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  • सावन में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर, मुस्लिम युवक ने 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ चढ़ाने का लिया संकल्प

    सावन में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर, मुस्लिम युवक ने 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ चढ़ाने का लिया संकल्प


    नई दिल्ली। श्रावण मास में देशभर में भगवान शिव की भक्ति का उत्साह चरम पर है। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लाकर शिवालयों में जलाभिषेक कर रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जिसने आस्था, मानवता और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश एक साथ दिया है। मेरठ के फलावदा कस्बे के रहने वाले 22 वर्षीय मुस्लिम युवक शाकिर ने हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा का परिचय दिया है।

    फलावदा के मोहल्ला होली चौक, मंदवाड़ी रोड निवासी शाकिर एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। उनके पिता मंजूर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और स्वयं शाकिर भी मेहनत-मजदूरी कर अपने घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था लगातार मजबूत होती गई। बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों से वह नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं और हर वर्ष कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं।

    पिछले वर्ष शाकिर हरिद्वार से 101 लीटर गंगाजल लेकर आए थे और क्षेत्र के शिवालयों में जलाभिषेक किया था। इस बार उन्होंने अपनी श्रद्धा को और आगे बढ़ाते हुए 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई। उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि समाज में भाईचारे और पारस्परिक सम्मान का संदेश भी बन गई है।

    श्रावण मास में भगवान शिव को करुणा, समरसता और लोककल्याण का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महादेव के दरबार में किसी भी प्रकार का जाति, धर्म या वर्ग का भेद नहीं होता। शाकिर की कांवड़ यात्रा इसी भावना को साकार करती नजर आती है। उनकी इस पहल की स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोग इसे गंगा-जमुनी तहजीब और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत मिसाल बता रहे हैं।

    हरिद्वार से लौटते समय रुड़की सहित कई पड़ावों पर कांवड़ सेवा शिविरों में शाकिर का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शिवभक्तों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया और उनकी आस्था को सम्मान दिया। रास्ते भर उन्हें शुभकामनाएं मिलती रहीं, जिससे उनकी यात्रा और भी यादगार बन गई।

    इसी दौरान मेरठ से ही एक और भावुक तस्वीर सामने आई। मवाना तहसील के बहादुरपुर गांव निवासी अमरपाल अपनी 81 वर्षीय मां ओमवती को कांवड़ में बैठाकर यात्रा करा रहे हैं। कांवड़ के एक ओर गंगाजल और दूसरी ओर अपनी मां को बैठाकर वह सेवा और श्रद्धा का अनूठा उदाहरण पेश कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि बुजुर्ग मां की वर्षों पुरानी कांवड़ यात्रा की इच्छा को पूरा करने के लिए यह निर्णय लिया गया।

    श्रावण मास में सामने आई ये दोनों घटनाएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज को प्रेम, सेवा, सम्मान और सामाजिक सौहार्द का मजबूत संदेश भी देती हैं। शाकिर की शिवभक्ति और अमरपाल की मातृसेवा यह साबित करती है कि सच्ची आस्था इंसान को जोड़ने का काम करती है। ऐसे प्रेरक उदाहरण समाज में विश्वास, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को और मजबूत करने का काम करते हैं।

  • विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव

    विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव


    मंदसौर । मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ महादेव मंदिर में सावन माह को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंचने लगा है। भगवान पशुपतिनाथ की पारंपरिक राजसी शाही सवारी इस वर्ष 24 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर पूरे श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां काली आरती मंडल और मंदिर समिति ने शुरू कर दी हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। शहर के प्रमुख मार्ग भगवान पशुपतिनाथ के जयघोष और भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान होंगे।

    भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मंदसौर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 1996 से लगातार चली आ रही इस परंपरा का श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व है। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान का राजसी स्वरूप सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करता है। रास्ते भर श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करते हैं और विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक संस्थाएं जगह-जगह मंच बनाकर आरती और स्वागत कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

    आयोजन समिति के अनुसार सावन माह के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 8 बजे तक भगवान पशुपतिनाथ का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और विशेष अभिषेक किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिर परिसर में पूरे सावन माह तक भक्ति और आस्था का विशेष वातावरण बना रहेगा।

    शाही सवारी से एक दिन पहले 23 अगस्त को भव्य वाहन रैली निकाली जाएगी। इस रैली के माध्यम से श्रद्धालुओं को शाही सवारी में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाएगा और पूरे शहर में धार्मिक उत्सव का माहौल तैयार किया जाएगा। इसके बाद 24 अगस्त को भगवान पशुपतिनाथ की राजसी शाही सवारी निर्धारित मार्गों से होकर निकलेगी। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए प्रशासन भी व्यापक तैयारियां करेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन माह के धार्मिक आयोजनों का समापन भी विशेष तरीके से किया जाएगा। 6 सितंबर को भगवान पशुपतिनाथ को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित कर भव्य छप्पन भोग महोत्सव आयोजित होगा। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ प्रसादी वितरण भी किया जाएगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर छप्पन भोग का प्रसाद ग्रहण करेंगे।

    मंदिर समिति का कहना है कि सभी धार्मिक आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे अनुशासन बनाए रखते हुए आयोजनों में शामिल हों और धार्मिक गरिमा का पालन करें। सावन के इस पावन अवसर पर भगवान पशुपतिनाथ की नगरी एक बार फिर शिवभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर होने जा रही है।