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  • शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में दिखे लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकी, सवालों में घिरे पूर्व क्रिकेटर

    शोएब अख्तर के भाई के जनाजे में दिखे लश्कर ए तैयबा से जुड़े आतंकी, सवालों में घिरे पूर्व क्रिकेटर


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान में आतंकवाद का दंश इतनी गहराई तक समाज में घुस चुका है कि वहां आप पता नहीं लगा सकते कि कौन सामान्य आदमी है और कौन आतंक परस्त. अब नामी क्रिकेटर रहे शोएब अख्तर के बारे में भी बड़ी खबर सामने आ रही है. पता चला है कि शोएब अख्तर के भाई शाहिद अख्तर के जनाजे में लश्कर ए तैयबा (LeT) से जुड़े आतंकी भी शामिल हुए. शाहिद अख्तर का हाल ही में निधन हो गया. खुद शोएब अख्तर ने अपने एक्स और इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह खबर शेयर की थी.

    इस्लामाबाद में 24 जून को हुआ सुपुर्दे खाक
    रावलपिंडी एक्सप्रेस के नाम से मशहूर शोएब अख्तर के भाई शाहिद की मौत हार्ट फेलियर या लंग फेलियर से हुई मानी जा रही है. वे उनके पब्लिक रिलेशंस मैनेजर के रूप में भी काम करते थे. उनकी मौत पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया. इस्लेमाबाद के कब्रिस्तान में 24 जून को उनकी नमाज-ए-जनाजा पढ़ी गई. उस जनाजे में परिवार, खेल जगत की हस्तियां और स्थानीय लोग शामिल हुए.

    नमाजे जनाजा में दिखाई दिए लश्कर के आतंकी
    जब इस जनाजे की तस्वीरें और वीडियो सामने आया तो हंगामा मच गया. वीडियो में साफ दिखा कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके राजनीतिक विंग पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के आतंकी भी सुपुर्दे खाक के कार्यक्रम में शामिल हुए थे. खासतौर पर PMML इस्लामाबाद का अध्यक्ष इनाम उर रहमान कंबोह भी वीडियो में दिखा.

    शोएब अख्तर ने अभी तक साध रखी है चुप्पी
    विवाद तब ज्यादा बढ़ गया, जब लश्कर से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने खुद इन वीडियो को शेयर किया. यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है, जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव पहले से ही तेज है. सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि पाकिस्तानी समाज में आतंकी नेटवर्क किस कदर समाज में अपनी जड़ जमा चुका है. शोएब अख्तर ने इस विवाद पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है.

    संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित आतंकी संगठन है LeT
    बताते चलें कि लश्कर ए तैयबा संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, जिस पर 26/11 मुंबई हमलों समेत कई बड़े आतंकी हमलों का आरोप है. वहीं PMML को इसका राजनीतिक मुखौटा माना जाता है. इसके जरिए वह पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहा है. साथ ही दुनिया में दुष्प्रचार भी कर रहा है कि वह आतंकी नहीं बल्कि राजनीतिक संगठन है.