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  • गमछा बांधा चप्पल पहनी और पंक्चर बनाने लगा TI: 1322 किमी दूर पहुंची पुलिस ने ऐसे पकड़ा पत्नी का हत्यारा

    गमछा बांधा चप्पल पहनी और पंक्चर बनाने लगा TI: 1322 किमी दूर पहुंची पुलिस ने ऐसे पकड़ा पत्नी का हत्यारा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के सीधी में महिला प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या कर करीब एक साल से फरार चल रहे उसके पति वीरेंद्र साकेत को पकड़ने के लिए पुलिस ने ऐसी रणनीति बनाई जिसकी भनक आरोपी को भी नहीं लगी। आरोपी पुलिस की नजरों से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और फरारी के दौरान मोबाइल फोन तक इस्तेमाल नहीं कर रहा था। परिवार और बच्चों से भी उसने संपर्क पूरी तरह बंद कर दिया था। कई राज्यों में तलाश और लगातार दबिश के बावजूद जब उसका सुराग नहीं मिला तो पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ऐसा जाल बिछाया जिसमें खुद कोतवाली थाना प्रभारी मजदूर बनकर पंक्चर की दुकान पर बैठ गए।

    29 अगस्त को सीधी के एक व्यक्ति से पुलिस को अहम जानकारी मिली कि वीरेंद्र कुछ साल पहले महाराष्ट्र के राजगढ़ इलाके में काम कर चुका है। पुलिस ने इस सुराग को गंभीरता से लिया और टीम को तत्काल महाराष्ट्र रवाना कर दिया। सीधी से पुलिस टीम ने करीब 1322 किलोमीटर का सफर तय किया। राजगढ़ पहुंचने के बाद पता चला कि वीरेंद्र खिरखिनदीवाड़ी इलाके की एक कंपनी में ड्राइवर के रूप में काम कर रहा है और कंपनी के पास ही एक झोपड़ी किराए पर लेकर रह रहा है। पुलिस को डर था कि अगर आरोपी को पुलिस की भनक लग गई तो वह दोबारा फरार हो सकता है। इसलिए सीधे उसके ठिकाने पर दबिश देने के बजाय उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों को समझने की रणनीति बनाई गई।

    पुलिस को पता चला कि वीरेंद्र कंपनी की गाड़ी लेकर अक्सर पास की एक पंक्चर की दुकान पर आता है। इसके बाद कोतवाली थाना प्रभारी दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने अपना हुलिया पूरी तरह बदल लिया। सिर पर गमछा बांधा गया। पैरों में चप्पल पहनी गई और पुराने कपड़े पहनकर वह मजदूर की तरह पंक्चर की दुकान पर पहुंच गए। दुकान संचालक को भी उनकी असली पहचान नहीं बताई गई। थाना प्रभारी ने वहां आम मजदूर की तरह काम करना शुरू कर दिया। कभी गाड़ियों में हवा भरी तो कभी पंक्चर बनाया। इस दौरान पुलिस की बाकी टीम आसपास सादी वर्दी में तैनात रही और आरोपी की हर गतिविधि पर नजर रखती रही।

    पुलिस को वीरेंद्र का इंतजार करीब 16 घंटे तक करना पड़ा। आखिरकार 2 सितंबर को वह कंपनी की गाड़ी लेकर उसी पंक्चर की दुकान पर पहुंचा। जैसे ही वीरेंद्र गाड़ी से उतरकर दुकान की ओर बढ़ा पहले से तैयार पुलिस टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और मौके पर ही दबोच लिया। आरोपी को तत्काल वाहन में बैठाया गया और पुलिस टीम उसे लेकर सीधी रवाना हो गई। इस पूरी कार्रवाई में सबसे अहम बात यह रही कि जिस थाना प्रभारी को आरोपी पहचानता था वही उसके सामने मजदूर बनकर कई घंटे तक पंक्चर की दुकान पर काम करता रहा और उसे इसकी भनक तक नहीं लगी।

    वीरेंद्र पर अपनी पत्नी और सीधी पुलिस लाइन में पदस्थ प्रधान आरक्षक सविता साकेत की हत्या का आरोप है। दोनों की शादी करीब 22 साल पहले हुई थी और उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। 15 सितंबर 2025 की रात शराब के नशे में दोनों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद मारपीट शुरू हो गई। बच्चों ने डरकर खुद को कमरे में बंद कर लिया। इसी दौरान वीरेंद्र ने घर में रखे बेसबॉल के डंडे से सविता के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी आधी रात को घर से फरार हो गया।

    पुलिस ने मामले में हत्या का केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की थी। उसके ऊपर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। इस दौरान कई राज्यों में दबिश दी गई लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं आया। करीब एक साल में कोतवाली थाने के चार थाना प्रभारी बदल गए। 11 अगस्त 2026 को दिव्यप्रकाश त्रिपाठी ने थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभाली और एसपी संतोष कोरी ने उन्हें सविता हत्याकांड की फाइल सौंपकर आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। आखिरकार पुलिस की बदली हुई रणनीति काम आई और मजदूर के भेष में पंक्चर की दुकान पर बैठकर बिछाए गए जाल में एक साल से फरार आरोपी फंस गया। पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम की कार्रवाई की सराहना करते हुए पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत करने की बात कही है।

  • सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण

    सोशल मीडिया की ताकत रंग लाई: यूट्यूबर लीला साहू की वर्षों पुरानी मांग पूरी, गांव में शुरू हुआ सड़क निर्माण


    सीधी । सोशल मीडिया के दौर में अगर आवाज बुलंद हो और इरादे मजबूत हों तो बदलाव मुमकिन हैयह साबित कर दिखाया है सीधी जिले की यूट्यूबर और सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर लीला साहू ने। वर्षों से खराब सड़क को लेकर संघर्ष कर रहीं लीला की मांग अब पूरी हो गई है। सड़क निर्माण का काम शुरू होते ही गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है।

    जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर ग्राम खड्डी से बैगहा टोला तक करीब 10 किलोमीटर का यह सड़क मार्ग वर्षों से बदहाल स्थिति में था। खासकर बरसात के मौसम में हालात इतने खराब हो जाते थे कि गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। गर्भवती महिलाओं बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल ले जाना मानो टेढ़ी खीर बन गया था। इसी दुर्दशा को लेकर लीला साहू ने सोशल मीडिया को हथियार बनाया और सड़क की सच्चाई देश-दुनिया के सामने रखी।

    लीला साहू ने सड़क की बदहाली को लेकर कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जो देखते ही देखते वायरल हो गए। उन्होंने प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री तक गुहार लगाई वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसदों पर भी नाराजगी जाहिर की थी। उनके वीडियो ने न सिर्फ प्रशासन का ध्यान खींचा बल्कि यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

    अब जब सड़क निर्माण कार्य शुरू हो गया है तो लीला साहू ने गांव वालों के साथ खुशी जाहिर करते हुए एक बार फिर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने प्रदेश के मुखिया स्थानीय सांसद और मीडिया का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि यह जीत अकेले उनकी नहीं बल्कि पूरे गांव की है जिसने वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया।

    ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क बनने से अब उन्हें शिक्षा स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे। बच्चों को स्कूल पहुंचने में आसानी होगी और आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना सरल होगा। गांव में विकास की नई उम्मीद जगी है।

    लीला साहू की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि जब आम नागरिक अपनी बात मजबूती से और सही मंच पर रखता है तो सिस्टम को भी सुनना पड़ता है। सोशल मीडिया की ताकत और जनआवाज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव संभव है।