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  • शिवराज सिंह चौहान ने सुनाया दिलचस्प राजनीतिक किस्सा, मोदी की डिजिटल सोच और शुरुआती दौर की यादें फिर चर्चा में

    शिवराज सिंह चौहान ने सुनाया दिलचस्प राजनीतिक किस्सा, मोदी की डिजिटल सोच और शुरुआती दौर की यादें फिर चर्चा में

    नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कई दिलचस्प किस्से सुनाए। इस मौके पर उन्होंने अपनी संस्मरण पुस्तक ‘अपनापन, नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ का विमोचन किया, जिसमें उनके लंबे राजनीतिक जीवन और विभिन्न दौर की स्मृतियों का उल्लेख किया गया है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक ऐसा किस्सा भी साझा किया जिसने पूरे सभागार में हल्का-फुल्का माहौल बना दिया और उपस्थित लोग मुस्कुराने लगे।

    शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि वर्ष 1998 के आसपास, जब मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं, उस समय एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी नेताओं से पूछा था कि किसके पास ईमेल आईडी है। उस समय डिजिटल तकनीक उतनी सामान्य नहीं थी, जिसके कारण कई नेता इस शब्द से परिचित नहीं थे और कुछ समय के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया था।

    उन्होंने आगे बताया कि इसी दौरान एक वरिष्ठ नेता ने मजाकिया अंदाज में ईमेल को ‘फीमेल’ समझ लिया और सवाल पूछ दिया कि यह क्या होता है। इस छोटी सी गलतफहमी के बाद पूरे कमरे में हंसी का माहौल बन गया और गंभीर बैठक कुछ देर के लिए हल्के-फुल्के अंदाज में बदल गई। यह किस्सा उस दौर की तकनीकी जागरूकता और शुरुआती डिजिटल बदलावों की स्थिति को दर्शाता है।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस समय से ही नरेंद्र मोदी टेक्नोलॉजी को लेकर काफी सजग थे और नई व्यवस्थाओं को समझने में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने बताया कि युवा मोर्चा अध्यक्ष के रूप में मोदी अक्सर कंप्यूटर और आधुनिक तकनीक पर काम करते नजर आते थे और भविष्य की जरूरतों को लेकर पहले से ही सोच रखते थे।

    उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के महत्व को बहुत कम लोग समझ पाते थे, लेकिन मोदी ने इन माध्यमों की उपयोगिता को पहले ही पहचान लिया था। बाद में यही सोच प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यशैली का अहम हिस्सा बन गई और समय के साथ इसका प्रभाव और भी बढ़ता गया।

    शिवराज ने अपने अनुभवों में यह भी साझा किया कि गुजरात के विकास मॉडल को समझने के दौरान उन्होंने देखा कि नरेंद्र मोदी हर विषय पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान देते थे और बैठकों में योजनाओं की बारीकियों को विस्तार से समझते थे। यह उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जिसने निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया।

    कार्यक्रम के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नेतृत्व केवल निर्णय लेने की क्षमता नहीं होता, बल्कि समय से पहले भविष्य की जरूरतों को समझने और उसके अनुसार तैयारी करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि उनकी पुस्तक इन्हीं अनुभवों और सीखों का संग्रह है, जिसे उन्होंने जनता के साथ साझा किया है।

  • मेरे लिए पहले से सोच चुके थे प्रधानमंत्री’, शिवराज सिंह चौहान की किताब से निकले राजनीतिक सफर के अहम खुलासे

    मेरे लिए पहले से सोच चुके थे प्रधानमंत्री’, शिवराज सिंह चौहान की किताब से निकले राजनीतिक सफर के अहम खुलासे

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए बड़े बदलावों ने उस समय व्यापक राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया था। लंबे समय तक राज्य की कमान संभालने के बाद सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व के चयन को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। अब इन घटनाओं से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने अपनी नई पुस्तक में विस्तार से साझा किया है। राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़े इन अनुभवों ने एक बार फिर उस दौर की चर्चाओं को ताजा कर दिया है।

    अपनी पुस्तक में शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद से केंद्रीय राजनीति तक के सफर का जिक्र करते हुए कई व्यक्तिगत और राजनीतिक अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने लिखा कि विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत के बाद पार्टी ने राज्य में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। उन्होंने इस बदलाव को संगठन का निर्णय मानते हुए पूरी सहजता के साथ स्वीकार किया। उनके अनुसार राजनीति में पद से अधिक महत्वपूर्ण संगठन और जिम्मेदारी होती है।

    पुस्तक में एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनसे दिल्ली आने और बातचीत करने की बात कही थी। उस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र नए मुख्यमंत्री थे, लेकिन बाद में जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके भविष्य को लेकर पहले से एक सोच तैयार की जा चुकी थी। उन्होंने लिखा कि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि उनके लिए नई भूमिका को लेकर योजना पहले से तय थी।

    शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक जीवन के उस महत्वपूर्ण दौर का भी उल्लेख किया, जब मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री के रूप में Mohan Yadav के नाम की घोषणा हुई। उन्होंने लिखा कि स्वाभाविक रूप से ऐसी परिस्थितियों में भावनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती थीं, लेकिन संगठन के संस्कार और पारिवारिक सीख ने उन्हें संयम बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने इसे एक कार्यकर्ता की वास्तविक परीक्षा बताया।

    उन्होंने अपनी पुस्तक में यह भी लिखा कि उनकी पार्टी अनुशासन और त्याग के सिद्धांतों पर आधारित है और वह किसी पद से जुड़े रहने की मानसिकता में विश्वास नहीं करते। उनके अनुसार संगठन जो जिम्मेदारी देता है, उसे स्वीकार करना ही एक कार्यकर्ता का कर्तव्य होता है। यही सोच उन्हें नए दायित्व की ओर आगे बढ़ाने में सहायक बनी।

    मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव को नई जिम्मेदारी की तरह लिया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने पूरे समर्पण के साथ चुनावी अभियान में काम किया और उन क्षेत्रों तक पहुंचे जहां पहले संगठन को सीमित सफलता मिली थी। चुनाव परिणामों को उन्होंने सामूहिक प्रयास और संगठन की शक्ति का परिणाम बताया।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पुस्तक केवल व्यक्तिगत संस्मरण नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर की अंदरूनी झलक भी पेश करती है। इससे सत्ता परिवर्तन, संगठनात्मक निर्णयों और नेतृत्व की प्रक्रिया को समझने का एक नया दृष्टिकोण सामने आता है।

  • राष्ट्रीय दलहन उत्पादक सम्मेलन : केंद्रीय कृषि मंत्री सहित नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों ने देखी उन्नत फसलें

    राष्ट्रीय दलहन उत्पादक सम्मेलन : केंद्रीय कृषि मंत्री सहित नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों ने देखी उन्नत फसलें

    सीहोर। केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि गांवों में सुगमता से बीजों की वैरायटी पहुंच सके, इसके लिए ‘बीज ग्राम’ बनाए जाएंगे।


    केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के अमलाहा में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के अंतर्गत आयोजित ‘राष्ट्र-स्तरीय परामर्श और रणनीति सम्मेलन’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री चौहान ने उन्नत प्रौद्योगिकियों एवं किस्मों के प्रदर्शन के लिए खेतों का भ्रमण और किसानों से संवाद किया। इस मौके पर उन्होंने ‘बीज ग्राम’ बनाने की घोषणा की।


    सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रकाशित ‘बायोलॉजिकल सॉल्यूशंस एडवांसिंग री-जेनेरेटिंग एग्रीकल्चर फॉर हेल्थ एंड एनवायरनमेंट’ और वैश्विक स्तर पर अनुसंधान के लिए चर्चित आईसीएआरडीए की पुस्तक का विमोचन किया गया। साथ ही पल्स मिशन पोर्टल की लॉन्चिंग की गई। कार्यक्रम में जैविक खेती के विस्तार सहित कृषि के क्षेत्र में नवाचार व विशेष योगदान देने वाले किसानों को पुरस्कार भी वितरित किए गए।


    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने अतिथियों को अमलाहा स्थित क्षेत्र में तैयार चने और मसूर की उन्नत किस्मों की फसल का अवलोकन कराया। वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों ने उन्नत बीज, आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन पद्धतियों की जानकारी भी साझा की। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार-विमर्श चल रहा है। सम्मेलन में मप्र समेत प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।


    राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर से आए कृषि वैज्ञानिकों और नौ राज्यों के कृषि मंत्रियों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना विकसित और आत्मनिर्भर भारत का है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता देश के लिए आवश्यक है और विदेशों से दाल आयात करना गर्व नहीं, बल्कि चिंता का विषय है।


    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 27 देशों के साथ समझौते किए, लेकिन किसानों के हितों से समझौता नहीं होने दिया। अब लक्ष्य है कि देश में दालों का उत्पादन बढ़ाया जाए। उन्होंने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि एक ही फसल बोने से जमीन भी थकती है और कीटों का प्रकोप बढ़ता है, इसलिए चना, मसूर, उड़द और तुअर जैसी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है।


    उन्होंने मध्य प्रदेश को दलहन उत्पादन में देश में नंबर वन बताते हुए कहा कि क्षेत्रफल में कमी चिंता का विषय है, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। आईसीएआरडीए सहित अन्य अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं, जो मौसम और बीमारियों के अनुकूल होंगे। बीज वितरण के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपये की सहायता भी दी जाएगी।


    मध्य प्रदेश में लगेंगी 55 दाल मिल
    केंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि देशभर में 1000 नई दाल मिलें स्थापित की जाएंगी, जिनमें से 55 मध्य प्रदेश में लगेंगी। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि तुअर 8000 रुपये प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रुपये, चना 5875 रुपये और मसूर 7000 रुपये प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी। “बीज से लेकर बाजार तक” किसानों की चिंता सरकार करेगी।


    उन्होंने बताया कि सम्मेलन के बाद सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मंथन कर दलहन उत्पादन बढ़ाने का राष्ट्रीय रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस मिशन के तहत मध्य प्रदेश को 354 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि असली आनंद खेत, किसान और मिट्टी से जुड़कर काम करने में है, और सरकार किसानों की आय बढ़ाने तथा देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत : मुख्यमंत्री
    सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। हमारी थाली में परोसा गया अन्न ही हमारे लिए देवतुल्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान, युवा, गरीब और नारी सशक्तीकरण के लिए निरंतर योजनाएं चलाई जा रही हैं।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा प्राचीन और समृद्ध रही है। प्रदेश में स्थापित अनुसंधान केंद्र किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हम दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें, क्योंकि देश में मांग के अनुपात में उत्पादन अभी भी चुनौती बना हुआ है। डॉ. यादव ने कहा कि दलहन-तिलहन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार दो कदम आगे रहकर कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को डेढ़ हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे खातों में पहुंचाई गई। सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।


    मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों से आए कृषि मंत्रियों से भी आग्रह किया कि भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम है।