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  • दिलजीत दोसांझ हमेशा साथ रखते हैं गुटका साहिब, जानिए सिख परंपरा में क्यों माना जाता है इसे आस्था और अनुशासन का प्रतीक

    दिलजीत दोसांझ हमेशा साथ रखते हैं गुटका साहिब, जानिए सिख परंपरा में क्यों माना जाता है इसे आस्था और अनुशासन का प्रतीक

    नई दिल्ली । प्रसिद्ध गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में साझा किया कि वह जब भी घर से बाहर निकलते हैं, अपने साथ गुटका साहिब अवश्य रखते हैं। उनका यह वक्तव्य एक बार फिर सिख परंपरा में गुटका साहिब के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को चर्चा का विषय बना रहा है। सिख समुदाय में इसे केवल एक प्रार्थना पुस्तिका नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में ईश्वर के स्मरण, अनुशासन और आध्यात्मिक संतुलन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

    गुटका साहिब आकार में छोटा और साथ रखने में सुविधाजनक धार्मिक ग्रंथ है। इसमें सिख धर्म की प्रमुख वाणियों और दैनिक पाठों का संकलन होता है। इसकी पोर्टेबल संरचना के कारण श्रद्धालु इसे यात्रा, कार्यस्थल या घर से बाहर रहते हुए भी आसानी से अपने साथ रख सकते हैं। यही कारण है कि अनेक सिख श्रद्धालुओं की तरह दिलजीत दोसांझ भी इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं।

    गुटका साहिब में सामान्यतः जापजी साहिब, जाप साहिब, तव-प्रसाद सवैये, रेहरास साहिब, कीर्तन सोहिला तथा अन्य महत्वपूर्ण वाणियों का संकलन शामिल होता है। अलग-अलग प्रकाशनों में इसकी सामग्री में कुछ अंतर हो सकता है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य श्रद्धालुओं को दैनिक प्रार्थनाओं के लिए एक सुविधाजनक और सम्मानजनक संकलन उपलब्ध कराना होता है। इससे व्यक्ति नियमित रूप से गुरबाणी का पाठ कर अपने आध्यात्मिक जीवन से जुड़ा रह सकता है।

    सिख परंपरा में प्रार्थना को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को संयम, सेवा, विनम्रता और सकारात्मक सोच के साथ जीने का मार्ग माना जाता है। सुबह, शाम और रात्रि के निर्धारित पाठ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुशासन बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। गुटका साहिब इन्हीं दैनिक पाठों को सरल और व्यवस्थित रूप में उपलब्ध कराता है, जिससे व्यस्त जीवन और यात्रा के दौरान भी नियमित प्रार्थना जारी रखी जा सके।

    सिख समुदाय में गुटका साहिब को अत्यंत सम्मान के साथ रखा जाता है। इसे हमेशा स्वच्छ स्थान पर रखने, आदरपूर्वक स्पर्श करने और पाठ के समय पूर्ण श्रद्धा बनाए रखने की परंपरा है। धार्मिक ग्रंथ के प्रति सम्मान को सिख आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और श्रद्धालु इसके रख-रखाव से जुड़े धार्मिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखते हैं।

    दिलजीत दोसांझ का गुटका साहिब को हमेशा अपने साथ रखना उनकी व्यक्तिगत आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा सकता है। लगातार यात्राओं और व्यस्त कार्यक्रमों के बावजूद धार्मिक मूल्यों से जुड़े रहने की यह परंपरा अनेक सिख श्रद्धालुओं के जीवन में भी दिखाई देती है। गुटका साहिब उनके लिए केवल प्रार्थना का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और गुरु परंपरा से निरंतर जुड़े रहने का एक महत्वपूर्ण आधार भी है। इसी कारण यह सिख जीवनशैली और धार्मिक आचरण का एक सम्मानित एवं महत्वपूर्ण अंग माना जाता है।

  • गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया नमन, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

    गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया नमन, देशवासियों को दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखाश्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र प्रकाश उत्सव पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे साहस करुणा और बलिदान की मूर्ति हैं। उनका जीवन और शिक्षाएं हमें सच्चाई न्याय धर्म के लिए खड़े होने और मानवीय गरिमा की रक्षा करने के लिए प्रेरित करती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का विजन पीढ़ियों को सेवा और निस्वार्थ कर्तव्य के लिए मार्गदर्शन करता रहता है।

    उन्होंने इस साल की शुरुआत में तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की अपनी यात्रा की कुछ यादगार तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में प्रधानमंत्री को गुरुद्वारे में प्रार्थना करते जोड़ा साहिब के दर्शन करते और सेवादारों के साथ लंगर परोसते हुए देखा जा सकता है।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखाअन्याय और दमन के विरुद्ध चेतना जागृत करने वाले खालसा पंथ के संस्थापक सरबंस दानी साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने आगे लिखागुरु साहिब का जीवन शौर्य त्याग और आध्यात्मिक उत्कर्ष का अद्वितीय समन्वय है। उन्होंने मानवता को यह संदेश दिया कि धर्म सत्य और मर्यादा की रक्षा हेतु सर्वस्व का समर्पण ही सर्वोच्च मानवीय कर्तव्य है। उनके आदर्श बलिदान और महान गुरु परंपरा के प्रति उनकी अडिग निष्ठा युगों-युगों तक समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शन करती रहेगी।

    सीएम रेखा गुप्ता ने दशम गुरु के चरणों के नमन करते हुए लिखाउनके सत्य सेवा और बलिदान के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। पटना साहिब वह पवित्र स्थल है जहां 1666 में गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो साहस समानता और न्याय का प्रतीक बना। मुगल अत्याचारों के खिलाफ उन्होंने योद्धा बनकर संघर्ष किया और पांच प्यारों को अमृत छकाकर खालसा का जन्म दिया।

  • मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    नई दिल्ली/मौत के बाद क्या होता है? यह सवाल इंसान के अस्तित्व से जुड़ा सबसे गहरा रहस्य है। अलग-अलग धर्म इस पर अलग-अलग विचार रखते हैं। विश्व में हजारों धर्म हैं, और लगभग हर धर्म में मृत्यु और उसके बाद की जीवन यात्रा पर अलग मान्यता मिलती है। यहाँ 10 प्रमुख धर्मों के दृष्टिकोण पर नजर डालते हैं।

    1. ईसाई धर्म
    ईसाई धर्म में मौत को अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत माना जाता है। उनके अनुसार, हर जीव में आत्मा रहती है और मरने के बाद भगवान का न्याय होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और पापी नर्क में जन्म लेते हैं।

    2. इस्लाम
    इस्लाम में मृत्यु से डरने की बजाय इसे स्वीकार करना सिखाया जाता है। मुस्लिम मानते हैं कि अल्लाह मृत्यु के समय फरिश्ते भेजते हैं और आत्मा की परीक्षा लेते हैं। पाक आत्मा को बरजख भेजा जाता है, जहां वह कयामत के दिन का इंतजार करती है।

    3. हिंदू धर्म

    हिंदू धर्म में मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र को ‘संसार’ कहा जाता है। आत्मा कई जन्मों में नए शरीर में आती है- कभी इंसान तो कभी जानवर। मोक्ष प्राप्त करने पर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।

    4. बौद्ध धर्म

    बौद्ध धर्म में जीवन और मृत्यु सतत प्रक्रिया है। आत्मा मृत्यु के बाद अन्य जन्मों में जाती है। पुनर्जन्म का स्वरूप व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर करता है।

    5. सिख धर्म

    सिख धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा कर्मों के आधार पर पुनर्जन्म प्राप्त करती है। भगवान का ध्यान और अहंकार पर नियंत्रण पाने से आत्मा पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो सकती है।

    6. बहाई धर्म
    बहाई धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा जारी रहती है। शरीर मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन आत्मा स्वतंत्र और खुश रहती है। आत्मा की तरक्की में भगवान की कृपा और जीवित लोगों के नेक कर्म मदद करते हैं। मृत्यु को भय की चीज नहीं माना जाता।

    7. जैन धर्म

    जैन धर्म में आत्मा हमेशा जीवित रहती है। मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र केवल कर्मों से तय होता है। अहिंसा और अच्छे कर्म के माध्यम से आत्मा पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त होती है।

    8. जोरोस्ट्रियन धर्म

    जोरोस्ट्रियन धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा का न्याय ‘चिनवट ब्रिज’ पर होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और बुरे कर्म करने वाले नर्क में। अंततः सभी आत्माएं शुद्ध होकर भगवान के पास लौट जाती हैं।

    9. शिंटो धर्म जापान 

    शिंटो धर्म में आत्मा शरीर की मृत्यु के बाद जीवित रहती है और जिंदा लोगों की सहायता करती है। मरने के बाद व्यक्ति पवित्र आत्मा बन जाता है और परिवार और समुदाय की रक्षा करता है।

    10. अन्य प्राचीन और लोकधर्म

    अफ्रीकी, इंडिजिनस और अन्य लोकधर्मों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा विभिन्न रूपों में देखी जाती है। कुछ में आत्मा पूर्वजों के साथ मिलती है, कुछ में जीवन और प्रकृति के चक्र में सम्मिलित होती है।
    मृत्यु के बाद जीवन को लेकर इन सभी धर्मों की मान्यताएं भले ही अलग हों, लेकिन एक साझा संदेश है: मृत्यु अंत नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। चाहे स्वर्ग, नर्क या पुनर्जन्म हो, सभी धर्म आत्मा के महत्व और उसके कर्मों पर जोर देते हैं।

  • पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक

    पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक


    चंडीगढ़/पंजाब सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो श्री दमदमा साहिबको आधिकारिक रूप सेपवित्र शहर घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद इन तीनों धार्मिक नगरीयों में शराब तंबाकू नशीले पदार्थों और मांस की बिक्री व उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस संबंध में पंजाब सरकार की ओर से एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है जिसे राज्यपाल की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला इन शहरों के धार्मिक महत्व आस्था और पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

    पंजाब सरकार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक शेखर द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपाल को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि जिला अमृतसर का चारदीवारी क्षेत्र वॉल्ड सिटीजिला रूपनगर का श्री आनंदपुर साहिब नगर और जिला बठिंडा का तलवंडी साबो नगर अब पंजाब राज्य के पवित्र शहर घोषित किए जाते हैं। यह दर्जा मिलने के बाद इन इलाकों में कई तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण लागू होगा।सरकार ने सबसे पहले आबकारी विभाग को निर्देश जारी किए हैं। विभाग को कहा गया है कि इन तीनों पवित्र शहरों की नगरपालिका सीमाओं के भीतर शराब और उससे जुड़े सभी उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश तुरंत जारी किए जाएं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में मौजूद शराब के ठेकों को बंद करने या उन्हें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।

    इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। विभाग से अनुरोध किया गया है कि इन पवित्र शहरों में सिगरेट तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ धार्मिक वातावरण शुद्ध रहेगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।सरकार ने पशुपालन विभाग को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो की नगरपालिका सीमाओं के भीतर मांस और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री व उपयोग पर रोक लगाने के आदेश जारी किए जाएं। इस कदम को खास तौर पर धार्मिक भावनाओं के सम्मान और पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय सरकार विभाग को भी अधिसूचना भेजी गई है। साथ ही अमृतसर रूपनगर और बठिंडा के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में इस निर्णय को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी कदम उठाएं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थानीय प्रशासन विस्तृत दिशा-निर्देश और नियमावली जारी करेगा।सरकार के इस फैसले को सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों की पवित्रता से जोड़कर देखा जा रहा है। अमृतसर सिख धर्म का सबसे बड़ा केंद्र है जहां श्री हरमंदिर साहिब स्थित है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास में खालसा पंथ की स्थापना का साक्षी रहा है जबकि तलवंडी साबो जिसे श्री दमदमा साहिब भी कहा जाता है सिखों के पांच तख्तों में से एक है। पंजाब सरकार का कहना है कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला समय की जरूरत था।