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  • शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर मुकेश खन्ना की प्रतिक्रिया, वंदे मातरम को लेकर धार्मिक स्वीकार्यता के तर्क पर जताई असहमति

    शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर मुकेश खन्ना की प्रतिक्रिया, वंदे मातरम को लेकर धार्मिक स्वीकार्यता के तर्क पर जताई असहमति

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम को लेकर जारी बहस के बीच अभिनेता मुकेश खन्ना ने अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए हैं। खन्ना ने कहा कि दूसरे धर्मों से जुड़ी चिंताओं के आधार पर वंदे मातरम को देखने का नजरिया प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को धर्म, आस्था और राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए अपनी स्पष्ट राय रखी।

    शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा था कि कुछ अन्य धर्मों के लोगों के लिए इसके धार्मिक संदर्भों को स्वीकार करना कठिन हो सकता है। इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मुकेश खन्ना ने कहा कि वह उनकी व्यक्तिगत समझ या दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि दूसरे धर्मों की चिंताओं को इस गीत के संदर्भ में प्रमुखता क्यों दी जानी चाहिए।

    खन्ना ने शर्मिला टैगोर की पारिवारिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने उनके पटौदी परिवार में विवाह और इस्लामी पहचान से जुड़े संदर्भों को सामने रखते हुए सवाल किया कि लंबे समय तक भारतीय और बंगाली सांस्कृतिक परिवेश में रहने के बाद अब वंदे मातरम को लेकर दूसरे धर्मों की स्वीकार्यता का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।

    उन्होंने शर्मिला टैगोर के बंगाली परिवेश का भी जिक्र किया। खन्ना के अनुसार वह बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने उनके बंगाली सिनेमा से जुड़े करियर का उल्लेख करते हुए पूछा कि वंदे मातरम के संदर्भ में धार्मिक स्वीकार्यता को लेकर यह चिंता अब क्यों सामने आ रही है।

    मुकेश खन्ना ने अपनी धार्मिक समझ बताते हुए कहा कि हिंदू परंपरा में ईश्वर को निराकार माना जाता है और अलग-अलग देवी-देवताओं के माध्यम से उसी परम सत्ता की आराधना की जाती है। उन्होंने हनुमान, शिव, राम और कृष्ण जैसे आराध्य रूपों का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी।

    उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की धार्मिक मान्यता उन्हें केवल अपने ईश्वर के सामने झुकने की अनुमति देती है। खन्ना ने इस दृष्टिकोण को वंदे मातरम को लेकर उठने वाली आपत्तियों से जोड़कर अपनी असहमति जाहिर की।

    हालांकि, मुकेश खन्ना ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को शारीरिक रूप से सिर झुकाने या किसी विशेष तरीके से सम्मान व्यक्त करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार भारत माता के सामने सिर झुकाना उनकी अपनी आस्था और राष्ट्र के प्रति सम्मान का तरीका है, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति पर ऐसा करने के लिए दबाव नहीं होना चाहिए।

    खन्ना ने वंदे मातरम के गायन को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति का इसे नहीं गाना अलग बात है, लेकिन पूरे गीत के गायन पर ही आपत्ति जताना उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने इस बहस को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी जोड़ते हुए शर्मिला टैगोर की मंशा पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ लोग मुस्लिम समुदाय के समर्थन को ध्यान में रखकर अपनी स्थिति रखते हैं।

    वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से लंबे समय से जुड़ा रहा है। इसी कारण इसके धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। मुकेश खन्ना की टिप्पणी ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर मनोरंजन जगत के चर्चित चेहरों के बीच सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।

  • ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी

    ग्लासगो में भारत का परचम लहराया शर्मिला बनीं गोल्डन गर्ल चार नए पदकों के साथ मेडल टैली में मजबूत हुई दावेदारी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार देर रात भारतीय दल ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित करते हुए चार और पदक अपने नाम किए। इन उपलब्धियों में सबसे बड़ी सफलता पैरा एथलीट शर्मिला ने दिलाई जिन्होंने महिला शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को प्रतियोगिता का दूसरा गोल्ड दिलाया। इसके अलावा भारत को दो रजत और एक कांस्य पदक भी मिला जिससे कुल पदकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई। भारत अब दो स्वर्ण पांच रजत और तीन कांस्य पदकों के साथ पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

    महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग के फाइनल में शर्मिला ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने छह प्रयासों में लगातार बेहतरीन थ्रो किए और तीसरे प्रयास में 9 दशमलव 81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उनका इस सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। पूरे मुकाबले में उन्होंने आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया जिससे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी उनके आसपास भी नहीं पहुंच सके।

    इस स्पर्धा में घाना की जिनाबु इसाह ने 8 दशमलव 65 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक हासिल किया जबकि भारत की शिल्पा कंचुगरकोप्पालु शायला ने 7 दशमलव 26 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तरह एक ही स्पर्धा में भारत ने स्वर्ण और कांस्य दोनों पदक जीतकर शानदार उपलब्धि दर्ज की।

    एथलेटिक्स में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। पुरुषों की हाई जंप स्पर्धा में सर्वेश अनिल कुशारे ने 2 दशमलव 25 मीटर की ऊंची छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। गोल्ड मेडल की दौड़ बेहद रोमांचक रही क्योंकि सर्वेश और जमैका के रोमेन बेकफोर्ड दोनों ने समान ऊंचाई पार की। हालांकि प्रयासों की संख्या के आधार पर स्वर्ण पदक जमैका के खिलाड़ी के नाम रहा जबकि सर्वेश को रजत से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

    वेटलिफ्टिंग में भी भारत ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। पुरुषों के 79 किलोग्राम वर्ग में वल्लूरी अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता। उन्होंने स्नैच में 149 किलोग्राम का गेम रिकॉर्ड बनाया और क्लीन एंड जर्क में 181 किलोग्राम भार उठाया। हालांकि मलेशिया के एरी हिदायत मुहम्मद ने कुल 331 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला बेहद कांटे का रहा और अजय बाबू केवल एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए।

    भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि देश के खिलाड़ी अब हर बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर दमदार चुनौती पेश कर रहे हैं। पैरा खेलों से लेकर एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग तक भारतीय प्रतिभाएं लगातार पदक जीतकर देश का मान बढ़ा रही हैं। आने वाले दिनों में भी कई स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की उम्मीद बनी हुई है और खेल प्रेमियों की नजर अब अगले मुकाबलों पर टिकी है।