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  • नंदी पूजन से लेकर भस्म अर्पण तक गूंजा जय महाकाल, श्रद्धालुओं ने लिए दर्शन लाभ

    नंदी पूजन से लेकर भस्म अर्पण तक गूंजा जय महाकाल, श्रद्धालुओं ने लिए दर्शन लाभ


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन में भक्ति और आस्था का अनुपम दृश्य उस समय देखने को मिला जब भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। तड़के मंदिर के कपाट खुलते ही परंपरागत विधि-विधान के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और आज्ञा लेकर चांदी द्वार खोला गया।

    इसके बाद गर्भगृह के पट खोले गए और पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधिवत पूजन प्रारंभ किया। पंचामृत पूजन के बाद कर्पूर आरती की गई, जिसके उपरांत भगवान को भांग, चंदन, सिंदूर और विभिन्न आभूषणों से राजा स्वरूप में श्रृंगारित किया गया। यह दिव्य रूप भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    नंदी हॉल में इस दौरान नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और विधिवत पूजन किया गया। परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया, जिसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। इसके बाद ड्रायफ्रूट, फल और मिठाई का भोग अर्पित किया गया।

    आरती के दौरान भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों से बनी मालाएं भी अर्पित की गईं। इसके बाद महा निर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई, जो इस आरती का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है।

    मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी भाव के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही और “जय महाकाल” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। यह आरती न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।