Tag: Shivraj Singh Chauhan

  • प्रहलाद पटेल के साथ दिल्ली में मिले सीएम मोहन यादव, सरसों और तुअर किसानों को बड़ी राहत

    प्रहलाद पटेल के साथ दिल्ली में मिले सीएम मोहन यादव, सरसों और तुअर किसानों को बड़ी राहत

    नई दिल्ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल भी मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा किसानों की फसलों से जुड़ी समस्याओं और उनकी आय बढ़ाने के उपाय थे।

    बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि यह चर्चा मुख्यतः सरसों और तुअर की फसल से संबंधित रही। लंबे समय से लंबित सरसों की खरीद पर भावांतर भुगतान योजना को हरी झंडी दे दी गई है। इसका लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में मिलेगा और यह उनके लिए बड़ी राहत साबित होगी। इससे प्रदेश के लाखों सरसों उत्पादक किसानों को बाजार मूल्य और समर्थन मूल्य के अंतर की राशि मिल सकेगी।

    इसके अलावा, तुअर की पूरी फसल 100 प्रतिशत सरकारी खरीद के तहत खरीदी जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को इस योजना का स्वीकृति पत्र भी सौंपा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम मध्य प्रदेश के दलहन उत्पादन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा।

    दिल्ली में हुई इस बैठक की पृष्ठभूमि में एमपी विधानसभा का हालिया बजट सत्र भी रहा। सत्र के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयानों से सीएम और उनके बीच अंदरूनी मतभेद नजर आए थे। इसके बाद पिछले हफ्ते सीएम मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अलग-अलग समय पर केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। हालांकि इस बार कैलाश विजयवर्गीय निजी कार्यक्रम में व्यस्त रहे और बैठक में शामिल नहीं हो पाए।

    बैठक में यह भी तय किया गया कि वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा। इसमें मध्य प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इस वर्ष में मूंग, उड़द, सोयाबीन और अन्य तिलहनों पर विशेष फोकस रहेगा। सरकार किसानों के लिए योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन और बेहतर निगरानी भी सुनिश्चित करेगी।

    शिवराज-मोहन-प्रहलाद की यह बैठक किसानों के हितों के लिए मील का पत्थर मानी जा रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि भावांतर भुगतान योजना और तुअर की पूरी सरकारी खरीद से किसान आर्थिक रूप से सशक्त होंगे और राज्य में दलहन उत्पादन में तेजी आएगी।

    प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार मिलकर किसानों की आय बढ़ाने, फसल की सही कीमत सुनिश्चित करने और उत्पादन को प्रोत्साहित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। यह बैठक किसानों के लिए वास्तविक राहत और लंबे समय से प्रतीक्षित निर्णयों का परिणाम साबित होगी।

  • शिवराज सिंह चौहान ने 66वें जन्मदिन पर परिवार संग किया पौधारोपण , मामा कोचिंग और मोबाइल अस्पताल से शिक्षा-स्वास्थ्य में नई पहल शुरू की

    शिवराज सिंह चौहान ने 66वें जन्मदिन पर परिवार संग किया पौधारोपण , मामा कोचिंग और मोबाइल अस्पताल से शिक्षा-स्वास्थ्य में नई पहल शुरू की


    नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने 66वें जन्मदिन पर भोपाल के स्मार्ट पार्क में परिवार के साथ पौधारोपण किया और आगामी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस मौके पर पांच संकल्पों की घोषणा की, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, सेवा, सहायता और प्रतिभा प्रोत्साहन शामिल हैं।
    पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने जोर दिया कि पेड़ सिर्फ लकड़ी नहीं, बल्कि करोड़ों जीवों का घर और ऑक्सीजन की फैक्ट्री हैं, और धरती के तापमान को कम करने के लिए हर हाल में पेड़ लगाना जरूरी है। शिक्षा क्षेत्र में चौहान ने विदिशा, रायसेन और भैरुंदा में मुफ्त मामा कोचिंग क्लासेस शुरू करने की बात कही ताकि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई बच्चा अपने सपनों से वंचित न रहे। इसके अलावा विदिशा संसदीय क्षेत्र के मेधावी बच्चों के लिए प्रेम-सुंदर प्रतिभा सम्मान की शुरुआत होगी, जिसमें टॉपर्स को सम्मान राशि दी जाएगी।
    शिवराज ने सामाजिक सेवा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाने की योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि दिव्यांगों के लिए मोटराइज्ड ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे न केवल चल सकेंगे बल्कि अपना रोजगार भी कर सकेंगे। साथ ही ‘मामा चलित अस्पताल’ कार्यक्रम के तहत विदिशा की आठों विधानसभाओं के गांव-गांव में मोबाइल क्लिनिक चलाकर गरीबों को आधुनिक जांच और नि:शुल्क इलाज मुहैया कराया जाएगा। ये मेडिकल वैन स्थानीय लोगों को शुरुआती जांच, ब्लड टेस्ट, ईसीजी और दवाइयां उपलब्ध कराएंगी, और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की सुविधा भी देंगी।
    जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्विटर पर शिवराज सिंह चौहान को बधाई दी और उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। इसी अवसर पर स्वामी अवधेशानंद गिरि महाराज ने भी पौधारोपण कर चौहान को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके सेवा-समर्पित नेतृत्व की सराहना की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये जन्मदिन उनके लिए नए संकल्प और कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है, और उनका उद्देश्य किसानों, ग्रामीणों और युवाओं के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करना है।

  • लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी

    लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी


    नई दिल्ली/18 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक बार फिर हंगामे का माहौल देखने को मिला। भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी VB–G Ram G बिल पर मतदान के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया। विरोध के स्वर इतना तेज थे कि कई सांसद वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे और बिल से जुड़े कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

    विपक्ष का कड़ा विरोध
    विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस अहम बिल को पर्याप्त चर्चा और बहस के बिना जल्दबाजी में पास करवा दिया। उनका कहना था कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक और खुली बहस आवश्यक थी। हंगामे के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी कर रहे थे और सदन की कार्यवाही बाधित होती रही।विपक्ष का मुख्य आरोप यह भी था कि विधेयक पारित करते समय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और पारदर्शिता की अनदेखी की गई। विपक्ष ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य भले ही ग्रामीण रोजगार सृजन और आजीविका बढ़ाना है, लेकिन इसे बिना पर्याप्त चर्चा के पास कराना संसद की गरिमा के खिलाफ है।

    कृषि मंत्री का जवाब
    बिल पर चर्चा के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री ने कहा, हम किसी से भेदभाव नहीं करते। बापू हमारी प्रेरणा और श्रद्धा हैं। हमारे लिए पूरा देश एक है। देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है।
    उन्होंने आगे बताया कि सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक रोजगार और आजीविका के अवसर पहुंचाना है। इस बिल के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

    सदन में बढ़ता हंगामा और स्थगन

    मंत्री के जवाब के बावजूद विपक्ष का विरोध कम नहीं हुआ। सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी और कई ने कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। लगातार हंगामे के चलते स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित करने का फैसला किया। यह स्थिति यह दर्शाती है कि बिल का पारित होना राजनीतिक तौर पर कितनी संवेदनशील स्थिति पैदा कर गया है।

    राजनीतिक सरगर्मी तेज

    VB–G Ram G बिल के पारित होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। जहां सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस बिल को लेकर संसद के बाहर भी राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिल के प्रभाव और इसके क्रियान्वयन की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका के अवसर और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बिल का क्रियान्वयन प्रभावी और पारदर्शी होना चाहिए।VB–G Ram G बिल न केवल ग्रामीण भारत के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया, बहस और राजनीतिक गतिशीलता का उदाहरण भी बन गया है। यह देखना रोचक होगा कि अगले हफ्तों में इस बिल को लेकर क्या नीति और क्रियान्वयन कदम उठाए जाते हैं।

  • NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी

    NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ को लेकर अब एनडीए में भी विरोध की स्थिति बन गई है। जहां एक ओर विपक्ष ने इस विधेयक को महात्मा गांधी का अपमान मानते हुए उसका विरोध किया है वहीं एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी  भी सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।

    यह विधेयक मनरेगा योजना के स्थान पर लाया गया है लेकिन विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों में इसके नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तेलुगु देशम पार्टी के सांसद लवु श्री कृष्ण देवरयालु ने विधेयक के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इस नए बदलाव से उन्हें और ज्यादा बोझ पड़ेगा।

    देवरयालु ने आगे कहा “कुछ सालों से मनरेगा में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और यह विचार संसद के बाहर और अंदर कई बार उठाए गए थे। हाल ही में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इस योजना का खर्च राज्यों पर डालने का प्रस्ताव खासकर आंध्र प्रदेश जैसे राज्य के लिए सही नहीं है।
    टीडीपी के प्रवक्ता एन विजय कुमार ने इस नए वर्जन का स्वागत तो किया लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार से 40 फीसदी भुगतान के प्रावधान पर पुनः विचार करने की अपील की। उनका कहना था कि इस भुगतान व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

    वहीं कांग्रेस ने भी इस विधेयक पर विरोध जताया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस ने इसे एक “राजनीतिक कदम बताया है और दावा किया कि मोदी सरकार गांधी के विचारों से मुंह मोड़ रही है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

    ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विधेयक को संसद में पेश करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं और उनका नाम किसी योजना से हटाना उनका अपमान नहीं है। यह सरकार गांधीजी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय भी ‘जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला गया था और तब क्या यह पंडित नेहरू का अपमान था?

    चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अब इस नए विधेयक के तहत 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस योजना के लिए प्रावधानित की गई है जो गांवों के समग्र विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

    यह विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ है लेकिन इसके बावजूद विपक्ष और एनडीए के भीतर ही इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर उन राज्यों के लिए यह विधेयक एक चुनौती बन सकता है जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। सरकार की योजना है कि इस विधेयक से ग्रामीण भारत का समग्र विकास होगा और विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जाएगा। लेकिन इसके नाम उद्देश्य और वित्तीय बोझ को लेकर बढ़ते विवाद से यह साफ है कि आगामी दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।