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  • Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    नई दिल्ली । ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Meesho लिमिटेड में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। कंपनी के ताजा शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार पिछले दो तिमाहियों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) दोनों ने अपनी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की है। बाजार विशेषज्ञ इसे कंपनी के बेहतर परिचालन प्रदर्शन, मजबूत वित्तीय संकेतकों और भविष्य की विकास संभावनाओं के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मान रहे हैं।

    जून 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले मार्च 2026 में यह 4.2 प्रतिशत थी। लगातार दूसरी तिमाही में विदेशी निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर बाजार में FII की लगातार खरीदारी को अक्सर सकारात्मक निवेश संकेत माना जाता है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी कंपनी में अपना निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। दिसंबर 2025 में DII की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 5.6 प्रतिशत हुई और जून 2026 में तेज उछाल के साथ 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू संस्थानों ने Meesho में निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। इससे कंपनी के प्रति घरेलू निवेशकों का बढ़ता विश्वास भी स्पष्ट होता है।

    संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ कंपनी की प्रमोटर और सार्वजनिक हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है। प्रमोटर हिस्सेदारी 16.6 प्रतिशत से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गई, जबकि सार्वजनिक हिस्सेदारी 73.7 प्रतिशत से घटकर 69.3 प्रतिशत पर आ गई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के शेयरों का बड़ा हिस्सा अब संस्थागत निवेशकों के पास जा रहा है, जिसे बाजार स्थिर निवेश का सकारात्मक संकेत मानता है।

    कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में योगदान मार्जिन 170 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी लागत में कमी, प्रीपेड ऑर्डर बढ़ने तथा डिलीवरी विफल होने की घटनाओं में कमी आने से परिचालन खर्च नियंत्रित हुआ है। इससे कंपनी की लाभप्रदता में सुधार हुआ है और भविष्य में बेहतर नकदी प्रवाह की संभावना भी मजबूत हुई है।

    Meesho का विज्ञापन कारोबार भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय विक्रेताओं की संख्या में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही विज्ञापन पर खर्च करने वाले कारोबारियों की संख्या और बजट दोनों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कंपनी द्वारा AI आधारित वॉयस शॉपिंग असिस्टेंट का उपयोग ग्रामीण और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में किया जा रहा है, जिससे ग्राहक अधिग्रहण लागत कम होने और कारोबार के विस्तार में मदद मिल रही है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन, लागत नियंत्रण, विज्ञापन कारोबार का विस्तार और तकनीक आधारित रणनीति Meesho की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। यही कारण है कि संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय नतीजों और कारोबार की प्रगति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • सेबी की सख्त कार्रवाई से घिरी Rajesh Exports, 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित राजस्व घोटाले ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

    सेबी की सख्त कार्रवाई से घिरी Rajesh Exports, 15.15 लाख करोड़ रुपये के कथित राजस्व घोटाले ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता

    नई दिल्ली । देश की प्रमुख स्वर्ण आभूषण निर्यातक कंपनियों में शामिल Rajesh Exports एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से कंपनी और उसके प्रमोटर समूह के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और अंतरिम कार्रवाई के बाद निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल शेयर मूल्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनी की साख और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

    मामला कथित तौर पर राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने और धन के संभावित दुरुपयोग से जुड़ा बताया जा रहा है। सेबी की कार्रवाई के बाद बाजार में कंपनी को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला, जहां कंपनी के शेयर में पांच प्रतिशत का लोअर सर्किट लग गया और यह 104.65 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। पिछले कुछ महीनों से शेयर में लगातार गिरावट का रुख बना हुआ है, जिससे निवेशकों की चिंता और गहरी हो गई है।

    इस घटनाक्रम का सबसे अधिक ध्यान बड़े संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी पर गया है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, Life Insurance Corporation of India यानी एलआईसी के पास कंपनी में 10.8 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी 14.19 प्रतिशत और खुदरा निवेशकों की हिस्सेदारी 14.55 प्रतिशत है। प्रमोटर समूह अभी भी कंपनी में 54.55 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा शेयरधारक बना हुआ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि एलआईसी जैसे बड़े संस्थागत निवेशक के लिए यह निवेश उसके कुल पोर्टफोलियो का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है, इसलिए इस मामले का एलआईसी की वित्तीय स्थिति या उसके शेयर पर कोई बड़ा दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, Rajesh Exports के निवेशकों के लिए स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि नियामकीय जांच का असर अक्सर निवेशक विश्वास पर पड़ता है।

    इक्विटी बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की कार्रवाई अपने आप में गंभीर संकेत है। उनके अनुसार, जब किसी सूचीबद्ध कंपनी के खिलाफ वित्तीय पारदर्शिता और फंड उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं तो निवेशकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। यही कारण है कि बाजार में फिलहाल सतर्कता का माहौल दिखाई दे रहा है।

    दूसरी ओर, कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सेबी का आदेश केवल अंतरिम प्रकृति का है और अभी तक कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। कंपनी का दावा है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े पूरी तरह सही हैं और राजस्व बढ़ाकर दिखाने जैसी कोई स्थिति नहीं है। प्रबंधन का कहना है कि मामले में किसी प्रकार की संचार संबंधी गलतफहमी हो सकती है और जल्द ही विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि Rajesh Exports का शेयर शेयर बाजार के ‘Z’ ग्रुप में सूचीबद्ध है, जहां केवल ट्रेड-फॉर-ट्रेड आधार पर कारोबार की अनुमति होती है। इस श्रेणी में शामिल कंपनियों पर पहले से ही निवेशकों की विशेष नजर रहती है। कंपनी का शेयर दिसंबर 2025 में 239 रुपये के अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से करीब 56 प्रतिशत तक टूट चुका है। ऐसे में सेबी की जांच ने निवेशकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में सेबी की जांच रिपोर्ट और कंपनी के आधिकारिक स्पष्टीकरण पर बाजार की नजर बनी रहेगी, क्योंकि यही तय करेगा कि निवेशकों का भरोसा दोबारा बहाल हो पाता है या नहीं।

  • सेबी की सख्त कार्रवाई से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भूचाल, 5% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंचे; वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

    सेबी की सख्त कार्रवाई से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भूचाल, 5% गिरकर लोअर सर्किट पर पहुंचे; वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ लोअर सर्किट पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही कंपनी के शेयरों में बिकवाली का दबाव दिखाई दिया और यह बीएसई पर अपने पिछले बंद स्तर 110.15 रुपये से गिरकर 104.65 रुपये पर पहुंच गया।

    सेबी की ओर से जारी आदेश में कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और कारोबारी लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। नियामक ने प्रारंभिक जांच के आधार पर संकेत दिए हैं कि कंपनी द्वारा घोषित कुल राजस्व का लगभग 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा वास्तविकता से अधिक दिखाया गया हो सकता है। सेबी ने इन निष्कर्षों को बेहद गंभीर और अभूतपूर्व बताते हुए तत्काल हस्तक्षेप को आवश्यक माना है।

    आदेश में कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आई अनियमितताएं सामान्य कारोबारी त्रुटियों से कहीं अधिक गंभीर प्रतीत होती हैं। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय ने स्पष्ट किया कि निवेशकों के हितों की रक्षा और बाजार की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियामक कदम उठाना जरूरी था। इसी के तहत प्रमोटर राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों की खरीद, बिक्री अथवा किसी भी प्रकार के लेन-देन से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

    यह मामला मार्च 2024 में प्राप्त एक शेयरधारक की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत में कंपनी की बैलेंस शीट में दर्ज बड़े व्यापारिक देयकों और वित्तीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 तक की अवधि की विस्तृत जांच शुरू की और स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट के लिए बीडीओ इंडिया सर्विसेज को नियुक्त किया।

    जांच के दौरान फॉरेंसिक ऑडिटर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सेबी के अनुसार कंपनी ने कई अवसरों पर आवश्यक लेखा प्रणालियों, वित्तीय रिकॉर्ड और प्रमुख दस्तावेजों तक पूर्ण पहुंच उपलब्ध नहीं कराई। इसके कारण ऑडिटर कई महत्वपूर्ण लेन-देन और वित्तीय दावों का स्वतंत्र सत्यापन नहीं कर सका। केवल सीमित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए, जिससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हुई।

    नियामक ने कंपनी की विदेशी सहायक और अप्रत्यक्ष सहायक इकाइयों की भी समीक्षा की। सिंगापुर और स्विट्जरलैंड स्थित कुछ इकाइयों के वित्तीय लेन-देन और रिपोर्टिंग पैटर्न को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सेबी का मानना है कि कुछ वित्तीय संरचनाओं का उपयोग धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य को छिपाने के लिए किया गया हो सकता है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो कंपनी की वित्तीय पारदर्शिता और कॉरपोरेट गवर्नेंस पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

    सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वह जांचकर्ताओं द्वारा मांगी गई सभी लंबित जानकारियां 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराए। साथ ही कंपनी के खातों और लेन-देन की विस्तृत समीक्षा के लिए नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का भी आदेश दिया गया है।

    इस घटनाक्रम का असर केवल राजेश एक्सपोर्ट्स तक सीमित नहीं रहा। कंपनी में करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयरों पर भी दबाव देखा गया और कारोबार के दौरान उसके शेयरों में लगभग 1 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच की दिशा और निष्कर्ष निवेशकों की धारणा तथा कंपनी के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।