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  • भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार महाराष्ट्र पहुंचे नितिन नबीन, सिद्धिविनायक और लालबागचा राजा के किए दर्शन

    नई दिल्ली ।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन बुधवार को गणेशोत्सव के बीच अपने पहले महाराष्ट्र दौरे पर मुंबई पहुंचे। भाजपा अध्यक्ष का पद संभालने के बाद यह उनका महाराष्ट्र का पहला दौरा है। मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इसके बाद नितिन नबीन लालबागचा राजा के दरबार में पहुंचे और गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया।

    नितिन नबीन के मुंबई दौरे के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम भी उनके साथ मौजूद रहे। गणेशोत्सव के माहौल में हुए इस दौरे के दौरान उन्होंने महाराष्ट्र और देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। दर्शन के बाद नितिन नबीन ने कहा कि गणेश उत्सव के अवसर पर महाराष्ट्र आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन को विशेष अनुभव बताया।

    नितिन नबीन ने कहा कि महाराष्ट्र में गणेश उत्सव के दौरान आकर वह खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। उन्होंने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन के बाद लालबागचा राजा के दर्शन उनके लिए बेहद खास क्षण है। उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों और देशवासियों के कल्याण की कामना करते हुए प्रार्थना की।

    महाराष्ट्र में इस वर्ष गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है। मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान सिद्धिविनायक मंदिर, लालबागचा राजा समेत कई प्रमुख गणपति स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। लालबागचा राजा का गणेशोत्सव भी 14 सितंबर से शुरू हुआ है और 25 सितंबर तक चलेगा। ऐसे समय में नितिन नबीन का मुंबई दौरा गणेशोत्सव से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों के बीच हुआ।

    मुंबई में दर्शन के बाद नितिन नबीन के एक दिवसीय महाराष्ट्र दौरे में पुणे जाने का कार्यक्रम भी शामिल रहा। उनके कार्यक्रम में मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति मंदिरों तथा गणेश मंडलों में दर्शन और पूजा-अर्चना रखी गई। मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के बाद उनका कार्यक्रम मालाबार हिल, बांद्रा रिक्लेमेशन और अन्य गणपति स्थलों पर दर्शन से जुड़ा था।

    मालाबार हिल में मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के अलावा एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार के आवास पर स्थापित गणपति के दर्शन का कार्यक्रम भी रखा गया था। इसके बाद बांद्रा रिक्लेमेशन में गणपति दर्शन का कार्यक्रम निर्धारित था। दौरे के अगले चरण में नितिन नबीन के पुणे पहुंचने का कार्यक्रम था, जहां कसबा गणपति और दगडूशेठ हलवाई गणपति समेत अन्य गणपति मंडलों में दर्शन किए जाने थे।

    पुणे के कार्यक्रम में साने गुरुजी तरुण मित्र मंडल और कोथरूड स्थित श्री साई मित्र मंडल के गणपति दर्शन भी शामिल रहे। इस दौरान गणेशोत्सव के धार्मिक माहौल में पूजा-अर्चना और भगवान गणेश के दर्शन उनके दौरे का प्रमुख हिस्सा रहे।

    नितिन नबीन के महाराष्ट्र दौरे की शुरुआत मुंबई में गणेश दर्शन से हुई। सिद्धिविनायक मंदिर और लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अमित साटम की मौजूदगी रही। भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद नबीन का यह पहला महाराष्ट्र दौरा गणेशोत्सव के दौरान हुआ, जिसमें उन्होंने मुंबई और पुणे के प्रमुख गणपति स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और महाराष्ट्र तथा देश के कल्याण की कामना की।

  • सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    सिद्धिविनायक मंदिर के चढ़ावे को लेकर राज ठाकरे के आरोप से महाराष्ट्र की राजनीति गरमाई, जांच की मांग तेज

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मंदिरों के चढ़ावे और ट्रस्टों की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर के दान को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मंदिर में आने वाले दान में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित चोरी होती है। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है और विभिन्न दलों की ओर से इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।

    राज ठाकरे ने अपनी पार्टी की छात्र इकाई के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान की पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है। उनका आरोप है कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले धन का सही उपयोग और उसका पारदर्शी लेखा-जोखा सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है।

    एमएनएस प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कुछ ट्रस्टियों ने राज्य के उपमुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनके अनुसार, पत्र में यह आशंका जताई गई है कि मंदिर के दान से जुड़े वित्तीय मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और कुछ कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    अपने संबोधन के दौरान राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर के दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों पर व्यापक स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से भी इस प्रकार के आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में वित्तीय पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    राज ठाकरे के आरोपों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रसिद्ध गणेश मंदिर के बारे में इस तरह के आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण सामने आने चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों की प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी और संयम के साथ बयान दिए जाने चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों।

    सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है, जिसके प्रबंधन की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पास होती है। ऐसे में मंदिर के वित्तीय संचालन को लेकर लगाए गए आरोप स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

    फिलहाल इन आरोपों को लेकर संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो उससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ धार्मिक संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर चल रही बहस का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।