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  • दवा स्टॉक में गड़बड़ी की आशंका, औचक निरीक्षण में रिकॉर्ड खंगाले गए

    दवा स्टॉक में गड़बड़ी की आशंका, औचक निरीक्षण में रिकॉर्ड खंगाले गए


    मध्य प्रदेश । मंदसौर जिले में दवाओं के सुरक्षित, पारदर्शी और नियमानुसार विक्रय को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से औषधि विभाग ने अपनी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को बीपीएल चौराहा क्षेत्र स्थित कई मेडिकल संस्थानों पर औचक निरीक्षण किया गया, जिससे दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने दुकानों में मौजूद दवाओं के स्टॉक, उनकी एक्सपायरी डेट, तथा नशे के रूप में दुरुपयोग होने वाली दवाओं के क्रय-विक्रय रिकॉर्ड की गहन जांच की। अधिकारियों ने यह भी देखा कि शेड्यूल-एच1 श्रेणी की दवाओं का रिकॉर्ड नियमों के अनुसार संधारित किया जा रहा है या नहीं।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. गोविंद सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि दवा वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए, रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश
    निरीक्षण के दौरान बीपीएल चौराहा स्थित श्रीजी मेडिकल से दवाओं के नमूने जांच हेतु लिए गए हैं। इसके साथ ही सिटी मेडिकल और वीर फार्मा को निर्देश दिया गया है कि वे शेड्यूल-एच1 दवाओं के क्रय-विक्रय से जुड़े सभी रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर विभाग के समक्ष प्रस्तुत करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा में दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर संबंधित संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। टीम ने मौके पर मौजूद सभी मेडिकल संचालकों को स्टॉक रजिस्टर नियमित रूप से अद्यतन रखने के निर्देश भी दिए।

    सीतामऊ में पहले मिली थीं अनियमितताएं, दो मेडिकल फर्मों को नोटिस
    सीएमएचओ डॉ. चौहान ने बताया कि इससे पहले सीतामऊ तहसील में किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच के आधार पर पूजा मेडिकोज और मां आशापुरा मेडिकल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनसे प्राप्त जवाबों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

    नशे के रूप में दवाओं के दुरुपयोग पर सख्ती
    औषधि विभाग द्वारा सीतामऊ तहसील के सभी मेडिकल संचालकों की एक बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नशे के रूप में दुरुपयोग होने वाली दवाओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से रखा जाए और बिना चिकित्सकीय परामर्श किसी भी दवा का वितरण न किया जाए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसी भी मेडिकल स्टोर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो उसके खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

    निगरानी और निरीक्षण आगे भी जारी रहेगा
    सीएमएचओ ने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य अवैध दवा कारोबार और दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाना है। साथ ही दवा वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना भी प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिलेभर में इस तरह के औचक निरीक्षण और निगरानी अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

  • फर्जी खबरों से भड़का विवाद: VIT भोपाल ने सरकार को भेजा विस्तृत जवाब, कहा- 17 हजार छात्रों में केवल 35 को पीलिया

    फर्जी खबरों से भड़का विवाद: VIT भोपाल ने सरकार को भेजा विस्तृत जवाब, कहा- 17 हजार छात्रों में केवल 35 को पीलिया


    भोपाल । VIT भोपाल यूनिवर्सिटी ने राज्य सरकार के शो-कॉज नोटिस पर 49 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजते हुए आरोपों को भ्रमित करने वाला, तथ्यहीन और अफवाहों पर आधारित बताया है। विश्वविद्यालय ने साफ कहा कि भोजन, पानी, हॉस्टल, स्वास्थ्य सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़े सभी प्रावधान तय मानकों के अनुरूप हैं। संस्था के अनुसार, हालिया उपद्रव सोशल मीडिया पर फैलाई गई फर्जी खबरों और भड़काऊ संदेशों के कारण हुआ।

    यूनिवर्सिटी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि कैंपस में 8 बॉयज और 2 गर्ल्स हॉस्टल हैं, जिनमें प्रतिष्ठित केटरर्स भोजन उपलब्ध कराते हैं। फूड मेन्यू छात्रों की फूड कमेटी तय करती है, और फीडबैक पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। पानी की गुणवत्ता ISO 10500 मानकों के अनुसार नियमित रूप से जांची जाती है, जिसके लिए ओजोनाइजर, सैंड फिल्टर और वॉटर सॉफ्टनर लगाए गए हैं। प्रबंधन ने यह भी बताया कि जल्द ही कैंपस में फूड और वॉटर टेस्टिंग लैब स्थापित की जाएगी।

    पीलिया फैलने की खबरों पर यूनिवर्सिटी ने कहा कि कुल 17,121 छात्रों में से केवल 35 विद्यार्थियों में ही पीलिया के लक्षण पाए गए, जिन्हें तुरंत मेडिकल सुविधा दी गई। संस्थान में 24×7 डॉक्टर, नर्सें और 8-बेड की मेडिकल यूनिट मौजूद है। गंभीर मामलों में छात्रों को मान्यता प्राप्त अस्पतालों, जैसे चिरायु अस्पताल, भेजा गया। छात्रों की मेडिकल रिपोर्ट न देने के आरोप को भी असत्य बताया गया।

    VIT ने सुरक्षा और अनुशासन संबंधी आरोपों को भी खारिज किया। संस्था ने कहा कि किसी अधिकारी को रोका नहीं गया, न ही छात्रों को धमकाया गया। यूनिवर्सिटी के अनुसार विरोध के दौरान अफवाहों के चलते छात्रों ने एक एम्बुलेंस, बस, कारें और लैब उपकरणों को नुकसान पहुंचाया, CCTV सिस्टम तोड़ दिया और सुरक्षा कर्मियों के साथ मारपीट की गई। इन घटनाओं से कर्मचारियों की जान भी खतरे में पड़ी।

    अंत में विश्वविद्यालय ने कहा कि शो-कॉज नोटिस गलत सूचनाओं पर आधारित है, इसलिए इसे वापस लिया जाए। साथ ही, तथ्यात्मक सुनवाई का अवसर देने का अनुरोध भी किया गया। VIT भोपाल ने अपनी उपलब्धियों-डॉक्टरेट फैकल्टी, वैश्विक MoUs, आधुनिक लैब्स और प्लेसमेंट रिकॉर्ड-का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हमेशा सभी मानकों का पालन करता आया है।