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  • विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक

    विजयादशमी पर इंदौर में शस्त्र पूजन के साथ पुलिस को बड़ा तोहफा, लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम से लैस होंगी 50 आधुनिक बाइक


    इंदौर । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंगलवार को विजयादशमी के अवसर पर इंदौर की डीआरपी लाइन में शस्त्र पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में इंदौर पुलिस को होंडा कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड के तहत 50 हाईटेक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इन आधुनिक बाइकों के मिलने से शहर में पुलिस की गश्त को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिसकर्मियों को तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी। इन बाइकों में पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इंदौर की डीआरपी लाइन में हर साल विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का आयोजन किया जाता है। इस बार मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए परिसर में विशेष तैयारियां की गई हैं। पूजा स्थल को सजाया गया है और कार्यक्रम के लिए अन्य व्यवस्थाएं भी पूरी कर ली गई हैं। आयोजन में पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश सिंह और मयंक अवस्थी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। शस्त्र पूजन विजयादशमी की परंपरा का हिस्सा है और पुलिस विभाग में इसे विशेष महत्व दिया जाता है।

    कार्यक्रम के दौरान पुलिस को मिलने वाली 50 बाइक की खासियत भी चर्चा में है। ये 350 सीसी क्षमता वाली बाइक होंगी जिनमें पुलिस लाइट और अनाउंसमेंट सिस्टम लगाया गया है। जरूरत पड़ने पर पुलिसकर्मी इन बाइकों पर लगे सिस्टम के माध्यम से लोगों तक जरूरी संदेश पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा बाइकों में हेलमेट रखने की व्यवस्था भी की गई है। इन सुविधाओं का उद्देश्य पुलिस की गश्त को अधिक सुविधाजनक बनाना और आपात स्थिति में मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करने में मदद करना है।

    शहर के कई हिस्सों में ऐसी संकरी गलियां और भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं जहां बड़े पुलिस वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। ऐसे स्थानों पर बाइक से गश्त करना अपेक्षाकृत आसान होता है। नई बाइक मिलने के बाद पुलिसकर्मी संकरी सड़कों और घनी आबादी वाले इलाकों में बेहतर तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। किसी घटना या संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर मौके तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। इससे पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    पुलिस की गश्त व्यवस्था में दोपहिया वाहनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। बड़े वाहनों की तुलना में बाइक से तंग रास्तों पर पहुंचना और भीड़ के बीच से निकलना आसान होता है। अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए पुलिसकर्मी भीड़ को दिशा-निर्देश देने या जरूरी सूचना प्रसारित करने का काम भी कर सकेंगे। हालांकि इन सुविधाओं का वास्तविक असर इनके उपयोग और तैनाती के तरीके पर निर्भर करेगा। पुलिस विभाग की ओर से इन बाइकों का इस्तेमाल शहर की जरूरतों के अनुसार किया जाएगा।

    विजयादशमी के अवसर पर इंदौर के विभिन्न थानों में भी शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संबंधित थानों में अधिकारी अपने स्तर पर पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं डीआरपी लाइन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में होने वाला आयोजन खास रहेगा क्योंकि इसी अवसर पर पुलिस को 50 आधुनिक बाइक भी सौंपी जाएंगी। इस पहल से इंदौर पुलिस की गश्त व्यवस्था को बेहतर बनाने और शहर के अलग-अलग इलाकों में तेजी से पहुंचने की क्षमता बढ़ाने की उम्मीद है।

  • MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश

    MP में दशहरे पर शस्त्र पूजन की परंपरा, भोपाल पुलिस लाइन में जुटे जनप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी, सत्य-धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश


    भोपाल । विजयादशमी के अवसर पर मध्य प्रदेश में मंगलवार को शस्त्र पूजन के आयोजन किए गए। राजधानी भोपाल में नेहरू नगर स्थित पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विश्वास सारंग और सांसद आलोक शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक विधि-विधान से शस्त्रों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की। विजयादशमी पर आयोजित इस कार्यक्रम में सनातन परंपराओं और शस्त्र पूजन के महत्व पर भी जोर दिया गया।

    भोपाल पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में महापौर मालती राय विधायक भगवानदास सबनानी कमिश्नर कर्मवीर शर्मा पुलिस कमिश्नर संजय कुमार और संयुक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पूजा में भाग लिया। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति साहस और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी परंपरा के तहत भोपाल में भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने समाज और प्रदेश में शांति तथा समृद्धि बनाए रखने की कामना की।

    मंत्री विश्वास सारंग ने विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व बताया। उन्होंने कहा कि यह त्योहार पूरे विश्व में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उनके मुताबिक विजयादशमी लोगों को सत्य धर्म और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने शस्त्रों को शक्ति साहस और राष्ट्र की सुरक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। यह परंपरा लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश देती है।

    सारंग ने कहा कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे लोगों को अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी बोध कराती हैं। विजयादशमी के अवसर पर शस्त्रों की पूजा इसी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस दिन लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का संकल्प लेते हैं और समाज में सकारात्मकता तथा सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

    भोपाल के अलावा मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी पर शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन आयोजनों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। शस्त्र पूजन की परंपरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसमें शक्ति के साथ जिम्मेदारी और सुरक्षा के भाव को भी जोड़ा जाता है। पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने आयोजन को औपचारिक स्वरूप दिया।

    विजयादशमी का पर्व देशभर में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है तो कहीं शस्त्र पूजन के माध्यम से शक्ति और कर्तव्य के महत्व को याद किया जाता है। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम भी इसी परंपरा का हिस्सा रहा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने प्रदेश में सुख-समृद्धि शांति और उन्नति की कामना की।

  • विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    विजयादशमी पर मध्यप्रदेश में होगा शस्त्र-पूजन, इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव करेंगे पूजा, 31 जिलों में मंत्री संभालेंगे जिम्मेदारी

    मध्यप्रदेश: में विजयादशमी के अवसर पर 20 अक्टूबर 2026 को प्रदेशव्यापी शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस आयोजन के लिए जिलों के अनुसार जिम्मेदारियां तय की हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर शस्त्र-पूजन करेंगे। वहीं, प्रदेश के 31 जिलों में मंत्री और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। शेष 24 जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।

    सरकार की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा को आगे बढ़ाना और सुरक्षा, साहस तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान के भाव को रेखांकित करना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परंपरा को देश की सैन्य शक्ति, सुरक्षा और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया है। उनका कहना है कि शस्त्र-पूजन को साहस, आत्मरक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की भावना से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

    इन जिलों में प्रमुख नेता करेंगे शस्त्र-पूजन
    राज्य सरकार ने कई जिलों में मंत्रियों और प्रमुख जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की जिम्मेदारी सौंपी है। इंदौर में मुख्यमंत्री मोहन यादव शस्त्र-पूजन करेंगे। ग्वालियर में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे। मंदसौर में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और रीवा में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल शस्त्र-पूजन में शामिल होंगे।

    राजधानी भोपाल में मंत्री विश्वास सारंग पूजा-अर्चना करेंगे। धार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। नरसिंहपुर में मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और जबलपुर में मंत्री राकेश सिंह शस्त्र-पूजन करेंगे। सीहोर में मंत्री करण सिंह वर्मा तथा नर्मदापुरम में मंत्री उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम की जिम्मेदारी संभालेंगे।इनके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारियां दी गई हैं। सरकार की योजना के अनुसार, कुल 31 जिलों में मंत्री स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    24 जिलों में प्रशासन संभालेगा जिम्मेदारी
    प्रदेश के बाकी 24 जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को दी गई है। इन स्थानों पर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मिलकर आयोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। इस तरह सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है।प्रशासनिक अधिकारियों की भागीदारी के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित कार्यक्रम संबंधित जिलों में आयोजित हो सके। शस्त्र-पूजन में सुरक्षा से जुड़े विभागों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन का धार्मिक महत्व
    सनातन परंपरा में शस्त्रों को शक्ति, साहस और आत्मरक्षा का प्रतीक माना जाता है। विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन की परंपरा का उद्देश्य शक्ति के सदुपयोग और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की भावना को मजबूत करना है। इस अवसर पर सैनिक और पुलिसकर्मी अपने हथियारों की पूजा करते हैं, जबकि कई अन्य क्षेत्रों में लोग अपने कामकाज से जुड़े औजारों का पूजन करते हैं।


    शस्त्र-पूजन की एक मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने हथियार शमी के पेड़ के नीचे छिपाए थे। अज्ञातवास पूरा होने के बाद अर्जुन ने शमी के पेड़ से अपने शस्त्र निकाले और राजा विराट के राज्य की रक्षा के लिए कौरवों की सेना का सामना किया। इसी मान्यता के कारण कई स्थानों पर विजयादशमी के दिन शमी के पेड़ और शस्त्रों की पूजा की जाती है।

    राम और दुर्गा की विजय से जुड़ा पर्व
    विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध की मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। दोनों प्रसंग बुराई, अन्याय और अधर्म पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं। इसी भावना के साथ शस्त्र-पूजन में शक्ति का इस्तेमाल सही उद्देश्यों, सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए करने का संकल्प लिया जाता है।

    मध्यप्रदेश में होने वाला यह आयोजन धार्मिक परंपरा के साथ-साथ सुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व को भी सामने रखेगा। प्रदेश के सभी 55 जिलों में तय व्यवस्था के अनुसार कार्यक्रम संपन्न कराने की जिम्मेदारी मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है।