Tag: Shehbaz Sharif

  • इमरान समर्थकों के लॉन्ग मार्च के बीच शहबाज शरीफ ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, रखी ये शर्त

    इमरान समर्थकों के लॉन्ग मार्च के बीच शहबाज शरीफ ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, रखी ये शर्त


    लाहौर।
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को बातचीत की सशर्त पेशकश की है। उन्होंने कहा कि अगर PTI इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे अपने लॉन्ग मार्च को तत्काल रोक देती है, तो सरकार बातचीत के लिए तैयार है। राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान शरीफ ने पार्टी नेतृत्व से प्रदर्शन की राजनीति छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की।

    शरीफ ने चेतावनी दी कि लगातार सड़क प्रदर्शनों से पाकिस्तान में फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर लौट सकता है। उन्होंने कहा कि देश पहले ही लंबे समय तक राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर चुका है और ऐसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होनी चाहिए।

    बातचीत टूटने के बाद आया बयान

    शहबाज शरीफ का यह बयान सरकार और PTI के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आया है। हाल ही में नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के चैंबर में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन किसी समझौते तक नहीं पहुंचा जा सका।

    शरीफ ने PTI नेतृत्व पर बातचीत में गंभीरता से आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि वार्ता के दौरान जिन मुद्दों पर शुरुआती सहमति बनी थी, PTI ने बाद में उनमें बदलाव कर दिया। सरकार के अनुसार, राजनीतिक तनाव कम करने और विवादों का समाधान निकालने के उद्देश्य से बातचीत शुरू की गई थी, लेकिन विपक्ष का रुख टकराव जारी रखने वाला रहा।

    अर्थव्यवस्था को लेकर जताई चिंता

    प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि करीब ढाई साल की आर्थिक स्थिरीकरण प्रक्रिया के बाद देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं।

    शरीफ के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग, रेमिटेंस और निर्यात के क्षेत्र में सकारात्मक संकेत मिले हैं। ऐसे समय में लंबे धरने और राजनीतिक मार्च से कारोबारी गतिविधियां और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर विरोध प्रदर्शनों के कारण आर्थिक गतिविधियां बाधित होती हैं तो इसका सीधा नुकसान राष्ट्रीय हितों को होगा।

    बातचीत के साथ कार्रवाई का भी संकेत

    शहबाज शरीफ ने कहा कि संघीय सरकार PTI के साथ बैठकर संवैधानिक तरीके से राजनीतिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क पर मार्च जारी रखते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के बीच नई बातचीत नहीं होगी।

    सरकार का कहना है कि राजनीतिक संवाद का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। शरीफ ने संकेत दिया कि अगर प्रदर्शन के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है या इस्लामाबाद को ठप करने की कोशिश की जाती है, तो कानून लागू कराने वाली एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।

  • कश्मीर और पानी पर भारत को घेरने पहुंचे शहबाज से आतंकवाद पर हुआ सीधा सवाल UN के बाहर चुपचाप आगे बढ़ गए पाक PM

    कश्मीर और पानी पर भारत को घेरने पहुंचे शहबाज से आतंकवाद पर हुआ सीधा सवाल UN के बाहर चुपचाप आगे बढ़ गए पाक PM


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ कई आरोप लगाए और कश्मीर तथा सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया लेकिन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर जब उनसे पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े सवाल पूछे गए तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 24 सितंबर को UN मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकार ने उनसे पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा। शहबाज शरीफ सवाल को अनसुना करते हुए आगे बढ़ गए। बाद में मुख्यालय से निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस बार भी उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दी और आगे निकल गए। इस घटनाक्रम की पुष्टि कई मीडिया रिपोर्टों में हुई है।

    इसके एक दिन बाद 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने भारत पर सिंधु नदी के पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया और कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए भारत की नीतियों पर सवाल उठाए। साथ ही अपने भाषण में भारत के साथ संघर्ष का संदर्भ भी दिया। उनके संबोधन के बाद भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के दावों का जवाब देते हुए उसके आतंकवाद और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे को लेकर फॉर्म-47 का संदर्भ दिया और कहा कि पाकिस्तान में सत्ता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। गहलोत ने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने का भी उल्लेख किया और आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाया।

    भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी गई। गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लोगों के अधिकारों तथा वहां की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और धार्मिक कट्टरता से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र में यह बयानबाजी ऐसे समय हुई जब दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने अपने पक्ष को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने की कोशिश कर रहे थे। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत की नीतियों पर सवाल उठाए तो भारत ने जवाब के अधिकार के तहत पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड और उसकी आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था को मुद्दा बनाया।

    इस पूरे घटनाक्रम में UN मुख्यालय के बाहर पूछे गए सवाल भी चर्चा में रहे। पत्रकारों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से सीधे आतंकवादियों को कथित तौर पर पनाह देने और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल किया लेकिन शहबाज शरीफ ने दोनों मौकों पर कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया।

  • UN में पाकिस्तान की हार को जीत बता रहे थे शहबाज, भारतीय दूत की छूट गई हंसी, वीडियो वायरल

    UN में पाकिस्तान की हार को जीत बता रहे थे शहबाज, भारतीय दूत की छूट गई हंसी, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की ओर से इसे अपनी सफलता के तौर पर पेश किया। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघर्ष रोकने में कथित ‘समय पर हस्तक्षेप’ के लिए धन्यवाद भी दिया। शहबाज के भाषण के दौरान वहां मौजूद भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास का रिएक्शन कैमरे में कैद हो गया और उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

    शहबाज ने ट्रंप को दिया ‘क्रेडिट’

    शुक्रवार को UNGA में अपने करीब 23 मिनट के संबोधन में शहबाज शरीफ ने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘समय पर हस्तक्षेप’ से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बची।

    शरीफ ने ट्रंप के ‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’ के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर ट्रंप उस समय हस्तक्षेप नहीं करते तो हालात और गंभीर हो सकते थे।

    हालांकि, भारत लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए किसी तीसरे पक्ष ने मध्यस्थता की थी। भारत का कहना है कि संघर्ष विराम को लेकर सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद बनी थी।

    भारतीय राजनयिक का रिएक्शन कैमरे में कैद

    शहबाज शरीफ जब 2025 के संघर्ष को लेकर पाकिस्तान का पक्ष रख रहे थे, उसी दौरान सभा में मौजूद भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास की प्रतिक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में उनका हंसना नजर आया।

    शहबाज ने अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा 2025 जैसी स्थिति में जाने से रोकने के लिए कश्मीर मुद्दे का ‘न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान’ जरूरी है।

    भारत संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।

    सिंधु जल संधि का भी उठाया मुद्दा

    शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत के इस फैसले पर आपत्ति जताई कि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को ‘अबेयांस’ में रखने का फैसला किया था।

    भारत का रुख है कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की कार्रवाई से जुड़े सवालों के समाधान तक संधि स्थगित रहेगी। वहीं पाकिस्तान इस फैसले को चुनौती देता रहा है।

    शहबाज ने UNGA में भारत की ओर से सिंधु नदी के पानी को लेकर किसी भी कदम को गंभीर परिणामों से जोड़ते हुए चेतावनी भी दी।

    कश्मीर पर फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से बात

    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कश्मीर मुद्दे को भी अपने भाषण का हिस्सा बनाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से कश्मीर पर अपनी स्थिति के अनुरूप कार्रवाई की मांग दोहराई और कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा।

    भारत का रुख इसके उलट है। नई दिल्ली कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पाकिस्तान की कोशिशों को खारिज करता रहा है और इसे भारत-पाकिस्तान के बीच का विषय मानता है।

    आसिम मुनीर की भी कई बार तारीफ

    शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का भी कई बार उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कूटनीति के लिए रास्ता बनाने में मुनीर के लगातार प्रयासों की भूमिका रही।

    2025 के संघर्ष का जिक्र करते हुए शरीफ ने पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की भी प्रशंसा की और इसे अपनी ओर से प्रभावी जवाब के तौर पर पेश किया।

    भारत देगा ‘राइट टू रिप्लाई’

    UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण के बाद भारत की ओर से ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत जवाब दिए जाने की प्रक्रिया भी तय है। भारत आमतौर पर पाकिस्तान के नेता के संबोधन के बाद अपने स्थायी मिशन के अपेक्षाकृत युवा राजनयिक को जवाब देने के लिए भेजता है।

    इस बार भी पाकिस्तान के कश्मीर, आतंकवाद और सिंधु जल संधि से जुड़े बयानों पर भारत की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

  • भारत-पाक तनाव पर UN में फिर बोले ट्रंप शहबाज शरीफ ने मुझे बताया 3 करोड़ लोगों का जीवन बचाया

    भारत-पाक तनाव पर UN में फिर बोले ट्रंप शहबाज शरीफ ने मुझे बताया 3 करोड़ लोगों का जीवन बचाया


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा किया है। 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में आठ संघर्षों को खत्म कराने में मदद करने का दावा भी किया। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें पत्र लिखकर आभार जताया था और कहा था कि उनके हस्तक्षेप से करीब 3 करोड़ लोगों की जान बची।

    ट्रंप के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जिस स्तर तक पहुंच गया था उससे हालात और गंभीर हो सकते थे। उन्होंने अपने संबोधन में इस पूरे घटनाक्रम को अपने उन प्रयासों से जोड़कर पेश किया जिनके जरिए वह विभिन्न देशों के बीच संघर्ष को रोकने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें युद्ध रोकने और बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया था। हालांकि 3 करोड़ लोगों की जान बचाने का आंकड़ा ट्रंप द्वारा किया गया दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं बताया गया है।

    भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में तनाव उस समय बढ़ा था जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनी और कई दिनों तक तनाव जारी रहा। बाद में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हुआ। ट्रंप लंबे समय से इस घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक भूमिका से जोड़ते रहे हैं और अब संयुक्त राष्ट्र के मंच से उन्होंने एक बार फिर इसी दावे को दोहराया है।

    हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर भारत का पक्ष ट्रंप के दावे से अलग रहा है। भारत ने लगातार कहा है कि सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क और आपसी समझ के तहत हुआ था। भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को स्वीकार नहीं करता। भारत की विदेश नीति में भारत पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय तरीके से मुद्दों को सुलझाने की बात लंबे समय से कही जाती रही है। इसलिए ट्रंप के दावे और भारत के आधिकारिक रुख के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

    पाकिस्तान की ओर से हालांकि ट्रंप की भूमिका को लेकर सकारात्मक बयान सामने आते रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले भी भारत के साथ हुए संघर्ष विराम में ट्रंप के हस्तक्षेप की सराहना की थी। पाकिस्तान की तरफ से ट्रंप को शांति स्थापित करने की कोशिशों के लिए धन्यवाद दिए जाने की बात ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में भी दोहराई।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 22 सितंबर से शुरू हुआ है और इसमें दुनिया के विभिन्न देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय शांति सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार रख रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का भारत पाकिस्तान संघर्ष को लेकर यह बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि ट्रंप ने इस दावे को अपने व्यापक शांति प्रयासों के हिस्से के तौर पर पेश किया जबकि भारत की ओर से संघर्ष विराम में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार नहीं किया गया है।

  • इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील

    इस्लामिक नाटो’ में शामिल होगा ईरान? राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों से की एकजुट होने की अपील


    नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बीते तनाव और संघर्ष के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़े समझौतों की चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने और आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है। उनके इस बयान को क्षेत्रीय स्तर पर एक मजबूत मुस्लिम गठबंधन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक घटनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

    संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास तभी संभव है जब क्षेत्रीय देश आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग की भावना से आगे बढ़ें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम देशों को अपने साझा हितों और जबड़े के प्रति एकजुट होकर काम करना चाहिए।

    पेजेशकियन ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि मुस्लिम अपने समुदायों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होंगे।” उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि ईरान भविष्य में उस सैन्य-सहयोगी मंच के करीब आ सकता है जिसे मीडिया में अक्सर ‘इस्लामिक नाटो’ कहा जाता है।

    हालांकि यह ध्यान देने योग्य है कि ‘इस्लामिक नाटो’ कोई औपचारिक नाटो जैसी संस्था नहीं है, बल्कि इस्लामिक मिलिट्री काउंटर टेररिज्म कोएलिशन नामक एक बहुराष्ट्रीय सुरक्षा गठबंधन है, जिसे हासिल सऊदी अरब करता है और जिसमें पाकिस्तान सहित कई मुस्लिम देश शामिल हैं। ईरान वर्तमान में इस गठबंधन का सदस्य नहीं है।

    विश्लेषणों का मानना ​​है कि यदि ईरान और पाकिस्तान के बीच राजनयिक सहयोग बढ़ता है और क्षेत्रीय स्वायत्त अनुकूल रहते हैं, तो मुस्लिम देशों के बीच सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग का नया ढांचा विकसित हो सकता है। हालांकि ईरान के किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। स्विट्जरलैंड में अमेरिका के साथ वार्ता के बाद पाकिस्तान पहुंचे पेजेशकियां के इस दौरे को क्षेत्रीय आतंकवाद और मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।

  • बलूचिस्तान के 1 ट्रिलियन डॉलर खनिज खजाने पर पाकिस्तान की सख्ती, सैन्य तैनाती से बढ़ा तनाव

    बलूचिस्तान के 1 ट्रिलियन डॉलर खनिज खजाने पर पाकिस्तान की सख्ती, सैन्य तैनाती से बढ़ा तनाव

    नई दिल्ली। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में खनिज संपदा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद गहराता जा रहा है। इस क्षेत्र में मौजूद अरबों-खरबों डॉलर के सोना, तांबा और रेयर अर्थ खनिजों को लेकर पाकिस्तानी सरकार और सेना की गतिविधियों का विरोध लगातार तेज हो रहा है।

    जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बलूचिस्तान में सैन्य और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ाने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम खनिज संसाधनों और खनन परियोजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। इसके तहत फ्रंटियर कोर की अतिरिक्त टुकड़ियों को तैनात करने और प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा चौकियां स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचिस्तान का रखशान डिवीजन, सैंदक और रेको डिक जैसे क्षेत्र बड़े खनिज भंडारों के लिए जाने जाते हैं। यहां तांबा और सोने की विशाल खदानें मौजूद हैं, जिनमें अरबों टन अयस्क होने का अनुमान लगाया जाता है। इन खनिज संसाधनों का अनुमानित मूल्य 1 से 6 ट्रिलियन डॉलर तक बताया जाता है।

    पाकिस्तान लंबे समय से इन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को खनन परियोजनाओं के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि आर्थिक संकट से राहत मिल सके। इनमें कुछ बड़ी अंतरराष्ट्रीय खनन कंपनियों की भागीदारी भी बताई जाती है, जो विभिन्न परियोजनाओं में हिस्सेदारी रखती हैं।

    हालांकि, बलूचिस्तान में इस खनन गतिविधि का लगातार विरोध हो रहा है। स्थानीय बलूच अलगाववादी समूहों और विद्रोही संगठनों का आरोप है कि उनकी जमीन के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है और इसका लाभ स्थानीय लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। इसी कारण यहां कई बार सुरक्षा बलों और विद्रोही गुटों के बीच हिंसक झड़पें भी हो चुकी हैं।

    पिछले समय में खनन स्थलों और सुरक्षा बलों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे क्षेत्र की स्थिति और अधिक तनावपूर्ण बनी हुई है। विद्रोही गुटों का कहना है कि संसाधनों पर उनका पहला अधिकार है, लेकिन सरकार और सेना इन खजानों का उपयोग बाहरी कंपनियों के साथ मिलकर कर रही है।

    बलूचिस्तान की खनिज संपदा को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे समृद्ध प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में से एक है, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों के कारण इसका पूरा लाभ अभी तक नहीं उठाया जा सका है।

    फिलहाल पाकिस्तान सरकार की ओर से सुरक्षा बढ़ाने के फैसले के बाद स्थिति और अधिक संवेदनशील हो गई है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

  • कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में संदिग्ध पोस्टर सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुल डोडा क्षेत्र की एक दीवार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के समर्थन में पोस्टर चिपकाए जाने का मामला सामने आया है।

    इससे जुड़ी एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी। वीडियो में दावा किया गया है कि ‘जम्मू कश्मीर यूथ मूवमेंट’ नाम के एक आजादी समर्थक संगठन ने यह पोस्टर लगाया है। पोस्टर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की गई है और कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के मुद्दे पर पाकिस्तान के समर्थन के लिए आभार जताया गया है।

    मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, डोडा पुलिस ने BNS की धारा 353(1) के तहत केस (FIR नंबर 95/2026) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डोडा के डीएसपी कृष्ण रतन ने बताया कि वीडियो में आपत्तिजनक सामग्री है, जिससे क्षेत्र में तनाव या अफरा-तफरी फैल सकती है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल वीडियो असली है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है।

    अब तक किसी भी संदिग्ध को हिरासत में नहीं लिया गया है, क्योंकि मौके से ऐसा कोई पोस्टर बरामद नहीं हुआ है। पुलिस वीडियो की जियो-टैग लोकेशन की भी जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना वास्तव में वहीं हुई या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

  • ट्रंप ने खोली पाकिस्तान के दावे की पोल, शहबाज शरीफ के बयान पर उठे सवाल

    ट्रंप ने खोली पाकिस्तान के दावे की पोल, शहबाज शरीफ के बयान पर उठे सवाल


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान के दावों पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था जिससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है।

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में कहा कि सीजफायर समझौते में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि संभवतः ईरान ने इसे अलग तरह से समझा। वेंस के मुताबिक यह युद्धविराम अमेरिका ईरान और उनके सहयोगियों जैसे इजरायल और अरब देशों पर केंद्रित है न कि लेबनान पर।

    ट्रंप ने भी किया इनकार

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट कहा कि लेबनान को समझौते में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि इसकी वजह हिज्बुल्लाह है और वहां की स्थिति अलग तरह की झड़प का हिस्सा है।

    शहबाज शरीफ के बयान से बढ़ा विवाद

    इससे पहले शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि ईरान अमेरिका और उनके सहयोगी लेबनान समेत सभी क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों को इस्लामाबाद में आगे की वार्ता के लिए आमंत्रित भी किया था। उनके इस बयान के बाद अब अमेरिका के स्पष्ट रुख से पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।

    इजरायल पहले ही कर चुका था साफ इनकार

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके थे कि यह युद्धविराम लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई पर लागू नहीं होगा। सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में हमले भी जारी रखे। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 89 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई हिज्बुल्लाह के खिलाफ जारी रहेगी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बंद बढ़ा तनाव
    लेबनान में हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया जिसे लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है और यह आशंका पैदा हो गई है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम आगे टिक पाएगा या नहीं।