Tag: Sheetla Mata Temple Accident

  • 16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च

    16 मौतों से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ा सहारा, सातऊं समिति उठाएगी 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक हादसे से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए ग्राम सातऊं शीतला माता कल्याण समिति आगे आई है। समिति ने मृतकों के परिजनों और घायलों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही हादसे से प्रभावित 40 परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने की भी घोषणा की गई है। इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो हादसे के बाद आर्थिक और पारिवारिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुए इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया जबकि घायल लोगों और उनके परिजनों के सामने इलाज तथा रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी चुनौतियां खड़ी हो गईं। पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समिति ने सहायता देने की योजना तैयार की है। इसके लिए अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई जिसमें सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहत संबंधी निर्णय लिए।

    समिति के फैसले के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। वहीं हादसे में घायल हुए लोगों के परिवारों को 10 हजार रुपये की मदद देने का निर्णय लिया गया है। इस सहायता का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा देना है। किसी परिवार के लिए अचानक अपने कमाने वाले सदस्य या प्रियजन को खो देना बेहद कठिन परिस्थिति होती है। ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की ओर से मिलने वाली सहायता उन्हें कुछ राहत दे सकती है।

    समिति ने प्रभावित परिवारों की बेटियों की शादी का पूरा खर्च उठाने का भी निर्णय लिया है। इस योजना के तहत 40 प्रभावित परिवारों को लाभ देने की बात कही गई है। शादी जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक आयोजन का खर्च उठाना कई परिवारों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है। हादसे के बाद जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है उनके लिए यह सहायता महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि सहायता प्राप्त करने वाले परिवारों की पहचान और खर्च से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

    इस संबंध में आयोजित बैठक में समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर के साथ मजबूत सिंह गजराज सिंह जितेंद्र सिंह और कृष्णकांत सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। बैठक में हादसे से प्रभावित परिवारों की परिस्थितियों पर चर्चा की गई और उनकी मदद के लिए सामूहिक रूप से काम करने का संकल्प लिया गया। समिति के सदस्यों ने सहायता संबंधी निर्णय सर्वसम्मति से लिए ताकि पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई जा सके।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने ग्वालियर में कई परिवारों को गहरे दुख और कठिनाइयों में डाल दिया है। ऐसे में आर्थिक मदद के साथ बेटियों की शादी का खर्च उठाने का फैसला प्रभावित परिवारों के लिए सामाजिक सहयोग का उदाहरण है। अब सहायता किस प्रक्रिया के तहत और कब तक परिवारों तक पहुंचाई जाएगी इस पर नजर रहेगी। फिलहाल समिति के इस निर्णय से हादसे के पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। 

  • ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा

    ग्वालियर मंदिर हादसे की जांच तेज, प्रशासन ने मांगे दस्तावेज और सबूत, 16 लोगों की मौत के कारणों का होगा खुलासा


    ग्वालियर । ग्वालियर के ऐतिहासिक शीतला माता मंदिर के मुख्य द्वार पर हुए दर्दनाक ट्रक हादसे की मजिस्ट्रियल जांच शुरू हो गई है। हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद अब प्रशासन घटना के कारणों और संभावित लापरवाही का पता लगाने में जुट गया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान ने जांच की जिम्मेदारी अपर जिला दंडाधिकारी यानी ADM सीबी प्रसाद को सौंपी है। प्रशासन ने आम लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से अपील की है कि वे घटना से जुड़ी जानकारी दस्तावेज और अन्य साक्ष्य उपलब्ध कराएं ताकि जांच में सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया जा सके।

    यह हादसा 18 अक्टूबर की रात करीब एक से डेढ़ बजे के बीच हुआ था। जानकारी के अनुसार मंदिर के मुख्य द्वार के पास तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक की चपेट में आने से 16 लोगों की जान चली गई थी। घटना के बाद से ही हादसे की परिस्थितियों और संभावित चूक को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब मजिस्ट्रियल जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कौन से कारण जिम्मेदार रहे। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    प्रशासन ने हादसे से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए 26 से 28 अक्टूबर तक तीन दिन निर्धारित किए हैं। जांच अधिकारी ADM सीबी प्रसाद के अनुसार ऐसे व्यक्ति जिनका मामले से कोई व्यक्तिगत हित या विवाद नहीं है वे घटना से संबंधित जानकारी और साक्ष्य दे सकते हैं। इसके लिए प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित लोग 26 27 और 28 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ADM न्यायालय कक्ष क्रमांक 201 ग्वालियर में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकेंगे। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जानकारी एकत्र करना है।

    जांच में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हादसे के समय मंदिर के आसपास मौजूद लोगों के पास घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी हो सकती है। इसके अलावा उपलब्ध दस्तावेज तस्वीरें और वीडियो भी जांच के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। खबर में लाइव वीडियो को भी जांच का संभावित आधार बताया गया है। ऐसे दृश्य उपलब्ध होने पर उनसे हादसे के समय ट्रक की स्थिति घटनास्थल की परिस्थितियों और घटनाक्रम को समझने में मदद मिल सकती है। हालांकि किसी भी वीडियो या अन्य सामग्री की प्रामाणिकता और उपयोगिता जांच के दौरान परखी जाएगी।

    मजिस्ट्रियल जांच का उद्देश्य केवल हादसे की परिस्थितियों का पता लगाना ही नहीं बल्कि संभावित लापरवाही और सुरक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल करना भी है। मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है इसलिए प्रवेश द्वार के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और वाहनों की आवाजाही जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ेंगे। प्रशासन की अपील है कि जिन लोगों के पास घटना से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी है वे निर्धारित तारीख और समय पर अपने साक्ष्य प्रस्तुत करें।

    शीतला माता मंदिर हादसे ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब लोगों की नजर मजिस्ट्रियल जांच पर रहेगी कि हादसे के वास्तविक कारण क्या सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम सुझाए जाते हैं। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक किसी संभावित कारण या जिम्मेदारी को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।

  • ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल

    ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बनी हुई है। हादसे में अपनों को खोने वाले परिजन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर दौरे से पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए। जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने अस्पताल से लेकर पीड़ित परिवारों के घरों तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले संबंधित स्थानों पर पहुंचे और तैयारियों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। हालांकि कई परिवारों के साथ उनकी मुलाकात तीन से सात मिनट तक ही रही। इस दौरान परिजनों ने नौकरी आवास और आर्थिक सहायता की मांग रखी। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से सामने नहीं आए।

    मुख्यमंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के दौरान बाहर मौजूद कुछ घायलों और उनके परिजनों ने इलाज को लेकर नाराजगी जताई। शिवम ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा जहां 15 हजार रुपये खर्च हुए। उनका कहना था कि प्रशासन मुफ्त इलाज की बात कर रहा है लेकिन खर्च की गई रकम वापस नहीं मिली। वहीं कोमल ने शिकायत की कि घायल कल्पना परिहार को 24 घंटे तक जरूरी पट्टा नहीं मिला और उन्हें बाजार से 15 हजार रुपये में खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शैलेंद्र शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले अस्पताल में पंखे लगाए गए जाले हटाए गए और बेडशीट बदली गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने की भी शिकायत की।

    महेशपुरा में मुख्यमंत्री शाम करीब 4 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। इससे पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को समझाते नजर आए। मुख्यमंत्री के काफिले के आने की सूचना मिलने पर उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दिव्यांश के पिता अशोक कुशवाह और उनके बेटे शुभम को सांत्वना दी। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के मकान और आवास योजना के बारे में पूछा। अशोक कुशवाह ने बताया कि उनका एक कमरे का अपना मकान है और उन्होंने शुभम के लिए नौकरी की मांग रखी। करीब तीन मिनट में यह मुलाकात समाप्त हो गई।

    इसके बाद मुख्यमंत्री महलगांव में मृतक सतेंद्र गुर्जर के घर पहुंचे। वहां उनके पिता जगदीश गुर्जर भावुक हो गए। सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार मुख्यमंत्री ने जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा और आर्थिक सहायता का चेक देकर आगे बढ़ गए। गल्ला कोठार में मुख्यमंत्री ने मृतक प्रिंस और निकेश के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका पर आए संकट की जानकारी दी और नौकरी तथा आवास की मांग रखी।

    गदाईपुरा के शिवनगर में मुख्यमंत्री ने मृतक हेमंत राठौर पवन राठौर और लव अमन तथा अशोक त्यागी के परिजनों से भी मुलाकात की। यहां कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये घायलों को 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। हादसे के बाद परिवारों के सामने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता बनी हुई है। वहीं ट्रक मंदिर परिसर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी इन सवालों का जवाब हादसे की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।

  • 15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात

    15 मौतों के बाद शीतला माता मेले से गायब हुए श्रद्धालु, लाखों का सामान लेकर लौटे व्यापारी, कोरोना के बाद पहली बार ऐसे हालात


    भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित सातऊ गांव के शीतला माता मंदिर में हर साल अष्टमी और नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। नौ दिनों तक चलने वाले मेले में खिलौनों प्रसाद झूलों और घरेलू सामान की दुकानों पर जमकर खरीदारी होती है। इसी उम्मीद के साथ दूरदराज के जिलों और दूसरे राज्यों से व्यापारी यहां दुकानें लगाने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार मेले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। 17 अक्टूबर की रात मंदिर के पास हुए दर्दनाक ट्रक हादसे के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर से लोग दुखी हैं और इसका सीधा असर मेले के कारोबार पर पड़ा है। व्यापारियों के मुताबिक दो दिनों में 50 लाख रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है और नवमी से पहले ही करीब 80 प्रतिशत दुकानदार अपनी दुकानें समेटकर लौटने लगे।

    सोमवार को दुर्गा नवमी के दिन मेले का नजारा सामान्य वर्षों से बिल्कुल अलग दिखाई दिया। जिन रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और दुकानों पर ग्राहकों की चहल पहल रहती थी वहां सन्नाटा पसरा था। कई दुकानदार सामान पैक करते नजर आए तो कुछ आखिरी समय तक ग्राहकों का इंतजार करते रहे। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने नौ दिनों तक चलने वाले मेले के लिए पहले से सामान खरीदा था और दुकान लगाने के लिए किराया तथा परिवहन पर भी खर्च किया था। लेकिन हादसे के बाद लोगों के नहीं पहुंचने से उनकी कमाई की उम्मीद टूट गई। कुछ व्यापारियों के लिए तो दुकान तक सामान लाने का भाड़ा निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के बाद भी मेले में कारोबार की ऐसी स्थिति नहीं देखी थी।

    हर साल अष्टमी और नवमी पर शीतला माता मंदिर में करीब एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसी अनुमान के आधार पर छोटे और बड़े व्यापारी अपनी तैयारियां करते हैं। इस बार भी दुकानदारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद थी लेकिन हादसे के बाद मेले में आने वालों की संख्या बेहद कम रह गई। छतरपुर से परिवार के साथ आईं दर्पण पिछले पांच साल से यहां खिलौनों की दुकान लगाती हैं। उन्हें इस बार भी अच्छी कमाई की उम्मीद थी लेकिन ग्राहकों की कमी ने उन्हें निराश कर दिया। वहीं दतिया से पहली बार दुकान लगाने आईं दामिनी को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। उनका कहना है कि कारोबार नहीं होने से उनका पूरा हिसाब बिगड़ गया है।

    ग्वालियर की मंजिता देवी के मुताबिक उन्होंने करीब एक लाख रुपये का सामान बिक्री के लिए रखा था लेकिन ग्राहकों की कमी के कारण सामान नहीं बिक सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंदिर मार्ग पर बाइक तक जाने में रोक लगाई जाती है तो भारी ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। भितरवार की 80 वर्षीय कस्तूरी देवी भी नुकसान से परेशान हैं। वे हर सोमवार को शीतला माता मंदिर आती हैं और उनके मुताबिक सामान्य सोमवार को भी इस बार की तुलना में ज्यादा भीड़ रहती है। उन्होंने बताया कि उन पर करीब 50 हजार रुपये का कर्ज है और अब कारोबार ठप होने से इसकी भरपाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    मंदिर के महंत कमल सिंह भगत ने भी हादसे पर दुख जताया। उनका कहना है कि मंदिर के सैकड़ों साल के इतिहास में ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई। उनके मुताबिक नवमी पर इस बार सामान्य दिनों की तुलना में बेहद कम श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर का मजबूत प्रवेश द्वार पहले भी कई लोगों की जान बचाने में मददगार रहा है। भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए मंदिर प्रबंधन प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था की मांग करेगा।

    इस बीच कुछ दुकानदारों ने स्थानीय लोगों पर दुकान लगाने की जगह के लिए 500 रुपये और बिजली के लिए प्रतिदिन 200 रुपये मांगने के आरोप भी लगाए हैं। कुछ ने धमकी और मारपीट की शिकायतें भी बताई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के बाद मेले में पसरे सन्नाटे ने व्यापारियों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अब उनके सामने बचा हुआ सामान वापस ले जाने और हुए नुकसान की भरपाई करने की चुनौती है। वहीं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मंदिर मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।