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  • भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    भगवान भोलेनाथ की आराधना का विशेष दिन: प्रदोष व्रत और शिवरात्रि एक ही दिन होने से बना दुर्लभ संयोग, इन विशेष वस्तुओं के दान से चमकेगी किस्मत

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि का एक ही दिन पड़ना बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है। इस वर्ष 12 जुलाई 2026 को भगवान शिव को समर्पित दो अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत, रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन पड़ रहे हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है और सुबह से ही देश भर के शिवालयों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। ज्योतिषविदों के अनुसार इस प्रकार के संयोग में की गई पूजा और दान का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

    धार्मिक गणना के अनुसार आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी तिथि के चलते प्रदोष व्रत का पालन किया जा रहा है। चूंकि आज रविवार का दिन है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि रवि प्रदोष का व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव व माता पार्वती की संयुक्त उपासना करने से जीवन के समस्त संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। आज प्रदोष काल में पूजा के लिए सबसे उत्तम समय शाम को 07:20 बजे से लेकर रात के 09:30 बजे तक निर्धारित किया गया है, जिसमें श्रद्धालु विशेष आरती और अर्घ्य आदि प्रदान कर सकते हैं।

    इसके साथ ही, संध्या काल के पश्चात चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ होने के कारण आज ही के दिन मासिक शिवरात्रि का व्रत भी रखा जा रहा है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में इसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। मासिक शिवरात्रि की मुख्य पूजा निशिता काल यानी मध्य रात्रि में संपन्न की जाती है। इस व्रत के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 13 जुलाई की रात को यानी आधी रात के समय 12:07 बजे से लेकर 12:47 बजे तक रहेगा, जहां शिव भक्त शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करेंगे।

    इस महासंयोग के अवसर पर दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार आज के दिन अनाज जैसे चावल, गेहूं और दाल का दान करने से घर में कभी भी अन्न-धन की कमी नहीं होती है। भगवान भोलेनाथ को सफेद रंग अत्यधिक प्रिय है, इसलिए आज के दिन सफेद रंग की मिठाइयों का दान करने से आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होते हैं और इच्छित वरदान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सफेद वस्त्रों का दान करने से जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधी सभी परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

    पर्यावरण और ग्रहों की शांति के दृष्टिकोण से आज के शुभ दिन पर पौधों का दान करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि रवि प्रदोष और मासिक शिवरात्रि के इस पावन अवसर पर छायादार या पूजनीय पौधों का दान करने से कुंडली के विभिन्न ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, उचित समय पर महादेव का अभिषेक करने और जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने से मनुष्य को मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • शुक्रवार को करें महालक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर-परिवार में आएंगी खुशियाँ और समृद्धि

    शुक्रवार को करें महालक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर-परिवार में आएंगी खुशियाँ और समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शुक्रवार को विशेष महत्व प्राप्त है। ज्योतिष और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यह दिन धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा को समर्पित माना गया है। इस दिन विशेष पूजन और मंत्रोच्चारण से परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। आज, 16 जनवरी को माघ माह के शुक्रवार पर शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का अनूठा संयोग बन रहा है, जिससे पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। यह चालीसा मां लक्ष्मी के गुणों और उनके भक्तों पर उनकी कृपा के प्रभाव को बताती है। जो साधक श्रद्धा और भक्ति भाव से इस चालीसा का पाठ करते हैं, उनके घर से दरिद्रता दूर होती है और वैभव, संपन्नता और मानसिक शांति आती है।

    विशेष रूप से माघ माह के शुक्रवार को इस चालीसा का पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा अधिक मात्रा में प्राप्त होती है। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन में समस्त प्रकार की बाधाएं और समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही वैभव लक्ष्मी व्रत का पालन करने से धन और सुख की वृद्धि होती है। पूजन का विधान सरल है। सुबह स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण के बाद पूजा स्थल पर दीपक, अगरबत्ती, अक्षत और फल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भक्त मन, वचन और क्रिया से महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। पाठ के दौरान पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव बनाए रखना आवश्यक है। इस दिन विशेष रूप से 108 बार या कम से कम एक बार पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा अधिक प्राप्त होती है।

    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से न केवल वित्तीय समस्याएं कम होती हैं, बल्कि पारिवारिक संबंधों में भी प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। घर में सुख-शांति और मानसिक संतुलन आता है। साथ ही, जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।संक्षेप में, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। माघ माह के शुक्रवार पर महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करना, शिव-पार्वती की पूजा और वैभव लक्ष्मी व्रत का पालन करना साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह न केवल जीवन में खुशहाली लाता है, बल्कि व्यक्ति के आत्मिक और भौतिक दोनों पक्षों में संतुलन बनाए रखता है।