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  • पाकिस्तान में LPG संकट गहराया, 12 किलो सिलेंडर की कीमत 8200 रुपये तक पहुंची..

    पाकिस्तान में LPG संकट गहराया, 12 किलो सिलेंडर की कीमत 8200 रुपये तक पहुंची..


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में महंगाई के बीच रसोई गैस की कमी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के कई हिस्सों में घरेलू इस्तेमाल वाले LPG सिलेंडरों की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। करीब 12 किलो गैस वाला सिलेंडर, जो कुछ दिन पहले लगभग 4,500 पाकिस्तानी रुपये में मिल रहा था, अब 7,000 रुपये से अधिक कीमत पर बिक रहा है। कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को इसके लिए 8,200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। गैस की बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।

    इस संकट की प्रमुख वजह ईरान से होने वाली LPG आपूर्ति का बाधित होना है। पाकिस्तान और ईरान के बीच स्थित दो प्रमुख सीमा चौकियां 17 अक्टूबर से बंद हैं। सीमा बंद होने के कारणों को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं। पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अवैध तस्करी रोकने को इसकी वजह बताया है, जबकि ईरान ने इसे तकनीकी समस्या से जुड़ा मामला कहा है।

    पाकिस्तान अपनी LPG जरूरत का लगभग आधा हिस्सा ईरान से प्राप्त करता है। ऐसे में सीमा पर आवाजाही बंद होने से गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया है। इसका असर सीधे सिलेंडरों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

    पाकिस्तान की LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश अपनी कुल आवश्यकता का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ईरान के अलावा ओमान और इराक भी गैस आपूर्ति के प्रमुख स्रोत हैं। इन देशों से आने वाली खेप प्रभावित होने से संकट और गंभीर हो गया है।

    पाकिस्तान में प्रतिदिन लगभग 6,500 से 7,000 टन LPG की खपत होती है। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन करीब 2,000 से 2,500 टन प्रतिदिन है। शेष जरूरत पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, खपत और उत्पादन के बीच का यह अंतर देश को बाहरी आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने समुद्री परिवहन को भी प्रभावित किया है। इसके कारण इराक और ओमान से आने वाली गैस की आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह पाकिस्तान को एक साथ सीमा पार आपूर्ति और समुद्री मार्गों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    गैस की कमी के बीच कालाबाजारी की समस्या भी सामने आई है। पाकिस्तान के तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण ने 11.8 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर की आधिकारिक कीमत 3,296 पाकिस्तानी रुपये निर्धारित की है। इसके बावजूद कई बाजारों में सिलेंडर इससे दोगुने से भी अधिक दाम पर बेचे जा रहे हैं। आधिकारिक दर और बाजार में वसूली जा रही कीमत के बीच बड़ा अंतर उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा रहा है।

    कीमतों की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में और गंभीर है। बलूचिस्तान में 12 किलो का सिलेंडर लगभग 7,000 रुपये में मिल रहा है, जबकि लाहौर में इसकी कीमत 7,500 रुपये तक बताई गई है। दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्र स्कर्दू में उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए 8,200 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।

    आपूर्ति सामान्य होने में देरी से घरेलू उपभोक्ताओं के सामने परेशानी बनी रह सकती है। फिलहाल सीमा चौकियों के बंद रहने, समुद्री मार्गों पर तनाव और आयात पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान के LPG बाजार पर दबाव है। गैस की उपलब्धता में सुधार और कीमतों में स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाधित आपूर्ति कितनी जल्दी बहाल होती है।

  • फेस्टिव सीजन में नहीं होगी LPG की किल्लत …. मोदी सरकार ने Plan-B पर शुरू किया काम

    फेस्टिव सीजन में नहीं होगी LPG की किल्लत …. मोदी सरकार ने Plan-B पर शुरू किया काम


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच अभी भी सबकुछ ठीक नहीं हो पाया है, मिडिल ईस्ट टेंशन (Middle East Tensions) के बीच होर्मुज (Hormuz) ही नहीं, बाब-अल-मंदेब समेत अन्य समुद्री रूट्स में बाधाएं जारी हैं. भारत (India) के लिए ये सब इसलिए खास है, क्योंकि देश में फेस्टिव सीजन (Festive season) शुरू होने वाला है. यानी LPG की खपत बढ़ना तय है, लेकिन इस तेज त्योहारी मांग को पूरा करने में खाड़ी देशों से सप्लाई में रुकावट का बुरा असर पड़ सकता है. ऐसे में अभी से सरकार ने अपने प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) पर काम करना शुरू कर दिया है, ताकि आम जनता को त्योहारों पर एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से न जूझना पड़े. इसके लिए सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं.


    घरेलू मांग पूरा करने के लिए तैयारी

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, त्योहारी मौसम में एलपीजी की घरेलू मांग बढ़ने के कारण सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने लगी हैं. इसके पीछे वजह ये है कि वेस्ट एशिया टेंशन के बीच फारस की खाड़ी से एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान जारी है, जिससे देश की कुकिंग गैस सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो रहा है. सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते त्योहारों से पहले ही उत्पादन में इजाफा किया जाने लगा है।


    20% बढ़ा देश में LPG का उत्पादन

    त्योहारी सीजन और सप्लाई में रुकावट के बीच सरकार का प्लान काम करता नजर आने लगा है. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों का घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़कर लगभग 44,000 टन प्रतिदिन हो गया है, जो बीते अगस्त महीने के औसत उत्पादन से लगभग 20% ज्यादा है. LPG Production में घरेलू स्तर पर ये बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जबकि भारत नवंबर में दिवाली तक चलने वाली उच्च खपत की अवधि के लिए तैयार हो रहा है, जबकि सर्दियों की मांग से इसे और बढ़ावा मिल सकता है।


    सरकार लगातार उठा रही कदम

    भले ही अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का सिलसिला थमा हुआ है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों के बीच तनातनी बिल्कुल खत्म नहीं है. ऐसे में लंबे समय से बाधित तेल-गैस आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री रूट की वजह से भारत में एलपीजी शॉर्टेज (LPG Shortage In India) को पूरा करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. इसे लेकर अब केंद्र ने राज्यों और प्रमुख उद्योगों के लिए एलपीजी आवंटन तय कर दिया है।

    बता दें कि घरेलू रिफाइनरियों ने युद्ध के दौरान के अपने हाई एलपीजी प्रोडक्शन को कम कर दिया था, क्योंकि गर्मियों के दौरान अमेरिका और अफ्रीका से वैकल्पिक आपूर्ति होने लगी थी. लेकिन त्योहारों के लिए ये काफी नहीं है, ऐसे में घरेलू एलपीजी उत्पादन में फिर से बढ़ोतरी शुरू की गई है. इसके साथ ही सरकार ने मार्च में LPG Supply Crisis के दौरान लागू न्यूनतम रिफिल वेटिंग टाइम को 45 दिनों से घटाकर अब 25 दिन कर दिया है।


    भारत दूसरा बड़ा LPG आयातक

    भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है और ऐतिहासिक रूप से फारस की खाड़ी से आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर रहा है. इस निर्भरता के कारण देश में इस क्षेत्र में जारी संघर्ष और व्यापारिक उथल-पुथल से पैदा होने वाली रुकावटों का बड़ा असर देखने को मिलता है।

    फिलहाल देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Cylinder Price) की बात करें, तो दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये है. बात नोएडा की करें, तो यहां पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर 939.50 रुपये पर मिल रहा है, जबकि हैदराबाद में इसका दाम सबसे अधिक 994 रुपये है. वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर यानी 19 किलोग्राम के LPG Cylinder का रेट देखें, तो दिल्ली 2,747.50 रुपये, जबकि मुंबई में ये 2,701 रुपये का है।

  • चीनी की किल्लत के बीच सरकार बोली- हमारे पास 20-25 लाख टन का अतिरिक्त स्टॉक… आयात की भी तैयारी

    चीनी की किल्लत के बीच सरकार बोली- हमारे पास 20-25 लाख टन का अतिरिक्त स्टॉक… आयात की भी तैयारी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में चीनी की किल्लत (Sugar Crisis) की खबरों के बीच अब सरकार (Government) एक्शन मोड में आ गई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) ने रविवार को कहा है कि त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंताओं को दूर करने के लिए केंद्र सरकार कई कदम उठा रही है। जोशी ने कहा कि रेड रॉट (गन्ने की फसल में होने वाली बीमारी) और अल नीनो की स्थितियों के कारण चीनी के उत्पादन में कमी आई है। इससे न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में चीनी सहित कुल कृषि उत्पादन में कमी आई है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि सरकार इसे लेकर चिंतित है और इसीलिए सरकार ने तुरंत कई कदम उठाए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया है कि भारत की जरूरत लगभग 280 लाख टन है और आज की स्थिति में हमारे पास 20 से 25 लाख टन से ज्यादा का अतिरिक्त स्टॉक है।


    ब्राजील से आएगी चीनी

    वहीं सहकारी चीनी मिलों की संस्था एनएफसीएसएफ के प्रमुख ने कहा कि भारत आने वाली चीनी की कुछ खेप 15 अक्तूबर से पहले देश में पहुंच सकती है। हालांकि अभी इसकी सही मात्रा का अंदाजा लगाना मुश्किल है। वहीं, जमाखोरी के खिलाफ सरकार की सख्ती से कीमतों में कुछ कमी आने लगी है।

    एनएफसीएसएफ के अध्यक्ष प्रकाश नाइकनवारे ने रविवार को बताया कि फिलहाल आयात के लिए ब्राजील ही एकमात्र व्यावहारिक स्रोत है, क्योंकि पारंपरिक आपूर्तिकर्ता थाईलैंड खुद चीनी की कमी से जूझ रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सप्लाई सबसे पहले पहुंचेगी। ब्राजील से भारत तक सामान आने में 40-45 दिन लगते हैं।


    कीमतों में आ रही गिरावट

    नायकनवरे ने कहा कि केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने फेडरेशन और इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। उन्होंने बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने और कीमतों पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। इससे पहले चीनी की कीमत 65-67 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई थी, हालांकि शनिवार को खुले टेंडरों में 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गई।

  • भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील

    भारत में LPG की किल्लत होगी दूर…. PM मोदी जा रहे UAE, दो अहम मुद्दों पर हो सकती है बड़ी डील


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) 15-20 मई 2026 तक पांच देशों के दौरे पर जा रहे हैं जिसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.-UAE) की यात्रा से हो रही है. पीएम मोदी यूएई में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान (President Sheikh Mohammed bin Zayed Al Nahyan) से मुलाकात करेंगे. ईरान जंग के बीच जहां दुनिया तेल-गैस की किल्लत से जूझ रही है, माना जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों नेता ऊर्जा सुरक्षा पर प्रमुखता से बात करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़े दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

    यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में UAE ने तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ढांचे से बाहर निकलने का फैसला किया है. ऐसे में दोनों देशों के लिए प्रत्यक्ष द्विपक्षीय ऊर्जा साझेदारी और भी अहम हो गई है, खासकर लंबे समय के लिए एनर्जी सप्लाई और उसके भंडारण में सहयोग के क्षेत्र में।

    भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेता द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें खास तौर पर ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श शामिल होगा।


    फ्यूल क्राइसिस के बीच भारत की उम्मीद बन सकते हैं ये पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स

    मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्ष भारत-UAE कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे. यह साझेदारी मजबूत राजनीतिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के बीच गहरे संबंधों पर आधारित है. बयान में कहा गया कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने में मदद करेगी।

    भारत और UAE ने पिछले कुछ सालों में ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ाया है. इसमें कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में निवेश और पेट्रोलियम इंफ्रास्ट्रक्चर के डाउनस्ट्रीम सेक्टर में सहयोग शामिल है। UAE फिलहाल भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और पिछले 25 सालों में भारत में सबसे ज्यादा निवेश करने वाले देशों में सातवें स्थान पर है।

    इस यात्रा के दौरान UAE में रहने वाले 45 लाख से अधिक भारतीय समुदाय के कल्याण पर भी खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है. खाड़ी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय सबसे बड़े विदेशी समुदायों में से एक माना जाता है।


    यूएई के अलावा और किन देशों के दौरे पर जा रहे हैं पीएम

    पीएम मोदी के पांच देशों के दौरे का मुख्य फोकस ऊर्जा सहयोग है जिसमें वो नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर भी बात होगी. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे में शामिल पांच देश हैं- यूएई और यूरोप के चार देश नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली. यूरोपीय देशों के दौरे का मकसद ग्रीन टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करना और भारत-यूरोपीय संघ के रिश्तों को मजबूती देना है।