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  • MP की सियासत में अजब गजब किस्से कहीं 80s के अंदाज में नेता तो कहीं अधिकारी का पुतला बचाने आग में कूदा कर्मचारी

    MP की सियासत में अजब गजब किस्से कहीं 80s के अंदाज में नेता तो कहीं अधिकारी का पुतला बचाने आग में कूदा कर्मचारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में इन दिनों एक से बढ़कर एक दिलचस्प किस्से सामने आ रहे हैं। कहीं नेता सोशल मीडिया पर 80 के दशक के रेट्रो अंदाज में नजर आ रहे हैं तो कहीं अपने अधिकारी के सम्मान में कर्मचारी आग की लपटों तक पहुंच गया। दूसरी तरफ श्योपुर में विकास कार्यों का हिसाब बताने पहुंचे सांसद को पंच और सरपंचों के विरोध के बाद कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। यानी प्रदेश की सियासत में इन दिनों खबरों के साथ किस्से भी खूब बन रहे हैं।

    सबसे पहले बात नेताओं के रेट्रो अंदाज की। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक का रंग छाया हुआ है। पुराने दौर के कपड़े पुराने गाने और उस जमाने की तस्वीरों जैसा अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है। अब इस ट्रेंड से मध्य प्रदेश की राजनीति भी अछूती नहीं रही। मुख्यमंत्री मोहन यादव से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक और दिग्विजय सिंह से लेकर कमलनाथ तक कई नेताओं की रेट्रो स्टाइल वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा और जीतू पटवारी जैसे नेताओं के फोटो भी पुराने दौर की झलक दिखा रहे हैं। किसी का अंदाज पुराने फिल्मी सितारे जैसा नजर आ रहा है तो किसी की तस्वीर देखकर 80 के दशक की यादें ताजा हो रही हैं।

    अब बात नर्मदापुरम की जहां अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी चर्चा का विषय बन गई। यहां आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता गंदगी और खराब सड़कों के विरोध में नगर पालिका के सीएमओ का पुतला जला रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी पुतले को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों से भिड़ गया। पहले उसने हाथों से आग बुझाने की कोशिश की। जब आग नहीं बुझी तो पैरों से उसे हटाने लगा। इसके बाद कर्मचारी ने अपनी शर्ट उतारकर उससे आग बुझाने की कोशिश की। आखिरकार पानी डालकर पुतले को जलने से बचा लिया गया। इस दौरान कर्मचारी खुद भी झुलस गया। उसका कहना था कि जब उसके अधिकारी का पुतला जलाया जा रहा था तो वह चुप कैसे रह सकता था। अधिकारी के पुतले को बचाने के लिए कर्मचारी का इस तरह आग में उतरना अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

    उधर श्योपुर में भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर को पंच और सरपंचों के विरोध का सामना करना पड़ा। सांसद विकास कार्यों का जिक्र कर रहे थे तभी कार्यक्रम में मौजूद पंच और सरपंचों ने इलाके में काम नहीं होने को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विरोध बढ़ा तो एक उप सरपंच सांसद के सामने पहुंच गया। स्थिति ऐसी बनी कि सांसद को कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। विकास कार्यों का बखान करने पहुंचे सांसद के सामने जब स्थानीय प्रतिनिधियों ने ही सवाल खड़े किए तो कार्यक्रम का माहौल बदल गया।

    इसके बाद सागर से जुड़ी एक और चर्चा सामने आई है। जहरीली शराब कांड की जांच के लिए पहुंचे आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर कई घंटे तक सर्किट हाउस में ही इंतजार करना पड़ा। बताया गया कि पुलिस विभाग के एक अधिकारी से घटना से जुड़े तथ्यों और सबूतों को लेकर जानकारी मांगी गई थी लेकिन प्रक्रिया में काफी समय लग गया। बाद में मौके पर पहुंचने पर जांच अधिकारी को महत्वपूर्ण सबूत नहीं मिले। अब इस मामले में शिकायत किए जाने की चर्चा है और आगे प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में इन दिनों राजनीति और प्रशासन से जुड़े ये किस्से खूब चर्चा बटोर रहे हैं। कहीं सोशल मीडिया का रेट्रो ट्रेंड नेताओं पर चढ़ा है तो कहीं अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी सुर्खियों में है और कहीं जनता के प्रतिनिधियों के सवालों ने नेताओं के दावों की परीक्षा ले ली है।

  • नीचे ग्रामीणों की भीड़ और ऊपर 60 फीट ऊंची टंकी पर सांड: 42 घंटे बाद प्रशासन ने क्रेन से किया सुरक्षित रेस्क्यू

    नीचे ग्रामीणों की भीड़ और ऊपर 60 फीट ऊंची टंकी पर सांड: 42 घंटे बाद प्रशासन ने क्रेन से किया सुरक्षित रेस्क्यू


    श्योपुर । मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के ददूनी गांव में एक सांड ने करीब दो दिन तक ग्रामीणों और प्रशासन की चिंता बढ़ाए रखी। गांव में बनी करीब 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ा सांड लंबे समय तक नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ। उसे टंकी की ऊंचाई पर फंसा देखकर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। हर किसी के सामने एक ही सवाल था कि आखिर इतने ऊंचे स्थान से इस जानवर को सुरक्षित नीचे कैसे उतारा जाए। काफी प्रयासों के बाद जब सांड नीचे नहीं आया तो प्रशासन को क्रेन की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। करीब दो घंटे चले अभियान के बाद आखिरकार सांड को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

    जानकारी के अनुसार ददूनी गांव श्योपुर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है। रविवार की शाम एक सांड पानी की टंकी पर चढ़ गया। टंकी की ऊंचाई लगभग 60 फीट बताई जा रही है। सांड के इतनी ऊंचाई पर पहुंचने की खबर फैलते ही ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचने लगे। लोगों ने अपने स्तर पर उसे नीचे लाने की कोशिश की लेकिन ऊंचाई और सांड की स्थिति को देखते हुए यह आसान नहीं था।

    ददूनी पंचायत के सचिव महेश गौड़ के मुताबिक सांड पर लगातार नजर रखी जा रही थी। पुलिस और प्रशासन को भी पूरे मामले की सूचना दे दी गई थी। इस दौरान सांड ने एक बार नीचे उतरने का प्रयास किया लेकिन नीचे बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भीड़ देखकर वह फिर ऊपर की तरफ चला गया। इसके बाद ग्रामीणों ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की ताकि जानवर को नीचे आने का मौका मिल सके लेकिन सांड टंकी पर ही रुका रहा।

    समय बीतता गया और रविवार की शाम से मंगलवार तक करीब 42 घंटे गुजर गए। इस दौरान पंचायत की ओर से सांड के खाने और पानी की व्यवस्था की गई। प्रशासन और ग्रामीण उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रहे। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इतने भारी जानवर को 60 फीट की ऊंचाई से नीचे उतारते समय किसी तरह की चोट या दुर्घटना न हो। इसी वजह से जल्दबाजी के बजाय सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू की योजना बनाई गई।

    मंगलवार को प्रशासन ने श्योपुर से क्रेन मंगवाई। मौके पर पुलिस के साथ पशुपालन विभाग और प्रशासन की टीम पहुंची। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। मानपुर थाना प्रभारी सतीश दुबे के अनुसार पुलिस टीम ने पशुपालन विभाग के सहयोग से अभियान चलाया। पशु चिकित्सा अधिकारी सचिन उपाध्याय ने सांड को नियंत्रित करने के लिए बेहोशी की दवा दी। इसके बाद क्रेन की मदद से उसे सावधानीपूर्वक नीचे उतारने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    करीब दो घंटे तक चले इस ऑपरेशन में टीम ने बेहद सावधानी के साथ सांड को नीचे लाने का काम किया। आखिरकार 42 घंटे से टंकी पर फंसे सांड को सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया। सांड के सुरक्षित नीचे आने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और मौके पर बनी हलचल भी धीरे धीरे खत्म हो गई।

    हालांकि इस पूरे घटनाक्रम ने एक सवाल जरूर छोड़ दिया कि आखिर सांड 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर चढ़ा कैसे। फिलहाल इसका स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है लेकिन इस अनोखे रेस्क्यू की चर्चा पूरे इलाके में बनी हुई है।

  • पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज

    पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज


    इंदौर । प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध की आग अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है। प्रदेश के कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर बड़ी संख्या में युवा धरने पर बैठे हैं। लगातार हो रही बारिश भी उनके हौसलों को डिगा नहीं सकी। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    इंदौर में छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत पेपर लीक जैसी घटनाओं से बर्बाद हो जाती है। इसलिए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। छात्रों ने निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग दोहराई।

    उधर, श्योपुर में भी छात्र संगठनों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। “समस्त छात्र शक्ति” के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र पीजी कॉलेज से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। करीब चार किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा के दौरान छात्रों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। कलेक्ट्रेट पहुंचकर छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और लगभग दो घंटे तक धरना देकर नारेबाजी की।

    रीवा, उमरिया और बड़वानी सहित अन्य जिलों में भी छात्र अलग-अलग स्थानों पर धरने और प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, इसलिए सरकार को दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

    प्रदर्शनकारी युवाओं ने यह भी कहा कि केवल जांच बैठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए मजबूत कानून, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे आंदोलन और व्यापक रूप ले सकते हैं।

    प्रदेशभर में बढ़ते छात्र आंदोलनों ने साफ कर दिया है कि युवाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग को लेकर उठी यह आवाज अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी आंदोलन का रूप ले चुकी है।

  • परिवारिक कलह के बीच उठाया खौफनाक कदम, जहर खाने वाले युवक ने तोड़ा दम

    परिवारिक कलह के बीच उठाया खौफनाक कदम, जहर खाने वाले युवक ने तोड़ा दम


    मध्यप्रदेश । श्योपुर जिले के विजयपुर तहसील अंतर्गत मगरधा गांव में घरेलू विवाद से परेशान एक 35 वर्षीय युवक की जहरीला पदार्थ खाने के बाद मौत हो गई। युवक की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे उपचार के लिए शिवपुरी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मृतक की पहचान अशोक धाकड़ पुत्र सरवन धाकड़ निवासी मगरधा गांव के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मंगलवार शाम घरेलू विवाद और लंबे समय से चल रहे गृह क्लेश के चलते अशोक ने जहरीला पदार्थ खा लिया। कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिवार के लोग उसे तत्काल इलाज के लिए शिवपुरी मेडिकल कॉलेज ले गए।

    मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने युवक का उपचार शुरू किया, लेकिन उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। बुधवार तड़के करीब 2:30 बजे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।

    पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में घरेलू कलह को युवक द्वारा यह कदम उठाने की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा परिजनों के बपुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में घरेलू कलह को युवक द्वारा यह कदम उठाने की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।