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  • सिद्धारमैया आज आएंगे दिल्ली, कांग्रेस चाहती है राष्ट्रीय भूमिका, क्या राहुल गांधी मना पाएंगे?

    सिद्धारमैया आज आएंगे दिल्ली, कांग्रेस चाहती है राष्ट्रीय भूमिका, क्या राहुल गांधी मना पाएंगे?

    नई दिल्ली। कर्नाटक की राजनीति में बड़े बदलाव के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अब दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनकी यह यात्रा सिर्फ औपचारिक नहीं मानी जा रही, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। पार्टी चाहती है कि सिद्धारमैया राज्यसभा जाएं और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले संगठन में अहम भूमिका निभाएं।

    सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी खुद सिद्धारमैया से मुलाकात कर उन्हें दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होने के लिए मनाने वाले हैं। उनकी सोनिया गांधी से भी मुलाकात प्रस्तावित है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि सिद्धारमैया पार्टी के सबसे मजबूत OBC चेहरों में से एक हैं और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने से पार्टी को राजनीतिक फायदा मिल सकता है।

    खराब मौसम के कारण बदला यात्रा कार्यक्रम
    सिद्धारमैया गुरुवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए थे, लेकिन खराब मौसम की वजह से उनका विशेष विमान जयपुर में उतारना पड़ा। उनके साथ कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, मंत्री के.जे. जॉर्ज, बयरती सुरेश, कानूनी सलाहकार पोन्नान्ना, विधान परिषद सदस्य डॉ. यतींद्र और AICC सचिव अभिषेक दत्त भी मौजूद थे। फ्लाइट में देरी होने के कारण रात की प्रस्तावित बैठक टल गई। अब राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच शुक्रवार सुबह आमने-सामने चर्चा होगी।

    पहले भी दिया गया था राज्यसभा का प्रस्ताव
    बताया जा रहा है कि राहुल गांधी और सिद्धारमैया के बीच पहले हुई करीब 40 मिनट की बातचीत में उन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव दिया गया था। साथ ही 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में बड़ी भूमिका निभाने का संकेत भी दिया गया था। अब इस दिल्ली दौरे में कांग्रेस नेतृत्व एक बार फिर उन्हें मनाने की कोशिश करेगा। पार्टी चाहती है कि सिद्धारमैया OBC और पिछड़े वर्गों के बीच कांग्रेस की पकड़ मजबूत करने में राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाएं।

    कर्नाटक में बड़ा राजनीतिक बदलाव
    गुरुवार को कर्नाटक की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने साफ कहा कि यह फैसला कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर लिया गया है। सिद्धारमैया ने बताया कि उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल कार्यालय को सौंप दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व से वादा किया था कि जब भी उनसे पद छोड़ने को कहा जाएगा, वह ऐसा करेंगे। हालांकि राष्ट्रीय राजनीति में जाने की चर्चाओं पर उन्होंने फिलहाल साफ इनकार किया है। सिद्धारमैया का कहना है कि वह कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं।

    भावुक हुए सिद्धारमैया
    इस्तीफे के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्धारमैया भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के सात करोड़ लोगों की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व की बात रही। उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आभार भी जताया। उन्होंने कहा कि वह “संयोग से राजनीति में आए” क्योंकि उनके परिवार का पहले राजनीति से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने बुद्ध, बसवेश्वर और बाबा साहेब आंबेडकर के विचारों को अपनी प्रेरणा बताया।

    सरकार के कामकाज का किया बचाव
    सिद्धारमैया ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आर्थिक बोझ के आरोप गलत हैं। उनका दावा था कि कर्नाटक आज प्रति व्यक्ति आय के मामले में देश में शीर्ष पर है और GST संग्रह में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राज्य की विकास दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है। कर्ज को लेकर विपक्ष के आरोपों पर उन्होंने कहा कि सरकार ने कानून के दायरे में रहकर ही उधारी ली। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं पर अब तक 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।

    सरकार की स्थिरता पर दिया भरोसा
    सिद्धारमैया ने कहा कि मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद सरकार पर कोई खतरा नहीं है। कांग्रेस के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत है और सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

  • कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट? डीके शिवकुमार की बढ़ती दावेदारी के बीच तेज हुआ मंथन

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार अटकलें तेज होती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के भीतर संभावित बदलाव और सत्ता की कमान को लेकर चल रहे मंथन ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। हाल के घटनाक्रमों और दिल्ली में शीर्ष स्तर पर जारी बैठकों के बाद यह चर्चा और अधिक तेज हो गई है कि राज्य में नेतृत्व से जुड़ा कोई बड़ा फैसला आने वाले समय में सामने आ सकता है।

    सूत्रों के हवाले से सामने आ रही चर्चाओं के अनुसार, पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर नए समीकरणों पर विचार किया जा रहा है। ऐसी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ नेता मौजूदा नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव के पक्ष में अपनी राय रख रहे हैं। इसी बीच उपमुख्यमंत्री पद संभाल रहे D. K. Shivakumar का नाम संभावित नेतृत्व विकल्प के रूप में तेजी से चर्चा में आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बना सकती है।

    बताया जा रहा है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस विषय पर लगातार विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक के बाद एक बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दी है। इन बैठकों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि अब तक पार्टी की ओर से किसी आधिकारिक निर्णय या बयान की घोषणा नहीं की गई है।

    राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस महासचिव Priyanka Gandhi इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और नेतृत्व से जुड़े मंथन में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वहीं पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठकों और विचार-विमर्श को भी बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और राजनीतिक चर्चाएं अभी सूत्रों पर आधारित हैं।

    दिल्ली में हुई बैठकों ने पूरे मामले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge, Rahul Gandhi और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को कर्नाटक के राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार अलग-अलग चरणों में कई बैठकें हुईं, जिनमें राज्य नेतृत्व और संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन और नेतृत्व बदलाव का विषय पहले भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनता रहा है। राज्य की राजनीति में क्षेत्रीय समीकरण, संगठनात्मक संतुलन और नेतृत्व की भूमिका हमेशा अहम रही है। ऐसे में यदि भविष्य में किसी तरह का निर्णय सामने आता है तो उसका असर केवल राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसके राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे।

    फिलहाल पार्टी की ओर से किसी अंतिम निर्णय का संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और बढ़ती राजनीतिक चर्चाओं ने कर्नाटक की राजनीति को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर होने वाली गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।

  • चुनावी शोर थमा, पर कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम जारी, सीएम पद को लेकर फिर गरमाई सियासत

    चुनावी शोर थमा, पर कर्नाटक कांग्रेस में सत्ता संग्राम जारी, सीएम पद को लेकर फिर गरमाई सियासत


    नई दिल्ली ।  कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सत्ता को लेकर अंदरूनी संघर्ष सामने आने लगा है। हाल ही में पांच राज्यों के चुनावी माहौल के शांत होने के बाद राज्य में सत्तारूढ़ Indian National Congress के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान फिर से चर्चा में आ गई है। मौजूदा मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar के बीच कथित सत्ता-साझेदारी के फॉर्मूले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

    सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, 2023 में सरकार गठन के समय दोनों नेताओं के बीच एक अनौपचारिक समझौते की बात सामने आई थी, जिसमें कथित तौर पर ढाई-ढाई साल के नेतृत्व की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था। जैसे-जैसे सरकार अपने कार्यकाल के मध्य चरण के करीब पहुंच रही है, वैसे-वैसे यह मुद्दा फिर से सियासी बहस का केंद्र बन गया है।

    उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हालिया बयानों को लेकर उनके समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कहा है कि वे पार्टी नेतृत्व के निर्णय का पालन करेंगे, लेकिन उनके बयान के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। शिवकुमार खेमे का मानना है कि समय आ गया है जब कथित समझौते पर आगे की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

    दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के समर्थक इस तरह के किसी भी बदलाव की संभावना को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनके अनुसार राज्य में नेतृत्व स्थिर है और सरकार अपना पूरा कार्यकाल सिद्धारमैया के नेतृत्व में ही पूरा करेगी। साथ ही, पार्टी के भीतर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों का समर्थन भी इस बहस को और जटिल बना रहा है।

    कर्नाटक की राजनीति में जातीय समीकरण भी इस विवाद को और गहरा बना रहे हैं। सिद्धारमैया का समर्थन मुख्य रूप से पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच मजबूत माना जाता है, जबकि डीके शिवकुमार को वोक्कालिगा समुदाय का प्रमुख चेहरा माना जाता है। इन सामाजिक आधारों के कारण यह मुद्दा केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सामाजिक संतुलन का भी हिस्सा बन गया है।

    इसी बीच, पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित शीर्ष नेतृत्व से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस विवाद का समाधान निकालेंगे। दिल्ली में जल्द ही एक महत्वपूर्ण बैठक की संभावना जताई जा रही है, जिसमें दोनों नेताओं के बीच समन्वय और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

    वहीं विपक्षी दल इस स्थिति को लेकर कांग्रेस पर लगातार हमला कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पार्टी जनता के मुद्दों की बजाय सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व इस विवाद को आंतरिक मामला बताते हुए सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की कोशिश कर रहा है।

  • कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव

    कर्नाटक में CM पद पर सस्पेंस बरकरार: सिद्धारमैया बनाम डीके शिवकुमार की खींचतान तेज, कांग्रेस हाईकमान पर बढ़ा दबाव



    नई दिल्ली। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर अंदरूनी टकराव एक बार फिर खुलकर सामने आता दिख रहा है। एक तरफ मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया अपनी सरकार को मजबूत करने और कैबिनेट विस्तार पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी नेतृत्व परिवर्तन की अपनी दावेदारी को लेकर सक्रिय हैं। इस पूरे मामले ने कांग्रेस हाईकमान के सामने एक नई राजनीतिक दुविधा खड़ी कर दी है।

    पार्टी के अंदर चल रही चर्चाओं के मुताबिक, सिद्धारमैया खेमे का फोकस कैबिनेट फेरबदल और खाली मंत्रिपदों को भरने पर है, जिससे सरकार और संगठन दोनों पर उनकी पकड़ मजबूत हो सके। उनका मानना है कि प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखना अभी प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी तरह के नेतृत्व बदलाव को फिलहाल टाल देना चाहिए।

    दूसरी ओर, डीके शिवकुमार खेमे का दावा है कि संगठन को मजबूत करने और विधानसभा चुनाव में जीत दिलाने में उनकी भूमिका अहम रही है, इसलिए उन्हें भी मुख्यमंत्री पद पर अवसर मिलना चाहिए। उनके समर्थक लगातार “अगले मुख्यमंत्री” जैसे पोस्टर और सार्वजनिक कार्यक्रमों के जरिए दबाव बना रहे हैं।

    कांग्रेस आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किसी एक पक्ष के समर्थन से दूसरे खेमे में असंतोष पैदा हो सकता है, जिससे राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। यही वजह है कि पार्टी फिलहाल “इंतजार करो और देखो” की रणनीति पर काम कर रही है।

    हालांकि, हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि इस मुद्दे पर लंबे समय तक टालमटोल करना मुश्किल हो सकता है। आने वाले दिनों में कांग्रेस हाईकमान को यह तय करना होगा कि सिद्धारमैया के नेतृत्व को जारी रखा जाए या फिर डीके शिवकुमार को कमान सौंपकर सत्ता संतुलन बदला जाए।

  • सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन

    सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन


    नई दिल्ली। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी घमासान खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया कि कांग्रेस के करीब 80 से 90 विधायक उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। हुसैन ने कहा कि कई विधायक मानते हैं कि शिवकुमार के संघर्ष और मेहनत को सम्मानित करना चाहिए और आने वाले चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी यह सही कदम होगा।

    रामनगर में पत्रकारों से बातचीत में हुसैन ने बताया कि सभी 140 विधायक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं और करीब 80-90 विधायक नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ कौन खड़ा है और शिवकुमार के साथ कौन।

    विदेश यात्रा ने बढ़ाई हलचल
    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले कुछ विधायकों की विदेश यात्रा को गंभीरता से लिया है। पार्टी के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन विधायकों के नाम मांगे हैं जो इस यात्रा में शामिल थे। यह यात्रा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को शांत करने के लिए आयोजित की गई मानी जा रही है।

    राज्य पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश ने कहा कि कुछ नेताओं ने उन्हें इस यात्रा में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा उनके मंत्रालय द्वारा आयोजित नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी कहा कि विधायक और एमएलसी अपने खर्च पर विदेश जा रहे हैं।

    दिल्ली में डीके शिवकुमार की बैठक
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर बैठक की, जो नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को और मजबूत करती है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा या राहुल गांधी से मुलाकात की, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और सभी चर्चा पूरी हो गई।

    शिवकुमार ने यह भी कहा कि वे सड़क पर खड़े होकर राजनीति नहीं कर रहे हैं और सब कुछ पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में हो रहा है।

    आगे क्या होगा
    कर्नाटक कांग्रेस में यह घमासान अभी जारी है। 80-90 विधायक डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और पार्टी हाईकमान की बैठकें और विदेश यात्रा इस सियासी समीकरण को और जटिल बना रही हैं। अब नजर यह है कि नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अगला कदम कब और कैसे उठाया जाएगा और क्या डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह संकट राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • 80 नहीं, पूरे 136 विधायक मेरे साथ: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं पर डीके शिवकुमार का करारा जवाब

    80 नहीं, पूरे 136 विधायक मेरे साथ: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं पर डीके शिवकुमार का करारा जवाब


    बेंगलुरु/नई दिल्ली। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर मची हलचल के बीच उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने एक बड़ा बयान देकर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को नया मोड़ दे दिया है। दिल्ली में पार्टी आलाकमान के साथ बैठकों के दौर के बीच शिवकुमार ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि उनके खेमे में विधायकों की संख्या कम है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि विधानसभा में कांग्रेस के सभी 136 विधायक उनके साथ हैं।

    पिछले कुछ समय से राज्य में ‘पावर-शेयरिंग’ फॉर्मूलेढाई-ढाई साल के कार्यकाल को लेकर कयासों का बाजार गर्म है, खासकर तब जब नवंबर 2025 में सरकार का आधा कार्यकाल पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के उस बयान के बाद कि ‘उनके पिता पूरे 5 साल मुख्यमंत्री रहेंगे’, राजनीति और गरमा गई थी। इसी पृष्ठभूमि में शिवकुमार का यह कहना कि136 विधायक मेरे साथ हैं, न केवल उनकी संगठन पर पकड़ को दर्शाता है, बल्कि आलाकमान को भी अपनी ताकत का सीधा संकेत है।

    शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके बीच कोई गोपनीय समझौता नहीं है जो सार्वजनिक न हो। उन्होंने पार्टी नेताओं को चेतावनी भी दी कि नेतृत्व को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी से पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचता है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर जोड़ा कि वह दिल्ली में आगामी चुनावोंजैसे असम विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी मामलों पर चर्चा करने आए हैं, न कि मुख्यमंत्री की कुर्सी की मांग करने।

    राज्य में विपक्ष भाजपा लगातार कांग्रेस के भीतर चल रहे इस शीतयुद्ध को ‘अस्थिरता’ का नाम दे रहा है। ऐसे में शिवकुमार का ‘136 विधायकों’ वाला बयान पार्टी के भीतर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें मार्च 2026 में पेश होने वाले राज्य बजट पर टिकी हैं, जहाँ सिद्धारमैया अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश करेंगे।

  • कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल ने बिना स्पीच पढ़े किया बहिर्गमन, सरकार-राज्यपाल के बीच टकराव तेज

    कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल ने बिना स्पीच पढ़े किया बहिर्गमन, सरकार-राज्यपाल के बीच टकराव तेज



    नई दिल्ली। 22 जनवरी 2026 कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्पीच पढ़ना शुरू किया, लेकिन 2-4 लाइन के बाद कागज रख दिया और सदन से बाहर निकल गए। इस घटना से राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच अनबन का विवाद कर्नाटक तक पहुंच गया है।

    संसद में स्पीकर यूटी खादर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्री एचके पाटिल, प्रियांक खरगे, सलीम अहमद और बसवराज होरट्टी सहित कई नेता राज्यपाल का इंतजार कर रहे थे।

    लेकिन गहलोत ने भाषण पूरा नहीं पढ़ा और सदन छोड़ दिया। बीके हरिप्रसाद ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे वापस नहीं आए।

    क्या है वजह?
    राज्यपाल और सरकार के बीच संवैधानिक परंपरा और भाषण के कंटेंट को लेकर विवाद चल रहा है। गहलोत का कहना है कि सरकार के तैयार किए गए भाषण के 11 पैराग्राफ में बदलाव जरूरी हैं। इनमें केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना वाले हिस्से शामिल हैं। गहलोत ने इन हिस्सों को पूरी तरह हटाने की मांग की, जबकि सरकार केवल भाषा में सीमित बदलाव करने को तैयार थी।

    सरकार ने भी की थी कोशिश
    कर्नाटक के लॉ और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176(1) के तहत राज्यपाल का संयुक्त सत्र को संबोधित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर भाषण में आपत्तिजनक भाषा है तो सरकार संशोधन कर सकती है, लेकिन पूरा पैराग्राफ हटाना स्वीकार्य नहीं।

    ये मामला और बड़ा हो सकता है
    कर्नाटक की घटना के पहले तमिलनाडु में भी 20 जनवरी को राज्यपाल आरएन रवि विधानसभा सत्र बीच में छोड़कर बाहर चले गए थे। दोनों राज्यों में राज्यपाल-सरकार की टकराहट राजनीतिक और संवैधानिक बहस को तेज कर रही है।

  • कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक CM पद पर खींचतान बरकरार, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्ली / कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर जारी सियासी खींचतान अभी थमने के आसार नहीं दिखा रही है। बेलगावी से लेकर बेंगलुरु तक लगातार बयानबाजी के बीच अब यह मामला सीधे दिल्ली दरबार तक पहुंचता नजर आ रहा है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्य मंत्रीडीके शिवकुमार 14 दिसंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस हाई कमान से मुलाकात कर सकते हैं। कुछ दिन पहले हाई कमान के निर्देश पर दोनों नेताओं का मुख्यमंत्री आवास पर नाश्ता हुआ था। उस बैठक के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई कि सब कुछ सामान्य हो गया है। लेकिन इसके बाद दोनों खेमों से जिस तरह के बयान सामने आए हैं, उससे साफ है कि अंदरखाने असहमति अब भी बनी हुई है।

    दिल्ली में अहम बैठक की संभावना
    हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि यह बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे में से किसी एक के साथ हो सकती है। हालांकि समय कम बताया जा रहा है, लेकिन अगर यह मुलाकात होती है तो इसे कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा
    सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। अगर वे हमारे शीर्ष नेतृत्व से मिलना चाहते हैं, तो इसमें कोई बाधा नहीं है।सूत्रों के अनुसार, यह संभावित बैठक नई दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस रैली के बाद हो सकती है, जिसे ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत आयोजित किया जा रहा है।
    कहां से शुरू हुआ विवाद?
    2023 में कर्नाटक में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही। सत्ता गठन के समय सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। तभी से यह चर्चा चलती रही कि ढाई साल बाद मुख्यमंत्री पद में बदलाव हो सकता है।20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह मुद्दा फिर से तेज हो गया। शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि चुनाव जीतने के बाद सत्ता साझा करने को लेकर कोई अघोषित समझौता हुआ था, जिसके तहत आधे कार्यकाल के बाद मुख्यमंत्री बदले जाने की बात थी। हालांकि पार्टी और सरकार की ओर से कभी भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।

    बयानबाजी ने बढ़ाया तनाव

    हाल के दिनों में दोनों नेताओं के समर्थकों की बयानबाजी ने आग में घी डालने का काम किया है। एक ओर सिद्धारमैया खेमे की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि सरकार स्थिर है और नेतृत्व में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है, वहीं शिवकुमार समर्थक लगातार समझौते” की याद दिला रहे हैं।यह खींचतान न सिर्फ सरकार की छवि पर असर डाल रही है, बल्कि पार्टी के भीतर असंतोष को भी उजागर कर रही है। यही वजह है कि हाई कमान को अब सीधे दखल देना पड़ सकता है।

    हाई कमान के लिए बड़ी चुनौती
    कांग्रेस नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कर्नाटक में सरकार की स्थिरता बनी रहे और अंदरूनी कलह बाहर न आए। ऐसे में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की दिल्ली मुलाकात को फायरफाइटिंग मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है।अगर यह बैठक होती है, तो इससे यह साफ हो सकता है कि पार्टी नेतृत्व कर्नाटक में नेतृत्व को लेकर क्या रुख अपनाने जा रहा है। फिलहाल इतना तय है कि कर्नाटक की सियासत में आने वाले दिन काफी अहम होने वाले हैं।

  • कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्‍ली । कर्नाटक(Karnataka) में मुख्यमंत्री पद को लेकर मची खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। हाई कमान के निर्देश पर मुख्यमंत्री के घर हुए दोनों नेताओं के नाश्ते के बाद ऐसा दावा किया जा रहा था कि अब सब ठीक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों की तरफ से की जा रही बयान बाजी के बाद यह साफ है कि कुछ ठीक नहीं है। हिन्दुस्तान (Hindustan)टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसी खींचतान को लेकर अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(Siddaramaiah) और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार(DK Shivakumar) 14 दिसंबर को नई दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।

    कांग्रेस के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में इन दोनों नेताओं की बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में से किसी एक से हो सकती है। पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक इस बैठक के लिए समय बहुत कम है लेकिन अगर यह मुलाकात होती है, तो यह कर्नाटक के आगामी हालात के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

    कर्नाटक में कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एचटी से कहा, “सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे किसी भी शीर्ष नेता से मिलना चाहते हैं, तो वह हमेशा ऐसा कर सकते हैं।” सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के नेताओं की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात नई दिल्ली के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत रामलीला मैदान में होने वाली रैली के बाद होगी।

    गौरतलब है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से दोनों नेताओं की मुलाकात की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों खेमों के बीच में पिछले कई दिनों से खींचतान मची हुई है। 2023 से सत्ता में आने के बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने पर इन हमलों की तीव्रता बढ़ गई। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि जीत के बाद सरकार के आधे पड़ाव पर सत्ता हस्तांतरण की बात हुई थी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका।

  • कर्नाटक में सीएम पद को लेकर सियासी हलचल: सिद्धारमैया के बेटे के बयान ने बढ़ाई विवाद की गर्मी, डीके समर्थक भड़के

    कर्नाटक में सीएम पद को लेकर सियासी हलचल: सिद्धारमैया के बेटे के बयान ने बढ़ाई विवाद की गर्मी, डीके समर्थक भड़के


    कर्नाटक । में सीएम पद को लेकर सियासी तापमान एक बार फिर बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया के हालिया बयान ने कांग्रेस के भीतर बढ़ते मतभेदों को फिर से उकसाया है। यतींद्र ने कहा था कि मुख्यमंत्री पद में कोई बदलाव नहीं होगा और जो लोग नेतृत्व परिवर्तन का सपना देख रहे हैं, वे सिर्फ सपना ही देख सकते हैं। उनका यह बयान उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थकों को खटक गया और इसके बाद एक नई सियासी हलचल शुरू हो गई है।

    डीके शिवकुमार ने यतींद्र के बयान पर संयमित प्रतिक्रिया दी, लेकिन उनके समर्थक भड़क उठे। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने कहा कि अगर कोई नेतृत्व पर सवाल उठाता है, तो नोटिस जारी किए जाते हैं। उन्होंने इस बयान को अनुशासनहीनता बताया और कहा कि हर किसी को अपनी सीमा समझनी चाहिए। वहीं, सिद्धारमैया के करीबी मंत्री बायरथी सुरेश ने यतींद्र का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हाईकमान के निर्देशों के अनुसार ही कार्य करेंगे, और नेतृत्व परिवर्तन के सवाल पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    कर्नाटक की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद नया नहीं है। शिवकुमार समर्थक अक्सर यह आरोप लगाते आए हैं कि सरकार गठन के समय 2.5 साल के पावर-शेयरिंग फॉर्मूले पर सहमति बनी थी, जिसके तहत सिद्धारमैया को कार्यकाल के आधे समय बाद पद छोड़ देना था। हालांकि, इस पर कोई खुला बयान नहीं आया है, लेकिन विवाद लगातार बने रहते हैं। अब यतींद्र के बयान ने एक बार फिर इस विवाद को तूल दे दिया है, जिससे हाईकमान को फिर से हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।