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  • जून 2026 वाहन खरीद मुहूर्त: 17 से 29 तक 7 दिन रहेंगे सबसे शुभ, जानें पूरी डिटेल

    जून 2026 वाहन खरीद मुहूर्त: 17 से 29 तक 7 दिन रहेंगे सबसे शुभ, जानें पूरी डिटेल




    नई दिल्ली। जून 2026 में नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए पंचांग के अनुसार खास शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक इस समय अधिक मास (मलमास) का प्रभाव चल रहा है, जिसकी वजह से मई 2026 में वाहन खरीदने जैसे मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जा रहा है। ऐसे में अब लोगों की नजर जून महीने के शुभ मुहूर्तों पर टिकी है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जून 2026 में 17 जून से 29 जून के बीच कुल 7 ऐसे दिन हैं, जब वाहन खरीदना शुभ फल देने वाला माना गया है। इन दिनों में अलग-अलग नक्षत्रों का शुभ संयोग बन रहा है, जो नई शुरुआत और समृद्धि के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

    जून 2026 के शुभ वाहन खरीद मुहूर्त इस प्रकार हैं:
    17 जून (बुधवार) – पुनर्वसु नक्षत्र
    19 जून (शुक्रवार) – आश्लेषा नक्षत्र
    21 जून (रविवार) – पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र
    22 जून (सोमवार) – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र
    24 जून (बुधवार) – चित्रा नक्षत्र
    27 जून (शनिवार) – अनुराधा नक्षत्र
    29 जून (सोमवार) – मूल नक्षत्र

    इन तारीखों को वाहन खरीदना विशेष रूप से शुभ माना गया है क्योंकि इन दिनों में नक्षत्रों का ऐसा संयोग बनता है, जो नए कार्यों की शुरुआत के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

    विशेष मुहूर्त की खास बातें:
    17 जून को पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग वाहन खरीद के लिए बेहद अनुकूल रहेगा।
    19 जून को आश्लेषा नक्षत्र के दौरान सुबह का समय खास शुभ बताया गया है।
    21 और 22 जून को लगातार शुभ नक्षत्रों का प्रभाव रहेगा, जिससे इन दिनों में खरीदारी लाभकारी मानी गई है।
    27 और 29 जून को अंतिम शुभ संयोग बन रहा है, जो वाहन खरीद के लिए उत्तम अवसर माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों में खरीदी गई नई गाड़ी जीवन में सुख, समृद्धि और प्रगति का संकेत देती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि वाहन खरीदते समय केवल मुहूर्त ही नहीं, बल्कि अपनी आवश्यकता, बजट और उपयोगिता का भी ध्यान रखना जरूरी है।

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  • नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..

    नवरात्र के तीसरे दिन और गणगौर का महत्व..


    नई दिल्ली:शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि का तीसरा दिन इस बार और भी खास बन गया है क्योंकि इसी दिन तृतीया तिथि पर प्रसिद्ध पर्व गणगौर भी मनाया जा रहा है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    गणगौर का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से है। इस दिन शिवजी को ईसर और माता पार्वती को गौरा या गवरजा के रूप में पूजा जाता है। गण का अर्थ भगवान शिव और गौर का अर्थ माता पार्वती होता है। यह पर्व विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र सहित कई हिस्सों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है और विवाहित महिलाओं को सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है। महिलाएं पूरे मनोभाव से व्रत रखकर माता गौरा की पूजा करती हैं और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।

    पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्योदय सुबह 6 बजकर 24 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 33 मिनट पर होगा। शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 11 बजकर 56 मिनट तक प्रभावी रहेगी। नक्षत्र अश्विनी दिनभर रहेगा और यह 22 मार्च की देर रात तक प्रभावी रहेगा। वहीं, योग इन्द्र शाम 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा और करण तैतिल दोपहर 1 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

    शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 49 मिनट से 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा, जो ध्यान और साधना के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 4 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 32 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा, जिसे धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उत्तम समय माना जाता है। अमृत काल शाम 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

    हालांकि, कुछ समय ऐसे भी होते हैं जिनमें शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। इस दिन राहुकाल सुबह 9 बजकर 26 मिनट से 10 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, यमगंड दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 31 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 6 बजकर 24 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इन समयों में कोई भी नया कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय लेना शुभ नहीं माना जाता।

    नवरात्र का यह तीसरा दिन आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां मां गौरा और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है, वहीं दूसरी ओर पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त का पालन कर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता प्राप्त की जा सकती है। यह दिन भक्ति, आस्था और संस्कारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

  • 27 फरवरी को आमलकी/रंगभरी एकादशी: जानें व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त..

    27 फरवरी को आमलकी/रंगभरी एकादशी: जानें व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त..


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि इस साल 27 फरवरी को पड़ रही है। इसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन का धार्मिक महत्व विशेष है क्योंकि मान्यता है कि नारायण के साथ-साथ महादेव से भी इसका गहरा संबंध है।

    आमलकी एकादशी का व्रत भक्ति भाव से रखने पर सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। आंवले के वृक्ष में नारायण का निवास माना जाता है, इसलिए इस दिन आंवले की पूजा करना अत्यंत फलदायी है। भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं।

    रंगभरी एकादशी का संबंध शिव और पार्वती से भी है। धार्मिक मान्यता है कि विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी आए थे और माता पार्वती का गौना इसी दिन हुआ था। यही कारण है कि इस दिन से रंगों के पर्व होली का जश्न भी शुरू माना जाता है।

    दृक पंचांग के अनुसार, 27 फरवरी की एकादशी तिथि रात 10:32 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी शुरू होगी। नक्षत्र की स्थिति के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र सुबह 10:48 बजे तक रहेगा, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा। योग आयुष्मान शाम 7:44 बजे तक रहेगा। करण वणिज सुबह 11:31 बजे तक रहेगा और उसके बाद विष्टि करण रहेगा।

    शुभ योगों की बात करें तो सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:48 बजे से अगले दिन 6:47 बजे तक रहेगा, वहीं रवि योग सुबह 6:48 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। सूर्योदय शुक्रवार को 6:48 बजे और सूर्यास्त 6:20 बजे होगा।

    शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:09 बजे से 5:59 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 बजे से 3:15 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:17 बजे से 6:42 बजे तक रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल सुबह 11:08 बजे से 12:34 बजे तक, यमगण्ड दोपहर 3:27 बजे से 4:53 बजे तक, गुलिक काल सुबह 8:15 बजे से 9:41 बजे तक और दुर्मुहूर्त सुबह 9:07 बजे से 9:53 बजे तक रहेगा। भद्रा दोपहर 11:31 बजे से रात 10:32 बजे तक रहेगी।इस प्रकार 27 फरवरी की आमलकी या रंगभरी एकादशी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और इस दिन के शुभ मुहूर्त और व्रत पालन से जीवन में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • शुक्र के उदय के बाद फरवरी से शुरू होंगी मांगलिक शादियाँ..

    शुक्र के उदय के बाद फरवरी से शुरू होंगी मांगलिक शादियाँ..


    नई दिल्ली । जनवरी का महीना बीतते-बीतते विवाह की तैयारियों के लिए उत्साहित परिवारों के लिए निराशाजनक रहा क्योंकि शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार, शुक्र तारे के अस्त होने पर कोई भी मांगलिक कार्य शुरू नहीं किया जा सकता। ज्योतिष के जानकार बताते हैं कि 12 दिसंबर 2025 को अस्त हुआ शुक्र तारा अब उदय हो चुका है और इसके चार दिन बाद यानी उसके ‘युवाकाल’ में प्रवेश करते ही मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं।

    शुक्र ग्रह का उदय होने और युवाकाल में प्रवेश करने से विवाह मुहूर्त स्वाभाविक रूप से शुभ हो जाते हैं। इसी कारण जनवरी का महीना विवाह के लिए अनुपयुक्त रहा, लेकिन फरवरी के आगमन के साथ परिवारों ने अब अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। शादी-ब्याह के लिए 2026 में कुल 12 रिकॉर्ड मुहूर्त उपलब्ध होंगे, जो हर परिवार की योजना को आसान बना देंगे।

    ज्योतिष के अनुसार, ये मुहूर्त केवल विवाह के लिए ही नहीं बल्कि अन्य मांगलिक कार्य जैसे संतान पूजा, गृह प्रवेश और नामकरण संस्कार के लिए भी शुभ माने जाते हैं। परिवार अब बैंड-बाजा, बारात, मेहमानों की सूची और रस्मों की तैयारी में जुट सकते हैं। इस साल विवाह मुहूर्त आने से सभी आयोजन शुभ और मंगलमय होंगे।

    शादी की तैयारियों में जुटे परिवारों के लिए यह समय खास महत्व रखता है क्योंकि मांगलिक कार्यों का शुभ समय परिवारों को आर्थिक और सामाजिक लाभ भी दिला सकता है। इसलिए ज्योतिष सलाहकार यह कहते हैं कि फरवरी से शादियों का सिलसिला पूरी तरह से शुरू हो जाएगा और सभी रस्में बिना किसी बाधा के संपन्न होंगी।

    इस वर्ष कुल 12 विवाह मुहूर्त आए हैं, जिन्हें देखकर कई परिवारों ने अपनी शादी-ब्याह की तिथियों का चयन कर लिया है। मांगलिक कार्यों के शुभ मुहूर्त आने से परिवारों की खुशी दोगुनी हो गई है। अब बैंड-बाजा, बारात और रंग-बिरंगी रस्मों के लिए हर कोई उत्साहित है और यह फरवरी से पूरे जोश के साथ शुरू होगा।

  • 15 जनवरी 2026 पंचांग: माघ कृष्ण द्वादशी – जानें शुभ-अशुभ काल और दिन की शुरुआत कैसे करें लाभकारी

    15 जनवरी 2026 पंचांग: माघ कृष्ण द्वादशी – जानें शुभ-अशुभ काल और दिन की शुरुआत कैसे करें लाभकारी


    नई दिल्ली। गुरुवार, 15 जनवरी 2026 का दिन माघ माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि में पड़ रहा है। आज ज्येष्ठा नक्षत्र और वृद्धि योग का संयोग बन रहा है, जिससे धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ और नए कार्यों की शुरुआत के लिए समय विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचरण कर रहे हैं जो जीवन में स्थिरता निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक शांति लाने में सहायक है।

    दिन की शुरुआत अगर सही मुहूर्त में की जाए तो उसका प्रभाव पूरे दिन महसूस किया जा सकता है। सुबह का ब्रह्म मुहूर्त 05:11 AM से 05:59 AM तक रहेगा। यह समय ध्यान, प्राणायाम, योग और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। दिन का मध्यकाल अभिजीत मुहूर्त 11:51 AM से 12:34 PM तक रहेगा। व्यापारी, छात्र और गृहस्थ लोग इस समय किसी भी नए काम की शुरुआत करने से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, शाम का अमृत काल 07:58 PM से 09:45 PM तक रहेगा, जो दान, पूजा, शांति और स्वास्थ्य संबंधित कार्यों के लिए अत्यंत शुभ है।

    हालांकि, इस दिन कुछ अशुभ काल भी हैं, जिनसे बचना चाहिए। यम गंड 6:47 AM से 8:08 AM, कुलिक काल 9:30 AM से 10:51 AM, राहु काल 1:34 PM से 2:55 PM तक रहेगा। इसके अलावा दिन में दो दुर्मुहूर्त 10:24 AM – 11:07 AM और 02:44 PM – 03:27 PM तक रहेंगे, जबकि वर्ज्यम् काल 09:17 AM से 11:04 AM तक रहेगा। इन कालों में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा या निवेश से बचने की सलाह दी जाती है।सूर्य और चंद्रमा के समय की जानकारी भी दिन की योजना बनाने में मददगार साबित होती है। आज सूर्य का उदय 6:47 AM और अस्त 5:38 PM पर होगा। चंद्रमा का उदय 3:47 AM और चंद्रास्त 2:36 PM पर रहेगा। यह जानकारी धार्मिक अनुष्ठान, व्रत, यात्रा और दैनिक कार्यों के समय निर्धारण में सहायक है।

    ज्येष्ठा नक्षत्र और वृद्धि योग का संयोग धन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक विकास में विशेष लाभ देता है। इस समय किए गए धार्मिक अनुष्ठान और पूजा कार्य विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं। साथ ही घर में नए कार्यों की शुरुआत, दान या निवेश करने के लिए भी यह समय अनुकूल है।आज का दिन पंचांग के अनुसार धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य लाभकारी रहेंगे, वहीं अशुभ काल में किए गए कार्यों में बाधा या हानि संभव है। इसलिए, पंचांग के अनुसार दिन की योजना बनाना और सही समय का चुनाव करना अत्यंत जरूरी है।