतिशत बढ़कर 23414.30 पर जबकि Sensex 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74858.99 पर बंद हुआ था। बाजार में इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी रही।

    24 सितंबर के कारोबार में NSE की लिस्टिंग सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले घटनाक्रमों में शामिल हो सकती है। NSE के आईपीओ का इश्यू साइज करीब 22568.94 करोड़ रुपए था और यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS था। इसका मतलब है कि आईपीओ के जरिए कंपनी के मौजूदा शेयरधारकों ने अपने शेयर बिक्री के लिए पेश किए थे।

    लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में NSE के शेयरों को लेकर प्रीमियम की चर्चा भी रही है। हालांकि ग्रे मार्केट के संकेत आधिकारिक लिस्टिंग कीमत या शेयर के भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं होते। इसलिए निवेशकों के लिए वास्तविक बाजार भाव और कारोबार शुरू होने के बाद सामने आने वाली स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण होगी।

    इसके अलावा भारतीय बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों की चाल कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बॉन्ड यील्ड और प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी या बिकवाली जैसे कारक भी अहम रहेंगे। हाल के सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बने हुए हैं।

    ऐसे में 24 सितंबर का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण रहेगा। एक तरफ Sensex और Nifty के रुख पर नजर होगी तो दूसरी तरफ NSE के शेयर बाजार में अपनी पहली कीमत पर कारोबार शुरू करेंगे। निवेशकों को किसी भी शेयर में निर्णय लेने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की परिस्थितियों और अपने जोखिम स्तर को ध्यान में रखना चाहिए। बाजार में तेजी या गिरावट की कोई भी संभावना निश्चित नहीं मानी जा सकती।

  • Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर

    Stock Market Today: 22 सितंबर को बाजार में दिख सकती है हलचल Nifty के इन लेवल पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। 22 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। सोमवार को बाजार ने लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद राहत की सांस ली और सेंसेक्स तथा निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। सोमवार को सेंसेक्स 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23414.30 पर पहुंचा। बाजार में यह तेजी कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेश से मिले सहारे के बीच देखने को मिली।

    अब 22 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि सोमवार की तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार फिर से दबाव में आता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 23200 से 23150 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 23500 के स्तर के आसपास बाजार को तत्काल प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। यदि निफ्टी 23500 से ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो बाजार में आगे की दिशा को लेकर नजर 23600 के आसपास के स्तर पर जा सकती है।

    सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की भी भूमिका रही। ब्रेंट क्रूड करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 101.5 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भी हालिया बिकवाली के बाद खरीदारी की तरफ रुख किया। शुक्रवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 599 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी।

    हालांकि बाजार के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। हाल के सप्ताहों में ऊंची कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक स्तर पर चिंता का कारण रही हैं। इसके साथ ही अमेरिकी ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से जुड़े संकेत भी उभरते बाजारों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वैश्विक मौद्रिक नीति में सख्ती की आशंका और भू राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।

    22 सितंबर को सेक्टर आधारित गतिविधियों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। सोमवार को फार्मा और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में मजबूती देखने को मिली जबकि आईटी मेटल और पीएसयू बैंकिंग जैसे कुछ हिस्सों में दबाव रहा। बाजार में स्टॉक विशेष गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं इसलिए केवल इंडेक्स की चाल के बजाय अलग अलग सेक्टर और कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

    इसके अलावा रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत होकर 95.8150 पर बंद हुआ। हालांकि आयातकों की डॉलर मांग और कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियां रुपये पर असर डाल सकती हैं। विदेशी निवेश का प्रवाह भी मुद्रा और शेयर बाजार दोनों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

    कुल मिलाकर 22 सितंबर के कारोबार में निफ्टी के 23200 से 23150 के सपोर्ट क्षेत्र और 23500 से 23600 के प्रतिरोध क्षेत्र पर बाजार की नजर रह सकती है। यह स्तर बाजार विशेषज्ञों के तकनीकी आकलन पर आधारित हैं और वास्तविक कारोबार में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव हो सकता है। निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी निवेश या ट्रेडिंग फैसले से पहले अपनी जोखिम क्षमता और संबंधित कंपनी के बुनियादी आंकड़ों पर विचार करना चाहिए।

  • Share Market में पैसा लगाना है तो पहले समझें पूरा तरीका: Risk से बचने के लिए निवेशकों को पता होनी चाहिए ये बातें

    Share Market में पैसा लगाना है तो पहले समझें पूरा तरीका: Risk से बचने के लिए निवेशकों को पता होनी चाहिए ये बातें


    नई दिल्ली। आज के समय में Share Market निवेश का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। बैंक में पैसा रखने के अलावा कई लोग अपने भविष्य के लिए शेयर बाजार में निवेश करने के बारे में सोचते हैं। बाजार में मिलने वाले रिटर्न की संभावनाएं लोगों को आकर्षित करती हैं लेकिन शेयर बाजार में निवेश के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए बिना जानकारी के केवल किसी की सलाह या सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा के आधार पर पैसा लगाना नुकसान का कारण बन सकता है।

    Share Market में निवेश शुरू करने से पहले यह समझना जरूरी है कि यहां पैसा किसी कंपनी के शेयर में लगाया जाता है। कंपनी के कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन के साथ उसके शेयर की कीमत में उतार चढ़ाव हो सकता है। बाजार ऊपर जाने पर निवेश की वैल्यू बढ़ सकती है लेकिन गिरावट आने पर नुकसान भी हो सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले अपनी Risk Capacity और Financial Goal को समझना जरूरी है।

    शेयर बाजार में शुरुआत करने के लिए सबसे पहले Demat Account और Trading Account की जरूरत होती है। इन्हीं के जरिए शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। Account खोलने से पहले Broker की सुविधाओं और शुल्क से जुड़ी जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए। इसके बाद निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार अलग अलग कंपनियों और निवेश विकल्पों का अध्ययन कर सकता है।

    किसी कंपनी का शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार को समझना बेहद जरूरी है। कंपनी क्या काम करती है उसकी कमाई किस तरह होती है कंपनी पर कितना कर्ज है और पिछले कुछ वर्षों में उसका प्रदर्शन कैसा रहा है जैसे सवालों पर ध्यान दिया जा सकता है। कंपनी के Financial Results और अन्य सार्वजनिक जानकारी को पढ़कर निवेशक किसी कंपनी को बेहतर तरीके से समझ सकता है।

    नए निवेशकों के लिए एक बड़ी गलती यह हो सकती है कि वे अपना पूरा पैसा एक ही शेयर में लगा दें। किसी एक कंपनी या एक ही सेक्टर पर पूरी तरह निर्भर रहने से जोखिम बढ़ सकता है। निवेश में Diversification यानी अलग अलग कंपनियों और Asset Classes में पैसा बांटने की रणनीति जोखिम को समझने और संभालने में मदद कर सकती है। हालांकि Diversification भी बाजार में नुकसान की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं करता।

    Share Market में निवेश करते समय जल्दबाजी से बचना भी जरूरी है। शेयर की कीमत तेजी से बढ़ रही हो तो केवल इस वजह से उसे खरीदना या गिरावट देखकर घबराकर बेच देना हमेशा सही रणनीति नहीं होती। बाजार में Short Term उतार चढ़ाव सामान्य हो सकते हैं। इसलिए निवेश का फैसला अपने लक्ष्य और Risk Profile को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

    नए निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि शेयर बाजार में Guaranteed Return जैसी कोई चीज नहीं होती। किसी व्यक्ति के पुराने रिटर्न को देखकर यह मान लेना कि भविष्य में भी उतना ही फायदा मिलेगा सही नहीं है। इसी तरह WhatsApp और Social Media पर मिलने वाले Tips पर बिना जांच के पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति पहली बार Share Market में निवेश शुरू कर रहा है तो पहले बाजार की बुनियादी जानकारी हासिल करना और छोटी राशि से शुरुआत करना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। निवेश से पहले अपनी आय खर्च बचत और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर SEBI Registered Investment Adviser से सलाह ली जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Share Market में निवेश को जल्दी पैसा कमाने के साधन के बजाय जोखिम और संभावित रिटर्न को समझते हुए लंबे समय की वित्तीय योजना का हिस्सा माना जाए।

  • शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर

    शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव जारी: निफ्टी और सेंसेक्स पर ग्लोबल संकेतों का असर जानिए बाजार की पूरी तस्वीर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 18 सितंबर को निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक घटनाक्रम पर भी बनी रहेगी। 17 सितंबर के कारोबारी सत्र में बाजार ने काफी उतार चढ़ाव के बीच लगभग सपाट रुख दिखाया था। कारोबारी दिन के अंत में Nifty 50 करीब 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23270.60 के स्तर पर बंद हुआ जबकि Sensex 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74314.59 पर रहा। बाजार में हाल की गिरावट के बाद कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जरूर दिखाई दी लेकिन निवेशकों का रुख पूरी तरह से जोखिम लेने वाला नहीं रहा।

    18 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा असर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का रह सकता है। फेड ने ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की है और ब्याज दर का दायरा 3.75 से 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही आगे भी दरों में बढ़ोतरी की संभावना का संकेत दिया गया है। इससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और दुनियाभर के बाजारों में निवेशकों की नजर ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड पर बनी हुई है। भारतीय बाजार के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां आकर्षक हो सकती हैं और उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी पर दबाव बढ़ सकता है।

    रुपये की चाल भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेगी। 17 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.93 के स्तर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान रुपया 96 के स्तर के पार भी गया था लेकिन बाद में इसमें सुधार देखने को मिला। Reuters के मुताबिक संभावित RBI हस्तक्षेप और पोर्टफोलियो निवेश से रुपये को कुछ सहारा मिला। ऐसे में 18 सितंबर को डॉलर इंडेक्स और रुपये की दिशा पर निवेशकों की नजर बनी रह सकती है।

    कच्चा तेल भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहेगा। 17 सितंबर को Brent crude करीब 104.8 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें महंगाई और आयात बिल से जुड़े दबाव बढ़ा सकती हैं। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी या गिरावट का असर बाजार के अलग अलग सेक्टर पर दिखाई दे सकता है।

    सेक्टर के लिहाज से 17 सितंबर को ऑटो और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली थी। वहीं व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों ने मजबूती दिखाई। Business Standard के अनुसार कारोबारी सत्र के दौरान Nifty Metal में भी बढ़त रही और बाजार की चौड़ाई सकारात्मक बनी रही।

    18 सितंबर को निवेशकों की नजर विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों पर भी रहेगी। 17 सितंबर से पहले उपलब्ध आंकड़ों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे रही थी। इस खींचतान के बीच Nifty और Sensex में उतार चढ़ाव बढ़ सकता है। इसलिए बाजार की चाल को केवल एक संकेत के आधार पर समझने के बजाय वैश्विक बाजार रुपये कच्चे तेल विदेशी निवेश और अमेरिकी ब्याज दरों को साथ देखकर समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें

    सेंसेक्स और निफ्टी में बन सकता है बड़ा मूवमेंट शेयर बाजार में निवेश से पहले जानें जरूरी बातें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार की चाल हमेशा महत्वपूर्ण रहती है। कभी तेजी निवेशकों का उत्साह बढ़ाती है तो कभी अचानक गिरावट बाजार की चिंता बढ़ा देती है। ऐसे में शेयर बाजार की दिशा को समझने के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी के उतार चढ़ाव को देखना पर्याप्त नहीं होता बल्कि देश और दुनिया की आर्थिक गतिविधियों का भी असर बाजार पर पड़ता है। निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे बाजार में किसी भी फैसले से पहले मौजूदा परिस्थितियों और प्रमुख संकेतकों को ध्यान से समझें।

    शेयर बाजार पर सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजारों की चाल का भी पड़ता है। अमेरिका समेत दूसरे प्रमुख बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंकों के फैसले महंगाई के आंकड़े और आर्थिक विकास से जुड़े संकेत भी बाजार की धारणा को प्रभावित करते हैं। यदि आर्थिक माहौल मजबूत दिखाई देता है तो निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है वहीं कमजोर संकेतों की स्थिति में बाजार में दबाव देखने को मिल सकता है।

    भारतीय बाजार के लिए कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बेहद अहम होते हैं। किसी कंपनी के मुनाफे में बढ़ोतरी बिक्री में सुधार और भविष्य के कारोबार को लेकर सकारात्मक संकेत उसके शेयर को मजबूती दे सकते हैं। इसके उलट कमजोर नतीजे या कारोबार से जुड़ी चिंता किसी शेयर में बिकवाली बढ़ा सकती है। यही वजह है कि निवेशकों को केवल शेयर की कीमत देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी के कारोबार और वित्तीय स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।

    बाजार में कच्चे तेल की कीमतों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इसका असर अर्थव्यवस्था के साथ बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है। दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत का संकेत मानी जा सकती है।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है जबकि लगातार बिकवाली से दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने का काम कर सकती है।

    ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे जल्दबाजी में फैसला न लें। शेयर बाजार में तेजी देखकर केवल मुनाफे की उम्मीद में पैसा लगाना और गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करना नुकसान का कारण बन सकता है। निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर रणनीति बनानी चाहिए। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है इसलिए मजबूत कंपनियों और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

    शेयर बाजार में किसी भी निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति बाजार की मौजूदा दिशा और आर्थिक परिस्थितियों का अध्ययन करना जरूरी है। बाजार में अवसर लगातार बनते रहते हैं इसलिए धैर्य और सोच समझकर लिया गया फैसला निवेशकों के लिए अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।

  • शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका

    शेयर मार्केट में पहली बार लगाने जा रहे हैं पैसा तो न करें ये गलती डीमैट अकाउंट से लेकर शेयर खरीदने तक समझें पूरा तरीका


    नई दिल्ली । शेयर मार्केट आज के दौर में निवेश का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुका है। बहुत से लोग अपनी बचत को बढ़ाने के लिए शेयर बाजार का रुख कर रहे हैं लेकिन बाजार में कदम रखने से पहले इसकी बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है। शेयर मार्केट में कमाई के अवसर मौजूद हैं लेकिन यहां जोखिम भी जुड़ा होता है। इसलिए बिना जानकारी और बिना रणनीति के पैसा लगाना नुकसान का कारण बन सकता है। खासतौर पर नए निवेशकों को किसी शेयर के तेजी से बढ़ने की खबर देखकर तुरंत निवेश करने से बचना चाहिए।

    शेयर मार्केट में शुरुआत करने के लिए सबसे पहले डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। डीमैट अकाउंट में आपके खरीदे गए शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखे जाते हैं जबकि ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए शेयरों की खरीद और बिक्री की जाती है। इसके बाद बैंक अकाउंट को इनसे जोड़ा जाता है ताकि निवेश के लिए पैसा भेजा जा सके और जरूरत पड़ने पर रकम वापस ली जा सके। अकाउंट खोलने से पहले ब्रोकरेज चार्ज और दूसरे शुल्क की जानकारी जरूर समझ लेनी चाहिए।

    नए निवेशक के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि शुरुआत छोटी रकम से की जाए। शेयर बाजार में एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय धीरे धीरे निवेश करने की आदत बनाना ज्यादा बेहतर हो सकता है। किसी कंपनी के शेयर खरीदने से पहले उसके कारोबार कंपनी की कमाई कर्ज भविष्य की योजनाओं और उद्योग की स्थिति को समझना चाहिए। केवल सोशल मीडिया या किसी दोस्त की सलाह पर शेयर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।

    शेयर मार्केट में निवेश करते समय यह भी समझना जरूरी है कि हर दिन शेयर की कीमत ऊपर नहीं जाएगी। बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य बात है। कई बार अच्छी कंपनियों के शेयर भी बाजार की परिस्थितियों के कारण नीचे आ सकते हैं। ऐसे समय में घबराकर तुरंत बेचने के बजाय निवेश के उद्देश्य और कंपनी की वास्तविक स्थिति को देखना चाहिए। हालांकि किसी भी निवेश में नुकसान की संभावना बनी रहती है इसलिए अपनी जोखिम क्षमता को समझना बेहद जरूरी है।

    शुरुआती निवेशकों के लिए लंबी अवधि का नजरिया रखना एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है। मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में शोध के बाद निवेश करके समय के साथ अपने निवेश को बढ़ाने का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसके अलावा अलग अलग कंपनियों और क्षेत्रों में पैसा बांटकर निवेश करने से किसी एक शेयर पर निर्भरता कम की जा सकती है। इसे डायवर्सिफिकेशन कहा जाता है।

    अगर कोई व्यक्ति रोज शेयर खरीदने और बेचने यानी ट्रेडिंग की शुरुआत करना चाहता है तो उसे ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। ट्रेडिंग में कीमतों में छोटे बदलाव से भी तेजी से लाभ या नुकसान हो सकता है। बिना पर्याप्त ज्ञान के इंट्राडे ट्रेडिंग या जोखिम वाले कारोबार में उतरना नुकसानदेह हो सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शेयर मार्केट को जल्दी अमीर बनने का रास्ता नहीं समझना चाहिए। सही जानकारी अनुशासन धैर्य और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश की शुरुआत करना ज्यादा जरूरी है। निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें आप कितना जोखिम उठा सकते हैं यह समझें और जिस पैसे की जल्द जरूरत पड़ सकती है उसे बाजार में लगाने से बचें। शेयर बाजार में सफलता किसी एक टिप या एक शेयर पर निर्भर नहीं होती बल्कि समझदारी और लगातार सीखने की आदत पर निर्भर करती है।

  • शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल

    शेयर बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक! 4 सितंबर को इन फैक्टर्स से बदल सकती है Nifty-Sensex की चाल


    नई दिल्ली। शुक्रवार 4 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। बीते कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार पर वैश्विक अनिश्चितता का दबाव रहा है और निवेशकों की नजर अब घरेलू संकेतों के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी बनी हुई है। 3 सितंबर को बाजार में शुरुआती बढ़त के बाद बिकवाली लौट आई और सेंसेक्स करीब 417 अंक गिरकर बंद हुआ जबकि निफ्टी 23900 के स्तर से नीचे चला गया। इससे संकेत मिल रहा है कि बाजार में फिलहाल तेजी को लेकर पूरी तरह भरोसा नहीं बन पाया है।

    4 सितंबर के कारोबार में सबसे अहम भूमिका कच्चे तेल की कीमतों की रह सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतों में तेजी आई है जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में अगर शुक्रवार को तेल की कीमतों में दोबारा तेज उछाल आता है तो इसका असर बाजार की धारणा पर दिखाई दे सकता है।

    दूसरी ओर ग्लोबल बाजार से कुछ सकारात्मक संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में हालिया कारोबार के दौरान मजबूती देखने को मिली है और गुरुवार को भारतीय बाजार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया था। विदेशी मुद्रा प्रवाह से भारतीय बैंकों की तरलता स्थिति को भी समर्थन मिला है। ऐसे संकेत बाजार में गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकते हैं।

    निवेशकों की नजर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के संकेतों पर भी रहेगी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण दुनिया भर के शेयर बाजारों में सतर्कता बढ़ी है। यदि अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़े ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की संभावना बढ़ाते हैं तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। दूसरी तरफ कमजोर आर्थिक आंकड़े दरों में नरमी की उम्मीद को बढ़ा सकते हैं जिससे उभरते बाजारों को कुछ राहत मिल सकती है।

    घरेलू स्तर पर बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयर बाजार को दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। हाल के कारोबार में बैंकिंग शेयरों में खरीदारी देखने को मिली है। इसके अलावा मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। हालांकि बाजार में उतार चढ़ाव को देखते हुए किसी एक सेक्टर या शेयर में जल्दबाजी से दांव लगाने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 4 सितंबर का कारोबार बेहद अहम रह सकता है। बाजार में तेजी की कोशिश दिखाई दे सकती है लेकिन महंगा कच्चा तेल वैश्विक तनाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए सतर्क रणनीति अपनाना बेहतर रहेगा। बाजार की दिशा को लेकर किसी निश्चित तेजी या गिरावट का अनुमान लगाने के बजाय सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। यह खबर निवेश सलाह नहीं है और निवेश का फैसला अपनी रिसर्च तथा विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही लेना चाहिए।

  • सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा

    सितंबर को बाजार में संभलकर कदम रखें निवेशक, ग्लोबल संकेतों से लेकर तेल कीमतों तक कई फैक्टर तय करेंगे Nifty-Sensex की दिशा


    नई दिल्ली। 1 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। अगस्त के आखिरी कारोबारी सत्र में घरेलू बाजार दबाव में नजर आया और अब नए महीने की शुरुआत कई महत्वपूर्ण संकेतों के बीच हो रही है। सोमवार को Nifty 50 और Sensex में गिरावट दर्ज की गई थी जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंता ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया। 31 अगस्त को Nifty 50 करीब 0.74 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23997.10 के स्तर तक पहुंच गया था जबकि Sensex भी करीब 0.66 प्रतिशत नीचे 76751.32 के आसपास रहा।

    1 सितंबर के कारोबार में सबसे बड़ा फोकस MSCI रीबैलेंसिंग पर रहने वाला है। इंडेक्स में बदलाव प्रभावी होने के साथ कई शेयरों में फंड फ्लो बढ़ सकता है। बाजार रिपोर्टों के मुताबिक Laurus Labs Adani Energy Solutions Lenskart और Groww जैसे शेयरों को इंडेक्स बदलाव से फायदा मिल सकता है जबकि Reliance Industries और Jio Financial Services जैसे बड़े शेयरों में आउटफ्लो का दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बाजार का मुख्य सूचकांक भले ही सीमित दायरे में रहे लेकिन कुछ खास शेयरों में तेज खरीदारी या बिकवाली देखने को मिल सकती है।

    MSCI रीबैलेंसिंग के साथ बाजार में नए Closing Auction Session को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत से लागू हुई है और 1 सितंबर का MSCI बदलाव इस नई व्यवस्था के लिए पहला बड़ा परीक्षण माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कम ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले शेयरों में इंडेक्स से जुड़े बड़े फंड फ्लो आने पर कीमतों में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि व्यापक बाजार पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए अहम संकेत बनी हुई हैं। तेल की कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और इससे महंगाई तथा रुपये की चाल पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर 31 अगस्त को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.2 प्रतिशत मजबूत होकर 95.1625 पर बंद हुआ और करीब चार सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया। बाजार में MSCI से जुड़े प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक के समर्थन को रुपये की मजबूती के प्रमुख कारणों में गिना गया।

    बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों को सतर्क नजर रखनी होगी। HDFC Bank के शेयरों में हालिया कमजोरी ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया है। 31 अगस्त को बैंक के शेयर में करीब 1.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं बाजार में वैश्विक ब्याज दरों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित नीति को लेकर संकेत आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में 1 सितंबर का कारोबार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार में किसी एक दिशा में तेजी या गिरावट के बजाय शेयर आधारित गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। इसलिए निवेशकों को केवल बाजार की तेजी देखकर खरीदारी करने या गिरावट देखकर घबराकर बिकवाली करने के बजाय कंपनी के फंडामेंटल और बाजार के जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए। खासतौर पर MSCI बदलाव से प्रभावित शेयरों में अचानक आने वाली हलचल को समझना जरूरी होगा। कुल मिलाकर नए महीने की शुरुआत घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजार कच्चे तेल रुपये और इंडेक्स रीबैलेंसिंग के बीच होने जा रही है और यही फैक्टर मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।