Tag: Shubh Muhurat Today

  • 4 मार्च का पंचांग: बुधवार से चैत्र मास की शुरुआत, जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

    4 मार्च का पंचांग: बुधवार से चैत्र मास की शुरुआत, जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना गया है। तिथि, नक्षत्र, योग और वार के आधार पर दिन की शुभ-अशुभ घड़ियां तय की जाती हैं। 4 मार्च, बुधवार से चैत्र मास के कृष्ण पक्ष का प्रारंभ हो रहा है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन विशेष माना जा रहा है, क्योंकि नए मास की शुरुआत साधना, संकल्प और पूजा के लिए शुभ मानी जाती है।

    तिथि और नक्षत्र का संयोग
    दृक पंचांग के अनुसार बुधवार को कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शाम 4 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वितीया तिथि आरंभ होगी। हालांकि उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन प्रतिपदा का ही मान रहेगा।

    नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाफाल्गुनी सुबह 7 बजकर 39 मिनट तक रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव शुरू होगा। योग धृति सुबह 8 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

    सूर्योदय सुबह 6 बजकर 43 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 23 मिनट पर होगा। दिन की कुल अवधि धार्मिक कार्यों के लिए संतुलित मानी जा रही है।

    दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त
    4 मार्च को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 4 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यह समय ध्यान, जप, साधना और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

    विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। नए कार्य की शुरुआत, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए यह समय अनुकूल है।

    गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक है। यह संध्या पूजन और विशेष अनुष्ठान के लिए शुभ माना जाता है।

    अमृत काल देर रात 12 बजकर 54 मिनट से 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 8 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ या कोई मांगलिक कार्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

    अशुभ समय का रखें ध्यान
    पंचांग के अनुसार राहुकाल दोपहर 12 बजकर 33 मिनट से 2 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई नया या शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए।

    यमगंड सुबह 8 बजकर 11 मिनट से 9 बजकर 38 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 11 बजकर 6 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

    दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, वर्ज्य दोपहर 3 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 41 मिनट तक प्रभावी रहेगा। साथ ही आडल योग सुबह 7 बजकर 39 मिनट से देर रात 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन अशुभ कालों में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यात्रा या अन्य मांगलिक कार्य करने से परहेज करना चाहिए।

    बुधवार का धार्मिक महत्व
    बुधवार का दिन विघ्न विनाशक भगवान गणपति और बुध ग्रह को समर्पित है। इस दिन विधि-विधान से गणेश पूजा करने और हरे वस्त्र या मूंग का दान करने से बुध ग्रह शांत होते हैं और बुद्धि, व्यापार व संचार से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से नए मास की शुरुआत होने के कारण यह दिन आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए भी उत्तम माना गया है।

  • 3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि बताने का माध्यम नहीं, बल्कि दिन की दिशा तय करने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। 3 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि और मंगलवार का संयोग बन रहा है। मंगलवार का दिन आदि शक्ति और श्रीराम भक्त हनुमान को समर्पित होता है, ऐसे में इस दिन पूजा-पाठ और विशेष साधना का महत्व और बढ़ जाता है।

    तिथि, नक्षत्र और योग का पूरा ब्योरा
    3 मार्च को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 44 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन पूर्णिमा का ही मान रहेगा। नक्षत्र मघा सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। सुकर्मा योग सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक और बव करण शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।

    विजय मुहूर्त और अमृत काल का खास महत्व
    इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:05 से 5:55 बजे तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:56 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 से 3:16 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त में नए कार्य, महत्वपूर्ण निर्णय या यात्रा प्रारंभ करना विशेष फलदायी माना जाता है।

    गोधूलि मुहूर्त शाम 6:20 से 6:44 बजे तक रहेगा। अमृत काल रात 1:13 से 2:49 बजे तक है, जो मंत्र जप और विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ है। निशीथ मुहूर्त रात 12:08 से 12:57 बजे तक रहेगा।

    राहुकाल और अन्य अशुभ समय
    शुभ समय के साथ अशुभ काल का ध्यान रखना भी आवश्यक है। राहुकाल दोपहर 3:28 से 4:55 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नए और शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। यमगंड सुबह 9:39 से 11:06 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 12:33 से 2:00 बजे तक रहेगा।

    दुर्मुहूर्त सुबह 9:04 से 9:50 बजे तक है। गण्ड मूल सुबह 6:44 से 7:31 बजे तक रहेगा। वर्ज्य काल दोपहर 3:34 से 5:10 बजे तक रहेगा।

    पूर्णिमा और मंगलवार का यह संगम आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। यदि आप किसी नए कार्य की योजना बना रहे हैं या विशेष पूजा-अर्चना करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखकर शुरुआत करें।