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  • रिटायर्ड शिक्षक की एक आवाज पर उमड़ पड़ते हैं 1000 तक कौवे 8 साल से रोज मिल रहा दाना पानी श्राद्ध पक्ष में बढ़ी इनकी अहमियत

    रिटायर्ड शिक्षक की एक आवाज पर उमड़ पड़ते हैं 1000 तक कौवे 8 साल से रोज मिल रहा दाना पानी श्राद्ध पक्ष में बढ़ी इनकी अहमियत


    उज्जैन । उज्जैन में श्राद्ध पक्ष के दौरान जहां श्रद्धालु पितरों के तर्पण और श्राद्ध कर्म के बाद कौवे को भोजन कराने के लिए तलाशते नजर आते हैं वहीं शहर के इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी हिल्स में रोज शाम एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। यहां रिटायर्ड शिक्षक अशोक कुमार दुबे की आवाज सुनते ही सैकड़ों कौवे एक जगह जमा हो जाते हैं। कई दिनों में इनकी संख्या करीब 1000 तक पहुंच जाती है। पिछले आठ वर्षों से चल रही दाना पानी की यह सेवा अब कौवों के लिए नियमित भोजन का भरोसेमंद ठिकाना बन चुकी है।

    नवोदय विद्यालय से रिटायर्ड लेक्चरर अशोक कुमार दुबे ने वर्ष 2018 में पक्षियों को दाना खिलाने की शुरुआत की थी। उस समय उनके घर के आसपास केवल पांच से सात चिड़ियां भोजन के लिए आती थीं। धीरे धीरे इस सिलसिले में कौवे भी जुड़ते गए। शुरुआत में उनकी संख्या बेहद कम थी लेकिन समय के साथ यह संख्या बढ़ती चली गई। 10 से 20 और फिर 50 कौवों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब सैकड़ों तक पहुंच चुका है। मौसम के अनुसार संख्या में उतार चढ़ाव जरूर होता है लेकिन जुलाई अगस्त और सितंबर के दौरान कौवों की मौजूदगी काफी बढ़ जाती है।

    अशोक दुबे के घर शाम करीब छह बजे जैसे ही भोजन रखने का समय होता है आसपास उड़ते कौवे उनकी आवाज पहचानकर पहुंचने लगते हैं। देखते ही देखते घर के आसपास कौवों का बड़ा झुंड दिखाई देने लगता है। दाना और पानी लेने के बाद ये पक्षी अंधेरा होने से पहले अपने ठिकानों की ओर लौट जाते हैं। फिलहाल रोज करीब 500 से 700 कौवे यहां पहुंच रहे हैं और कुछ दिनों में यह संख्या 1000 के आसपास भी पहुंच जाती है।

    इतने बड़े झुंड के भोजन का इंतजाम भी कम नहीं है। रोज करीब 10 किलो चावल और दो किलो परमल कौवों के लिए रखा जाता है। इस सेवा पर प्रतिदिन करीब 800 से 1000 रुपये तक खर्च होने की बात बताई गई है। सालभर में यह खर्च करीब दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है। हालांकि अब कॉलोनी के कुछ लोग भी इस पहल से जुड़ चुके हैं। शंकर राव जांगड़े और जयसिंह सहित अन्य लोग कौवों के लिए पानी की व्यवस्था में सहयोग करते हैं। इस तरह दाना और पानी की यह सेवा केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी न रहकर सामूहिक प्रयास का रूप ले चुकी है।

    श्राद्ध पक्ष में कौवों के लिए भोजन का स्वरूप भी बदल जाता है। इन दिनों उन्हें खीर पूड़ी भजिए और मीठी नुक्ती खिलाई जाती है। अशोक दुबे के अनुसार खीर और पूड़ी देखते ही कौवे तेजी से पहुंचते हैं और भोजन कुछ ही समय में खत्म हो जाता है। ज्यादा से ज्यादा कौवों तक भोजन पहुंच सके इसके लिए पूड़ी को छोटे टुकड़ों में बांटकर खिलाया जाता है।

    हिंदू परंपराओं में श्राद्ध के दौरान कौवे को भोजन कराने की विशेष मान्यता बताई जाती है। धार्मिक विश्वास के अनुसार कौवे को दिया गया भोजन पितरों तक पहुंचने से जोड़ा जाता है। पंचबलि की परंपरा में भी कौवे को भोजन अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। उज्जैन जैसे धार्मिक शहर में सिद्धवट और रामघाट समेत विभिन्न स्थानों पर श्राद्ध कर्म के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह परंपरा खास महत्व रखती है।

    अशोक दुबे के लिए हालांकि यह सेवा केवल धार्मिक मान्यता तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक लगातार दाना पानी मिलने के कारण कौवों को इस जगह पर भरोसा हो गया है। आठ साल पहले शुरू हुई छोटी सी पहल आज सैकड़ों पक्षियों के लिए रोज के भोजन का सहारा बन गई है। त्रिवेणी हिल्स में शाम होते ही कौवों का यह जमावड़ा बताता है कि नियमित दाना पानी और सुरक्षित माहौल मिलने पर पक्षी भी किसी जगह को अपने भरोसेमंद ठिकाने के रूप में अपना सकते हैं।

  • 60 साल बाद बन रहा दुर्लभ ग्रह संयोग, 26 सितंबर से उज्जैन में शुरू होगा श्राद्ध पक्ष, सिद्धवट और रामघाट पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़

    60 साल बाद बन रहा दुर्लभ ग्रह संयोग, 26 सितंबर से उज्जैन में शुरू होगा श्राद्ध पक्ष, सिद्धवट और रामघाट पर उमड़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़


    उज्जैन । उज्जैन में पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए विशेष महत्व रखने वाला श्राद्ध पक्ष 26 सितंबर से शुरू होने जा रहा है। इसके साथ ही सिद्धवट रामघाट और शिप्रा नदी के दूसरे घाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगेगी। देश के अलग अलग हिस्सों से लोग पितरों की शांति के लिए उज्जैन पहुंचेंगे। इसे देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से घाटों की सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शिप्रा नदी में पानी की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।

    इस बार का श्राद्ध पक्ष इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार करीब 60 साल बाद विशेष ग्रह संयोग बन रहा है। उनका कहना है कि 1966 के बाद 2026 में सूर्य चंद्र मंगल बुध गुरु और शनि की विशेष स्थिति फिर बन रही है। इसी वजह से इस बार श्राद्ध पक्ष को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि ग्रहों के इस संयोग को लेकर ज्योतिषीय मान्यताएं अलग अलग हो सकती हैं।

    महालय श्राद्ध की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा के दिन 26 सितंबर से होगी। इसका समापन 10 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस बार श्राद्ध पक्ष की शुरुआत और इसका समापन दोनों शनिवार को होने की बात कही गई है। इस दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा और मान्यता के अनुसार पितरों का तर्पण पिंडदान और श्राद्ध कर्म करेंगे।

    उज्जैन का सिद्धवट पितृ कर्म के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है। सिद्धवट मंदिर के पुजारी राघवेंद्र चतुर्वेदी के अनुसार यहां स्थित वटवृक्ष को भगवान शिव के स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने त्रेतायुग में इस वटवृक्ष को लगाया था। यही वजह है कि सिद्धवट पर पितरों की शांति और सद्गति की कामना के लिए विशेष पूजा की जाती है।

    श्राद्ध पक्ष के दौरान सिद्धवट पर देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां लोग अपने पूर्वजों के नाम से पिंडदान और तर्पण करते हैं। कई परिवार अपनी कई पीढ़ियों के पूर्वजों की शांति के लिए भी पूजा करवाते हैं। पूजा के बाद पितरों का स्मरण करते हुए सिद्धवट पर कच्चा दूध चढ़ाने की परंपरा भी बताई गई है। धार्मिक मान्यताओं के कारण श्राद्ध पक्ष में इस स्थान पर विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

    सिद्धवट का धार्मिक महत्व प्रयागराज के अक्षयवट गया के बोधिवट और वृंदावन के वंशीवट से भी जोड़ा जाता है। पुजारी के अनुसार उज्जैन का सिद्धवट कल्पवृक्ष के रूप में भी पूजनीय माना जाता है। यही कारण है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान यहां होने वाले तर्पण और पिंडदान को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष आस्था रहती है।

    26 सितंबर से शुरू होने वाले श्राद्ध पक्ष को देखते हुए उज्जैन में घाटों पर व्यवस्थाएं बढ़ाई जा रही हैं। रामघाट और शिप्रा के अन्य घाटों पर भी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयारियां की जा रही हैं। आने वाले दिनों में देशभर से श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की उम्मीद है। विशेष ग्रह स्थिति और पितृ कर्म की धार्मिक मान्यताओं के कारण इस बार श्राद्ध पक्ष को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है।