Tag: Shiv Sena UBT

  • देवेंद्र फडणवीस को PM पद पर समर्थन देने का ऐलान उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी पारा चढ़ा

    देवेंद्र फडणवीस को PM पद पर समर्थन देने का ऐलान उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी पारा चढ़ा


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर बड़ा बयान दिया। ठाकरे ने कहा कि यदि फडणवीस भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी करते हैं तो उनकी पार्टी उनका समर्थन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह फडणवीस के विरोधी नहीं बल्कि हितैषी हैं और महाराष्ट्र से यदि कोई नेता देश का प्रधानमंत्री बनता है तो उसका समर्थन किया जाना चाहिए।

    शिरडी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक ताकतें ऐसी रणनीति बना रही हैं जिससे देवेंद्र फडणवीस 2029 में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल न हो सकें। उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र का कोई नेता प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में पहुंचता है तो उनकी पार्टी उसके साथ खड़ी होगी।

    हालांकि समर्थन की बात कहने के साथ ठाकरे ने भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी तंज कसा। उनका कहना था कि यदि फडणवीस सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा जाहिर करते हैं तो यह उनके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। ठाकरे ने सवाल उठाया कि ऐसी घोषणा के बाद क्या वह अपनी ही पार्टी में उसी स्थिति में बने रह पाएंगे।

    शिरडी में आयोजित रैली के दौरान ठाकरे ने हाल में दल बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए सांसदों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के छह सांसदों के पाला बदलने के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका रही। ठाकरे ने यह भी कहा कि साईं बाबा के दर्शन के दौरान उन्होंने देवेंद्र फडणवीस की कुर्सी सुरक्षित रहने की प्रार्थना की।

    इससे पहले भी उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर को लेकर बयान देते हुए दावा किया था कि इसका वास्तविक उद्देश्य ऑपरेशन देवेंद्र था। उनके अनुसार यह कथित रणनीति फडणवीस के राजनीतिक कद को सीमित रखने और उन्हें भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दौड़ से दूर रखने के लिए बनाई गई थी।

    उधर देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के 14 करोड़ लोगों और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए कोई भी उनके राजनीतिक पंख नहीं काट सकता। उन्होंने हाल में उद्धव ठाकरे के साथ एक ही विमान में यात्रा करने को लेकर उठी अटकलों को भी महज संयोग बताया।

    महाराष्ट्र में हाल के दिनों में लगातार राजनीतिक उठापटक देखने को मिल रही है। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में संभावित टूट तथा दल बदल की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे का यह बयान राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और तेज कर गया है।

  • महाराष्ट्र में सियासी विस्फोट! ठाकरे खेमे के 6 सांसदों की बगावत, शिंदे शिवसेना की ताकत बढ़ने के संकेत

    महाराष्ट्र में सियासी विस्फोट! ठाकरे खेमे के 6 सांसदों की बगावत, शिंदे शिवसेना की ताकत बढ़ने के संकेत


    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य में लंबे समय से चर्चा में रहे ऑपरेशन टाइगर को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना UBT के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह ठाकरे खेमे के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित होगा और राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

    बताया जा रहा है कि शिवसेना UBT के छह सांसदों ने शिंदे गुट के साथ जाने का मन बना लिया है। इनमें से कुछ सांसदों ने सार्वजनिक रूप से अपने फैसले के संकेत भी दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सभी छह सांसद एक साथ शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो दलबदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई संख्या का आंकड़ा भी पूरा हो जाएगा। इससे इन सांसदों पर अयोग्यता की कार्रवाई का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।

    राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी ऑपरेशन टाइगर को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान सफल रहा है और संगठन पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। फडणवीस ने यह भी कहा कि किसी को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पार्टी और गठबंधन दोनों मजबूत हैं।

    वहीं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी अपने अंदाज में इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह कभी अधूरा ऑपरेशन नहीं करते और जब किसी मिशन की शुरुआत करते हैं तो उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। शिंदे के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इससे यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि शिवसेना UBT के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में और भी नेता पाला बदल सकते हैं।

    दूसरी ओर इस संभावित राजनीतिक झटके को देखते हुए शिवसेना UBT ने भी मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी नेतृत्व ने नरीमन पॉइंट स्थित शिवालय में अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि इस बैठक का उद्देश्य पार्टी नेताओं और जनप्रतिनिधियों को एकजुट रखना तथा संभावित राजनीतिक नुकसान को रोकना है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि छह सांसद वास्तव में शिंदे गुट में शामिल हो जाते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में इसका दूरगामी असर देखने को मिल सकता है। इससे न केवल शिवसेना UBT की संसदीय ताकत कमजोर होगी बल्कि आगामी चुनावों में भी इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है। दूसरी तरफ महायुति गठबंधन को इससे नई मजबूती मिल सकती है।

    फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। दोपहर बाद होने वाली राजनीतिक गतिविधियां यह तय करेंगी कि ऑपरेशन टाइगर वास्तव में कितना सफल रहा और महाराष्ट्र की राजनीति में इसके क्या परिणाम सामने आते हैं।

  • जून में फिर घिरे उद्धव ठाकरे! सांसदों के बाद विधायकों में टूट की आशंका, ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ की चर्चाओं से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

    जून में फिर घिरे उद्धव ठाकरे! सांसदों के बाद विधायकों में टूट की आशंका, ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ की चर्चाओं से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में जून का महीना एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए चुनौती लेकर आया है। वर्ष 2022 में जून के महीने में ही एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था और राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था। चार साल बाद जून 2026 में एक बार फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने राजनीतिक संकट गहराता दिखाई दे रहा है। इस बार शुरुआत सांसदों की बगावत से हुई है और अब चर्चा विधायकों की संभावित टूट को लेकर हो रही है।

    हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के बागी रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ विधायक भी पाला बदल सकते हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति में तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलने वाले महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान या उसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। ऐसे समय में उद्धव ठाकरे के लिए अपनी पार्टी के विधायकों और नेताओं को एकजुट बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

    विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के पास वर्तमान में 20 विधायक हैं, जबकि विधान परिषद में उसके छह सदस्य हैं। महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर भी उद्धव ठाकरे की पार्टी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी मानी जाती है। कांग्रेस के पास 16 विधायक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के पास 10 विधायक हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 57 विधायक और विधान परिषद में आठ सदस्य हैं, जिससे उनका संगठनात्मक और राजनीतिक आधार कहीं अधिक मजबूत दिखाई देता है।

    इसी बीच शिवसेना के विधायक कृपाल तुमाने के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 20 में से 16 विधायक शिंदे नेतृत्व के संपर्क में हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी में संभावित असंतोष और टूट की चर्चाओं को हवा मिली है।

    दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कहा है कि उनकी पार्टी कोई ‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं चला रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई नेता या जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से उनके साथ जुड़ना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा। इस बयान को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलते समीकरणों को देखते हुए आने वाले सप्ताह बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि विधायकों में किसी प्रकार की टूट होती है तो इसका असर केवल शिवसेना (यूबीटी) पर ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी की राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अब मानसून सत्र और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

  • RSS-पाकिस्तान संवाद पर सियासी घमासान: प्रियंका चतुर्वेदी ने BJP-आरएसएस पर साधा निशाना, विपक्ष हुआ आक्रामक

    RSS-पाकिस्तान संवाद पर सियासी घमासान: प्रियंका चतुर्वेदी ने BJP-आरएसएस पर साधा निशाना, विपक्ष हुआ आक्रामक


    नई दिल्ली।
    आरएसएस द्वारा पाकिस्तान से संवाद की वकालत किए जाने को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस तरह के रुख से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए।

    प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर टिप्पणी करते हुए इसे “RSS और पाकिस्तान की जुगलबंदी” बताया और आरोप लगाया कि यह बीजेपी के “अमन की आशा” वाले दृष्टिकोण की ओर इशारा करता है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    यह विवाद तब और बढ़ा जब आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की आवश्यकता पर जोर दिया और संवाद को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके इस रुख का पाकिस्तान ने भी स्वागत किया और कहा कि शांति, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बातचीत जरूरी है।

    इस मुद्दे पर पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे ने भी आरएसएस नेता के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत का मतलब सुरक्षा विकल्पों को छोड़ना नहीं है।

    इसके अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने भी बातचीत के विचार का समर्थन करते हुए कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और दोनों देशों के बीच संवाद जारी रहना चाहिए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे विवाद ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान नीति को लेकर अलग-अलग विचारधाराओं को सामने ला दिया है। एक तरफ जहां कुछ नेता बातचीत को समाधान मानते हैं, वहीं दूसरी ओर इसे आतंकवाद के पीड़ितों के साथ न्याय से जोड़कर विरोध भी किया जा रहा है।

    कुल मिलाकर यह मुद्दा अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश की घरेलू राजनीति में भी तीखी बहस का कारण बन गया है, जहां संवाद बनाम सख्त रुख की लड़ाई साफ दिखाई दे रही है।

  • प्रियंका चतुर्वेदी फिर जाएंगी राज्यसभा? उद्धव गुट की सांसद ने खुद बोलीं, 'मैं उसे लेकर कोई…'

    प्रियंका चतुर्वेदी फिर जाएंगी राज्यसभा? उद्धव गुट की सांसद ने खुद बोलीं, 'मैं उसे लेकर कोई…'


    नई दिल्‍ली। महाराष्ट्र में राज्यसभा की 7 सीटों पर चुनाव को लेकर सियासी गहमागहमी तेज हो गई है. उद्धव गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी का राज्यसभा का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है. राज्यसभा में फिर से जाने के सवाल पर प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे लेकर खुद स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि जनता से मुझे भरपूर समर्थन मिला है. भविष्य में क्या होगा मैं उसे लेकर कोई कयास नहीं लगाना चाहती हूं लेकिन देश और जनता के हित में काम करती रहूंगी.

    पिछले 6 सालों में मैंने जनता के मुद्दों का उठाया- प्रियंका चतुर्वेदी

    शिवसेना UBT सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया से बातचीत में कहा मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि जनता ने मुझ पर जो विश्वास जताया है मुझे भरपूर समर्थन मिला है. पिछले छह वर्षों में मैंने कड़ी मेहनत की है जनता के मुद्दों को उठाया है. मेरी पार्टी ने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है जिसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी.”

    मैं हमेशा लोगों का शुक्रगुजार रहूंगी- प्रियंका चतुर्वेदी

    उन्होंने आगे कहा एक महिला जिनका राजनीति से कोई लेना देना नहीं था उनको राज्यसभा में आने का मौका मिला मैं इसके लिए हमेशा आभारी और शुक्रगुजार रहूंगी. आने वाले समय में क्या होगा क्या नहीं होगा मैं उसे लेकर कोई अनुमान नहीं लगाना चाहती हूं लेकिन ये जरूर कहूंगी कि देश और जनता के हित में काम करना जारी रखूंगी.”

    MVA से कौन जाएगा राज्यसभा?

    उद्धव ठाकरे की पार्टी एमवीए का हिस्सा है. विधायकों के आंकड़ों के हिसाब से MVA से एक ही सांसद राज्यसभा जा सकता है. वो नेता कौन होगा इसको लेकर अभी इस गठबंधन में तस्वीर साफ नहीं है.

    महाविकास आघाड़ी का गणित
    कांग्रेस 16 + राष्ट्रवादी शरद पवार गुट 10 + शिवसेना ठाकरे गुट 20 = 46
    छोटे सहयोगी दल सपा 2 + माकपा 1 = 3
    कुल = 49 विधायक
    49 ÷ 37 = 1.32
    अर्थात MVA का 1 सांसद निश्चित
    राज्यसभा को लेकर चुनावी कार्यक्रम
    बता दें कि 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा. नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च है. वहीं 6 मार्च को नामांकन पत्र की जांच होगी. जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 मार्च है. 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी जबकि शाम पांच बजे से मतगणना होगी.

  • सुनेत्रा पवार को काबिलियत के आधार पर…', जल्दबाजी में डिप्टी CM बनाए जाने पर उद्धव गुट का तंज!

    सुनेत्रा पवार को काबिलियत के आधार पर…', जल्दबाजी में डिप्टी CM बनाए जाने पर उद्धव गुट का तंज!


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में इन दिनों बारामती प्लेन हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद से ही राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है. सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद के शपथ लेने के बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर हैखासकर शिवसेना यूबीटी. शिवसेना UBT ने तो अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में BJP और NCP अजित पवार गुट पर तीखा हमला बोल दिया है. सामना के मुताबिकयह शपथ समारोह जल्दबाजी और राजनीतिक साजिश का नतीजा है. लेख में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस को इसके पीछे की मुख्य ताकत बताया गया है. UBT के माउथपीस ने मौजूदा राजनीतिक हालात को घटिया राजनीति बताया है.

    शोक में था महाराष्ट्रदिखाई गई जल्दबाजी- सामना
    सामना के संपादकीय में कहा गया है कि डिप्टी CM शपथ समारोह महाराष्ट्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है. आरोप लगाया गया कि अजित पवार के निधन के बाद राज्य शोक में थालेकिन इसी दौरान सत्ता की जल्दबाजी दिखाई गईUBT का कहना है कि यह फैसला संवेदनशीलता और परंपराओं की अनदेखी का उदाहरण है.लेख में यह भी कहा गया कि BJP हिंदुत्व और संस्कृति की बात करती हैलेकिन व्यवहार में अपने ही रीति-रिवाजों का पालन नहीं करती. शोक काल में सत्ता प्रदर्शन को सामना ने बेहद घटिया राजनीति करार दिया है.

    सुनेत्रा पवार की नियुक्ति पर सवाल
    संपादकीय में सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. सामना का कहना है कि यह पद उनकी व्यक्तिगत काबिलियत या राजनीतिक अनुभव के आधार पर नहीं दिया गया. लेख में तंज कसते हुए लिखा गया है कि यह नियुक्ति पूरी तरह सत्ता संतुलन और अंदरूनी जोड़तोड़ का परिणाम है. सामना के अनुसारशरद पवार और सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि परिवार को भी इस शपथ की पूर्व जानकारी नहीं थी. इससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहराता है.

    NCP की स्थिति और फडणवीस का नियंत्रण
    UBT के मुखपत्र ने NCP की मौजूदा हालत पर तीखी टिप्पणी की है. संपादकीय में कहा गया है कि पार्टी की नाव का कैप्टन अब नहीं रहा और फिलहाल इसे देवेंद्र फडणवीस नियंत्रित कर रहे हैं. सामना का आरोप है कि NCP अब स्वतंत्र राजनीतिक इकाई नहीं रह गई है.लेख में यह भी कहा गया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर भ्रम है. खुले तौर पर यह संकेत दिया गया कि सत्ता में बने रहने के लिए समझौते किए जा रहे हैंजिससे पार्टी की वैचारिक पहचान कमजोर हो रही है.

    बेहद घटिया राजनीति’ का आरोप
    संपादकीय के अंत में UBT ने मौजूदा राजनीतिक हालात को बेहद घटिया राजनीति बताया है. सामना का कहना है कि सत्ता की लालसा ने संवेदनशीलतासंस्कृति और नैतिकता को पीछे छोड़ दिया है. यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति के लिए खतरनाक संकेत है.UBT ने इशारों में कहा है कि आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर दिखेगा. सामना के मुताबिकयह पूरा घटनाक्रम केवल पद और नियंत्रण की लड़ाई हैजिसमें जनता और मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया है.
  • महाराष्ट्र के 15 नगर निगमों में महिला महापौर तय, BMC को लेकर सियासी घमासान

    महाराष्ट्र के 15 नगर निगमों में महिला महापौर तय, BMC को लेकर सियासी घमासान


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य के 29 नगर निगमों में से 15 नगर निगमों में महिला महापौर तय हो गई हैं। गुरुवार को मुंबई में शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल की मौजूदगी में लॉटरी प्रणाली के जरिए महापौर पदों के लिए आरक्षण की घोषणा की गई। इस फैसले के साथ ही राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने विशेष रूप से बृहन्मुंबई महानगरपालिका को लेकर नियम बदलने का आरोप लगाया है।
    लॉटरी प्रक्रिया के तहत 29 नगर निगमों में से 16 महापौर पद अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। शेष 13 पद सामान्य वर्ग के लिए रखे गए हैं। महिला आरक्षण के 50 प्रतिशत नियम के तहत 15 नगर निगमों में महिला महापौर का चयन सुनिश्चित हुआ है। मुंबई नगर निगम में यह छठा अवसर होगा जब किसी महिला को महापौर बनने का मौका मिलेगा।

    हालांकि इस फैसले को लेकर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई है। पूर्व महापौर किशोरी पेडनेकर ने कहा कि पिछले दो कार्यकालों में मुंबई के महापौर सामान्य वर्ग से चुने गए थे। ऐसे में इस बार OBC या ST वर्ग को अवसर मिलना चाहिए था। उनका आरोप है कि सरकार ने लॉटरी से ठीक पहले नियमों में बदलाव किया और इसकी जानकारी किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दी गई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।विवाद केवल मुंबई तक सीमित नहीं है। परभणी नगर निगम में भी महिला महापौर के आरक्षण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। उद्धव शिवसेना का कहना है कि वहां आरक्षण रोटेशन के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि जरूरत पड़ी तो वह चुनाव आयोग और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी।

    लॉटरी के नतीजों के अनुसार ठाणे नगर निगम में महापौर पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। कल्याण डोंबिवली में अनुसूचित जनजाति वर्ग को यह पद मिलेगा। वहीं मुंबई पुणे नागपुर नासिक और पिंपरी चिंचवड़ जैसे बड़े शहरों में महापौर पद सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित हुए हैं। चंद्रपुर नगर निगम में लगातार पांचवीं बार महिला महापौर चुनी जाएगी जो अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड माना जा रहा है।अब अगला चरण नामांकन प्रक्रिया का होगा। जल्द ही महापौर चुनाव की तारीखों की घोषणा की जाएगी। इसके बाद नगर निगम की विशेष बैठक में पार्षदों द्वारा मतदान के जरिए महापौर का चुनाव होगा। मतदान से पहले सभी राजनीतिक दल अपने पार्षदों को व्हिप जारी करेंगे। पार्टी लाइन के खिलाफ मतदान करने पर पार्षद की सदस्यता रद्द किए जाने का प्रावधान है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला आरक्षण से स्थानीय राजनीति में महिला नेतृत्व को मजबूती मिलेगी। लेकिन आरक्षण रोटेशन और नियमों में बदलाव को लेकर उठे सवाल आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में नया टकराव पैदा कर सकते हैं। खासकर BMC जैसे प्रभावशाली नगर निगम में यह मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।

  • MC में मेयर की जंग: शिंदे गुट ने ढाई साल तक शिवसेना को मेयर पद देने का दावा, भाजपा-शिंदे में खींचतान

    MC में मेयर की जंग: शिंदे गुट ने ढाई साल तक शिवसेना को मेयर पद देने का दावा, भाजपा-शिंदे में खींचतान



    मुंबई। बीएमसी चुनावी नतीजों के बाद महाराष्ट्र की सियासत में नया उलझाव खड़ा हो गया है। भाजपा ने मुंबई में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरते हुए 89 वार्ड जीतकर पहली बार BMC मेयर के लिए मजबूत दावेदार बन गई है। लेकिन इसके बाद शिंदे गुट ने मेयर पद को लेकर नया दावा करके सियासी पेंच फंसाया है।

    सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट का दावा है कि 2026 शिवसेना संस्थापक बाला साहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष है, इसलिए कम से कम ढाई साल शिवसेना का मेयर होना चाहिए। इसी मांग को लेकर भाजपा और शिंदे गुट के बीच खींचतान शुरू हो गई है।

    शिंदे गुट ने 29 पार्षदों को होटल में किया शिफ्ट, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
    केंद्रीय रूप से भाजपा-शिंदे गुट की सीटों पर नजर रखने के लिए शिंदे गुट ने अपने 29 नए पार्षदों को बांद्रा के होटल ताज लैंड्स एंड में शिफ्ट कर दिया है। होटल के बाहर कड़ा पहरा भी लगाया गया है।
    यह कदम हॉर्स-ट्रेडिंग रोकने और पार्षदों को पार्टी लाइन में बनाए रखने के उद्देश्य से बताया जा रहा है।

    शिंदे गुट ने बताया है कि सभी 29 पार्षदों को बुधवार दोपहर 3 बजे तक होटल में बने रहने का निर्देश दिया गया है और इसके बाद भी उन्हें कम से कम 3 दिन होटल में ही रहना होगा।

    उद्धव गुट ने लगाया बड़ा आरोप, कहाशिंदे खुद नहीं चाहते भाजपा का मेयर बने
    इसी बीच उद्धव ठाकरे के गुट (UBT) के सांसद संजय राउत ने दावा किया कि शिंदे खुद नहीं चाहते कि BMC में भाजपा का मेयर बने, इसलिए वे अपने पार्षदों को होटल में रखे हुए हैं।
    उनका कहना है कि शिंदे गुट भाजपा को मेयर पद नहीं दिलाने की कोशिश कर रहा है।

    वहीं उद्धव गुट ने यह भी संकेत दिए कि अगर “भगवान चाहें” तो उनकी पार्टी का मेयर बन सकता है, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं।

  • बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: बीएमसी में कांटे की टक्कर, शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उद्धव गुट से सीधी लड़ाई

    बीएमसी चुनाव परिणाम 2026: बीएमसी में कांटे की टक्कर, शुरुआती रुझानों में बीजेपी आगे, उद्धव गुट से सीधी लड़ाई


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे बीएमसी समेत 29 महानगर पालिकाओं के चुनाव नतीजे सामने आने लगे हैं। सुबह 10 बजे से मतगणना शुरू होते ही शुरुआती रुझानों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। एशिया के सबसे अमीर नगर निगम बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी  और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।227 सीटों वाली बीएमसी में बहुमत का आंकड़ा 114 है। ताजा रुझानों के मुताबिक बीजेपी 90 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना गठबंधन 71 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस फिलहाल 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि एनसीपी अजित पवार गुट का खाता अभी नहीं खुल पाया है। इन आंकड़ों से साफ है कि बीएमसी में सत्ता की राह अभी आसान नहीं है और अंतिम नतीजों तक समीकरण बदल सकते हैं।

    दक्षिण मुंबई के दो अहम वार्डों में बीजेपी की मजबूत स्थिति सामने आई है। वार्ड 214 से बीजेपी उम्मीदवार अजय पाटिल बढ़त बनाए हुए हैं, जहां उन्हें 2519 वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वियों को काफी कम मत हासिल हुए हैं। वहीं वार्ड 215 से बीजेपी के संतोष ढाले आगे चल रहे हैं और उन्हें 2246 वोट मिले हैं। इन दोनों वार्डों में बीजेपी की बढ़त ने पार्टी के हौसले और मजबूत कर दिए हैं।बीएमसी जनरल इलेक्शन 2025-26 के तहत कुल 227 चुनावी वार्डों के लिए 23 इलेक्शन डिसीजन ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। मतगणना के लिए सभी स्ट्रॉन्ग रूम और काउंटिंग सेंटर्स को PWD और पुलिस विभाग से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है, जिससे पूरी प्रक्रिया कड़ी निगरानी में चल रही है।

    मुंबई के अलावा राज्य की अन्य प्रमुख नगर निगमों में भी बीजेपी गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। नागपुर में बीजेपी 20 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 6 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। पुणे नगर निगम में 165 सीटों में से बीजेपी 52 सीटों पर आगे है। पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम में भी मुकाबला बेहद रोचक बना हुआ है, जहां पवार परिवार के गढ़ में बीजेपी और पवार गुट दोनों 12-12 सीटों पर आगे चल रहे हैं।कुल मिलाकर शुरुआती रुझान संकेत दे रहे हैं कि इस बार महाराष्ट्र की नगर निगम राजनीति में बीजेपी की स्थिति मजबूत है, लेकिन बीएमसी में अंतिम नतीजे आने से पहले सियासी समीकरण पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है।

  • 10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज

    10 मिनट में मुंबई बंद बनाम खोखली धमकी: बीएमसी चुनाव से पहले राउत और फडणवीस में जुबानी जंग तेज


    नई दिल्ली । बृहन्मुंबई महानगरपालिका बीएमसी चुनाव 2026 की आहट के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। शिवसेना यूबीटी के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत के एक ताजा बयान ने राज्य में सियासी घमासान छेड़ दिया है। राउत ने दावा किया कि ठाकरे परिवार की ताकत आज भी इतनी है कि वे मात्र 10 मिनट के भीतर पूरी मुंबई को ठप कर सकते हैं। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे गीदड़ भभकी करार दिया है।

    संजय राउत ने रविवार को एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान शिवसेना यूबीटी की सांगठनिक शक्ति का प्रदर्शन करते हुए कहा चुनाव में हार-जीत तो चलती रहती है लेकिन ठाकरे परिवार को कभी खत्म नहीं किया जा सकता। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि हम आज भी 10 मिनट में मुंबई बंद करा सकते हैं। जब तक ठाकरे परिवार सलामत है तब तक मराठी अस्मिता और मुंबई भी सुरक्षित है। राउत का यह बयान उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों और आगामी निकाय चुनावों में उनके संभावित गठबंधन की खबरों के बीच आया है।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राउत के इस दावे पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ऐसी खोखली धमकियों से डरने वाली नहीं है। 11 जनवरी को एक कार्यक्रम के दौरान फडणवीस ने कहा संजय राउत अपने घर के आसपास का इलाका भी बंद नहीं करा सकते। वह दिन भर सिर्फ सुर्खियों में रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि एक दौर था जब स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे के एक इशारे पर मुंबई दो घंटे में बंद हो जाती थी, लेकिन अब शिवसेना यूबीटी के पास वैसी ताकत और जनाधार नहीं बचा है।

    फडणवीस ने साल 2022 के राजनीतिक घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि जब एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी तब भी यूबीटी नेताओं ने दावा किया था कि शिंदे मुंबई में कदम नहीं रख पाएंगे। उन्होंने कहा इसके बावजूद शिंदे 50 विधायकों के साथ मुंबई आए खुलेआम सड़कों से होते हुए राजभवन गए और सरकार बनाई। राउत के दावे जमीन से कोसों दूर हैं। 2026 के बीएमसी चुनाव को लेकर छिड़ी इस जंग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में मुंबई की सत्ता पर काबिज होने के लिए राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंकने वाले हैं। जहाँ एक ओर राउत कार्ड और ठाकरे परिवार की विरासत का हवाला दे रहे हैं वहीं फडणवीस और महायुति सरकार इसे बदलते वक्त की राजनीति बताकर चुनौती दे रही है।