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  • ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नियंत्रण के लिए बिल का ड्राफ्ट पेश किया, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान

    ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर नियंत्रण के लिए बिल का ड्राफ्ट पेश किया, नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान

    नई दिल्ली । ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ईरानी सांसदों ने इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियमों से जुड़े एक विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया है। इस प्रस्ताव में कुछ जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आर्थिक जुर्माना लगाने का प्रावधान शामिल किया गया है।

    यह बिल फिलहाल ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग की समीक्षा में है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात को नियंत्रित करना और ईरान के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया जा रहा है। हालांकि, इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी बढ़ सकती है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है।

    प्रस्तावित ड्राफ्ट में इजरायल से जुड़े जहाजों और कुछ अन्य देशों या कंपनियों से जुड़े सैन्य तथा नागरिक कार्गो पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसे जहाजों को मुआवजा मिलने तक ट्रांजिट की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों पर उनके कार्गो मूल्य का 20 प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान भी प्रस्ताव में शामिल किया गया है।

    ईरान की योजना के अनुसार, जिन जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी जाएगी, उनसे नौवहन सेवाओं के खर्च को पूरा करने के लिए शुल्क लिया जा सकता है। यह शुल्क ईरानी मुद्रा में जमा करना होगा। ईरान का कहना है कि यह व्यवस्था समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है। किसी भी तरह की बाधा या नियंत्रण व्यवस्था का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। इसी कारण ईरान के इस कदम पर कई देशों की नजर बनी हुई है।

    इससे पहले भी ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कानून बनाने की कोशिश की गई थी। शुरुआती प्रस्तावों में केवल उन देशों के जहाजों को निशाना बनाने की बात कही गई थी, जिन्हें ईरान अपना विरोधी मानता है। नए ड्राफ्ट में प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए अधिक जहाजों और कार्गो को शामिल किया गया है।

    इसी बीच ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े समुद्री मार्गों को लेकर बातचीत भी जारी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच नौवहन मार्ग के भौगोलिक निर्देशांकों को लेकर सहमति बन चुकी है और संयुक्त बयान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हालांकि, इस समझौते को लेकर ओमान की ओर से अभी सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान अपने नियंत्रण वाले समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी करेगा। ईरान का कहना है कि वह समुद्री सुरक्षा और नौवहन व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखेगा। इस व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

    होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के नए कदम ऐसे समय सामने आए हैं जब मध्य पूर्व में पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनाव बना हुआ है। समुद्री मार्गों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त नियंत्रण या प्रतिबंध वैश्विक व्यापार के लिए नई चुनौती पैदा कर सकता है। आने वाले दिनों में इस बिल की समीक्षा और क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर रहेगी।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की नई व्यवस्था से बढ़ी हलचल, अमेरिका ने मुक्त नौवहन को लेकर जताई आपत्ति

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान की नई व्यवस्था से बढ़ी हलचल, अमेरिका ने मुक्त नौवहन को लेकर जताई आपत्ति


    नई दिल्ली । दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच एक अहम समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दोनों देश इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा, मार्गदर्शन और यातायात प्रबंधन की संयुक्त जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके बदले जहाजों से सर्विस फीस लेने का प्रावधान किया गया है, जिसे दोनों देशों के बीच समान रूप से साझा किया जाएगा। इस प्रस्तावित व्यवस्था ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है क्योंकि अमेरिका ने इसका खुलकर विरोध दर्ज कराया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच नए शिपिंग रूट और उसके संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर व्यापक सहमति बन चुकी है। अब समझौते को अंतिम रूप देने के लिए संयुक्त बयान की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि नए समुद्री मार्ग के भौगोलिक निर्देशांक तय किए जा चुके हैं और तकनीकी स्तर पर अधिकांश प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि समझौते की औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है।

    प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्ग का पालन करना होगा। सुरक्षा, निगरानी और नौवहन सहायता की जिम्मेदारी ईरान और ओमान संयुक्त रूप से निभाएंगे। इसके बदले जहाजों से सर्विस फीस वसूली जाएगी, जिसे दोनों देशों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री यातायात को अधिक संगठित और सुरक्षित बनाना बताया जा रहा है।

    अमेरिका ने इस प्रस्तावित समझौते पर गंभीर आपत्ति जताई है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर ऐसी कोई व्यवस्था स्वीकार्य नहीं हो सकती, जिससे मुक्त और निर्बाध नौवहन के सिद्धांत पर प्रभाव पड़े। अमेरिका का मानना है कि वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सभी देशों को समान और स्वतंत्र पहुंच मिलनी चाहिए तथा किसी भी नई व्यवस्था से अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के मूल सिद्धांत प्रभावित नहीं होने चाहिए।

    ईरान का कहना है कि प्रस्तावित मॉडल का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना और जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करना है। अधिकारियों के अनुसार नई व्यवस्था इस प्रकार तैयार की गई है कि वाणिज्यिक जहाज अपनी यात्रा के दोनों चरणों में निर्धारित समुद्री क्षेत्र से होकर गुजरेंगे, जिससे यातायात प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सके। ईरान का यह भी दावा है कि यह व्यवस्था क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने और समुद्री गतिविधियों में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत रणनीतिक महत्व रखता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और ऊर्जा संसाधन इसी मार्ग से होकर गुजरते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में लागू होने वाली किसी भी नई व्यवस्था का प्रभाव केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान और ओमान इस समझौते को कब अंतिम रूप देते हैं और इसके बाद वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।

  • होर्मुज और लाल सागर के बाद ब्लैक सी पर बढ़ी चिंता, भारत ने समुद्री कर्मचारियों के लिए जारी किए सुरक्षा निर्देश

    होर्मुज और लाल सागर के बाद ब्लैक सी पर बढ़ी चिंता, भारत ने समुद्री कर्मचारियों के लिए जारी किए सुरक्षा निर्देश


    नई दिल्ली ।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का असर अब समुद्री मार्गों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ब्लैक सी क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए भारत सरकार ने जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों और समुद्री कर्मचारियों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने सलाह दी है कि किसी भी समुद्री यात्रा या नई नियुक्ति से पहले संबंधित क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति, रोजगार की शर्तों और आपातकालीन व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। इस कदम का उद्देश्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित जोखिमों को कम करना है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से जारी परामर्श में कहा गया है कि ब्लैक सी और उससे जुड़े समुद्री क्षेत्रों में मौजूदा समय में हालात संवेदनशील बने हुए हैं। युद्ध के कारण व्यावसायिक जहाजों पर हमलों का खतरा बना हुआ है और समुद्री गतिविधियां लगातार प्रभावित हो रही हैं। ऐसे माहौल में जहाजों पर कार्यरत कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। सरकार ने विशेष रूप से उन भारतीय नाविकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, जो इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाजों पर कार्यरत हैं या नई नियुक्ति के लिए जाने वाले हैं।

    हाल के दिनों में यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास एक व्यावसायिक जहाज पर हुए हमले ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। उस जहाज पर भारतीय नागरिक भी सवार थे। घटना के बाद कुछ भारतीय सुरक्षित पाए गए, जबकि अन्य की तलाश और स्थिति को लेकर प्रयास जारी रहे। इस घटनाक्रम ने ब्लैक सी क्षेत्र में कार्यरत समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने समय रहते एहतियाती सलाह जारी की है।

    एडवाइजरी में नाविकों से कहा गया है कि किसी भी जहाज पर कार्यभार संभालने से पहले यह सुनिश्चित करें कि उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, बीमा सुरक्षा और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही रोजगार अनुबंध की शर्तों की भी सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं। सरकार का मानना है कि पूर्व तैयारी और सही जानकारी संभावित संकट की स्थिति में जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी उल्लेख किया है कि अप्रैल 2026 से अब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष से जुड़े घटनाक्रमों में कई भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है। ऐसे मामलों को देखते हुए सरकार लगातार भारतीय नाविकों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी कर रही है। अधिकारियों ने सभी संबंधित एजेंसियों और शिपिंग कंपनियों से भी सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

    इस बीच वैश्विक समुद्री व्यापार पहले से ही कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता बनी हुई है, जबकि लाल सागर में भी सुरक्षा संबंधी घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को प्रभावित किया है। अब ब्लैक सी में बढ़ते जोखिम ने वैश्विक शिपिंग उद्योग की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समुद्री क्षेत्रों में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो इसका असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत सरकार की यह एडवाइजरी भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एहतियाती कदम मानी जा रही है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के बीच सरकार का बड़ा कदम, भारतीय नाविकों की तैनाती पर जारी हुई नई एडवाइजरी

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव के बीच सरकार का बड़ा कदम, भारतीय नाविकों की तैनाती पर जारी हुई नई एडवाइजरी

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) ने शिपिंग कंपनियों और जहाज प्रबंधन से जुड़ी संस्थाओं के लिए नई एडवाइजरी जारी करते हुए निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती से बचा जाए।

    सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी जोखिमों को देखते हुए समुद्री मार्गों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल है, जहां से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं का परिवहन होता है।

    जारी एडवाइजरी में शिप ओनर और शिप मैनेजमेंट कंपनियों से कहा गया है कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। जब तक सुरक्षा स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक होर्मुज क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नागरिकों की तैनाती नहीं की जाए। साथ ही कंपनियों को क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रखने और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    समुद्री प्रशासन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह एहतियाती उपाय के रूप में लिया गया है। खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं और किसी भी अप्रत्याशित घटना से भारतीय नाविकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में पहले से सावधानी बरतना आवश्यक माना गया है।

    हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ी सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी असर डाला है। कई देशों ने अपने नागरिकों और व्यापारिक जहाजों के लिए अलग-अलग स्तर पर सुरक्षा सलाह जारी की है। भारत ने भी इसी क्रम में अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण केंद्र है। इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का सुरक्षा संकट अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए समुद्री कंपनियां भी लगातार सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के निर्देशों के अनुरूप अपनी परिचालन रणनीति में बदलाव कर रही हैं।

    सरकार ने शिपिंग कंपनियों से यह भी अपेक्षा की है कि वे अपने जहाजों की आवाजाही और चालक दल की तैनाती से जुड़े सभी निर्णय मौजूदा सुरक्षा आकलन के आधार पर लें। यदि क्षेत्र की परिस्थितियों में कोई नया बदलाव होता है तो उसके अनुसार आगे के निर्देश भी जारी किए जाएंगे।

    भारतीय नाविक दुनिया के विभिन्न देशों के व्यापारिक जहाजों पर बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। वर्तमान एडवाइजरी को भी इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण एहतियाती कदम माना जा रहा है, ताकि किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

  • दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग पर ईरान का बड़ा कदम, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से वसूलेगा सर्विस फीस, मित्र देशों को मिल सकती है राहत

    दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्ग पर ईरान का बड़ा कदम, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से वसूलेगा सर्विस फीस, मित्र देशों को मिल सकती है राहत

    नई दिल्ली । ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर सर्विस फीस लगाने की दिशा में औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। तेहरान का कहना है कि यह व्यवस्था समुद्री सुरक्षा और जहाजों को दी जाने वाली सेवाओं के बदले लागू की जाएगी। इसके लिए ईरान ओमान के साथ मिलकर नई प्रणाली तैयार कर रहा है। इस घोषणा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार की नजरें इस प्रस्तावित व्यवस्था पर टिक गई हैं।

    बीजिंग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फजली ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाजों से लिया जाने वाला शुल्क टोल टैक्स नहीं बल्कि सर्विस फीस होगा, जिसे सुरक्षा, निगरानी और समुद्री सेवाओं के बदले वसूला जाएगा।

    ईरानी पक्ष का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट का एक हिस्सा उसके क्षेत्रीय जलक्षेत्र में आता है। ऐसे में जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराना, उनकी आवाजाही की निगरानी करना और भारी समुद्री यातायात से जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों का प्रबंधन करना उसकी जिम्मेदारी है। इसी आधार पर सर्विस फीस को उचित और वैध बताया गया है।

    हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के बाद व्यावसायिक जहाजों को लगभग 60 दिनों तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई थी। अब यह अंतरिम व्यवस्था समाप्त होने के बाद ईरान स्थायी नियम लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि शुल्क की दर, लागू होने की तारीख और किन देशों पर यह व्यवस्था किस रूप में लागू होगी, इस बारे में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि हालिया संकट के दौरान जिन देशों ने उसका समर्थन किया, उन्हें नई व्यवस्था में विशेष रियायत मिल सकती है। राजदूत ने कहा कि कठिन समय में साथ खड़े रहने वाले देशों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। हालांकि भारत सहित किसी भी देश का नाम लेकर यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन देशों को राहत मिलेगी और किस प्रकार की छूट दी जाएगी।

    भारत के संदर्भ में भी फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है कि भारतीय जहाजों को इस सर्विस फीस से छूट मिलेगी या उन्हें इसका भुगतान करना होगा। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत पर इस नई व्यवस्था का क्या प्रभाव पड़ेगा। अंतिम नियम जारी होने के बाद ही विभिन्न देशों और शिपिंग कंपनियों पर पड़ने वाले वास्तविक असर का आकलन किया जा सकेगा।

    होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस का परिवहन इसी रास्ते से होता है। इसलिए इस मार्ग से जुड़ा कोई भी प्रशासनिक या शुल्क संबंधी बदलाव अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत, ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। आने वाले दिनों में ईरान और ओमान द्वारा जारी किए जाने वाले अंतिम दिशा-निर्देशों पर पूरी दुनिया की नजर बनी रहेगी।