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  • शनि प्रदोष 2026: आज शिवजी और शनि देव की कृपा पाने का शुभ संयोग, देखें आज का पंचांग

    शनि प्रदोष 2026: आज शिवजी और शनि देव की कृपा पाने का शुभ संयोग, देखें आज का पंचांग

    नई दिल्ली।  Aaj Ka Panchang 27 June 2026: आज शनिवार के दिन शनि प्रदोष व्रत का पावन संयोग है। त्रयोदशी तिथि पर पड़ने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, वहीं शनिवार होने के कारण इस दिन शनि देव की उपासना का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव और शनि देव की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैया या अन्य शनि दोष का प्रभाव है, उन्हें आज शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करने के साथ शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

    27 जून 2026 का पंचांग

    • दिन: शनिवार

    • तिथि: त्रयोदशी (शनि प्रदोष व्रत)

    • सूर्योदय: प्रातः 5:47 बजे

    • सूर्यास्त: शाम 7:12 बजे

    • चंद्रोदय: शाम 5:17 बजे

    • चंद्रास्त: 28 जून प्रातः 3:58 बजे

    नोट: सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

    आज के शुभ मुहूर्त

    • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 4:11 बजे से 4:59 बजे तक

    • अमृत काल: सुबह 10:29 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक

    • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:56 बजे तक

    आज के अशुभ मुहूर्त

    • राहुकाल: सुबह 9:08 बजे से 10:49 बजे तक

    • यमगंड: दोपहर 2:10 बजे से 3:51 बजे तक

    • कुलिक काल: प्रातः 5:47 बजे से 7:28 बजे तक

    • दुर्मुहूर्त: सुबह 7:34 बजे से 8:28 बजे तक

    • वर्ज्य काल: प्रातः 4:28 बजे से 6:16 बजे तक

    शनि प्रदोष का धार्मिक महत्व

    शनि प्रदोष व्रत को भगवान शिव और शनि देव दोनों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों पर शनि देव की विशेष कृपा बनी रहती है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, रुद्राभिषेक, शिव मंत्रों का जाप तथा दीपदान करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

  • सिर्फ शुभ मुहूर्त नहीं ग्रहों की चाल भी है जरूरी, जानिए कब करें नए काम की शुरुआत

    सिर्फ शुभ मुहूर्त नहीं ग्रहों की चाल भी है जरूरी, जानिए कब करें नए काम की शुरुआत


    नई दिल्ली । जीवन में नई नौकरी जॉइन करना नया व्यापार शुरू करना या किसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत करना हर व्यक्ति के लिए एक बड़ा कदम होता है। भारतीय सनातन परंपरा में ऐसे कार्यों से पहले शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि सही समय पर शुरू किया गया कार्य सफलता के द्वार खोल सकता है। हालांकि ज्योतिष शास्त्र केवल मुहूर्त देखने तक सीमित नहीं है बल्कि ग्रहों की स्थिति दशा और गोचर को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है।

    ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र पांडेय के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले व्यक्ति को अपनी ग्रह दशाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। कई बार शुभ मुहूर्त होने के बावजूद ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति कार्य में बाधाएं उत्पन्न कर सकती है। वहीं अनुकूल ग्रह दशाएं व्यक्ति को नए अवसरों और सफलता की ओर तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करती हैं।

    ज्योतिष के अनुसार जब कुंडली में बृहस्पति या शुक्र की महादशा अथवा अंतरदशा चल रही हो तब नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय बेहद अनुकूल माना जाता है। ये दोनों ग्रह समृद्धि प्रगति और सकारात्मक अवसरों के कारक माने जाते हैं। इसी प्रकार यदि गोचर में गुरु और शनि अनुकूल स्थिति में हों तो करियर व्यवसाय और आर्थिक मामलों में अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

    इसके अलावा साढ़ेसाती या ढैया जैसी चुनौतीपूर्ण अवधियों के समाप्त होने के बाद भी जीवन में नए अध्याय शुरू करने के योग बनते हैं। ऐसे समय में व्यक्ति को नई नौकरी व्यापार विस्तार या निवेश जैसे फैसले लेने का अवसर मिल सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भाग्य स्थान के स्वामी यानी भाग्येश तथा सप्तम भाव के स्वामी सप्तमेश की दशा भी जीवन में नए अवसर लेकर आती है। इन ग्रहों की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को नई जिम्मेदारियां प्रतिष्ठा और उन्नति के अवसर प्रदान कर सकती है। इसलिए किसी बड़े निर्णय से पहले कुंडली का विश्लेषण कराना लाभकारी माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नए कार्य की शुरुआत करते समय केवल दिन नहीं बल्कि समय और स्थान का चयन भी महत्वपूर्ण होता है। चंद्रबल और ताराबल मजबूत होने पर कार्यों में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। इसके साथ ही कार्य के अनुरूप नक्षत्र का चयन और राशि के अनुसार शुभ दिन का चुनाव भी सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में राशि अनुसार कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का सेवन करके नए कार्य की शुरुआत करना शुभ माना गया है। मेष राशि के लोग गुरुवार को पीली सरसों ग्रहण कर सकते हैं। वृष और कुंभ राशि वालों के लिए घी शुभ माना गया है। मिथुन तुला और मकर राशि के जातक दही या दही चीनी खाकर शुरुआत कर सकते हैं। कर्क राशि वालों को गुड़ जबकि सिंह और वृश्चिक राशि वालों को पान का सेवन शुभ माना गया है। कन्या और मीन राशि के लोग हरा धनिया खाकर नया कार्य शुरू कर सकते हैं। वहीं धनु राशि वालों के लिए पीली मिठाई शुभ फलदायी मानी गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सही समय सही ग्रह दशा और सकारात्मक संकल्प के साथ शुरू किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को और मजबूत बना सकता है।

  • वट सावित्री व्रत 2026: नए व्रतियों के लिए आसान पूजा विधि और जरूरी नियम

    वट सावित्री व्रत 2026: नए व्रतियों के लिए आसान पूजा विधि और जरूरी नियम


    नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जिसमें सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति के प्राण वापस ले लिए थे। इसी कारण यह व्रत वैवाहिक जीवन की मजबूती और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
    साल 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। यह तिथि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को पड़ रही है। अमावस्या तिथि का आरंभ सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा और यह देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा।
    जो महिलाएं पहली बार व्रत रखने जा रही हैं, उनके लिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है। इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर वट वृक्ष की पूजा की जाती है। महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और कच्चा सूत बांधकर पूजा करती हैं। सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना इस व्रत का प्रमुख हिस्सा है। इसके बाद पति की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना की जाती है।
    पूजा के लिए इस दिन शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, जो अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर सौभाग्य योग और शोभन योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।
    वट सावित्री व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण को भी दर्शाता है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह आवश्यक है कि वे पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा करें ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

  • गुरु प्रदोष व्रत 2026: 14 मई को बन रहा शुभ योग, शिव कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

    गुरु प्रदोष व्रत 2026: 14 मई को बन रहा शुभ योग, शिव कृपा से पूरी होंगी मनोकामनाएं, जानें मुहूर्त और पूजा विधि



    नई दिल्ली। मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत 14 मई, गुरुवार को रखा जाएगा, जिसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ रहा है और इसका विशेष महत्व इसलिए भी माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से व्रत और पूजा करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    पंचांग के अनुसार त्रयोदशी तिथि 14 मई को दिन में लगभग 11:21 बजे शुरू होकर 15 मई सुबह 8:32 बजे तक रहेगी। लेकिन प्रदोष काल (संध्या समय) में तिथि होने के कारण व्रत 14 मई को ही रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:22 बजे से 7:04 बजे तक रहेगा, जो शिव आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय, मानसिक शांति और जीवन में स्थिरता मिलती है। इसके साथ ही जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

    व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर घी का दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिनभर शिव नाम का जप और सात्त्विक विचार रखने की सलाह दी जाती है। शाम के समय शिव मंदिर में जाकर पंचामृत से अभिषेक, बेलपत्र अर्पण, चंदन और दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है।

    पूजा के अंत में गुरु प्रदोष व्रत कथा का पाठ और आरती की जाती है। प्रसाद का वितरण परिवार में करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

  • मंगलवार, 7 अप्रैल : अभिजित व विजय मुहूर्त सहित पंचांग विवरण

    मंगलवार, 7 अप्रैल : अभिजित व विजय मुहूर्त सहित पंचांग विवरण


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में पंचांग के पांच अंग – तिथि नक्षत्र योग करण और वार – का विशेष महत्व है। इन्हीं के आधार पर दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय तय किया जाता है। 7 अप्रैल मंगलवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है जो दोपहर 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी। सूर्य और चंद्रमा की गणना के अनुसार पूरे दिन पंचमी तिथि का ही प्रभाव रहेगा।

    दृक पंचांग के अनुसार मंगलवार को ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा इसके बाद मूल नक्षत्र शुरू होगा। योग व्यतीपात दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर। चंद्रमा रात 11 बजकर 50 मिनट पर उदित होगा और अगले दिन सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर अस्त होगा।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचांग में दिए गए शुभ-अशुभ समय को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कार्य जैसे पूजा नया काम शुरू करना या यात्रा योजना बनाना चाहिए। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य फलदायी माने जाते हैं जबकि अशुभ समय में किए गए कार्य निष्फल हो सकते हैं।

    7 अप्रैल के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं – ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 41 मिनट से 7 बजकर 4 मिनट तक और अमृत काल शाम 8 बजकर 1 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

    अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक यमगण्ड सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 49 मिनट तक गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 36 मिनट से 9 बजकर 27 मिनट तक और वर्ज्य समय सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 11 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन गण्ड मूल का प्रभाव रहेगा और बाण रज सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक सक्रिय रहेगा।

    इस प्रकार 7 अप्रैल का दिन पंचांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण मुहूर्त प्रदान करता है जिनका उपयोग पूजा यात्रा और नए कार्यों में किया जा सकता है। साथ ही अशुभ समय से बचकर कार्य करने से समस्याओं और असफलताओं से बचा जा सकता है। यह दिन विशेष रूप से अभिजित और विजय मुहूर्त के लिए अनुकूल माना जा रहा है।

  • अप्रैल 2026 में विवाह और मांगलिक कार्य के शुभ मुहूर्त: जानें कौन से दिन करें शादी और गृह प्रवेश

    अप्रैल 2026 में विवाह और मांगलिक कार्य के शुभ मुहूर्त: जानें कौन से दिन करें शादी और गृह प्रवेश


    नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुभ समाचार है। सनातन धर्म में खरमास को विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। खरमास साल में दो बार आता है और जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह अवधि शुरू होती है। यह पूरे एक महीने तक चलता है और इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, सगाई, मुंडन और नए व्यापार या संपत्ति की खरीद जैसी मांगलिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है।

    ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रह को पिता पक्ष का प्रतिनिधि और ग्रहों का राजा माना गया है। जब सूर्य मीन या धनु राशि में होते हैं, तो उनका तेज कम हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य का तेज मांगलिक कार्यों के लिए शुभ फल देने के लिए आवश्यक है। इसलिए खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से उसका परिणाम अनिश्चित या अशुभ माना जाता है।

    इस बार अप्रैल 2026 में खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का राशि परिवर्तन होते ही खरमास का प्रभाव समाप्त हो जाएगा और 15 अप्रैल से विवाह, मुंडन, नामकरण, गृह प्रवेश और नए कार्य जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुभ और फलदायक हो जाएंगे।

    विवाह के लिए अप्रैल में कुल 8 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ये तिथियां हैं: 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 अप्रैल 2026। वहीं गृह प्रवेश के लिए अप्रैल में केवल एक मुहूर्त उपलब्ध है, जो 21 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। इस दिन गृह प्रवेश करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।

    इस प्रकार, अप्रैल के दूसरे भाग से मांगलिक कार्यों की योजना बनाने वालों के लिए समय अत्यंत अनुकूल है। विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की तैयारी करने वाले परिवारों को इस अवधि का लाभ उठाना चाहिए। इस समय सूर्य का तेज पूर्ण रूप से प्रभावी होने के कारण सभी शुभ कार्य सफलता और मंगल की प्राप्ति के साथ संपन्न होंगे। अप्रैल 2026 के शुभ मुहूर्तों का पालन कर योजना बनाना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह आपके कार्यक्रम को सफल और सौभाग्यपूर्ण बनाने में भी मदद करेगा।

  • रविवार का पंचांग अपडेट: कामदा एकादशी, मुहूर्त और राहुकाल की पूरी जानकारी

    रविवार का पंचांग अपडेट: कामदा एकादशी, मुहूर्त और राहुकाल की पूरी जानकारी

    नई दिल्ली:29 मार्च 2026, रविवार का दिन सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इसे कामदा एकादशी या अमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है और यह दिन नारायण भगवान की आराधना और व्रत करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष रविवार को एकादशी तिथि सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगी और उसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी। हालांकि, सूर्य उदय के समय के अनुसार पूरे दिन एकादशी का ही महत्व रहेगा।

    सूर्योदय इस दिन 6 बजकर 14 मिनट पर होगा और सूर्यास्त 6 बजकर 37 मिनट पर होगा। पंचांग के अनुसार नक्षत्र अश्लेषा दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मघा नक्षत्र शुरू होगा। योग धृति शाम 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा और करण विष्टि सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

    29 मार्च को कई शुभ मुहूर्त भी निर्धारित हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 42 मिनट से 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और इस दौरान पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना गया है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा और सायाह्न संध्या 6 बजकर 37 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक होगी। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 1 बजकर 2 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा और इसे किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है।

    अशुभ समय की जानकारी भी महत्वपूर्ण है ताकि इस दौरान कोई महत्वपूर्ण कार्य न किया जाए। राहुकाल शाम 5 बजकर 4 मिनट से 6 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल शाम 3 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा और दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 58 मिनट से 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। भद्रा सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा जबकि गंड मूल पूरे दिन प्रभाव में रहेगा।

    भक्त इस दिन कामदा एकादशी व्रत कर सकते हैं और शुभ मुहूर्त के अनुसार पूजा-अर्चना या धार्मिक कार्य संपन्न कर सकते हैं। राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल का लाभ उठाकर दिन को विशेष बनाया जा सकता है। इस प्रकार रविवार का यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी माना जाता है।

  • चैत्र शुक्ल नवमी 2026: राम जन्मोत्सव की पूजा का सही समय और विधि

    चैत्र शुक्ल नवमी 2026: राम जन्मोत्सव की पूजा का सही समय और विधि


    नई दिल्ली । भारत के हर कोने में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव यानी राम नवमी का पर्व बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। साल 2026 में यह तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों में व्रत और पूजन की सही तारीख को लेकर भ्रम उत्पन्न हो गया है।

    हिंदू पंचांग के अनुसार नवमी तिथि इस बार 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। लेकिन सूर्योदय के समय नवमी तिथि विद्यमान रहने के कारण 27 मार्च को राम नवमी मनाना अधिक शुभ माना जा रहा है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस समय में भगवान राम का पूजन और व्रत विधिपूर्वक संपन्न किया जा सकता है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ने पर देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के घर जन्म लेने का निर्णय लिया। राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ से प्राप्त खीर को कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा ने ग्रहण किया, और इस प्रकार चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। वाल्मीकि रामायण के अनुसार जन्म के समय पांच ग्रह अपनी उच्च राशि में स्थित थे, जो उनके दिव्य स्वरूप और प्रभाव को दर्शाता है।

    साथ ही, चैत्र नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। नवरात्रि में श्रद्धालु मां को सोलह श्रृंगार अर्पित करते हैं। इसमें लाल चुनरी, चूड़ी, इत्र, सिंदूर, बिछिया, महावर, मेहंदी, काजल, गजरा, कुमकुम, बिंदी, माला या मंगलसूत्र, पायल, नथ, कान की बाली और फूलों की वेणी शामिल हैं। ये श्रृंगार माता के सौभाग्य, सुंदरता और भक्त के समर्पण का प्रतीक हैं।

    अर्पित की जाने वाली वस्तुओं का भी विशेष महत्व है। अक्षत चावल, अखंडता और समृद्धि का प्रतीक है, लाल पुष्प शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, चुनरी श्रद्धा और सम्मान दर्शाती है, सिक्का दान और त्याग का संकेत देता है, जबकि ऋतु फल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का संदेश देते हैं।

    सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा ही जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। इस साल 2026 में राम नवमी और चैत्र नवरात्रि का संगम भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्त्व रखता है, इसलिए तय मुहूर्त और विधि के अनुसार पूजन और व्रत करना अत्यंत शुभ माना गया है।

  • आज का पंचांग 26 फरवरी 2026, फाल्गुन शुक्ल दशमी: प्रीति योग और शुभ मुहूर्त से दिन बने विशेष

    आज का पंचांग 26 फरवरी 2026, फाल्गुन शुक्ल दशमी: प्रीति योग और शुभ मुहूर्त से दिन बने विशेष


    नई दिल्ली। आज 26 फरवरी 2026 गुरुवार को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत हुई। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह दिन आध्यात्मिक साधना, ज्ञानार्जन, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि रात्रि 12 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगी और ग्रहों की स्थिति मानव जीवन के बौद्धिक और सामाजिक पक्ष को सुदृढ़ करने में सहायक होगी।

    खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य मंगल बुध शुक्र और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं जबकि चंद्रमा मिथुन राशि के मृगशिरा नक्षत्र में विराजमान हैं। मृगशिरा नक्षत्र ज्ञान, खोज और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र के देवता सोम माने जाते हैं जो अमृत और चंद्र ऊर्जा के प्रतिनिधि हैं। इसलिए आज का दिन ध्यान, जप, साधना और नए विचारों पर मनन के लिए विशेष रूप से फलदायी रहेगा।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज रात्रि 10 बजकर 33 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। धार्मिक दृष्टि से यह योग आपसी सद्भाव, संबंधों में मधुरता और रुके हुए कार्यों की सिद्धि का संकेत देता है। इसी प्रकार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा जिसे दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। वहीं अमृत काल रात्रि 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा जो साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए बेहद अनुकूल समय है।

    हालांकि पंचांग में कुछ अशुभ काल भी बताए गए हैं। राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और इस अवधि में नए कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय से बचने की परंपरा रही है। इसके अतिरिक्त गुलिकाल और यमगण्ड भी दिन के अलग-अलग समय में प्रभावी रहेंगे जिनमें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 49 मिनट और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 19 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 54 मिनट पर तथा चंद्रास्त अगले दिन प्रातः 3 बजकर 46 मिनट पर होगा। धार्मिक दृष्टि से यह समय क्रम दैनिक पूजा, व्रत और आध्यात्मिक अनुशासन के निर्धारण में महत्वपूर्ण माना जाता है।

    धर्माचार्यों का मत है कि आज का दिन आत्मसंयम, ज्ञानार्जन और ईश्वर स्मरण के लिए विशेष फलदायी है। ग्रहों की स्थिति मानसिक संतुलन विवेकपूर्ण निर्णय और सामाजिक मेल-जोल के संकेत देती है। श्रद्धालुओं को आज प्रार्थना दान और सकारात्मक संकल्प के माध्यम से जीवन में शांति और समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

    इस प्रकार आज का दिन आस्था, विवेक और सद्भाव के समन्वय का संदेश देता है। कर्म श्रद्धा और संयम जीवन को संतुलित दिशा प्रदान करते हैं। ध्यान साधना और ज्ञानार्जन के लिए अनुकूल यह दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्यों और जीवन के प्रति जागरूक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।

  • गुरुवार 26 फरवरी 2026: रवि योग, अमृतकाल, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

    गुरुवार 26 फरवरी 2026: रवि योग, अमृतकाल, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। यह दिन-प्रतिदिन के कार्यों के लिए शुभ और अशुभ समय बताता है। 26 फरवरी गुरुवार को नारायण और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगी, उसके बाद एकादशी आरंभ होगी।

    पंचांग के पांच अंग होते हैं-तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इनका मिलकर शुभ-अशुभ समय निर्धारित करने में उपयोग होता है। 26 फरवरी को नक्षत्र मृगशिरा दोपहर 12 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग प्रीति रात 10 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। यह दिन रवि योग से युक्त है, जो अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। सूर्योदय 6 बजकर 49 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 19 मिनट पर होगा।

    मुहूर्त का ज्ञान भी पंचांग से ही मिलता है। गुरुवार के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं- अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 15 मिनट तक। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 9 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 16 मिनट से 6 बजकर 42 मिनट तक है। अमृत काल रात 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन रवि योग का प्रभाव बना रहेगा।

    पंचांग में अशुभ काल का विशेष महत्व होता है। राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 6 बजकर 49 मिनट से 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजकर 42 मिनट से 11 बजकर 8 मिनट तक है। दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट से 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से परहेज करना चाहिए।

    गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति और नारायण को समर्पित पूजन का विधान है। पीले रंग का भोजन करना, पीले वस्त्र धारण करना और मस्तक पर पीला चंदन या हल्दी लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन दान करना और नारायण की विशेष पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।संपूर्ण दिन के पंचांग का पालन करके व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता और समृद्धि प्राप्त कर सकता है। शुभ मुहूर्त और रवि योग का ध्यान रखते हुए गुरुवार को किए गए कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।