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  • वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने अगस्त समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार में किया बड़ा फेरबदल, 31 अगस्त से प्रभावी होंगे बदलाव।

    वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई ने अगस्त समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार में किया बड़ा फेरबदल, 31 अगस्त से प्रभावी होंगे बदलाव।


    नई दिल्ली ।
    वैश्विक सूचकांक प्रदाता एमएससीआई अर्थात मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल ने अपनी अगस्त की आवधिक समीक्षा के तहत भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। इस नवीनतम समीक्षा के अंतर्गत अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस सहित चार नई कंपनियों को एमएससीआई इंडिया इंडेक्स में स्थान दिया गया है। इसके विपरीत तीन कंपनियों को इस सूचकांक से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। यह सभी पुनर्संतुलन 31 अगस्त के कारोबार की समाप्ति के पश्चात आधिकारिक रूप से प्रभावी कर दिए जाएंगे।

    एमएससीआई द्वारा जारी विवरण के अनुसार, मुख्य सूचकांक में शामिल की गई अन्य कंपनियां मुख्य रूप से पूंजी बाजार और फार्मास्यूटिकल्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबद्ध रखती हैं। वैश्विक सूचकांक में कंपनियों का चयन उनके बाजार पूंजीकरण, तरलता और फ्री-फ्लोट जैसे कड़े वैश्विक मानकों के आधार पर किया जाता है। इन्हीं मानकों के आधार पर यह निर्धारित होता है कि किस कंपनी का सूचकांक में प्रवेश होगा अथवा किसे बाहर किया जाएगा।

    मुख्य सूचकांक के साथ-साथ एमएससीआई इंडिया डोमेस्टिक स्मॉल कैप इंडेक्स में भी बड़ा पुनर्गठन देखने को मिला है। इस स्मॉल कैप सूचकांक में 12 नए शेयरों को स्थान दिया गया है, जबकि 19 शेयरों को सूचकांक से हटा दिया गया है। इस प्रकार स्मॉल कैप श्रेणी में सात कंपनियों की शुद्ध कमी दर्ज की गई है। इस बदलाव से भारतीय शेयर बाजार में बड़े पैमाने पर पोर्टफोलियो पुनर्संतुलन की प्रक्रिया प्रारंभ होने की संभावना है।

    एमएससीआई इंडेक्स को दुनिया भर के बड़े संस्थागत निवेशक और पैसिव फंड मुख्य बेंचमार्क के रूप में उपयोग करते हैं। जब भी इस सूचकांक में कोई बदलाव होता है, तब अंतरराष्ट्रीय फंड प्रबंधक अपने पोर्टफोलियो को नए वेटेज के अनुसार पुनर्संतुलित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप संबंधित कंपनियों के शेयरों में भारी मात्रा में विदेशी पूंजी का आगमन या निकासी देखने को मिलती है। एमएससीआई का भारत केंद्रित सूचकांक भारतीय इक्विटी बाजार के लगभग 85 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

    बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस समीक्षा के बाद भारतीय शेयर बाजार में अरबों रुपये का पैसिव निवेश प्रवाह आ सकता है। पूर्व में भी यह संभावना व्यक्त की गई थी कि कुछ बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनियां स्मॉल कैप श्रेणी से पदोन्नत होकर स्टैंडर्ड इंडेक्स का हिस्सा बन सकती हैं। मध्य प्रदेश सहित देश भर के निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजरें इन बदलावों के बाद होने वाले पूंजी प्रवाह पर टिकी हुई हैं।

    एमएससीआई की आधिकारिक घोषणा के तुरंत बाद संबंधित कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी का रुझान देखा गया। विशेष रूप से अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर में शुरुआती सत्र में ही बढ़त दर्ज की गई। लंबे समय के वित्तीय प्रदर्शन के दृष्टिकोण से देखा जाए तो कंपनी के शेयर ने पिछले वर्षों में निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न प्रदान किया है। इस वैश्विक सूचकांक में शामिल होने से कंपनी के शेयरों में अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रवाह और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • टाटा संस के रेवन्यू में 9.1% का उछाल…. एक शेयर पर 1,10,717 रुपये डिविडेंड देने की सिफारिश

    टाटा संस के रेवन्यू में 9.1% का उछाल…. एक शेयर पर 1,10,717 रुपये डिविडेंड देने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन चंद्रशेखर (Chairman N. Chandrasekaran) ने बताया कि टाटा संस का रेवन्यू (Tata Sons Revenue) बीते वित्त वर्ष 9.1 प्रतिशत बढ़कर 42,367 करोड़ रुपये रहा है। वित्त वर्ष 2025 में टाटा संस का रेवन्यू (Tata Sons Revenue) 38835 करोड़ रुपये रहा था। वहीं, टैक्स भुगतान के बाद प्रॉफिट 21.8 प्रतिशत बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये हो गया। इससे पहले के फाइनेंशियल ईयर में कंपनी का प्रॉफिट 26232 करोड़ रुपये था। कंपनी के निदेशक मंडल ने 1,10,717 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड की सिफारिश की है। यह शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर है। बता दें, टाटा संस की शेयर बाजारों में लिस्टिंग नहीं हुई है।

    एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि टाटा ग्रुप का वित्तीय प्रदर्शन बीते वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत रहा है। समूह का कुल रेवन्यू 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16,24,030 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 51.9 प्रतिशत बढ़कर 1,70,525 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। चंद्रशेखरन ने कंपनी की सालाना रिपोर्ट 2025-26 में शेयरधारकों को संबोधित करते कहा कि वर्ष 2025-26 वैश्विक संघर्षों और ग्लोबल स्टेज पर एआई में अभूतपूर्व निवेश का साल रहा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद टाटा समूह ने वित्तीय मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया।

    उन्होंने कहा, ”एकीकृत स्तर पर वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा समूह का रेवन्यू 7.8 प्रतिशत बढ़कर 16,24,030 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ 51.9 प्रतिशत बढ़कर 1,70,525 करोड़ रुपये हो गया।” वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा समूह का राजस्व वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में 2.1 गुना और लाभ 5.4 गुना हो गया है। यह समूह की विभिन्न कंपनियों में किए गए सुधारों का परिणाम है।

    टाटा के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता एयर इंडिया है। कंपनी का घाटा वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 22,238 करोड़ रुपये हो गया है। एक साल पहले इसी वित्त वर्ष के दौरान कंपनी का घाटा 10,859 करोड़ रुपये रहा था। चंद्रशेखरन ने कहा कि एयर इंडिया के लिए यह साल काफी संघर्षपूर्ण रहा। वो कहते हैं कि तेल की कीमतों में उछाल, कई रूट्स का बंद होना, AI171 का क्रैश होना, पश्चिम एशिया में तनाव का बुरा असर पड़ा है। जिसकी वजह से एयर इंडिया को काफी नुकसान हुआ है। वो कहते हैं इतिहास की हर बड़ी एयरलाइन को खड़ा होने में दशकों का समय लगा है….। एयर इंडिया के परिवर्तन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।