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  • शर्मिला टैगोर को एक्शन-कट बोलना कुणाल खेमू का सपना था, बोले- लेजेंड को डायरेक्ट कर गर्व महसूस हुआ

    शर्मिला टैगोर को एक्शन-कट बोलना कुणाल खेमू का सपना था, बोले- लेजेंड को डायरेक्ट कर गर्व महसूस हुआ


    नई दिल्ली। कुणाल खेमू इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म वाइब को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद इसकी कहानी और स्टारकास्ट को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ गई है। इस फिल्म की खास बात यह भी है कि कुणाल खेमू ने इसमें अभिनय करने के साथ निर्देशन और लेखन की जिम्मेदारी भी संभाली है। फिल्म में प्रीति जिंटा स्पर्श श्रीवास्तव वंशिका धीर दिनेश लाल यादव और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। शर्मिला टैगोर का इस फिल्म से जुड़ना कुणाल के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वह उनकी सास हैं।

    फिल्म में शर्मिला टैगोर को कास्ट करने के अनुभव को याद करते हुए कुणाल ने बताया कि उनके लिए यह फैसला आसान नहीं था। कुणाल के मुताबिक शर्मिला जी के साथ फिल्म को लेकर बातचीत कुछ ऐसी थी जैसे अंधेरे में तीर चलाना। उन्होंने शर्मिला से फिल्म का सिनोप्सिस मांगे जाने पर उन्हें पूरी कहानी के बारे में बताया। इसके बाद शर्मिला टैगोर ने फिल्म के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। कुणाल के लिए यह पल बेहद खास था क्योंकि वह लंबे समय से किसी दिग्गज कलाकार को बतौर निर्देशक एक्शन और कट बोलने का सपना देख रहे थे।

    कुणाल ने बताया कि शर्मिला टैगोर को डायरेक्ट करना उनके लिए एक ऐसा चेकबॉक्स था जिसे वह काफी समय से पूरा करना चाहते थे। उनके मुताबिक वह इस बात को लेकर बेहद खुश और गर्व महसूस करते हैं कि उन्हें शर्मिला जैसी दिग्गज अभिनेत्री को निर्देशक के तौर पर निर्देशित करने का मौका मिला। उनके लिए यह अनुभव सिर्फ काम का हिस्सा नहीं बल्कि निजी और पेशेवर दोनों स्तरों पर बेहद यादगार रहा।

    वहीं फिल्म की ट्रेलर लॉन्चिंग के दौरान प्रीति जिंटा ने भी कुणाल खेमू से अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रीति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि फिल्म में उन्हें ज्यादा फनी सीन नहीं दिए गए जबकि शूटिंग के दौरान वह कॉमेडी से भरपूर अनुभव की उम्मीद कर रही थीं। उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग आसान नहीं थी और कलाकारों ने कई बार दिन में 16 से 18 घंटे तक काम किया।

    इस दौरान कुणाल की पत्नी और अभिनेत्री सोहा अली खान भी मौजूद थीं। उन्होंने कुणाल के मजाकिया अंदाज की तारीफ करते हुए कहा कि शादी हो या फ्यूनरल कुणाल लोगों को हंसा ही देते हैं। सोहा के मुताबिक दोनों परिवारों में कुणाल सबसे ज्यादा फनी हैं।

    कुणाल खेमू के निर्देशन करियर की बात करें तो उन्होंने साल 2024 में मडगांव एक्सप्रेस के साथ बतौर निर्देशक शुरुआत की थी। प्रतीक गांधी अविनाश तिवारी और दिव्येंदु स्टारर इस फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स से अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी। इसके बाद अब कुणाल वाइब के जरिए निर्देशन में एक और कदम आगे बढ़ा रहे हैं।

    वाइब में कुणाल के साथ काम करने वाली स्टारकास्ट भी काफी दिलचस्प है। फिल्म में शर्मिला टैगोर जैसी दिग्गज अभिनेत्री के साथ प्रीति जिंटा भी नजर आएंगी। फिल्म 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। वहीं कुणाल बतौर अभिनेता गोलमाल 5 में भी नजर आएंगे जिसमें अजय देवगन अक्षय कुमार अरशद वारसी तुषार कपूर और शरमन जोशी जैसे कलाकार शामिल हैं।

  • सैफ-सोहा और सबा की धार्मिक परवरिश पर खुलासा, शर्मिला टैगोर ने सिखाया इस्लाम; बोलीं- अल्लाह का नाम लूंगी

    सैफ-सोहा और सबा की धार्मिक परवरिश पर खुलासा, शर्मिला टैगोर ने सिखाया इस्लाम; बोलीं- अल्लाह का नाम लूंगी


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और पूर्व भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी की शादी हमेशा से ही लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों ने साल 1969 में शादी की थी। शर्मिला टैगोर हिंदू परिवार से आती थीं जबकि मंसूर अली खान पटौदी मुस्लिम परिवार से थे। शादी के बाद शर्मिला ने इस्लाम अपनाया और अपने तीनों बच्चों सैफ अली खान सोहा अली खान और सबा अली खान को भी इस्लाम की शिक्षा दी। अब उनकी बेटी सबा अली खान ने अपने परिवार की धार्मिक परवरिश को लेकर खुलकर बात की है।

    बिग बॉलीवुड बफ के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान सबा अली खान ने बताया कि उनके बचपन में घर का माहौल इस्लामिक परंपराओं से जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि उनकी मां शर्मिला टैगोर ने उन्हें और उनके भाई-बहनों को इस्लाम के बारे में समझाया और रमजान समेत धार्मिक परंपराओं की जानकारी दी। सबा के मुताबिक उनके घर में हिंदू धर्म की पूजा के लिए कोई मंदिर नहीं था और बचपन में उन्होंने घर पर हिंदू धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं किया।

    सबा ने अपनी आस्था के बारे में बताते हुए कहा कि जब वह भगवान के बारे में सोचती हैं तो उनके मन में अल्लाह का नाम आता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी आस्था को लेकर उनका नजरिया दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान से अलग नहीं है। उनका कहना था कि किसी एक धर्म को मानने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति दूसरे धर्मों का सम्मान करना छोड़ दे।

    सबा ने बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें किसी धार्मिक पहचान को जबरन अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया था। उनके अनुसार शर्मिला टैगोर ने बच्चों को इस्लाम से परिचित कराया ताकि उनकी धार्मिक समझ और बुनियाद स्पष्ट रहे। इसके साथ ही बच्चों को अपनी आस्था को समझने और अपने तरीके से आगे बढ़ने की आजादी भी मिली।

    दिलचस्प बात यह है कि भले ही उनके घर में इस्लामिक परंपराओं का पालन होता था लेकिन परिवार में दूसरे धर्मों के त्योहारों को भी मनाया जाता था। सबा ने बताया कि वह होली दिवाली और क्रिसमस जैसे त्योहार मनाते हुए बड़ी हुई हैं। उनके मुताबिक उनके भाई और बहन ने अलग-अलग धर्मों में शादी की और परिवार में अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं के लिए जगह रही। यही वजह है कि उनके परिवार में धार्मिक विविधता हमेशा दिखाई देती रही है।

    सबा के बयान से यह भी साफ होता है कि उनके परिवार में धर्म को लेकर व्यक्तिगत आस्था को महत्व दिया गया। उन्होंने कहा कि आस्था बेहद निजी विषय है और इसे किसी व्यक्ति पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उनके मुताबिक उनकी मां ने उन्हें इस्लाम के बारे में बताया लेकिन आगे चलकर अपनी आस्था को लेकर चुनाव करने की स्वतंत्रता भी दी।

    शर्मिला टैगोर ने अपने फिल्मी करियर के दौरान हिंदी सिनेमा में खास पहचान बनाई थी। 1960 और 1970 के दशक में उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात तत्कालीन भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी से हुई। दोनों ने 1969 में शादी की। इस शादी के बाद शर्मिला टैगोर ने इस्लाम अपनाया और उनके परिवार की धार्मिक परवरिश भी उसी पृष्ठभूमि में हुई।

    आज सैफ अली खान और सोहा अली खान फिल्म इंडस्ट्री के जाने-पहचाने नाम हैं जबकि सबा अली खान अपने परिवार और उससे जुड़ी यादों को सोशल मीडिया पर साझा करती रहती हैं। सबा का ताजा बयान एक बार फिर बताता है कि पटौदी परिवार में अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का किस तरह मेल रहा है।

  • शर्मिला टैगोर और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच क्या है रिश्ता? बेटी सोहा अली खान ने बताया पूरा सच

    शर्मिला टैगोर और रवींद्रनाथ टैगोर के बीच क्या है रिश्ता? बेटी सोहा अली खान ने बताया पूरा सच


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर का सरनेम हमेशा चर्चा का विषय रहा है। कई लोग अक्सर यह सवाल करते रहे हैं कि क्या उनका सीधा संबंध महान साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर से है। इस जिज्ञासा पर अब उनकी बेटी और अभिनेत्री सोहा अली खान ने विस्तार से जानकारी दी है।
    सोहा अली खान ने बताया कि टैगोर परिवार का रिश्ता रवींद्रनाथ टैगोर के विस्तृत वंश से जुड़ा हुआ है, लेकिन यह कोई सीधा पिता-पुत्र या नजदीकी रक्त संबंध नहीं है। दरअसल, शर्मिला टैगोर का संबंध टैगोर परिवार की उस शाखा से है, जो ऐतिहासिक रूप से बंगाल के प्रतिष्ठित टैगोर वंश का हिस्सा रही है। इस वंश में कला, साहित्य और संस्कृति से जुड़े कई महान व्यक्तित्व शामिल रहे हैं।
    सोहा ने यह भी बताया कि रवींद्रनाथ टैगोर के परिवार की कई पीढ़ियों में अलग-अलग शाखाएं विकसित हुईं, जिनमें से कुछ कला और संस्कृति के क्षेत्र में आगे बढ़ीं। शर्मिला टैगोर का सरनेम उसी व्यापक सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है, न कि रवींद्रनाथ टैगोर के सीधे वंश का।
    रवींद्रनाथ टैगोर भारतीय साहित्य के सबसे महान नामों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल ‘गीतांजलि’ जैसी अमर रचनाएं दीं, बल्कि भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान भी लिखे। ऐसे में उनके नाम से जुड़ी किसी भी विरासत को लेकर लोगों की उत्सुकता स्वाभाविक है। इसी वजह से शर्मिला टैगोर के नाम को लेकर भी अक्सर सवाल उठते रहे हैं।
    सोहा अली खान ने यह भी कहा कि उनके परिवार में सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत बहुत मजबूत रही है, लेकिन हर पीढ़ी ने अपनी अलग पहचान बनाई है। शर्मिला टैगोर ने भी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अलग मुकाम हासिल किया, जबकि उनका सरनेम ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा भर है।
    गौरतलब है कि शर्मिला टैगोर भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में से हैं जिन्होंने अपने दौर में ग्लैमर और क्लासिक सिनेमा दोनों में संतुलन बनाए रखा। वहीं सोहा अली खान भी अपने इंटरव्यू और पॉडकास्ट के जरिए परिवार, रिश्तों और विरासत पर खुलकर बात करती रही हैं।
    इस खुलासे के बाद यह साफ हो जाता है कि टैगोर सरनेम एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, न कि किसी सीधे पारिवारिक रिश्ते का प्रमाण।