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  • श्रावण के पहले सोमवार नरसिंहपुर के शिवालयों में उमड़ी आस्था, मिट्टी के शिवलिंग बनाकर भक्तों ने की विशेष पूजा

    श्रावण के पहले सोमवार नरसिंहपुर के शिवालयों में उमड़ी आस्था, मिट्टी के शिवलिंग बनाकर भक्तों ने की विशेष पूजा

    मध्य प्रदेश: के नरसिंहपुर जिले में श्रावण मास के पहले सोमवार को भगवान शिव की भक्ति का विशेष उत्साह देखने को मिला। जिले के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल जीवन की कामना की। पूरे दिन मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंजते रहे।

    श्रावण के पहले सोमवार के अवसर पर जिले के कई शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मिट्टी से शिवलिंग और रुद्री का निर्माण कर पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है और सोमवार के दिन की गई पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।

    इस वर्ष श्रावण का पहला सोमवार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग के शुभ संयोग में पड़ा। धार्मिक विद्वानों के अनुसार सुकर्मा योग में किए गए जप, तप, दान, पूजा और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ समय में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    पहले सोमवार को लेकर जिले के प्रमुख शिवालयों को विशेष रूप से सजाया गया था। मंदिरों में सुबह से पूजा-पाठ का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर शाम तक चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर अपनी श्रद्धा प्रकट की। कई मंदिरों में सामूहिक जलाभिषेक और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया।

    नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा स्थित डमरूघाटी, परमहंसी गंगा आश्रम स्थित लोधेश्वर मंदिर, महादेव पिपरिया के जबरेश्वर महादेव मंदिर, बरमान घाट के दीपेश्वर महादेव मंदिर सहित कई प्रमुख शिवालयों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इसके अलावा पुलिस लाइन शिव मंदिर, व्यंकटेश महादेव मंदिर, आजाद वार्ड शिव मंदिर, नृसिंह मंदिर परिसर, सदर मढ़िया शिवलिंग, स्टेशनगंज श्री शिव मंदिर, सांकल रोड तिराहा स्थित ठाकुर बाबू शिव मंदिर, काली मठ और झिरना महादेव मंदिर में भी भक्तों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली।

    श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की खुशहाली, स्वास्थ्य और सुख-शांति की प्रार्थना की। कई भक्तों ने सावन सोमवार का व्रत रखा और दिनभर धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। मंदिरों में भजन, मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ के कारण वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।

    श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। दर्शन, जलाभिषेक और पूजा के दौरान भक्तों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए गए। सावन के पहले सोमवार पर जिलेभर में धार्मिक आस्था, भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला।

  • सावन सोमवार पर मनोकामना अनुसार करें शिवलिंग का अभिषेक, शास्त्रों में बताए गए हैं विशेष धार्मिक उपाय

    सावन सोमवार पर मनोकामना अनुसार करें शिवलिंग का अभिषेक, शास्त्रों में बताए गए हैं विशेष धार्मिक उपाय

    नई दिल्ली । श्रावण मास के पवित्र सोमवार के अवसर पर देश भर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सनातन धर्म और धार्मिक मान्यताओं में सावन सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस पावन अवधि में शिवलिंग का अलग-अलग पवित्र द्रव्यों से अभिषेक करने पर साधक को उसकी विशिष्ट मनोकामनाओं के अनुसार फलों की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

    शिवपुराण के अनुसार, मनोकामना पूर्ति के लिए अभिषेक की सामग्री का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि कोई भक्त मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति की कामना रखता है, तो उसे शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करना चाहिए। वहीं, मानसिक शांति और विचारों की शुद्धता प्राप्त करने के लिए साधारण जल से अभिषेक करने का विधान बताया गया है। उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और गंभीर रोगों से मुक्ति पाने के लिए कच्चे दूध से जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    पारिवारिक सुख, शांति और समृद्धि की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए दूध में शक्कर मिलाकर अर्पित करने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, वंश वृद्धि, उत्तम संतान की प्राप्ति तथा शारीरिक शक्ति और ऊर्जा में वृद्धि के लिए देसी गाय के शुद्ध घी से अभिषेक करने का महत्व है। कर्ज की समस्या से निजात पाने, वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने और कुंडली में शुक्र ग्रह को मजबूत करने के लिए शहद से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

    आर्थिक तंगी से जूझ रहे लोगों के लिए शास्त्रों में गन्ने के रस से अभिषेक करने का विधान है। मान्यता है कि गन्ने के रस से जलाभिषेक करने पर घर में धन-धान्य, संपत्ति और यश की वृद्धि होती है। वहीं, जिन युवाओं के विवाह में बाधाएं आ रही हों, वे दूध या जल में थोड़ा केसर मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही बेलपत्र अर्पित करने से तीनों जन्मों के पापों का नाश होता है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के सभी प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में सावन सोमवार के दिन तड़के से ही पंचामृत और विभिन्न पवित्र नदियों के जल से रुद्रभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था और इच्छाओं के अनुसार पूजन सामग्री लेकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने मंदिरों में पहुंच रहे हैं। संपूर्ण वातावरण हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गुंजायमान हो रहा है।

  • उज्जैन में महाकाल की श्रावस मास की सवारी 3 अगस्त को, अधिकारियों ने लिया तैयारियों का जायजा

    उज्जैन में महाकाल की श्रावस मास की सवारी 3 अगस्त को, अधिकारियों ने लिया तैयारियों का जायजा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में विश्वर प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर की श्रावाण मास की पहली सवारी आगामी 3 अगस्त को निकलेगी। उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने मंगलवार रात्रि में प्रशासनिक एवं पुलिस अमले के साथ भगवान महाकाल के सवारी मार्ग का निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का विस्तृत जायजा लिया।

    कलेक्टर ने सर्वप्रथम पालकी द्वार का का निरीक्षण किया और वहां ऊपर से गुजर रहे बिजली के तारों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। सवारी मार्ग के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्य एवं मरम्मत कार्यों के साथ सड़क, प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, बैरिकेडिंग, पेयजल, सुरक्षा तथा श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया।

    कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रावण-भादौ मास की सवारियों से पूर्व सभी आवश्यक कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सवारी मार्ग पर स्वच्छता, विद्युत एवं पेयजल व्यवस्था, बैरिकेडिंग सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित की जाएं, ताकि भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

    कलेक्टर सिंह ने रामघाट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, और सवारी मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्यों की शीघ्र लेवलिंग पूर्ण कर मार्ग को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। ढाबा रोड पर स्थित जीर्ण शीर्ण भवनों एवं निर्माणाधीन भवनों के आसपास सवारी के दौरान कड़ा बीन का उपयोग न करने के सख्त निर्देश दिए गए।

    निर्माणाधीन मकानों के आसपास बेरीकेट्स लगाने तथा साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए ताकि कोई व्यक्ति अंदर प्रवेश ना करें । लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जीर्ण शीर्ण चिन्हित मकानों के आसपास पर्याप्त चेतावनी के साइन बोर्ड लगाए जाने के निर्देश दिए गए। ढाबा रोड पर खुले ट्रांसफार्मरों के आसपास जाली लगाने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिए कि अब कोई नया निर्माण कार्य प्रारंभ न किया जाए तथा जो निर्माण कार्य चल रहे हैं, उन्हें तेज गति से पूरा किया जाए।

    गोपाल मंदिर पहुंचकर वहां निरीक्षण के दौरान कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि रीगल टॉकीज क्षेत्र के आसपास सवारी के दौरान किसी भी व्यक्ति को खड़ा नहीं होने दिया जाए तथा पर्याप्त बैरिकेडिंग की जाए। निरीक्षण के दौरान नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्रेयांस कूमट, महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    नई दिल्ली । भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में विशेष आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर होती है कि इस बार सावन में कुल कितने सोमवार पड़ेंगे। वर्ष 2026 के पंचांग के अनुसार उत्तर भारत में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान कुल चार सावन सोमवार आएंगे।

    पंचांग के अनुसार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को होगा। इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा तथा अंतिम सावन सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। इन चारों सोमवार को शिव भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और व्रत रखकर विशेष पूजा करेंगे। सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को होने के साथ ही इस पवित्र महीने का समापन होगा।

    हर वर्ष सावन की शुरुआत और सोमवार की संख्या को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है। इसका प्रमुख कारण देश में प्रचलित दो अलग-अलग पंचांग पद्धतियां हैं। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अमांत पंचांग मान्य है। दोनों पंचांगों की गणना पद्धति अलग होने के कारण सावन की तिथियों और सोमवारों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

    सावन सोमवार के व्रत का विशेष महत्व अविवाहित और विवाहित दोनों के लिए बताया गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित दंपति परिवार की सुख-शांति, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और समृद्धि के लिए भगवान शिव का पूजन करते हैं। कई स्थानों पर पूरे सावन महीने में शिवालयों में विशेष धार्मिक आयोजन और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाते हैं।

    सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन करते हैं और भगवान शिव की आराधना में समय बिताते हैं। वर्ष 2026 में उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन के चार सोमवार शिव भक्तों को विशेष पूजा और व्रत का अवसर प्रदान करेंगे, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथियों में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

  • Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? भूल से भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकते हैं महादेव!

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की पूजा में क्या चढ़ाएं और क्या नहीं? भूल से भी न करें ये गलतियां, वरना रूठ सकते हैं महादेव!


    नई दिल्ली । Mahashivratri 2026 Date: भगवान शिव की आराधना के लिए महाशिवरात्रि का पर्व बेहद खास माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भक्त उपवास रखकर शिवलिंग का विधि-विधान से अभिषेक और पूजा करते हैं. कहा जाता है कि सच्चे मन से की गई शिव पूजा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. पंचांग के अनुसार, साल 2026 में महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन भगवान शिव को क्या चढ़ाना शुभ माना जाता है और किन चीजों को चढ़ाने से बचना चाहिए.
    महादेव को क्या अर्पित करें?
    शिवजी को सादगी प्रिय है. यदि आप पूरी श्रद्धा से ये चीजें अर्पित करते हैं, तो आपकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं.बेलपत्र: महादेव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है. ध्यान रखें कि बेलपत्र कटा-फटा न हो और उसमें तीन पत्तियां एक साथ जुड़ी हों.धतूरा और भांग: ये चीजें शिवजी को नकारात्मकता दूर करने के प्रतीक के रूप में चढ़ाई जाती हैं.कच्चा दूध और गंगाजल: शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए शुद्ध कच्चा दूध और गंगाजल सबसे उत्तम माना जाता है.चंदन: शिवजी को सफेद चंदन का तिलक लगाएं. इससे मन को शांति मिलती है
    अक्षत (चावल): पूजा में साबुत चावल का प्रयोग करें. टूटे हुए चावल खंडित कभी न चढ़ाएं भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें !केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था.तुलसी दल: भगवान शिव ने जालंधर असुर का वध किया था, जिसकी पत्नी वृंदा (तुलसी) थी. इसलिए तुलसी शिव पूजा में नहीं चढ़ाई जाती.सिंदूर या कुमकुम: महादेव वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक है, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए लगाती हैं.शंख से जल: शिवजी ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था, इसलिए उनकी पूजा में शंख वर्जित माना जाता है.
    पूजा के दौरान न करें ये गलतियां
    कभी भी खंडित शिवलिंग की पूजा न करें. हालांकि, नर्मदेश्वर शिवलिंग को अपवाद माना जाता है. जल चढ़ाने के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ है, लेकिन तांबे के बर्तन में दूध डालकर अभिषेक नहीं करना चाहिए. दूध के लिए चांदी या स्टील के बर्तन का प्रयोग करें. शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. हमेशा आधी परिक्रमा करें और जहां से जल बाहर निकलता है (जलाधारी), उसे कभी न लांघें.

    महाशिवरात्रि व्रत का धार्मिक महत्व
    हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहारों में से एक माना जाता है. यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए इस दिन शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत और पूजा करते हैं. महाशिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
    मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यह व्रत आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी प्रतीक माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार,जो भक्त सच्चे मन से महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. अविवाहित लोगों को मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और विवाहित लोगों के वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.