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  • MP: सीधी में 4 पुलिसकर्मियों की शर्मनाक करतूत… नशे में मरीज के बेड में सोए, डस्टबिन में किया पेशाब

    MP: सीधी में 4 पुलिसकर्मियों की शर्मनाक करतूत… नशे में मरीज के बेड में सोए, डस्टबिन में किया पेशाब


    सीधी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सीधी जिले (Sidhi district) से पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जिला अस्पताल के अंदर ड्यूटी पर तैनात चार पुलिसकर्मियों (Four Policemen) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वे मरीज के बेड पर सोते और अस्पताल परिसर में अनुशासनहीन हरकत करते नजर आए। वीडियो में एक पुलिसकर्मी को डस्टबिन में पेशाब करते हुए भी देखा गया। घटना के बाद से पुलिस महकमे में हड़कंप है। मामले में चारों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

    जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो 13 अप्रैल को सामने आया। आरोप है कि सभी पुलिसकर्मी नशे की हालत में थे और पुलिस की गरिमा के खिलाफ व्यवहार कर रहे थे। उनकी वर्दी भी पास में टंगी हुई दिखाई दी।

    कैदी की सुरक्षा में तैनात थे पुलिसकर्मी
    बताया जा रहा है कि ये पुलिसकर्मी 28 मार्च से जिला अस्पताल में भर्ती एक अंडरट्रायल कैदी की सुरक्षा में तैनात थे। इस टीम का नेतृत्व सहायक उप-निरीक्षक नर्मदा प्रसाद प्रजापति कर रहे थे। टीम में कांस्टेबल उदयराज सिंह, जितेंद्र सिंह और मनीष तिवारी शामिल थे।


    नशे में धुत होकर उत्पात मचाया

    मामले की आंतरिक जांच में पुष्टि हुई कि पुलिसकर्मियों ने शराब के नशे में यह अनुशासनहीनता की। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित थाना प्रभारी द्वारा उचित निगरानी नहीं की गई, जिससे यह घटना हुई।

    सीधी पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए चारों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर कर्तव्य में लापरवाही, अनुशासनहीनता और पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने के आरोप लगाए गए हैं। निलंबन अवधि के दौरान सभी को सीधी के रिजर्व सेंटर से अटैच कर दिया गया है और उन्हें विभागीय नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई भी जारी है।

  • जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला

    जब हर तरफ आग ही आग थी सीधी में कार्यकर्ता की हिम्मत से सुरक्षित निकले मासूम बड़ा खतरा टला


    सीधी । मध्य प्रदेश के सीधी जिले में मंगलवार का दिन उस समय दहशत में बदल गया जब रामपुर नैकिन क्षेत्र के शिकारगंज स्थित एक आंगनवाड़ी केंद्र के पास अचानक भीषण आग भड़क उठी और देखते ही देखते हालात बेकाबू हो गए। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर लपटों से घिर गया और हर तरफ धुआं और अफरा तफरी का माहौल बन गया लेकिन इसी बीच एक महिला की सूझबूझ और साहस ने सात मासूम बच्चों की जिंदगी बचा ली।

    घटना सुबह करीब 11 बजे की है जब आंगनवाड़ी केंद्र में सात छोटे बच्चे मौजूद थे और उनकी देखरेख कर रही थीं कार्यकर्ता उर्मिला द्विवेदी। अचानक पास के क्षेत्र से आग उठती नजर आई जो तेजी से फैलते हुए केंद्र के आसपास पहुंचने लगी। हालात की गंभीरता को समझते हुए उर्मिला द्विवेदी ने बिना किसी घबराहट के तुरंत निर्णय लिया और एक एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। उन्होंने न केवल बच्चों को आग से दूर पहुंचाया बल्कि उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाकर राहत की सांस ली।

    कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और आंगनवाड़ी भवन के तीनों ओर ऊंची लपटें उठने लगीं। आग की भयावहता इतनी ज्यादा थी कि आसपास के लोग भी सहम गए लेकिन जैसे ही घटना की जानकारी फैली ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे और अपने स्तर पर आग बुझाने की कोशिश करने लगे। हालांकि आग लगातार फैलती जा रही थी और उस पर काबू पाना आसान नहीं था।

    स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब आग पास के जंगल की ओर बढ़ने लगी जिससे बड़े क्षेत्र में नुकसान की आशंका पैदा हो गई। तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन टीम को मौके तक पहुंचने में कुछ समय लगा। करीब आधे घंटे बाद दमकल दल घटनास्थल पर पहुंचा और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। इसके साथ ही डायल 112 और 108 की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और राहत व बचाव कार्य में जुट गईं।

    ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने मिलकर लगातार प्रयास किए लेकिन आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि डेढ़ घंटे से ज्यादा समय तक लपटें शांत नहीं हुईं। कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका और स्थिति नियंत्रण में आई।

    रामपुर नैकिन थाना प्रभारी सुधांशु तिवारी ने बताया कि सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक सेवाओं को तुरंत मौके पर भेजा गया था और प्राथमिकता के आधार पर बचाव कार्य शुरू किया गया। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इस घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है जो कि सबसे बड़ी राहत की बात है।

    यह पूरी घटना एक बड़ी चेतावनी भी है कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है लेकिन साथ ही यह भी साबित करती है कि मुश्किल हालात में सही समय पर लिया गया निर्णय कितनी बड़ी त्रासदी को टाल सकता है। उर्मिला द्विवेदी की सतर्कता और साहस ने आज सात परिवारों को एक बड़ी विपत्ति से बचा लिया।

  • मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान

    मप्रः आईएएस विकास मिश्रा बने सीधी के नए कलेक्टर, हितिका वसाल गुना एसपी की कमान


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में प्रशासनिक सख्ती के बीच सरकार ने सीधी और गुना जिलों में बड़े स्तर पर बदलाव किए हैं। सीधी में नए कलेक्टर के रूप में वर्ष 2013 बैच के आईएएस अधिकारी विकास मिश्रा की पदस्थापना की गई है, जबकि गुना जिले की पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को सौंपी गई है।

    रविवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त रुख के बाद यह बदलाव किया गया है। दरअसल, मुख्यमंत्री रविवार को मिर्जापुर से सीधे सीधी जिला मुख्यालय पहुंचे थे। यहां स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात के दौरान उन्हें कई शिकायतें मिलीं। जिसके बाद उन्होंने ये एक्शन लिया।

    मुख्यमंत्री ने सीधी जिले में अचानक पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद कर प्रशासनिक व्यवस्था और योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी ली थी। उन्होंने जनसंवाद के दौरान आमजन और जनप्रतिनिधियों द्वारा विभिन्न मुद्दों पर की गई शिकायतों और जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों की कार्य प्रणाली पर विस्तार से समीक्षा एवं फीडबैक लिया था।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने प्राप्त शिकायतों के दृष्टिगत सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को तत्काल प्रभाव से हटाने और जिला सहकारी बैंक के महाप्रबधंक पीएस धनवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिये थे। साथ ही गुना जिले में तलाशी के दौरान मिली नगद राशि में हेरफेर के मामले में पुलिस अधीक्षक गुना अंकित सोनी की भूमिका को यथोचित न मानते हुए पुलिस अधीक्षक पद से हटाने के निर्देश भी दिये थे।

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य शासन ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए गुना हवालाकांड के बाद एसपी अंकित सोनी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उन्हें पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक बनाया गया है। इंदौर में 15वीं बटालियन की कमांडेंट हितिका वसल को उनकी जगह गुना का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है। 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी हितिका वसाल को अब गुना जिले की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    वहीं, सीधी में जनप्रतिनिधियों से मिली शिकायतों के बाद सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग में ओएसडी और सह आयुक्त बनाया गया है। उनकी जगह 2013 बैच के विकास मिश्रा को नया कलेक्टर बनाया है। विकास मिश्रा इससे पहले मुख्यमंत्री सचिवालय में अपर सचिव के साथ आयुक्त आर्थिक एवं सांख्यिकी का दायित्व संभाल रहे थे। अब उन्हें सीधी जिले की कमान सौंपी गई है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनी अनामिका बैगा की 'रोती' गुहार, डॉक्टर बनने का सपना हुआ पूरा

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सुनी अनामिका बैगा की 'रोती' गुहार, डॉक्टर बनने का सपना हुआ पूरा


    भोपाल । मध्य प्रदेश के सीधी जिले की अनामिका बैगा, जो गरीब बैगा आदिवासी परिवार से आती हैं, ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपने डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने के लिए मदद की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे NEET की तैयारी, कोचिंग और छात्रावास के लिए सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

    मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक बहादुर बेटी ने अपने सपनों को सच करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मदद की गुहार लगाई। सीधी जिले की अनामिका बैगा, जो बैगा आदिवासी समुदाय से हैं, का सपना है कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनकी पढ़ाई में रुकावट आ रही थी। वह कई बार विधायक, सांसद और कलेक्टर से मदद की उम्मीद कर चुकी थीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अंत में, मुख्यमंत्री से मिली उम्मीद ने उनके जीवन को नया मोड़ दिया।

    सीधी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री से मिलने पर अनामिका ने अपने दिल की बात रोते हुए साझा की। उन्होंने कहा, मैं बैगा आदिवासी हूं, मुझे डॉक्टर बनना है, लेकिन मेरे पापा के पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं NEET की तैयारी और कोचिंग ले सकूं। अनामिका की यह गुहार सीधा मुख्यमंत्री तक पहुंची, और उन्होंने तुरंत कार्रवाई करने का फैसला किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्हें अनामिका के बारे में जानकारी मिली है, और उन्होंने उसे पूरी मदद देने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा अनामिका NEET की तैयारी कर रही हैं और उन्हें कोचिंग और छात्रावास की आवश्यकता है। इसके लिए उचित व्यवस्था की जाएगी। मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने पर राज्य सरकार हर संभव सहायता करेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि वह एक दिन एक विख्यात चिकित्सक बनकर मध्य प्रदेश का नाम रोशन करेंगी। मुख्यमंत्री के इस संवेदनशील कदम से न केवल अनामिका का भविष्य उज्जवल हो रहा है बल्कि यह भी संदेश जा रहा है कि मध्य प्रदेश में कोई भी सपना आर्थिक तंगी के कारण अधूरा नहीं रहेगा।

    यह पहल आदिवासी समुदाय की एक युवा लड़की के लिए उम्मीद की किरण साबित हुई है। अनामिका के लिए यह अवसर न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को बदलने वाला होगा, बल्कि यह राज्य सरकार की नीतियों का भी एक सशक्त उदाहरण है, जो निर्धनता और सामाजिक स्थिति के बावजूद किसी भी युवा को उनका सपना पूरा करने का अवसर प्रदान करती है। मुख्यमंत्री के इस कदम से यह स्पष्ट हो जाता है कि राज्य सरकार अपनी योजनाओं के तहत हर उस व्यक्ति तक मदद पहुंचाने का प्रयास कर रही है, जो अपनी मेहनत और संघर्ष से कुछ बड़ा करना चाहता है।अब, अनामिका बैगा के पास डॉक्टर बनने की राह पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है, और मध्य प्रदेश के आदिवासी समुदाय के लिए यह एक प्रेरणास्त्रोत बन गया है।