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  • हसीना के सत्ता से हटने से पहले ही यूनुस को कमान सौंपने की हो गई थी तैयारी! इस दावे से बांग्लादेश में नई बहस शुरू

    हसीना के सत्ता से हटने से पहले ही यूनुस को कमान सौंपने की हो गई थी तैयारी! इस दावे से बांग्लादेश में नई बहस शुरू


    नई दिल्ली। बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और मोहम्मद यूनुस के अंतरिम सरकार का नेतृत्व संभालने से जुड़े घटनाक्रम पर नया विवाद खड़ा हो गया है। यूनुस के पूर्व प्रेस सचिव और समाचार एजेंसी AFP के पूर्व पत्रकार शफीकुल आलम ने दावा किया है कि हसीना के प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले ही छात्र नेताओं ने यूनुस को अंतरिम सरकार की कमान सौंपने के लिए उनसे संपर्क की कोशिश शुरू कर दी थी। इस पूरी प्रक्रिया में AFP की फैक्ट-चेक टीम के तत्कालीन संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। हालांकि, इस दावे से यह साबित नहीं होता कि सरकार गिराने की पूरी योजना पहले से तैयार थी।

    शफीकुल आलम के इस बयान के बाद बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के पीछे की रणनीति और अंतरिम सरकार के नेतृत्व के चयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आलम के मुताबिक, शिशिर ने छात्र नेताओं की ओर से यूनुस से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत कराने में मदद की।

    कैसे हुई यूनुस और छात्र नेताओं के बीच बातचीत?
    शफीकुल आलम ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि अगस्त 2024 में जब हसीना विरोधी आंदोलन तेज हो रहा था, तब छात्र नेता ऐसे भरोसेमंद व्यक्ति की तलाश में थे, जो उनकी बात मोहम्मद यूनुस तक पहुंचा सके। उस समय AFP की फैक्ट-चेक टीम के संपादक कदरुद्दीन शिशिर ने यह जिम्मेदारी संभाली।

    आलम के अनुसार, शिशिर ढाका स्थित AFP कार्यालय में उनके पास ही बैठते थे और उन्होंने पूरी बातचीत गोपनीय तरीके से कराई। उन्होंने लिखा कि शिशिर ने छात्र नेताओं की ओर से सबसे पहले यूनुस से संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच शुरुआती बातचीत का रास्ता बनाया।

    आलम ने दावा किया कि उस समय शेख हसीना की सरकार कमजोर पड़ रही थी, लेकिन यह संपर्क बेहद जोखिम भरा था। यदि सरकार को इसकी जानकारी मिल जाती तो शिशिर और AFP की पूरी टीम को कथित तौर पर ‘आइनाघर’ पहुंचा दिया जाता।

    ‘आइनाघर’ बांग्लादेश में एक कथित गुप्त हिरासत केंद्र के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है। हसीना शासन के दौरान यहां राजनीतिक विरोधियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने, प्रताड़ित करने और उनकी हत्या किए जाने के आरोप लगते रहे हैं।

    आलम ने यह भी कहा कि शिशिर ने सरकार की कथित कार्रवाई से जुड़े वीडियो सबूत जुटाने शुरू कर दिए थे। AFP ने अगस्त 2024 के घटनाक्रम के दौरान बताया था कि इंटरनेट ब्लैकआउट के बीच उसका ढाका ब्यूरो उन चुनिंदा स्थानों में शामिल था, जहां से बाहरी दुनिया तक खबरें पहुंचाई जा सकती थीं।

    हसीना के देश छोड़ने से पहले शुरू हुई थी यूनुस की भूमिका?
    शफीकुल आलम के दावे से यह सवाल उठ रहा है कि क्या मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने की बातचीत शेख हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो गई थी।

    बांग्लादेश में जुलाई-अगस्त 2024 में सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के खिलाफ बड़े जनआंदोलन में बदल गया। हिंसक प्रदर्शनों के बीच 5 अगस्त 2024 को हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़कर देश से बाहर जाना पड़ा। वह भारत पहुंचीं।

    इसके अगले दिन, 6 अगस्त को छात्र आंदोलन के नेताओं ने सार्वजनिक रूप से मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाने का प्रस्ताव रखा था। इस घोषणा में नाहिद इस्लाम और आसिफ महमूद जैसे छात्र नेता शामिल थे। बाद में ये दोनों यूनुस सरकार में सलाहकार बने।

    8 अगस्त 2024 को पेरिस से ढाका लौटने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की जिम्मेदारी संभाली। शफीकुल आलम के ताजा बयान के मुताबिक, यूनुस को नेतृत्व सौंपने के लिए संपर्क की प्रक्रिया हसीना के देश छोड़ने से पहले ही शुरू हो चुकी थी। हालांकि, छात्र नेताओं की ओर से संभावित अंतरिम नेतृत्व पर बातचीत होना और पूरे सत्ता परिवर्तन की साजिश पहले से तैयार होना दो अलग-अलग बातें हैं।

    यूनुस का पुराना बयान भी फिर चर्चा में
    इस विवाद के बीच सितंबर 2024 में न्यूयॉर्क के एक कार्यक्रम में मोहम्मद यूनुस की ओर से दिया गया बयान भी चर्चा में आ गया है। उस दौरान उन्होंने अपने विशेष सहायक महफूज आलम को पूरी क्रांति के पीछे का दिमाग बताया था।

    यूनुस ने जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन को अचानक हुआ घटनाक्रम मानने के बजाय व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया आंदोलन बताया था। उन्होंने कहा था कि इसकी नेतृत्व व्यवस्था इस तरह बनाई गई थी कि किसी एक नेता के पकड़े जाने पर भी आंदोलन जारी रह सके।

    यूनुस के उस बयान और शफीकुल आलम के ताजा दावे को जोड़कर अब आंदोलन की तैयारी और सत्ता परिवर्तन के बाद नेतृत्व तय करने की प्रक्रिया पर चर्चा हो रही है।

    हसीना की वापसी के बयान के बीच नया घटनाक्रम
    शफीकुल आलम का यह दावा ऐसे समय आया है, जब भारत में रह रहीं शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की बात दोहराई है। 19 अक्टूबर को एक ऑनलाइन कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें गिरफ्तारी, प्रताड़ना या जान से मारे जाने का डर नहीं है।

    इसी बीच 28 अक्टूबर को ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के पूर्व फ्लाइट लेफ्टिनेंट के.एम. तहसिफ सौरी का शव तुराग नदी से बरामद किया गया। 28 वर्षीय तहसिफ का नाम उस वीडियो से जोड़ा गया था, जिसमें कथित तौर पर 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना को देश छोड़ते हुए दिखाया गया था।

    तहसिफ को अगस्त 2024 में वायुसेना से सेवा मुक्त कर दिया गया था। उनके परिवार ने हत्या की आशंका जताई है, जबकि पुलिस के मुताबिक मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल उनकी मौत और हसीना के देश छोड़ने वाले वीडियो के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

    यूनुस का कार्यकाल खत्म, अब तारिक रहमान की सरकार
    बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद बनी अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने वाले मोहम्मद यूनुस ने फरवरी 2026 में पद छोड़ दिया। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत मिला और उसके नेता तारिक रहमान ने 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

    यूनुस के कार्यकाल में हसीना विरोधी आंदोलन से जुड़े कई छात्र नेताओं को अंतरिम सरकार में जगह मिली थी। बाद में इनमें से कुछ नेताओं ने नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) बनाई, जिसने जमात गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा।

    अब शफीकुल आलम के बयान ने अगस्त 2024 के घटनाक्रम को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। हालांकि, उनके दावे को सत्ता परिवर्तन की पूर्व नियोजित साजिश का प्रमाण मानने के लिए स्वतंत्र पुष्टि और अतिरिक्त साक्ष्यों की जरूरत होगी।

  • शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने WHO के क्षेत्रीय प्रमुख पद से दिया इस्तीफा, वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों के बीच बड़ा फैसला

    शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने WHO के क्षेत्रीय प्रमुख पद से दिया इस्तीफा, वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों के बीच बड़ा फैसला


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की बेटी साइमा वाजेद ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को अपना इस्तीफा सौंपा, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। वाजेद के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से जुड़े आरोपों की जांच चल रही थी। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।

    साइमा वाजेद ने वर्ष 2024 की शुरुआत में WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक का पद संभाला था। उनका कार्यकाल पांच साल का निर्धारित था। हालांकि, आरोपों और जांच के बीच WHO ने उन्हें पिछले साल बिना वेतन प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया था।

    बांग्लादेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने भी लगाए थे आरोप

    साइमा वाजेद के खिलाफ बांग्लादेश की भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ने भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने मार्च 2025 में उन पर फ्रॉड और फर्जीवाड़े के आरोप लगाए थे। इसके बाद जुलाई 2025 में WHO ने उन्हें प्रशासनिक छुट्टी पर भेज दिया।

    WHO की ओर से लगाए गए आरोपों में चीन की यात्रा से जुड़े खर्च में कथित वित्तीय अनियमितता भी शामिल थी। इसके अलावा संगठन ने उनकी शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, वाजेद ने इन आरोपों को खारिज किया है।

    वकीलों ने WHO को भेजा जवाब

    साइमा वाजेद के वकीलों ने जुलाई 2026 में WHO को पत्र भेजकर उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब दिया था। पत्र में कहा गया था कि उनकी मुवक्किल ने किसी तरह की वित्तीय धोखाधड़ी नहीं की है। वकीलों ने उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर लगाए गए आरोपों को भी गलत बताया था।

    जमीन हासिल करने के आरोप पर भी दी सफाई

    साइमा वाजेद पर बांग्लादेश में एक जमीन का प्लॉट कथित तौर पर गलत तरीके से हासिल करने का आरोप भी लगाया गया था। इस्तीफे में उन्होंने इस आरोप का भी जवाब दिया।

    वाजेद के मुताबिक, उन्होंने संबंधित जमीन WHO में शामिल होने से पहले हासिल की थी। उनका कहना है कि यह जमीन बांग्लादेश के उस कानून के तहत मिली थी, जो देश के स्वतंत्रता आंदोलन के नेता शेख मुजीबुर रहमान के परिवारों से जुड़ा था। शेख मुजीबुर रहमान, शेख हसीना के पिता हैं।

    शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बढ़ा परिवार पर दबाव

    साइमा वाजेद का इस्तीफा ऐसे समय हुआ है जब बांग्लादेश में शेख हसीना और उनके परिवार से जुड़े लोगों पर राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा था।

    हसीना के कई करीबी नेताओं और सहयोगियों पर बांग्लादेश में अलग-अलग मामलों में आरोप लगाए गए हैं। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले भी शामिल हैं। शेख हसीना देश छोड़ने के बाद भारत में रह रही हैं।

    हालांकि, साइमा वाजेद के खिलाफ लगे आरोपों को उनके द्वारा लगातार खारिज किया गया है। उनके इस्तीफे को शेख हसीना के परिवार पर बढ़ते राजनीतिक और कानूनी दबाव के व्यापक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

    WHO शुरू करेगा नए क्षेत्रीय प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया

    साइमा वाजेद के इस्तीफे के बाद WHO अब दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए नए क्षेत्रीय प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगा। एक सूत्र के मुताबिक, यह प्रक्रिया अगले महीने शुरू होने की उम्मीद है।

    WHO का दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय सदस्य देशों में स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों और नीतियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में नए क्षेत्रीय निदेशक का चुनाव संगठन के लिए अहम माना जा रहा है।

  • कहां हैं शेख हसीना? बेटा साजिब वाजेद सामने आया, पूर्व PM ने दिया संदेश लेकिन नहीं दिखाया चेहरा

    कहां हैं शेख हसीना? बेटा साजिब वाजेद सामने आया, पूर्व PM ने दिया संदेश लेकिन नहीं दिखाया चेहरा


    नई दिल्ली।
    बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना लंबे समय बाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में वर्चुअली नजर आईं। हालांकि उन्होंने इस दौरान अपना चेहरा कैमरे पर नहीं दिखाया। नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया की एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ऑनलाइन जुड़ीं, जबकि उनके बेटे साजिब वाजेद भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

    यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन और हिंसक प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और देश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके करीब दो साल बाद उन्होंने किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी बात रखी है।

    जुलाई-अगस्त 2024 की हिंसा को याद कर भावुक हुईं हसीना

    लाइव संबोधन के दौरान शेख हसीना ने 2024 के जुलाई-अगस्त आंदोलन और उसके बाद हुई हिंसा को याद किया। अपनी बात रखते हुए वह कई बार भावुक हुईं और उनका गला भर आया।

    हसीना ने दावा किया कि शुरुआत में छात्रों का आंदोलन शांतिपूर्ण था और उनकी सरकार प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बातचीत करना चाहती थी। उनके मुताबिक, बाद में कुछ संगठित समूहों ने आंदोलन का इस्तेमाल हिंसा फैलाने के लिए किया।

    उन्होंने आरोप लगाया कि 15 जुलाई 2024 के बाद आंदोलन का स्वरूप बदल गया और हिंसा तेज हो गई। हसीना ने यह भी दावा किया कि मोहम्मद यूनुस ने भी शुरुआत में आंदोलन को योजनाबद्ध और पहले से तैयार बताया था।

    ‘मेरी हत्या की 19 बार कोशिश हुई’

    अपने संबोधन में शेख हसीना ने अपने निजी संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी हत्या की 19 बार कोशिश की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि उनका बेटा जेल में पैदा हुआ था और तमाम मुश्किलों के बावजूद वह बांग्लादेश वापस लौटेंगी।

    हसीना ने कहा कि उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है या जेल भेजा जा सकता है, लेकिन वह अपने लोगों के बीच वापस जाएंगी।

    साजिब वाजेद ने लगाए राजनीतिक हत्याओं के आरोप

    कार्यक्रम में शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद ने भी बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि देश में अब भी आवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

    वाजेद के मुताबिक, पुलिस हिरासत में भी पार्टी कार्यकर्ताओं की मौत हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन घटनाओं पर कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर दोषियों को संरक्षण दे रही है।

    उन्होंने कहा कि अंतरिम सरकार के दौर के बाद अब मौजूदा सरकार के दौरान भी राजनीतिक हिंसा जारी है। उनके अनुसार, कुछ ऐसे कानून और अध्यादेश लाए गए हैं जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर हत्यारों को बचाने के लिए किया जा रहा है।

    मानवाधिकार और कट्टरपंथ को लेकर भी जताई चिंता

    साजिब वाजेद ने बांग्लादेश में मानवाधिकारों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि देश तेजी से असफल राष्ट्र की दिशा में बढ़ रहा है।

    वाजेद ने कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े लोगों की रिहाई का आरोप लगाते हुए भविष्य में बांग्लादेश से आतंकवाद का खतरा बढ़ने की आशंका भी जताई।

    हालांकि, ये सभी आरोप शेख हसीना और साजिब वाजेद की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्यों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    आखिर कहां हैं शेख हसीना?

    5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और हिंसा के बीच शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद वह भारत आ गई थीं।

    सुरक्षा कारणों से भारत सरकार ने उनके सटीक ठिकाने की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शेख हसीना दिल्ली के सुरक्षित क्षेत्र में रह रही हैं।

    अब करीब दो साल बाद उनका वर्चुअल कार्यक्रम में शामिल होना और बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर खुलकर अपनी बात रखना क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

  • ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में

    ढाका में US डिफेंस डील पर मंथन, ACSA और GSOMIA समझौते फिर सुर्खियों में




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    बांग्लादेश में अमेरिका के साथ दो अहम रक्षा समझौतों को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बड़ी चर्चा तेज हो गई है। ये दोनों समझौते ACSA (Acquisition and Cross-Servicing Agreement) और GSOMIA (General Security of Military Information Agreement) कई वर्षों से लंबित हैं, जिन्हें लेकर अब एक बार फिर ढाका में गंभीर मंथन शुरू हो गया है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार ने अमेरिका के साथ इन डिफेंस डील्स को आगे बढ़ाने से परहेज किया था। माना जाता है कि उस समय सरकार ने भारत और चीन के साथ संतुलन बनाए रखने की नीति अपनाई थी, जिसके चलते इन समझौतों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, अब राजनीतिक बदलाव और नई परिस्थितियों के बीच इन समझौतों के फिर से सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है।

    ACSA समझौता के तहत अमेरिका और बांग्लादेश के बीच सैन्य लॉजिस्टिक्स सहयोग को मजबूत किया जाता है, जिसमें ईंधन आपूर्ति, उपकरणों की मरम्मत और सैन्य सहायता जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। वहीं GSOMIA के तहत दोनों देशों के बीच संवेदनशील सैन्य सूचनाओं के सुरक्षित आदान-प्रदान की व्यवस्था बनाई जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये दोनों समझौते लागू होते हैं, तो इससे अमेरिका की बांग्लादेश में सैन्य और रणनीतिक पहुंच और मजबूत हो सकती है। यह कदम बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति को बढ़ाने के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर असर पड़ सकता है।

    हालांकि, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि इन समझौतों का अर्थ किसी सैन्य बेस की स्थापना नहीं है, बल्कि यह मुख्य रूप से सहयोग, लॉजिस्टिक्स और सूचना साझाकरण तक सीमित ढांचा है। फिर भी, इस पहल को लेकर क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई हलचल देखी जा रही है।

  • बांग्लादेश पासपोर्ट विवाद: “Except Israel” शर्त की वापसी, राजनीतिक प्रतीकों को हटाने की तैयारी

    बांग्लादेश पासपोर्ट विवाद: “Except Israel” शर्त की वापसी, राजनीतिक प्रतीकों को हटाने की तैयारी




    नई दिल्ली। बांग्लादेश एक बार फिर अपने पासपोर्ट नीति में बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। ढाका से सामने आई रिपोर्टों के अनुसार देश के पासपोर्ट में “Except Israel” यानी “इजरायल को छोड़कर” वाला वाक्यांश फिर से शामिल किया जाएगा। यह वही प्रावधान है जिसे 2020 में शेख हसीना सरकार के दौरान हटाया गया था, हालांकि उस समय भी इजरायल में पासपोर्ट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लागू था।

    रिपोर्टों के मुताबिक अब बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेतृत्व वाली सरकार इस वाक्यांश को दोबारा शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। कहा जा रहा है कि यह कदम देश की विदेश नीति और फिलिस्तीन मुद्दे पर लंबे समय से चले आ रहे रुख को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

    इसी के साथ पासपोर्ट डिज़ाइन और वॉटरमार्क में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव के अनुसार, बांग्लादेश के ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रतीकों से जुड़े कई चिन्ह हटाए जा सकते हैं, जिनमें बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान से जुड़े स्थल और स्मारक भी शामिल हैं। इसमें धनमंडी 32 स्थित उनका आवास, तुंगीपारा स्थित मकबरा और अन्य राष्ट्रीय पहचान से जुड़े प्रतीक शामिल बताए जा रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार यह बदलाव पहले चरण में नए जारी होने वाले पासपोर्ट पर लागू होगा, जबकि पुराने पासपोर्ट को तुरंत बदलने की कोई योजना नहीं है। जैसे-जैसे पुराने पासपोर्ट की अवधि समाप्त होगी, नए नियमों के अनुसार ही दस्तावेज जारी किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक और वैचारिक दिशा में भी बड़ा संकेत है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि नई सरकार अपनी विदेश नीति और घरेलू राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठा रही है, जिसमें फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल विरोधी रुख को दोबारा मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है।

  • बंगाल की सत्ता बदलते ही बांग्लादेश से आया बड़ा संदेश, शेख हसीना की पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को दी बधाई

    बंगाल की सत्ता बदलते ही बांग्लादेश से आया बड़ा संदेश, शेख हसीना की पार्टी ने शुभेंदु अधिकारी को दी बधाई



    नई दिल्ली। कोलकाता में नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने बधाई दी है। पार्टी ने कहा कि शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के रिश्तों का नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है। अवामी लीग ने अपने संदेश में भारत-बांग्लादेश की ऐतिहासिक दोस्ती, साझा संस्कृति और आपसी सहयोग को और मजबूत करने की बात कही।

    अवामी लीग की केंद्रीय कार्यसमिति की ओर से जारी बयान में कहा गया कि पश्चिम बंगाल की जनता ने शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व पर भरोसा जताया है और यह जनादेश उनके मजबूत नेतृत्व की पहचान है। पार्टी ने उम्मीद जताई कि नई सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक सहयोग और विकास की रफ्तार और तेज होगी।

    बयान में कहा गया कि भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से दोस्ताना संबंध रहे हैं और पश्चिम बंगाल इन रिश्तों की सबसे अहम कड़ी है। ऐसे में नई सरकार दोनों देशों के बीच सहयोग को नई दिशा दे सकती है। अवामी लीग ने शुभेंदु अधिकारी और उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों के बेहतर स्वास्थ्य और सफल कार्यकाल की कामना भी की।

    दरअसल, कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शनिवार को भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। समारोह के दौरान भाजपा समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश की तरफ से आया यह संदेश सिर्फ औपचारिक बधाई नहीं, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिहाज से भी अहम संकेत माना जा रहा है। खासतौर पर ऐसे समय में जब दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं।
  • ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया

    ढाका में भारतीय उच्चायोग को धमकी, भारत ने बांग्लादेशी हाई कमिश्नर को किया तलब; कूटनीतिक तनाव गहराया


    नई दिल्ली / ढाका /भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में एक बार फिर तल्खी देखने को मिल रही है। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग को कथित रूप से धमकी मिलने की खबर के बाद भारत सरकार ने बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब किया है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि धमकी किस तरह की थी और किस माध्यम से दी गई। इसके बावजूद इस मामले को गंभीर मानते हुए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर कड़ा संदेश दिया है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब बांग्लादेश में विजय दिवस मनाए जाने के ठीक एक दिन बाद माहौल संवेदनशील बना हुआ है। बुधवार को ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हुई जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने भारत में तैनात बांग्लादेश के हाई कमिश्नर को तलब कर इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा। फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।इस बीच यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक स्तर पर लगातार बयानबाजी और आपसी आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले हैं। इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने रविवार को ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया था। यह तलबगी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिए गए कथिती भड़काऊ बयानोंको लेकर की गई थी।

    पीटीआई-भाषा के अनुसार बांग्लादेश सरकार ने भारत के समक्ष यह आपत्ति दर्ज कराई थी कि शेख हसीना को भारत में रहते हुए ऐसे बयान देने की अनुमति दी जा रही है जो बांग्लादेश की आंतरिक स्थिति को अस्थिर कर सकते हैं। बांग्लादेश का आरोप है कि हसीना अपने समर्थकों को कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसा रही हैं और उनका उद्देश्य आगामी संसदीय चुनावों को बाधित करना है।गौरतलब है कि शेख हसीना इस समय भारत में हैं। बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। इसके बाद से ही बांग्लादेश भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इस मुद्दे ने भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है।

    तनाव को और हवा देने वाले बयान बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी NCP के नेता हसनत अब्दुल्ला की ओर से सामने आए हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि यदि भारत बांग्लादेश को अस्थिर करने की कोशिश करता है तो ढाका को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को ‘अलग-थलगकरने की दिशा में कदम उठाना चाहिए और क्षेत्र में अलगाववादी तत्वों को समर्थन देना चाहिए। उनके इस बयान को भारत में गंभीर उकसावे के रूप में देखा गया।इन बयानों पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि पिछले एक वर्ष से बांग्लादेश की ओर से बार-बार ऐसे बयान सामने आ रहे हैं जिनमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को अलग कर बांग्लादेश का हिस्सा बनाने की बात की जाती है। मुख्यमंत्री ने इसे न केवल अव्यावहारिक बल्कि खतरनाक सोच करार दिया था।

    हिमंत बिस्वा सरमा ने यह भी कहा था कि भारत एक परमाणु शक्ति संपन्न देश है और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा इस तरह की बातें सोचना भी गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह तक कहा कि इस तरह की सोच को किसी भी स्तर पर प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए और बांग्लादेश को दी जाने वाली मदद पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।फिलहाल ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली धमकी दोनों देशों द्वारा एक-दूसरे के राजनयिकों को तलब किया जाना और तीखे राजनीतिक बयान-इन सबने भारत-बांग्लादेश संबंधों को एक संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश इस तनाव को कूटनीतिक बातचीत के जरिए कैसे संभालते हैं।

  • बांग्लादेश में इस्लामिक राज्य बनने की संभावना भारत की सुरक्षा पर गंभीर खतरा हसीना के बेटे का दावा

    बांग्लादेश में इस्लामिक राज्य बनने की संभावना भारत की सुरक्षा पर गंभीर खतरा हसीना के बेटे का दावा



    नई दिल्ली ।
    बांग्लादेश में अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की चुनावी भागीदारी पर भी प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना को लेकर माहौल गरमाया हुआ है। इस बीच शेख हसीना के बेटे और सलाहकार सजेब वाजेद जॉय ने बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जॉय ने कहा कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में चल रही सरकार बांग्लादेश को इस्लामिक राज्य बनाने की दिशा में काम कर रही है जो न केवल देश के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ा सुरक्षा खतरा हो सकता है।

    जॉय ने कहा कि इस सरकार के तहत आतंकवादी संगठन जैसे लश्कर-ए-तैयबा को पूरी छूट मिल रही है जिससे भारत के लिए आतंकवाद का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि इस संगठन की गतिविधियों को रोकने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने की जरूरत है। जॉय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश के राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ता जा रहा है और चुनावों को लेकर विभिन्न पार्टियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा हो रही है।

    सजेब वाजेद जॉय ने आगे कहा कि बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन की स्थिति भी बहुत गंभीर हो गई है खासकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ। उनका आरोप है कि यूनुस सरकार के तहत बांग्लादेश में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है और विपक्षी पार्टियों को दबाया जा रहा है। इस स्थिति ने देश के भीतर असंतोष और अस्थिरता को बढ़ावा दिया है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए एक खतरे की घंटी है।

    वाजेद जॉय के इस बयान ने बांग्लादेश के राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है और यह दर्शाता है कि बांग्लादेश में शासन के वर्तमान स्वरूप और भविष्य की दिशा को लेकर गहरी चिंताएं हैं। भारत के लिए भी इस स्थिति को नजरअंदाज करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि बांग्लादेश का भारत के साथ गहरा भौगोलिक और राजनीतिक संबंध है।

    इन हालातों में भारत के सुरक्षा तंत्र को बांग्लादेश में चल रही घटनाओं और उनके संभावित परिणामों पर लगातार निगरानी रखनी होगी ताकि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहा जा सके। इस बयान ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में न केवल तनाव को बढ़ाया है बल्कि दोनों देशों की सुरक्षा की साझा चिंता को भी उजागर किया है।

  • बांग्लादेश में चुनावी तारीख घोषित, शेख हसीना की पार्टी ने किया खारिज, कहा- यूनुस के बस की बात नहीं

    बांग्लादेश में चुनावी तारीख घोषित, शेख हसीना की पार्टी ने किया खारिज, कहा- यूनुस के बस की बात नहीं


    नई दिल्‍ली । पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना(Sheikh Hasina) की पार्टी बांग्लादेश अवामी लीग ने 12 फरवरी, 2026 के लिए घोषित चुनावी तारीख को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। आवामी लीग ने बांग्लादेश(Bangladesh) चुनाव आयोग के इस कदम को गैर-कानूनी बताया है। पार्टी ने कहा कि नोबेल पुरस्कार विजेता और मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस(Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार एक किलर-फासीस्ट(killer-fascist) गिरोह की तरह काम कर रही है, जो किसी भी हाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और सहभागी चुनाव नहीं करा सकती।

    अवामी लीग का कड़ा बयान
    गुरुवार को जारी एक तीखे बयान में पार्टी ने कहा कि उसने गैरकानूनी, कब्जाधारी, हत्यारे-फासीस्ट यूनुस गिरोह के गैरकानूनी निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम का गहन अध्ययन किया है और यह स्पष्ट है कि मौजूदा प्रशासन पूरी तरह पक्षपाती है। पार्टी के अनुसार उनके नियंत्रण में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनता की इच्छा का प्रतिबिंब सुनिश्चित करना असंभव है।

    अवामी लीग ने अपने बयान में कहा- यह अब स्पष्ट है कि मौजूदा कब्जाधारी सत्ता पूरी तरह पक्षपाती है और उनके नियंत्रण में सामान्य, स्वतंत्र और निष्पक्ष माहौल संभव नहीं। चुनाव जनता की लोकप्रियता का पैमाना हैं। अवामी लीग एक चुनाव-उन्मुख पार्टी है और जनता के सामने खड़े होने की क्षमता, साहस और ताकत रखती है।

    ऐतिहासिक भूमिका और चुनावी विरासत का उल्लेख
    अवामी लीग ने जोर देकर कहा कि अपनी स्थापना से लेकर अब तक उसने 13 राष्ट्रीय चुनावों में हिस्सा लिया है, जिनमें से 9 बार विजयी होकर सरकार बनाई है। पार्टी ने दावा किया कि उसकी भागीदारी के बिना चुनाव करवाना देश को गहरे संकट में धकेलने के बराबर है। पार्टी ने साफ कहा कि बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव कराना यूनुस के बस की बात नहीं है।

    पार्टी की मुख्य मांगें
    – अवामी लीग ने चुनाव कार्यक्रम को खारिज करते हुए कई बड़े कदमों की मांग की है:
    – पार्टी पर लगाए गए सभी प्रतिबंध तत्काल हटाए जाएं
    – शेख हसीना सहित नेताओं पर दर्ज फर्जी मामलों को वापस लिया जाए
    – सभी राजनीतिक बंदियों को बिना शर्त रिहा किया जाए
    – मौजूदा अंतरिम सरकार को हटाकर एक तटस्थ केयरटेकर सरकार बनाई जाए, जो स्वतंत्र और सहभागी चुनाव करा सके
    – पार्टी ने कहा कि देश की आजादी की अगुवाई करने वाली पार्टी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश राष्ट्र को अस्थिरता की ओर ले जाएगी।

    CEC का ऐलान: 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय चुनाव और जनमत संग्रह
    इससे पहले बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ए.एम.एम. नासिर उद्दीन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा की कि देश में 12 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय चुनाव होंगे। यह चुनाव अगस्त 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद होने वाला पहला राष्ट्रीय मतदान होगा, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाया था।

    उसी दिन जुलाई चार्टर पर एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह भी कराया जाएगा। इस चार्टर में कार्यपालिका की शक्तियां सीमित करने और न्यायपालिका को मजबूत करने जैसे बड़े सुधार प्रस्तावित हैं। मतदान देश की 300 संसदीय सीटों पर एक साथ होगा- यह बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार ट्विन पोल्स होंगे।

    चुनावी प्रक्रिया की समयरेखा
    – नामांकन दाखिल: 29 दिसंबर 2025 से
    – चुनाव प्रचार: 22 जनवरी 2026 से शुरू
    – चुनाव प्रचार समाप्ति: मतदान से 48 घंटे पहले

    आगामी चुनाव का संभावित मुकाबला
    विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनाव में मुख्य प्रतिस्पर्धा इन दलों के बीच रहने की संभावना है:
    – बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP)- नेतृत्व बेगम खालिदा जिया
    – जमात-ए-इस्लामी
    – नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP)- जिसने 2024 के छात्र आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    अवामी लीग की अनुपस्थिति चुनावी परिदृश्य को जटिल बना सकती है, और उसकी सख्त आपत्तियों के कारण बांग्लादेश का राजनीतिक तापमान एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है।