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  • एमएसपी सुरक्षा कवच का विस्तार: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की रिकॉर्ड खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

    एमएसपी सुरक्षा कवच का विस्तार: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की रिकॉर्ड खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

    नई दिल्ली । किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और कृषि बाजार में मूल्य अस्थिरता के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को मंजूरी दी है। यह निर्णय मूल्य समर्थन योजना के तहत लिया गया है और इससे विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु तथा हरियाणा के लाखों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि कई बार बाजार में कीमतों में गिरावट आने के कारण किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में एमएसपी आधारित खरीद किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दालों और तिलहनों की सरकारी खरीद का दायरा बढ़ाया गया है, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित प्रतिफल मिल सके।

    इस निर्णय में सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है। ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए राज्य में मूंग, उड़द और मूंगफली की बड़ी मात्रा में खरीद को स्वीकृति दी गई है। राज्य में कुल स्वीकृत खरीद का मूल्य 1,490 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश के दाल एवं तिलहन उत्पादक किसानों की आय को महत्वपूर्ण समर्थन मिलेगा और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी।

    उत्तर प्रदेश में मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए यह फैसला विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ वर्षों में दालों के उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन कई बार मांग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण किसानों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती। ऐसे में सरकारी खरीद किसानों के लिए स्थिर आय का आधार प्रदान करेगी।

    गुजरात के लिए भी सरकार ने ग्रीष्मकालीन सीजन के तहत मूंग की खरीद को मंजूरी दी है। राज्य में स्वीकृत खरीद का कुल मूल्य 160 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। इससे मूंग उत्पादक किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और उन्हें खुले बाजार में कम कीमतों पर फसल बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कृषि क्षेत्र में यह कदम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ किसानों का भरोसा बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

    तमिलनाडु में सरकार ने पहले से निर्धारित खरीद सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है। राज्य में मूंग की अतिरिक्त खरीद को मंजूरी मिलने से किसानों को अधिक मात्रा में अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने का अवसर मिलेगा। इससे फसल की बिक्री प्रक्रिया अधिक सुगम होगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।

    हरियाणा में भी मूंग की खरीद के लिए स्वीकृति दी गई है। राज्य के किसानों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय का मानना है कि यह निर्णय मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करेगा और किसानों को बाजार में मूल्य गिरावट से सुरक्षा प्रदान करेगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार दालों और तिलहनों की एमएसपी खरीद का विस्तार केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में खाद्य सुरक्षा और तिलहन-दाल उत्पादन को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा, उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को मजबूती मिलेगी।

  • जलवायु संकट और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारत का संदेश, छोटे किसानों को मजबूत किए बिना सुरक्षित नहीं होगा खाद्य भविष्य

    जलवायु संकट और बढ़ती कृषि चुनौतियों के बीच भारत का संदेश, छोटे किसानों को मजबूत किए बिना सुरक्षित नहीं होगा खाद्य भविष्य

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने ब्रिक्स देशों से छोटे और सीमांत किसानों को सशक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयास तेज करने का आह्वान किया है। भारत का मानना है कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और टिकाऊ कृषि विकास सुनिश्चित करने के लिए किसानों को आर्थिक, तकनीकी और संस्थागत रूप से सक्षम बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

    इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सदस्य देशों के बीच गहरा सहयोग वैश्विक कृषि व्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ब्रिक्स देश अपनी सामूहिक क्षमता, अनुभव और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करें तो कृषि क्षेत्र में सकारात्मक और दूरगामी बदलाव संभव हैं।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र अनेक जटिल चुनौतियों का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, उत्पादन लागत में वृद्धि हो रही है और वैश्विक कृषि बाजारों में अस्थिरता किसानों के लिए नई कठिनाइयां पैदा कर रही है। इन परिस्थितियों में छोटे किसानों की सुरक्षा और समृद्धि को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है।

    कृषि मंत्री ने कहा कि दुनिया के अधिकांश देशों में छोटे और सीमांत किसान खाद्य उत्पादन की रीढ़ हैं। यदि इन्हें आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता, बेहतर बाजार और नवाचार आधारित कृषि प्रणालियों तक पहुंच मिलती है तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला भी अधिक मजबूत और स्थिर बनेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों का सशक्तिकरण ही खाद्य सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

    भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि पिछले एक दशक में देश के कृषि क्षेत्र ने लगातार उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 4.5 प्रतिशत रही है, जो इस क्षेत्र की मजबूती और क्षमता को दर्शाती है। खाद्यान्न उत्पादन में निरंतर वृद्धि ने देश को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया है।

    उन्होंने जानकारी दी कि भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच चुका है। वहीं गेहूं उत्पादन करीब 118 मिलियन टन के स्तर पर पहुंच गया है। बागवानी क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है और इसका उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है। इसके अलावा मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर गया है, जो कृषि से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विकास का संकेत है।

    सम्मेलन के दौरान मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कृषि नीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखता है और कृषि क्षेत्र में साझा प्रगति का समर्थन करता है।

    चौहान ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित कर रहा है, जिसके माध्यम से करोड़ों लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश की लगभग 43 प्रतिशत कार्यशक्ति कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है, जिससे यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।

    उन्होंने विशेष रूप से इस तथ्य पर जोर दिया कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। ऐसे में उनकी आय, उत्पादकता और संसाधनों तक पहुंच बढ़ाना केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत का मानना है कि ब्रिक्स देशों का साझा सहयोग कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार बना सकता है।

  • विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

    विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

     मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विदिशा संसदीय क्षेत्र के किसानों को समर्पित एक बड़े कार्यक्रम के तहत 14 जून को विदिशा जिले के बेरखेड़ी जट्टू में कृषि विज्ञान केंद्र की आधारशिला रखी जाएगी। इस अवसर को क्षेत्र के कृषि विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम की घोषणा विदिशा से सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की है। उन्होंने किसानों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह दिन क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा। उनके अनुसार प्रस्तावित कृषि विज्ञान केंद्र केवल एक संस्थान नहीं होगा, बल्कि किसानों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान और तकनीकी मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र बनेगा।

    कार्यक्रम के दौरान विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार किए गए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप को लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह रोडमैप कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और किसानों को मौसम तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप खेती करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता और लाभप्रदता दोनों में सुधार संभव है।

    इस अवसर पर ‘खेत बचाओ अभियान’ की भी शुरुआत की जाएगी। अभियान का उद्देश्य किसानों को नकली खाद, बीज और अन्य कृषि उत्पादों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक बनाना है। किसानों को यह बताया जाएगा कि असली और नकली उत्पादों की पहचान कैसे की जाए तथा गुणवत्ता वाले कृषि संसाधनों का चयन किस प्रकार किया जाए। इससे खेती में होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी और विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को नई फसल बुआई पद्धतियों, जैविक खेती, फसल प्रबंधन, जल संरक्षण और मौसम आधारित कृषि सलाह से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में उपयोग हो रही नई मशीनों और उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि किसान उन्हें समझ सकें और अपने खेतों में उपयोग कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और वैज्ञानिकों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। ऐसे केंद्रों के माध्यम से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान, उन्नत बीजों की जानकारी, फसल रोग नियंत्रण की तकनीक तथा नवीन कृषि अनुसंधान का लाभ मिलता है। विदिशा में प्रस्तावित यह केंद्र आसपास के जिलों के किसानों के लिए भी उपयोगी संसाधन केंद्र साबित हो सकता है।

    कृषि क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और बदलते मौसमीय परिस्थितियों के बीच वैज्ञानिक खेती की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विदिशा में स्थापित होने वाला कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि इस पहल से कृषि विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी।

  • किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

    किसानों के मुद्दे पर गरजे जीतू पटवारी शिवराज और बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल । भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भारतीय जनता पार्टी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तीखा हमला बोला। इस दौरान उन्होंने किसानों की स्थिति और राज्य की कृषि नीतियों को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है।

    जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में किसानों के साथ लगातार धोखा हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कृषि आय को बढ़ाने के बड़े बड़े दावे किए लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग ही नजर आती है। उन्होंने कहा कि बार बार किए गए वादों के बावजूद किसानों की आमदनी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

    उन्होंने यह भी कहा कि मंडियों में किसानों को अपनी उपज बेचने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा है। कई बार फसल खुले में पड़ी रह गई और समय पर खरीद नहीं हो सकी। इसके कारण किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। पटवारी ने आरोप लगाया कि नीतियों की खामियों का फायदा कुछ चुनिंदा व्यापारियों को मिला है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने खाद और उर्वरक की समस्या को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी चीजों की उपलब्धता को लेकर लगातार संकट की स्थिति बनी रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने के दावे किए जाते रहे हैं लेकिन वास्तविकता इससे अलग रही है।

    पटवारी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रांसफर और पोस्टिंग को लेकर सिस्टम में पारदर्शिता की कमी है और कई निर्णयों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार को लेकर जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है कांग्रेस अध्यक्ष ने वल्लभ भवन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि वहां पर फैसलों में अनियमितताओं की बात सामने आती रही है। उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी कमजोरी बताया।

    इसके अलावा उन्होंने मुरैना और इंदौर से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीतिक स्तर पर कई मुद्दों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति के मुद्दों पर किसी को भी किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है और हर दल को अपनी प्राथमिकता तय करने का अधिकार है।

    जीतू पटवारी ने अंत में कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने घोषणा की कि वह किसानों के मुद्दों को लेकर आगे भी आंदोलनात्मक रुख अपनाएंगे और जरूरत पड़ी तो विरोध स्वरूप उपवास भी करेंगे। इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सत्तापक्ष की ओर से भी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है।

  • प्रधानमंत्री मोदी और बड़े नेताओं ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया, नारी सशक्तिकरण और शिक्षा में योगदान की सराहना

    प्रधानमंत्री मोदी और बड़े नेताओं ने सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें नमन किया, नारी सशक्तिकरण और शिक्षा में योगदान की सराहना


    नई दिल्ली । देश की पहली महिला शिक्षिका और नारी सशक्तिकरण की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंती शनिवार को धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर हम उस अग्रणी समाज सुधारक को स्मरण करते हैं जिन्होंने सेवा और शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव के लिए अपना जीवन समर्पित किया। वे समानता न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थीं। उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे शक्तिशाली साधन है।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा के मूल अधिकार से जोड़कर नारी सशक्तिकरण को नई दिशा दी। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष करते हुए देश के पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की और समाज सुधार की अलख जगाई। उनका प्रेरणादायी जीवन राष्ट्र निर्माण में सदैव मार्गदर्शक बना रहेगा।

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया नारी शिक्षा व सशक्तिकरण के लिए जीवनपर्यंत संघर्ष करने वाली महान समाज सुधारिका भारत की प्रथम महिला शिक्षिका श्रद्धेय माता सावित्रीबाई फुले जी की जयंती पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं। शोषितों-वंचितों और नारी उत्थान के लिए आपने जो अभूतपूर्व कार्य किए हैं वे सदैव समाज के नवनिर्माण के लिए हम सबको प्रेरित करते रहेंगे।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए लिखा ‘क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले ने अपने साहस संघर्ष और दूरदर्शिता से समाज में शिक्षा समानता व महिला अधिकारों की अलख जगाई। उनका जीवन सामाजिक परिवर्तन और मानवीय गरिमा का प्रतीक है। नारी सशक्तिकरण के लिए आजीवन संघर्षरत रहीं सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

    सावित्रीबाई फुले का जीवन समाज में शिक्षा के प्रसार और महिलाओं के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष को दर्शाता है। उन्होंने न केवल महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार खोले बल्कि अपने समय में प्रचलित जातिवाद और महिला शोषण के खिलाफ भी आवाज उठाई। उनके योगदान को आज भी समाज सुधारकों और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे लोगों द्वारा याद किया जाता है।