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  • अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव

    अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसी दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 250 से 300 अंकों की कमजोरी के साथ खुला जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 80 से 100 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया जिससे बाजार में दबाव बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय वैश्विक घटनाक्रम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।

    एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी मिला जुला रहा। जापान के निक्केई और टॉपिक्स सूचकांक दबाव में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती गिरावट के बाद संभलता नजर आया। हांगकांग के हैंगसेंग फ्यूचर्स में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

    वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। डॉव जोन्स एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के बावजूद भू राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। हालांकि बाद में अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर नहीं दिखाई दिया।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी बाजारों में स्थिरता लौटती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए संकेत पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

  • सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति

    सेंसेक्स निफ्टी की आज कैसी रहेगी दिशा बाजार खुलने से पहले जानिए एक्सपर्ट्स की राय और निवेश की रणनीति


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज का कारोबारी सत्र कई अहम घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। निवेशकों की नजर एक ओर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी तो दूसरी ओर विदेशी बाजारों की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के संकेत मौजूद हैं इसलिए कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली थी लेकिन मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और निवेशकों का भरोसा अभी भी भारतीय बाजार को सहारा दे रहा है। अगर विदेशी बाजारों से अच्छे संकेत मिलते हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक स्तर पर किसी तरह की अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार दबाव में भी आ सकता है।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी बाजार को ऊपर ले जाने में मदद कर सकती है जबकि आईटी कंपनियों पर अमेरिकी बाजार और डॉलर की चाल का असर देखने को मिल सकता है। ऑटो सेक्टर में बिक्री के आंकड़े और इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों की रुचि बढ़ा सकती हैं। फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से मजबूत विकल्प माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर परिणाम देने वाली कंपनियों में दबाव बन सकता है। ऐसे में केवल अफवाहों के आधार पर निवेश करने के बजाय कंपनियों की वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना जरूरी होगा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद और बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार निवेश आता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स में होने वाले बदलाव का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई देगा।

    जानकारों का मानना है कि छोटे और मझोले शेयरों में भी अच्छी गतिविधि बनी रह सकती है लेकिन इनमें जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इसलिए निवेशकों को बिना पर्याप्त जानकारी के निवेश से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है। वहीं अल्पकालिक निवेश करने वालों को स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए ताकि अचानक आने वाले उतार चढ़ाव से नुकसान सीमित रखा जा सके।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में मिश्रित लेकिन सक्रिय कारोबार देखने को मिल सकता है। वैश्विक संकेत यदि अनुकूल रहे तो बाजार मजबूती के साथ आगे बढ़ सकता है लेकिन किसी भी नकारात्मक खबर के चलते दबाव भी बन सकता है। ऐसे में निवेशकों को धैर्य बनाए रखते हुए सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए और केवल विश्वसनीय जानकारी के आधार पर ही निवेश करना चाहिए।

  • शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल

    शेयर बाजार आउटलुक 30 जुलाई बाजार खुलने से पहले जान लें कौन से फैक्टर्स तय करेंगे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल


    नई दिल्ली । 30 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार की चाल कई घरेलू और वैश्विक कारकों से प्रभावित हो सकती है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल देखने को मिला है और अब निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों वैश्विक बाजारों की चाल विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों पर टिकी रहेगी। ऐसे में बाजार खुलने से पहले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि किन वजहों से सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो भारतीय बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है। वहीं यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी तरह की आर्थिक या भू राजनीतिक चिंता बढ़ती है तो बाजार में दबाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशकों को हर खबर पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    इन दिनों कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। जिन कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर होंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजे देने वाली कंपनियों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर निवेशकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी करते हैं तो बाजार को मजबूती मिलती है जबकि बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई देता है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती या कमजोरी और रुपये की स्थिति भी निवेशकों की रणनीति को प्रभावित करती है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और कई कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। वहीं तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को किसी भी तेजी या गिरावट में भावनाओं के आधार पर निर्णय लेने से बचना चाहिए। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना बेहतर रणनीति मानी जाती है। जिन लोगों की जोखिम उठाने की क्षमता कम है उन्हें एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए। साथ ही पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में गिरावट आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।

    30 जुलाई का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए कई नए अवसर लेकर आ सकता है लेकिन बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्क रहना भी उतना ही जरूरी होगा। सही जानकारी मजबूत रिसर्च और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मदद कर सकता है।

  • सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बाजार में बन सकते हैं नए मौके निवेश से पहले जान लें एक्सपर्ट्स की अहम सलाह

    सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन बाजार में बन सकते हैं नए मौके निवेश से पहले जान लें एक्सपर्ट्स की अहम सलाह


    नई दिल्ली। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को शेयर बाजार की दिशा कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक संकेतों से तय हो सकती है। निवेशकों की नजर विदेशी बाजारों की चाल कच्चे तेल की कीमतों विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो भारतीय शेयर बाजार में अच्छी शुरुआत देखने को मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की अनिश्चितता का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

    हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजार में उतार चढ़ाव का दौर बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सोच समझकर निवेश करना चाहिए। खासतौर पर छोटे और नए निवेशकों के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने का है। मजबूत कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करना अपेक्षाकृत बेहतर रणनीति मानी जा रही है।

    मंगलवार के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो एफएमसीजी फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रह सकती है। यदि इन क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर कमजोर नतीजे या नकारात्मक वैश्विक संकेत बाजार में दबाव भी बढ़ा सकते हैं।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है। वहीं लगातार बिकवाली होने पर प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट जानकारियों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति कारोबार की संभावनाओं और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है। जोखिम को कम करने के लिए निवेश को अलग अलग सेक्टरों में बांटना भी एक बेहतर रणनीति मानी जाती है।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बाजारों की चाल एशियाई बाजारों का प्रदर्शन डॉलर की मजबूती या कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता बनी रहती है तो घरेलू निवेशकों का भरोसा भी मजबूत हो सकता है। इसके अलावा रुपये की स्थिति भी विदेशी निवेश के प्रवाह को प्रभावित करती है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें रोजाना होने वाले उतार चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छी गुणवत्ता वाली कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश करना लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है। वहीं अल्पकालिक कारोबार करने वाले निवेशकों को स्टॉप लॉस और जोखिम प्रबंधन के नियमों का पालन करना चाहिए।

    कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबार कई महत्वपूर्ण संकेतों पर निर्भर रहेगा। बाजार में अवसर भी बन सकते हैं और उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को संयम धैर्य और सही रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि वे बदलते बाजार माहौल में बेहतर निवेश निर्णय ले सकें।

  • कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का असर: एशियन पेंट्स में निवेशकों के लिए क्या बन रहे हैं

    कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट का असर: एशियन पेंट्स में निवेशकों के लिए क्या बन रहे हैं


    नई दिल्ली:
      वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजार में पेंट सेक्टर के स्टॉक्स पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव में नरमी और आपूर्ति परिस्थितियों में सुधार के चलते क्रूड ऑयल करीब 20 प्रतिशत तक टूटकर 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया है। इस बदलाव ने निवेशकों का ध्यान उन कंपनियों की ओर खींचा है, जिनकी लागत संरचना में कच्चा तेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन्हीं में प्रमुख नाम है Asian Paints Ltd का, जो भारतीय पेंट उद्योग की अग्रणी कंपनी मानी जाती है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार क्रूड ऑयल में गिरावट का सीधा लाभ पेंट कंपनियों को मिल सकता है क्योंकि इनके प्रमुख कच्चे माल पेट्रोकेमिकल आधारित होते हैं। लागत घटने की संभावना से कंपनी के मार्जिन में सुधार की उम्मीद बढ़ती है, जिसका सकारात्मक असर शेयर कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, मौजूदा स्तरों पर बाजार पहले ही इस कारक को काफी हद तक कीमतों में समाहित कर चुका है।

    डेली चार्ट पर तकनीकी विश्लेषण के अनुसार एशियन पेंट्स के शेयर ने हाल के सत्र में 2829 रुपये का उच्च स्तर बनाया था, जिसके बाद इसमें हल्का प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली है। इसके बावजूद स्टॉक अभी भी अपने प्रमुख मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है, जो इसकी मध्यम अवधि की मजबूती को दर्शाता है। पिछले कुछ महीनों में स्टॉक ने हायर हाई और हायर लो का पैटर्न बनाए रखा है, जिससे इसमें अपट्रेंड की संरचना बनी हुई है।

    ट्रेडिंग विश्लेषकों का मानना है कि नीचे की ओर 2650 से 2700 रुपये का जोन मजबूत सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। इस स्तर पर यदि स्टॉक आता है तो इसमें खरीदारी की दिलचस्पी बढ़ने की संभावना बनी रहती है। वहीं ऊपर की ओर 2828 रुपये का हालिया हाई महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है तो स्टॉक 2900 से 2928 रुपये के 52-सप्ताह उच्च स्तर की ओर बढ़ सकता है।

    बाजार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि क्रूड ऑयल में आई मौजूदा गिरावट का प्रभाव अब सीमित रह सकता है क्योंकि हालिया रैली के दौरान इस फैक्टर का काफी हद तक असर स्टॉक प्राइस में पहले ही दिख चुका है। ऐसे में आगे की चाल मुख्य रूप से बाजार की मांग, तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। अल्पकाल में स्टॉक में कंसोलिडेशन की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि मध्यम अवधि में ट्रेंड अभी भी सकारात्मक माना जा रहा है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल रणनीति यह मानी जा रही है कि मजबूत सपोर्ट जोन पर ही एंट्री की जाए और ऊपरी स्तरों पर सावधानी बरती जाए। पेंट सेक्टर में लागत घटने का लाभ लंबे समय में ग्रोथ सपोर्ट कर सकता है, लेकिन तात्कालिक तेजी की संभावना सीमित दायरे में रह सकती है।

  • रेपो रेट पर RBI के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, बैंकिंग शेयर दबाव में

    रेपो रेट पर RBI के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, बैंकिंग शेयर दबाव में


    नई दिल्ली ।
    घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई और प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति संबंधी घोषणा के बाद बाजार का रुख बदल गया। रेपो रेट को यथावत रखने के फैसले और आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कमी के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

    कारोबार के शुरुआती चरण में निवेशकों का रुझान सकारात्मक था और सेंसेक्स के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, जैसे ही RBI की नीति से जुड़े प्रमुख संकेत सामने आए, बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त खो दी और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में पहुंच गए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की प्रतिक्रिया केवल रेपो रेट को स्थिर रखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि केंद्रीय बैंक द्वारा आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम करने और महंगाई के अनुमान को बढ़ाने का असर भी बाजार पर दिखाई दिया। इससे निवेशकों के बीच आगामी आर्थिक गतिविधियों और कॉर्पोरेट आय को लेकर सतर्कता बढ़ी, जिसका सीधा असर शेयरों की खरीदारी पर पड़ा।

    बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 200 अंकों से अधिक फिसल गया और बाद में भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दबाव में दिखाई दिया। बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में सबसे अधिक असर देखने को मिला, क्योंकि शुरुआती तेजी के बाद इनमें मुनाफावसूली बढ़ गई। निवेशकों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक की ओर से नीतिगत दरों में किसी प्रकार की राहत मिल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होने से बैंकिंग शेयरों की रफ्तार थम गई।

    दूसरी ओर, तकनीकी और आईटी क्षेत्र के कुछ शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रही। इसके अलावा कुछ निजी वित्तीय और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों ने भी शुरुआती सत्र में मजबूती दिखाई। हालांकि व्यापक बाजार में दबाव बढ़ने के कारण इन शेयरों की तेजी भी सीमित रही।

    गिरावट वाले शेयरों में धातु, ऊर्जा और कुछ बैंकिंग कंपनियों के शेयर प्रमुख रहे। टाटा स्टील, पावरग्रिड, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। इन शेयरों में बिकवाली का असर सूचकांकों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    इस बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर रहा। डॉलर के मुकाबले रुपये में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया और यह लगभग पिछले कारोबारी सत्र के स्तर के आसपास कारोबार करता रहा। इससे संकेत मिला कि मुद्रा बाजार ने केंद्रीय बैंक की घोषणा पर सीमित प्रतिक्रिया दी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बनी रहेगी। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है। फिलहाल RBI के ताजा संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके कारण बाजार में अल्पकालिक दबाव देखने को मिल रहा है।

  • रिकॉर्ड हाई के बाद भी नहीं थम रही इस ₹800 वाले कैपिटल गुड्स स्टॉक की रफ्तार, निवेशकों की नजर नए 52-वीक हाई पर

    रिकॉर्ड हाई के बाद भी नहीं थम रही इस ₹800 वाले कैपिटल गुड्स स्टॉक की रफ्तार, निवेशकों की नजर नए 52-वीक हाई पर

    नई दिल्ली । कैपिटल गुड्स सेक्टर की प्रमुख कंपनी Graphite India के शेयरों में लगातार मजबूत तेजी देखने को मिल रही है। हाल ही में रिकॉर्ड हाई स्तर छूने के बाद भी स्टॉक की रफ्तार थमती नजर नहीं आ रही और बाजार में इसे लेकर सकारात्मक माहौल बना हुआ है। शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भी कंपनी के शेयरों में शानदार बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होता दिखाई दिया।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्टॉक में अभी भी तेजी की संभावना बनी हुई है और आने वाले कारोबारी सत्रों में यह नया 52-वीक हाई बना सकता है। टेक्निकल चार्ट पर शेयर की स्थिति मजबूत मानी जा रही है और इसमें लगातार खरीदारी का रुझान दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर में बने मजबूत मोमेंटम और सकारात्मक संकेतों के चलते शॉर्ट टर्म निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।

    कंपनी के शेयरों ने पिछले कुछ समय में शानदार प्रदर्शन किया है, जिससे यह बाजार के चर्चित स्टॉक्स में शामिल हो गया है। निवेशकों का मानना है कि कैपिटल गुड्स सेक्टर में बढ़ती गतिविधियों और औद्योगिक मांग में सुधार का फायदा कंपनी को मिल सकता है। इसी वजह से बाजार में इस शेयर को लेकर उत्साह लगातार बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि स्टॉक ने हाल के दिनों में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे यह संकेत मिलता है कि बाजार में इसके प्रति निवेशकों का भरोसा मजबूत है। तकनीकी स्तर पर भी शेयर मजबूत सपोर्ट ज़ोन में बना हुआ है और इसमें लगातार वॉल्यूम के साथ खरीदारी देखी जा रही है। यही कारण है कि कई विश्लेषक इसे निकट भविष्य में और ऊपर जाने की संभावना वाला शेयर मान रहे हैं।

    मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए यह स्टॉक आकर्षक बना हुआ है। उनका मानना है कि यदि बाजार का मौजूदा सकारात्मक रुख जारी रहता है तो शेयर आने वाले हफ्तों में और ऊंचे स्तर छू सकता है। हालांकि निवेशकों को बाजार की अस्थिरता और जोखिम को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

    पिछले कुछ महीनों में कंपनी के प्रदर्शन और शेयर की तेजी ने इसे निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। रिकॉर्ड हाई के बाद भी स्टॉक में लगातार बनी मजबूती यह दर्शाती है कि बाजार में इसके प्रति सकारात्मक धारणा कायम है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह शेयर जल्द ही नया 52-वीक हाई बनाकर अपनी तेजी को अगले स्तर तक ले जा पाएगा।

  • शेयर बाजार में दस्तक देने जा रही पैकेजिंग कंपनी, 50 रुपये प्रति शेयर वाला IPO बना चर्चा का विषय

    शेयर बाजार में दस्तक देने जा रही पैकेजिंग कंपनी, 50 रुपये प्रति शेयर वाला IPO बना चर्चा का विषय


    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में एक और नया आईपीओ निवेशकों के लिए अवसर लेकर आने वाला है। पैकेजिंग सेक्टर में काम करने वाली कंपनी आरएफबीएल फ्लेक्सी पैक जल्द ही अपना SME आईपीओ लॉन्च करने जा रही है। कम कीमत और तेजी से बढ़ते पैकेजिंग उद्योग की वजह से यह इश्यू निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी का आईपीओ 12 मई से खुलेगा, जबकि निवेशक 14 मई तक इसमें आवेदन कर सकेंगे।

    इस आईपीओ का प्राइस बैंड 47 रुपये से 50 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी इस इश्यू के जरिए लगभग 35 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। इसके तहत करीब 71 लाख नए शेयर जारी किए जाएंगे। शेयर बाजार में इसकी संभावित लिस्टिंग 19 मई को हो सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कम कीमत वाला यह इश्यू छोटे और मध्यम निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।

    आईपीओ में आवेदन करने के लिए रिटेल निवेशकों को कम से कम 3,000 शेयरों का एक लॉट खरीदना होगा। यदि कोई निवेशक ऊपरी प्राइस बैंड पर आवेदन करता है तो उसे लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश करना पड़ेगा। वहीं बड़े निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश राशि इससे कहीं अधिक रखी गई है। शेयर आवंटन की प्रक्रिया 15 मई तक पूरी होने की उम्मीद है।

    कंपनी पिछले कई वर्षों से फ्लेक्सिबल पैकेजिंग मटेरियल के निर्माण और व्यापार में सक्रिय है। यह मुख्य रूप से प्लास्टिक फिल्म रोल और पैकेजिंग पाउच तैयार करती है, जिनका इस्तेमाल खाद्य पदार्थ, फार्मा और घरेलू उत्पादों की पैकेजिंग में किया जाता है। कंपनी विभिन्न उद्योगों की जरूरतों के अनुसार कस्टमाइज पैकेजिंग समाधान भी उपलब्ध कराती है, जिससे उसकी बाजार में अच्छी पकड़ बनी हुई है।

    भारत में पैकेज्ड फूड, एफएमसीजी और फार्मास्यूटिकल सेक्टर तेजी से विस्तार कर रहे हैं। इन उद्योगों में बढ़ती मांग का सीधा फायदा पैकेजिंग कंपनियों को मिल रहा है। इसी अवसर को देखते हुए कंपनी अपने कारोबार का विस्तार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी आधुनिक मल्टीलेयर पैकेजिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है, जिससे उत्पादों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहती है।

    कंपनी की उत्पादन इकाई गुजरात के हिम्मतनगर में स्थित है। सीमित संसाधनों के बावजूद कंपनी लगातार अपने कारोबार को मजबूत करने में लगी हुई है। आधुनिक तकनीक और मजबूत वितरण नेटवर्क की मदद से कंपनी पैकेजिंग उद्योग में अपनी स्थिति को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है।

    वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में 135 करोड़ रुपये से अधिक की आय दर्ज की थी। इसी अवधि में कंपनी का मुनाफा भी मजबूत रहा, जिससे संकेत मिलता है कि कारोबार लगातार स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है। चालू वित्त वर्ष में भी कंपनी ने संतोषजनक प्रदर्शन किया है और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम जारी रखा है।

    आईपीओ से मिलने वाली राशि का उपयोग मुख्य रूप से कारोबार विस्तार, पूंजीगत खर्च और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने और बाजार में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना है। बढ़ती पैकेजिंग इंडस्ट्री और कम प्राइस बैंड को देखते हुए यह आईपीओ निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।