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  • राहुल गांधी को लेकर गुहा–थरूर में टकराव, सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी से बढ़ी सियासी बहस

    राहुल गांधी को लेकर गुहा–थरूर में टकराव, सोशल मीडिया पर बयानबाज़ी से बढ़ी सियासी बहस


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व और राजनीतिक क्षमता को लेकर इतिहासकार रामचंद्र गुहा और कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस देखने को मिली है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब रामचंद्र गुहा ने एक इंटरव्यू में राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए थे। इसके बाद शशि थरूर ने सार्वजनिक रूप से उनका बचाव किया, जिसके जवाब में गुहा ने फिर से प्रतिक्रिया देते हुए अपने रुख को दोहराया।

    रामचंद्र गुहा ने सोशल मीडिया मंच पर अपनी टिप्पणी में कहा कि राहुल गांधी के बचाव में दिए गए तर्क उनके मुख्य सवालों का उत्तर नहीं देते। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हालिया चुनावी प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और तथ्यों के आधार पर ही राजनीतिक नेतृत्व का मूल्यांकन किया जाना चाहिए। गुहा ने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी को लगातार आम चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इतिहासकार ने आगे कहा कि उनके अनुसार कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति में पिछले वर्षों में गिरावट आई है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कई राज्यों में पार्टी की सत्ता सीमित हो गई है और संगठनात्मक प्रभाव भी पहले की तुलना में कमजोर हुआ है। गुहा ने यह सवाल भी उठाया कि जब किसी पार्टी का नेतृत्व लंबे समय तक चुनावी सफलता हासिल नहीं कर पाता, तो उस नेतृत्व पर चर्चा होना स्वाभाविक है।

    दूसरी ओर, शशि थरूर ने रामचंद्र गुहा के तर्कों का जवाब देते हुए अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि किसी नेता के अनुभव को केवल प्रशासनिक पृष्ठभूमि के आधार पर नहीं आंका जा सकता। थरूर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे राष्ट्रपति बने थे, तब उनके पास भी सीमित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुभव था, लेकिन उन्होंने बाद में नेतृत्व क्षमता साबित की।

    थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करने के लिए प्रारंभिक अनुभव हमेशा निर्णायक नहीं होता। उन्होंने तर्क दिया कि राजनीतिक नेतृत्व को व्यापक दृष्टिकोण से देखना चाहिए और केवल शुरुआती पृष्ठभूमि के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

    इस पूरे विवाद के बाद रामचंद्र गुहा ने एक बार फिर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके सवालों का मूल उद्देश्य नेतृत्व के परिणामों पर चर्चा करना था। उन्होंने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार और संगठनात्मक कमजोरी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    गुहा ने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति में उल्लेखनीय बदलाव आया है। उनके अनुसार, पार्टी की राज्यों में मौजूदगी पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। उन्होंने यह सवाल भी दोहराया कि जब राजनीतिक परिणाम स्पष्ट रूप से सामने हों, तो नेतृत्व की भूमिका पर चर्चा होना आवश्यक है।

    इस बहस ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, जहां अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। कुछ लोग इसे राजनीतिक विश्लेषण के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ इसे नेतृत्व और उत्तरदायित्व पर बहस मान रहे हैं।

    फिलहाल, इस विवाद पर किसी भी पक्ष ने अपने रुख में बड़ा बदलाव नहीं किया है और सोशल मीडिया पर यह चर्चा अभी भी जारी है।

  • शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा

    शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल के दिनों में अपने राजनीतिक रुख में बदलाव दिखाया है और पार्टी नेतृत्व के साथ अपने संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं। बीते कुछ समय से थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की अटकलें आम रही हैं। विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने कई मौकों पर मोदी सरकार की तारीफ की थी जिससे राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी और पार्टी से दूरी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
    हालांकि अब शशि थरूर ने अपने रुख में बदलाव किया है। उन्होंने पार्टी का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है और हाल ही में राहुल गांधी द्वारा मनरेगा योजना पर पोस्ट साझा किया है। थरूर ने इसे री-शेयर करते हुए लिखा कि मनरेगा देश की सबसे सफल विकास योजनाओं में शामिल रही है और ग्रामीण गरीबों के लिए यह एक अहम सामाजिक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को खत्म करना पीछे की ओर उठाया गया कदम होगा जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। मनरेगा योजना को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है।
    मोदी सरकार ने मनरेगा की जगह VB-GRAM G बिल संसद में लाकर पारित किया जिसे विपक्षी दल ग्रामीण हितों के खिलाफ मान रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि यह नया कानून मनरेगा की अधिकार और मांग पर आधारित गारंटी व्यवस्था को समाप्त करता है और इसे केंद्र से संचालित राशन-आधारित योजना में बदल देता है। शशि थरूर ने राहुल गांधी के इस संदेश को साझा कर इसे समर्थन दिया।राहुल गांधी ने पोस्ट में मनरेगा के ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस योजना ने ग्रामीणों को अपने काम का सही मूल्य दिलाने में मदद की मजदूरी में सुधार किया पलायन को कम किया और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। उन्होंने चेतावनी दी कि VB-GRAM G इन उपलब्धियों को कमजोर करता है और कोविड काल में मनरेगा की उपयोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि इसने लाखों लोगों को भूख और कर्ज से बचाया।
    थरूर का रुख पहले मोदी सरकार की सराहना करने वाला था लेकिन अब वे पार्टी के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में केरल निकाय चुनावों के दौरान उन्होंने भाजपा की तारीफ की थी लेकिन उसके बाद कई मौकों पर कांग्रेस का समर्थन किया। लोकसभा में भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन शांति विधेयक 2025 पर चर्चा में उन्होंने इसके खामियों को उजागर किया और कहा कि यह रेडियोधर्मी पदार्थों और परमाणु अपशिष्ट से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करता है। इसके अलावा थरूर ने केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव IFFK में 19 फिल्मों के प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी न देने की आलोचना की। उन्होंने इसे सिनेमाई अशिक्षा और नौकरशाही की अत्यधिक सतर्कता करार दिया। थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुमति देने का अनुरोध भी किया। साथ ही उन्होंने फिल्म अभिनेता देव आनंद की फिल्म हरे रामा हरे
  • कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम  बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है

    कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है


    नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद और आंतरिक खींचतान को लेकर चल रही अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी के साथ उनके रिश्ते पूरी तरह सामान्य हैं। हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस की रैली में उनकी गैरमौजूदगी और कुछ अहम बैठकों में शामिल न होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

    इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने चर्चित समाचार एजेंसी  से बातचीत में साफ कहा कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है। रैली में शामिल न हो पाने के सवाल पर उन्होंने कहा मैं जरूर अटेंड करता क्यों नहीं करता? लेकिन उस दिन मैं विदेश में था। यह कार्यक्रम मैंने करीब छह महीने पहले तय किया था। थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी गैरहाजिरी को पार्टी से दूरी या असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है तो थरूर ने दो टूक जवाब दिया बिल्कुल ठीक है। मुझे यह कहने की जरूरत क्यों पड़े? मेरी तरफ से सब कुछ ठीक है। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति भरोसे और प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    इस बीच सोशल मीडिया मंच ‘एक्स पर एक यूजर द्वारा किए गए विश्लेषण ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी। यूजर ने अपने लंबे पोस्ट में शशि थरूर और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच कथित वैचारिक विरोधाभास की बात कही थी। पोस्ट में यह तर्क दिया गया था कि यह विरोधाभास दरअसल कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद दो अलग-अलग वैचारिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है।

    यूजर के अनुसार समस्या थरूर और राहुल गांधी के सह-अस्तित्व में नहीं है बल्कि कांग्रेस की उस अक्षमता में है जिसमें पार्टी अलग-अलग विचारधाराओं को चुनने एकजुट करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से लागू करने में सफल नहीं हो पा रही है। इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने इसे विचारशील विश्लेषण करार दिया।

    थरूर ने लिखा इस विचारशील विश्लेषण के लिए धन्यवाद। कांग्रेस पार्टी में हमेशा एक से अधिक प्रवृत्तियां रही हैं। आपका आकलन निष्पक्ष है और वर्तमान वास्तविकता की एक निश्चित धारणा को प्रतिबिंबित करता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर वैचारिक विविधता को एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया मानते हैं न कि टकराव का कारण।

    गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस सांसदों की एक अहम बैठक में भी शशि थरूर शामिल नहीं हुए थे। इस पर भी सवाल उठे थे। हालांकि चर्चित सूत्रों के हवाले से बताया कि थरूर ने बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी पहले ही पार्टी को दे दी थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वह कोलकाता में प्रभा खैतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थे।

    कुल मिलाकर शशि थरूर के हालिया बयानों और स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच किसी बड़े टकराव की बात फिलहाल केवल अटकलों तक सीमित है। थरूर ने न सिर्फ अपनी गैरहाजिरी के कारण गिनाए बल्कि यह भी जताया कि पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं का होना कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में उनके बयान कांग्रेस के भीतर एकता और संवाद के महत्व को रेखांकित करते हैं।